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कैसा एडिटर चाहिए लखनवी अमरउजालाइटों को?

इंदुशेखर पंचोली से भी खफा होने और कामकाज के तरीके पर उंगली उठाने का दौर शुरू : अमर उजाला, लखनऊ आफिस वालों को फिर नया एडिटर रास नहीं आ रहा है. खबर है कि अभिजीत मिश्रा की जगह लखनऊ के नए आरई बने इंदुशेखर पंचोली के सख्त व्यवहार से कई अमरउजालाइट नाराज हैं और लंबी छुट्टी पर जाने की तैयारी कर रहे हैं. इन लोगों का आरोप है कि नए आरई का स्टाफ के साथ व्यवहार अच्छा नहीं है और बात-बात पर जलील करते हैं.

<p style="text-align: justify;"><strong>इंदुशेखर पंचोली से भी खफा होने और कामकाज के तरीके पर उंगली उठाने का दौर शुरू : </strong>अमर उजाला, लखनऊ आफिस वालों को फिर नया एडिटर रास नहीं आ रहा है. खबर है कि अभिजीत मिश्रा की जगह लखनऊ के नए आरई बने इंदुशेखर पंचोली के सख्त व्यवहार से कई अमरउजालाइट नाराज हैं और लंबी छुट्टी पर जाने की तैयारी कर रहे हैं. इन लोगों का आरोप है कि नए आरई का स्टाफ के साथ व्यवहार अच्छा नहीं है और बात-बात पर जलील करते हैं.</p>

इंदुशेखर पंचोली से भी खफा होने और कामकाज के तरीके पर उंगली उठाने का दौर शुरू : अमर उजाला, लखनऊ आफिस वालों को फिर नया एडिटर रास नहीं आ रहा है. खबर है कि अभिजीत मिश्रा की जगह लखनऊ के नए आरई बने इंदुशेखर पंचोली के सख्त व्यवहार से कई अमरउजालाइट नाराज हैं और लंबी छुट्टी पर जाने की तैयारी कर रहे हैं. इन लोगों का आरोप है कि नए आरई का स्टाफ के साथ व्यवहार अच्छा नहीं है और बात-बात पर जलील करते हैं.

भड़ास4मीडिया से बातचीत में अमर उजाला, लखनऊ के कई लोगों ने बताया कि जबसे नए आरई आए हैं, सब कुछ बदल डालने की बात कहते हुए हर किसी को परेशान कर रहे हैं. देर रात तक काम कराते हैं. देर तक मीटिंग करते हैं. खबरें बार-बार रिराइट कराते हैं. स्टोरी आइडियाज को कूड़ा बताते हैं.  बाइलाइन नहीं देते हैं. खबरों को रुटीन किस्म का बताकर खारिज कर देते हैं. दिन में देर तक बैठक करते हैं और कुछ घंटे बाद फिर बुला लेते हैं तो लोग खबरें लाएंगे कहां से… आदि आदि.

उधर, लखनऊ के कुछ तटस्थ लोगों का कहना है कि दिक्कत उन लोगों को ज्यादा हो रही है जो काम पर कम, कामचोरी पर ज्यादा ध्यान देते हैं. इनका कहना है कि हर एडिटर अपने स्टाइल व विजन के साथ काम करता-कराता है और इसका किसी को बुरा नहीं मानना चाहिए. अखबार को बेहतर बनाने के लिए कई बार रुटीन से व लीक से हटकर काम कराना पड़ता है और जब किसी से अच्छा काम लिया जाता है तो जाहिर है कि उसे अतिरिक्त श्रम करना पड़ता है.

इनका कहना है कि एडिटर के मुंह पर मीठा बने रहने और पीठ पीछे बुराई करने की आदत हिंदी पत्रकारों में बहुत ज्यादा होती है. साथ ही, हिंदी के जमे-जमाए पत्रकार इन्नोवेशन व चेंज को जल्दी स्वीकार नहीं करते. वे एक बने बनाए सेट पैटर्न में काम करने के आदी होते हैं इसलिए उनसे कोई जमकर व नए तरीके से काम लने की कोशिश करता है तो उसे तुरंत बुरा घोषित कर दिया जाता है. अभिजीत मिश्रा से नाराज लखनऊ के अमरउजालाइटों को अब अगर नया संपादक भी रास नहीं आ रहा तो खोट कहीं न कहीं टीम में है, एडिटर में नहीं.

इन बातों से अलग अमर उजाला, लखनऊ से जुड़े कुछ पत्रकार कहते हैं कि काम करने में किसी को कोई दिक्कत नहीं है पर लोगों के साथ व्यवहार तो मानवीय किस्म का किया जाना चाहिए. अगर डांट-फटकार और असम्मान ही परोसा जाएगा तो किसी का काम में मन कैसे लगेगा. पत्रकार आमतौर पर अपने आत्मसम्मान को लेकर बहुत सचेत होते हैं और पत्रकारों के व्यक्तित्व की गरिमा की रक्षा की जानी चाहिए. अच्छा काम अच्छे माहौल में संभव है.

