रामोजी राव का कसूर क्या है?

आलोक तोमरइनाडु प्रकाशन समूह के मालिक और हैदराबाद के पास विश्व की सबसे बड़ी फिल्म सिटी रामोजी राव फिल्म सिटी के और ईटीवी के मालिक रामोजी राव जिंदगी में पहली बार कांग्रेस का साथ देते नजर आ रहे हैं। हैलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए वाईएसआर रेड्डी ने तो मुख्यमंत्री रहते हुए रामोजी राव का साम्राज्य ध्वस्त कर देने की पूरी तैयारी कर ली थी। हाल ही में रामोजी राव और आंध्र प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री के रोशैया के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं।

आम तौर पर कांग्रेस विरोधी माने जाने वाले रामोजी राव ने सोनिया गांधी की पिछली आंध्र यात्रा के दौरान उनके बारे में बड़ी-बड़ी अच्छी खबरें छापीं। ईटीवी पर भी उसका अच्छा खासा प्रसारण किया गया। मामला कुछ यों है कि रामोजी राव मार्गदर्शी चिट फंड के नाम से एक बड़ी कंपनी चलाते हैं और उनकी दूसरी कपंनी मार्गदर्शी फाइनेंस है। आंध्र प्रदेश की रेड्डी सरकार ने रामोजी राव पर इल्जाम लगाया था कि मार्गदर्शी चिट और मार्गदर्शी फाइनेंसस के बीच पैसे का अवैध लेन-देन हो रहा है और यह आयकर कानून का उल्लंघन है। मार्गदर्शी कंपनियों को बचाव के लिए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट जाना पड़ा और वहां शिकायत करनी पड़ी कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय और और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड सर्विस टैक्स के नाम पर लगातार नोटिस भेज रहे हैं जबकि फाइनेंस एक्ट 1994 में चिट फंड कंपनियां इन टैक्सों से बाहर रखी गई हैं।

अब रामोजी राव ने अपनी तरफ से घोषित कर दिया है कि वे अब और फंड नहीं लेंगे और जो चिट फंड निवेशक निवेश कर चुके हैं उनका पैसा ब्याज सहित चुकाने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसा है। चार साल पहले दिसंबर 2006 में राज्य सरकार के एक सलाहाकर एन रंगाचारी को मार्गदर्शी फाइनेंसस की जांच के लिए नियुक्त किया गया था। कंपनी अदालत में गई थी मगर अदालत से स्थगन आदेश नहीं मिला था।

रंगाचारी कमेटी ने सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर ही अपनी सिफारिशें दी और ऐलान कर दिया कि निवेशकों ने अगर एक रुपया जमा किया है तो उन्हें 49 पैसे से ज्यादा नहीं मिलने वाले। रामोजी राव ने इस रिपोर्ट के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की और जाने माने दो बड़े पत्रकार एन राम और कुलदीप नायर ने पेश हो कर कहा कि कांग्रेस की केंद्र और राज्य सरकार इनाडु और ईटीवी समूह को उसकी नीतियों के कारण खामोश करने की कोशिश कर रही है और इसके लिए छापे भी मारे जा रहे हैं।

1974 में स्थापित इनाडु अखबार ने हैदराबाद में नशाबंदी के दौरान शराब का कारोबार करने वाले कई कांग्रेसी नेताओं को उजागर किया था। कांग्रेस के सांसद अरुण कुमार ने मार्गदर्शी फांइनेंसस में घपलों का इल्जाम संसद में लगाया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि जब अखबार सरकार के कामों का खुलासा कर सकते हैं तो सरकार के पास भी यह अधिकार है कि उसे अगर कोई शिकायत मिले तो उसकी जांच करवाए। मगर स्वर्गीय वाइएस रेड्डी की सरकार ने तो फिल्म सिटी और मार्गदर्शी कंपनियों के यहां छापे भी पड़वा दिए। रंगाचारी कमेटी ने पता नहीं किन आंकड़ों के आधार पर कहा कि 31 मार्च 2006 तक कुल जमा 2610 करोड़ रुपए में से 1369 करोड़ रुपए का घाटा हो चुका था और यह कुल रकम का आधा है। इनाडु और ईटीवी चलाने वाले ऊषोदय कंपनी को भी इस लेन देन में शामिल बताया गया था और यह भी कहा गया था कि मार्गदर्शी के पास तो निवेशकों को चुकाने के लिए पैसे ही नहीं है।