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0 Comments

  1. Anshul Srivastava Reporter Akela Tv

    April 27, 2010 at 4:28 pm

    sir maine pahle hi apko 1 comment send kiya tha kijyada din lkome nhi rahenge lekin apne use broadcast nhi kiya tha

  2. Shalu

    April 28, 2010 at 6:36 am

    amar ujala lko ki ye badkismati hai ki use ko achcha editor nahi mil raha hai, naye editor k vyavhar ko lekar Lucknow Amar Ujala k journalists ki narazgi jayaz hai, aap safal Leader tab ban sakte hain jab kisi bhi team se kaam le saken, apne ideas par kaam karane ka hunar hi aap ko alag banata hai, na ki bina kisi idea k teem members ko gali dene, sabko nakara batane se…are aap sabordinate ko batao bhi ki kaise intro likna hai, kaise soft story karni hai,,,

  3. amait

    April 28, 2010 at 7:22 am

    yasvant bhai ko namskar.. amar ujala ki vahi teem hai jo akhbar ko pahchan dilaya. jo log kahe rahey hai ki teem may kamchoor voo bilkul galat kah rhaey hai, teem ka hausla badha kar hai kam liya ja sakata hai jaleel kar nahi. jisa sunney may aya hai li sampadka ji keval repoters ko jaleel kar rhaiy hai, rajsthan ka admai up may kaya karega es ka andaja maliko ko bhai hoona chaiye.

  4. ruby

    April 28, 2010 at 8:51 am

    ye bada hi hasyaspad hai. ki shehar ke ek zimmedar akhbar me aisa ho raha hai.yadi aisi bate akhbar ke bahar ati hai to mamla gambhir kism ka hi hota hai. apni baat ko vyavharikta ke sath rakhte to shayad ye naa hota. amar ujala team me bahut se aise log hai jo mehnat se kaam ke liye hi jane jate hai.aise me sirf reporter ki galti nikalne se kaam nai chalega batana padega ki kaise hona chaiye nai to log yai smjhenge ki ata nai to batayenge kya.ab bus nukhtachini karne vale ko pratibhavan manne ka zamana lad gaya.

  5. Ravi

    April 28, 2010 at 10:05 am

    kuch chapalus logo ke sahare koe bhi kaam nahi hota he .phir paper chalana koi aasan kaam nahi hi. phir jab baki log mehanat karane wale ho to who chapalus logo ko kyo darege .
    par indushekhar ji chapaluso ki jai bol rahe hi
    jo ki paper ke liye aachcha nahi hi

  6. ....

    April 28, 2010 at 2:04 pm

    good going Indu.. keep it up.. but take the confidence of old staff.

  7. manishsharma

    April 28, 2010 at 9:12 pm

    jin logo ko kaaam karne ki aadat nahi hoti. unhe sirf dusro ke kaam mai kamiyaa nikalne ke siwa koi kam nahi hota soo…. indushekar ji jaise editor to bahut mushkil se miltey hai….
    yee wo insaan hai jo 16-16 hours kamm kartey hai.. soo dusro ko thoda kaamm karna pad jaye to editor bura hai unhe kuch nahi aataa aadi bahut sii baatey karne ka samay mil hi jaaataa hai…

  8. pradeep

    April 29, 2010 at 9:18 am

    ye kam to bahut karate ha lakin staff ko koi idea nahi dete, sirf reporter se hi idea mangte ha inke kam karne ke tareki se ya Bhaskar Ajmer, Kota or Jaipur ke reporter hamesa se tension me hi rehate taaaa
    jayda jankari ke liye in city ke kaise bhi journilist se sampark kiya ja sakta ha >:(

  9. swmai

    April 30, 2010 at 5:32 am

    yasvant ji.. u doing good job. amarujala may kuch loog aisey hai jo her sampadak kay kahash ban jatey hai. kyo ki unkoo kam to ata hai nahi hai.yah loog ashok pansey, abhijeet kay bhi kash rahey hai. sampadak kay kamrey may aksahar baidey rahety hai. kaval kam karney wallo ki burai kar apana nukari chalatey hai. nam ka andja to amarujala kay loog laga hi lengey… phil hall mili jankari kay mutabik sampadak ji ko kuch -kuch samjah may aa gaya hai, unki bhasa badal gai hai, ek bar phir reporter kam may man say lag gaye hai.

  10. ruby

    May 1, 2010 at 11:03 am

    kya swami
    aisi baat kar rahe hai aise jiv to har akhbar me dekhe ja sakte hai jo asal me parjivi hai fir isme kaisi shikayat.lekin haan un sare reporter ko badhai jinhone apne samman ko bachaye rakhne ke liye awaz uthai.matlab ujala me zinda patrakar hai sun kar khushi hoti hai ek bar fir se badhai ho

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