रामोजी राव ने इसका जवाब बहुत तीखा दिया था और कहा था कि 1600 एकड़ में तो दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म सिटी हमारे पास है, इसके अलावा डाल्फिन होटल हैं और तीन हजार करोड़ से ज्यादा के टर्न ओवर वाली मार्गदर्शी चिट फंड लिमिटेड और कई और कंपनियां हैं। उन्होंने कहा था कि 34 साल में एक भी शिकायत कंपनी के खिलाफ दर्ज नहीं हुई फिर भी जांच करने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने सवाल किया था कि हमारी हैसियत 1217 करोड़ आंकी गई है जबकि हमारी सिर्फ एक कंपनी की हैसियत 4690 करोड़ रुपए है। रेड्डी सरकार ने ब्लैक स्टोन नाम की एक कंपनी को इनाडु समूह में निवेश करने से रोक दिया था और बाद में मुकेश अंबानी ने इनाडु में बहुत लंबा चौड़ा निवेश किया।

ई टीवी खास तौर पर देश के उन इलाकों में बहुत देखा जाता है जहां से कांग्रेस को बहुमत मिलता है। इसलिए भी रामोजी राव को काबू में रखना सरकार के लिए जरूरी जान पड़ता हैं। रामोजी राव हाल में भले ही कांग्रेस के साथ जुड़ गए हों मगर शुरू से उनका रुख कांग्रेस विरोधी रहा हैं और शायद इसीलिए सरकार उन पर अंकुश लगाए रखना चाहती है।

लेखक आलोक तोमर वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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Comments on “रामोजी राव का कसूर क्या है?

  • Salman Ahmed, Saudi Arabia says:

    Lagta hai is tarah ka article likhne ke liye Alok Ji ko achhi khasi raqam mili hai.

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  • ek karmchari says:

    khurram ji bina experience ke naukri dete ho to kya, gulam bana ke rakhoge ,

    KAMAL ,Rajsthan desk ke copy editor se pichhale saal kya aap logon ne 75000 nahin wasula ,,,aise kai log hain,,,JEE UP me gaye paisa dekar gaye,releaving letter ke liye pura harzana wasula gaya,
    pahle aap log certificate bhi jabt karke rakhte the,court ke order ke baad aap sudhare hain ,,,lekin aapne bond ki rakam 1lakh se bada ke 175000 kar di hai,
    berozgaron ka shoshan koi ramoji se sikhe
    sare chanel me vetan barh gaya lekin etv ke kuber malik aub bhi chaprasi ka vetan de rahen hai
    udar baniye tabhi kirti amar hogi pathar ki emart se amar nahin hoeyega.

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  • Maaf kariye ek karamchari sahab. Etv mein bina experience milti hai naukri. jahan tak bonnd bharnein kee baat hai, to bond sab bharte hain, lekin kisi nein aaj tak bond todnein ke baad paisa nahi diya hai. ulta, nka jo bhee dues raha ho, woh ETV nein sasamman aonein kabhi etvian reh chuke patrakaro ko dhoondh dhoondh kar un tak pahunchaya hai.

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  • ek karmchari says:

    Ramji rao apne staff ko bond bharwa ke bandhak bana ke rakhta hai ,RFC dunia ka sabse bada jail hai,jo log naukri chharate hain ,unhe bond ki rakam deni parti hai,
    ETV ko chhorkar jo JEE TV gaye unse puchho kitana kamaye aur kitana dekar gaye,ek banda 60,000 kamakar ,75,000 bharkar gaya,ye ramoji ka nyay hai.

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  • ALOK TOMAR says:

    अनीस, भाई मेरे बारे में जो है वो जग जाहिर है. भड़ास पर ही दो भागों में डेढ़ साल पहले दो भागो में लिखा है. आप को कुछ नया पता हो तो ज़रूर लिखें.देवता नहीं हूँ, इंसान ही हूँ

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  • अरे आप क्यों इतनी तारीफ कर रहे हैं रामोजी राव की…वो तो खून चूसता है।

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  • दोस्‍तों रामोजी राव टूट चुके हैं, इसमें कोई दो राय नहीं हैं। सुना है अब वो रिर्पोटर और स्ट्रिंगर के साथ हर तिमाही बैठक में हिस्‍सा नहीं लेते। कहा जाता है कि शायद रामोजी राव में कूबत नहीं रही कि वो अपने कर्मचारियों का सामना कर सकें। क्‍योंकि पहले जो नैतिक उपदेश वो देते थें अब उनके चैनलों में ठीक उसके उलट हो रहा है। जो पुराने कर्मचारी हैं वो तो कम से कम सारे बदलाव को देख रहे हें। हिंदी के चारों राज्‍यों में ईटीवी सरकारों का पिछलग्‍गू बनकर काम कर रहा है। कभी मुलायम सिंह मुख्‍यमंत्री रहते हुए ईटीवी की इमानदारी के चलते पानी मांग गये थे आज मायावती की ठकुरसुहाती कर रहा है चैनल
    । राजस्‍थान में वसुंधरा की सरकार को फिर से बनवाने की कोशिश कर रहा था लेकिन अब पाला बदलकर अशोक गहलोत का दम भर रहा है। इस विश्‍वास का इनाम भी मिला है सरकारी विज्ञापनों से ईटीवी के हिंदी चैनल पटे हुए हैं। अब रामोजी राव पत्रकारिता में नैतिकता और इमानदारी की बात करने लायक नहीं रह गये । ईटीवी पहले लीक से अलग चल रहा था आज लकीर का फकीर बन गया है। अपनी इज्‍जत और विश्‍वास को उसने खो दिया है। हम पुराने इटीवीयन्‍स को इन हालातों पर काफी दुख होता है। लेकिन कोई बात नहीं कबिरा देख दिनन के फेर::::::::::::

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  • @all comments. Ramoji Rao is a good businessman. He knows where to hit, when to hit, when to go soft. No doubt he is man of principles but still he is a man!

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  • shailendra singh says:

    आलोक तोमर जी, आप बहुत बड़े पत्रकार माने जाते हैं…लेकिन ये लेख लिखने की जरूरत क्या पड़ी…मुझे बात समझ में नहीं आई…रामो जी राव कभी किसी पार्टी से बंधकर नहीं रहे हैं…ना ही उन्होंने कभी खबरों का विरोध किया है….खबर…खबर और केवल खबर ही उनके चैनलों का उद्देश्य रहा है…यही वजह है कि ईटीवी के हिंदी चैनल सबसे ज्यादा देखे जाते हैं…चाहे बात बिहार की हो…जहां से राजनीति के मायने तय होते हैं…चाहे यूपी की जहां से देश की राजनीति तय होती है…ऐसे में रामोजी को कांग्रेस का करीबी बताकर आपने उनके सिद्धांतों को चुनौती दी है…जिनके खिलाफ वो सालों से लड़ते आ रहे हैं…एक कमेंट में किसी भाई ने सेलरी की बात उठाई है…लेकिन इसके साथ उसे ये भी जानना चाहिए…कि ईटीवी ने कभी किसी भी कर्मचारी से हैदराबाद में बेगार नहीं करवाई…जिसने भी काम किया…उसे पूरे दिनों का पैसा मिला…कभी एक पैसे की हेरफेर तक नहीं हुई है…अगर वहां की सेलरी स्ट्रक्चर ही ऐसा है…तो इसमें किसी का क्या कसूर…जिसको कम पैसे में काम करना हो वो करे…नहीं तो ईटीवी में किसी को रोका नहीं जाता है…कि आप काम करें…और जिस तरह की कर्मचारियों के लिए व्यवस्था ईटीवी ने की है…उसके बारे में तो देश के और चैनल जिंदगी भर सोचते रह जाएंगे…फिर से रामोजी राव कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकते हैं…तारकेश्वर जी ने सही बात कही है…उन्होंने रामोजी को काफी करीब से देखा है…वो सब जानते हैं…

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  • amitanshu says:

    ईटीवी के वेतन ढांचे पर नवल किशोर जी की टिप्पणी सुनी सुनाई हो सकती है..सच नहीं। रही बात शर्म से गड़ जाने की। तो कम वेतन शर्म से गड़ने की वजह उनके लिए हो सकती है…ईटीवी के एक आम पत्रकार या कर्मी के लिए नहीं। झूठ और फरेब का धंधा आज भी ईटीवी में दूसरे मीडिया संस्थानों से कम है…खबरें ग्रामीण अंचल से लेकर अंतर्राष्ट्रीय जगत तक की वहीं सबसे ज्यादा पहुंचती और प्रसारित होती हैं…90 फीसदी से ज्यादा ईटीवी के पत्रकार परीक्षा उत्तीर्ण कर योग्यता के बल पर संस्थान में प्रवेश करते हैं…एक मेधावी और जानकार इंसान अगर कहीं सीधे पत्रकार बनने की ख्वाहिश किसी संस्थान को लेकर पाल सकता है..तो वो सिर्फ ईटीवी है। रही बात वेतन की…तो सीटीसी के गुणाभाग पर ज्यादा वेतन देने का दावा करने वाले दिल्ली के आला मीडिया संस्थानों में काम करने वाले ईटीवियन ये अच्छे से जानते हैं…कि कहां उन्हें वाकई में वेतन मिलता था…सीटीसी नहीं। नवल जी काश एक बार ईटीवी हो आते….तब आंखें फटी की फटी रह जातीं…यूं शर्म से गड़ नहीं जाती।

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  • पत्रकार व पत्रकारिता को समाज की आंख, नाक, व कान ही नहीं उसका मुख भी माना जाता है ! 2004 से वह मुख सरकारी संसाधनों को अधिग्रहित करने में सरकार की विशेष भागीदारी योजना से जुड़कर आंख, नाक, व कान का उपयोग समाज हित नहीं स्वहित साधने में व्यस्त है! ऐसे में समाज के दुःख दर्द, महंगाई व किसी भी समस्या पर पत्रकारिता गूंगी हो गई है तो इस से जुडे लोगों का क्या दोष ! पहले पेट देखें या दूसरों का दुःख दर्द! देश के स्थापित मीडिया व उसके सभी स्तरों पर बाजारवाद व यथार्थवाद के नाम पर ऐसे ही लोगों का प्रभुत्व है! किशोर चौधरी का यह कथन ‘पूछने का अधिकारी नहीं हूं’ और कैसे लोग इसके अधिकारी हैं क्योंकि लिखित शर्तों से अधिक अलिखित शर्तों को पूरा कर उन्होंने यह अधिकार पाया है!जिस हम जैसे लोग नहीं कर पाते!

    विश्वगुरु रहा वो भारत, इंडिया के पीछे कहीं खो गया ! इंडिया से भारत बनकर ही विश्व गुरु बन सकता है- तिलक

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  • Alok ji ko yeh lekh likhne se pehle ETV ke bare mein bariki se jankari ikaththi karni chahiye thi….aur agar woh jankari le lete to shayad unhe yeh sab likhne ki naubat hi nahin aati….Ramoji Rao is a man of priciples, thought and a visionary…who know remedy of all industries, which he is handling. Political najdeekiyan samay ke sath kaun nahi badalta…yahan to political leader ratorat party badal lete hain…..party ko kisi dusri party mein merge kar dete hain…..mujhe to is article mein kuchh bhi naya nahin laga……

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  • Naval Kishore says:

    भाई साहब अगर रामोजी राव इतने बड़े कुबेर हैं जितना आप बता रहे हैं तो ज़रा ई.टी.वी.के कर्मचारियों से उनका वेतन पूछ लें आप भी शर्म से गड़ जाएँगे और लिखे हुए पर पुनर्विचार करेंगे.

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  • Tarkeshwar Mishra says:

    Aaalok ji have so many speculations and many factual mistakes in this article.
    In fact .. RAMOJI RAO IS A MAN OF PRINCIPALS.
    Very few people know that he have no faith in GOD, but can sacrifice all belongings for the principals.
    “ISHWAR KI SATTA KO CHUNAUTI DENE WALA MAMULI SATTADARION SE KYA DAREGA?”

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  • anis ahmad khan says:

    alok ji
    kabhi apne bare me bhi likhiye apne kaya kaya gul khilye hai PAR UPDESH KUSHAL BAHUTERE

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  • pankaj kumar singh etv bihar says:

    alokjee ne puri khabar to sahi likhi hai lekin niskarsh me pardarshita nahin barti hai, sarkar ko pata hai ki ramoji rao ka byaktitwa etana bada hai ki unhe koi sarkar apne ankush me nahin rakh sakti,ye sahi hai ki rao aur congress ek dusare ke najdik aayen hain lekin yah aapsi sauhardra ke karan hua hai kisi swarth ke vashbhut hokar nahin,etv ko nichale star par kuchh log bhale manage kar len lekin india me abhi ramoji rao ko kisi pralobhan ke sahare ankush me karne wala koi paida nahin hua hai.

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  • Rakesh Tiwar says:

    Ramoji Rao ke nam se unke Manager maja mar rahe hai Etv Marathi ki halat badtar ho chuki hia Marathi ka desk in charge Gajanan Kadam deskper kam karane wale copyeditors se paise leta hai jo paise nahi de sakate unhe pareshan kar ke bhagaya jata hai yahi hal dusare channels ka bhi hai to kya Ramoji ya Gopal Rao ko isame dhyan nahi dena chahiye ?

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  • Lila Dhar Sharma says:

    Etv ke baare main kai logo ne unke baare main kafi tarah ki bate ki hai jinme etv jo disha bharmit hua hai us baat se toh main sahmat hun . ye baat sahi hai ki etv main pahle wali baaten nahi rahi .muje yaad hai jab etv ka editorial aur marketing alag alag tha par aaj “RAM TERI GANGA MAILI HO GAYI” hai .lekin etv ki sallery ke baare main logo ko galt fahmi hai jo log etv main kaam kar rahe hai aur unko lagta hai ki sallery kam hai toh etv chod kyon naho dete par muje pata hai etv koi nahi chodega kyonki sab ko pata hai sallery kam bhale hi ho MILTI TOH HAI . main khud kai Regnol aur national channel main kaam kar chuka hun wahan sellery dene ke baare main chote bhi nahi hai.sellery nahi mile isese toh acha hai kam mile par mile toh sahi.etv ne kabhi bhi kisi ke 100 rupeye bhi nahi khaye par baki channelo ne toh staff ke lakho rupeye dakar liye aur aaj bhi usi disha main aage badh rahe hai ……..etv ke bare main ya toh logo ko pata nahi hai ya unehe baaki channelon ki sacchai pata nahi hai ise liye aise baate ho rahi hai ………

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  • ajay tripathi says:

    बात कहां से निकली और किस दिशा में मुड़ गई। आलोक तोमर जी जो बात कह रहे हैं वह सच हो सकती है। पर अच्छा होता कि लिखने के पहले एक बार रामोजीराव से मिल लेते। आलोक जी, आपका पहला अखबार अपना स्वदेश बहुत बदल गया है। आप भी बदल गए हैं। बड़े-बड़े मीडिया हाउस के मालिक और संपादक बदल गए हैं। जब सब बदल गए हैं तो फिर रामोजीराव के बदलने पर इतना अफसोस क्यों? आप ने यह आर्टीकल लिखा क्यों मैं भी यह नहीं समझ पाया। खैर मैं बात कर रहा था कि आपने जो चर्चा शुरू की थी, वह दूसरी दिशा में मुड़ गई। मै ईटीवी में लंबे समय तक रहा और कई बार भर्ती के लिए इंटरव्यू करने वाले पैनल में रहा। कभी किसी से यह नहीं कहा गया कि अभी तो इतने पर ज्वाइन कर लो बाद में बढ़ा देंगे। जैसा कि अधिकांश मीडिया में भर्ती के समय होता है। बांड के बारे में भी सब कुछ इंटरव्यू के समय ही बता दिया जाता है। लोग अपनी मर्जी से नौकरी करते हैं। सब कुछ पता होने के बाद भी हर बार परीक्षा में अच्छी खासी भीड़ होती है। इसलिए बाद में इस तरह की टीका टिप्पणी किसी भी संस्थान के बारे में किया जाना ठीक नहीं होगा। हर महीने की आखिरी तारीख को सैलरी आपके एकाउंट में आ जाना हर किसी मीडिया हाउस के बस की बात नहीं है। खामियां हो सकती हैं, बदलाव अच्छे या खराब दोनों हो सकते हैं। लेकिन शायद यह पहला समूह होगा जो नौकरी पाने के लिए आने वाले को खर्चा पानी देता है। और नौकरी छोड़ कर जाने वाले के २० रुपए भी निकलते हैं तो ड्राफ्ट बनवाने और कूरियर या डाक सहित चालीस रुपए खर्च करके उसे भेजते हैं। मैंने भी ईटीवी छोड़ा क्योंकि मुझे ज्यादा सैलरी चाहिए थी। रामजीराव मेंरी सैलरी नहीं बढ़ा पाएंगे मैं जानता था. लेकिन नौकरी वहां करते रहना और छोड़ना दोनों मेंरे हाथ में था। मित्रो कलम चलाते समय किसी के बारे में सतही बात नहीं करनी चाहिए।

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  • avanish dixit says:

    alok ji kuch likhne se pahile samne wale ka bhi vichar janna chahiye … E tv group ke chairman Shri Ramoji Rao ke bare me mai aap ko suchit kar du ki TV channel ki duniya me single person hai jo aapne bottom level ke employee se direct meeting me milte hai aur unki problem snu kar solution bhi nikale ki puri kosis karte hai…Aur unki kosis safal bhi hoti hai..aur kisi bhi TV CHANNEL group me reporter ho ya phir stringier apne news coordinator tak se nahi mil pata hai …chairman to door ki baat hai

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