गुस्से में अतुल माहेश्वरी, मेरठ यूनिट में हड़कंप

कांपैक्ट के रिपोर्टर पर गाज गिरी : आरई के बदले जाने की चर्चा तेज : अमर उजाला समूह के निदेशक अतुल माहेश्वरी आजकल मेरठ यूनिट पर खास ध्यान दे रहे हैं. हफ्ते में दो-चार दिन मेरठ बैठने लगे हैं. अखबार के कंटेंट व सरकुलेशन से दुखी अतुल माहेश्वरी एडिटोरियल वालों समेत कई विभागों को टाइट कर रहे हैं. अखबार की रोजाना समीक्षा कर रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि स्थानीय संपादक सूर्यकांत द्विवेदी और कांपैक्ट के प्रभारी प्रियरंजन से आए दिन विभिन्न खबरों-मुद्दों पर जवाब तलब किया जा रहा है. कांपैक्ट के रिपोर्टर शशिकांत जायसवाल के बारे में सूचना मिल रही है कि उन्हें मेरठ से कार्यमुक्त कर दिया गया है. इसके पीछे विवाद किसी कार्यक्रम के कवरेज का बताया जा रहा है जिसके बारे में उच्च स्तर पर पूछताछ शुरू हुई तो आखिरकार गाज गिरी बीट रिपोर्टर पर. अतुल माहेश्वरी की मेरठ यूनिट में अति सक्रियता के कारण कई तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं. चर्चा होने लगी है कि स्थानीय संपादक के पद पर सूर्यकांत द्विवेदी की जगह प्रबंधन अब किसी और को लाने की तैयारी में जुट गया है. बताया जा रहा है कि इस अखबार का मेरठ में कंटेंट का स्तर काफी गिरा है और प्रसार भी चौपट हुआ है. वैसे तो सूर्यकांत द्विवेदी शशि शेखर के अमर उजाला आने से काफी पहले से अमर उजाला समूह से जुड़े हुए हैं और अतुल माहेश्वरी के करीबियों में से हैं पर नए दौर में अमर उजाला प्रबंधन उन मजबूत सेंटरों पर खास नजर रख रहा है जहां पिछले कुछ समय से कामकाज ढीला चल रहा है.

ज्ञात हो कि अतुल माहेश्वरी कुछ वर्षों पहले तक अमर उजाला के मेरठ आफिस में ही बैठते थे और वहीं से अमर उजाला समूह के कामधाम का संचालन करते थे. नोएडा में अमर उजाला का मुख्यालय शिफ्ट होने और शशि शेखर के हाथ में पूरा अखबार सौंप कर आंख मूंद लेने के बाद अतुल माहेश्वरी का मेरठ से नाता लगभग न के बराबर रह गया था. अब जब एक बार फिर अमर उजाला के कंटेंट व सरकुलेशन को दुरुस्त होने की कोशिशें जोरशोर से शुरू हो चुकी हैं, अतुल माहेश्वरी ने मेरठ के मोर्चे का संभाल लिया है. बताया जा रहा है कि जागरण व हिंदुस्तान की मेरठ में सफलता को देखते हुए अमर उजाला प्रबंधन अब किसी स्तर पर अपनी टीम को छूट देने के मूड में नहीं है. यही कारण है कि अब अमर उजाला, मेरठ के संदर्भ में हायर एंड फायर का दौर शुरू हो चुका है. देखना है कि आगे आने वाले दिनों में किस पर गाज गिरती है.

Comments on “गुस्से में अतुल माहेश्वरी, मेरठ यूनिट में हड़कंप

  • Bobby Pandey says:

    dear Atul Ji,
    presently i am read your corporate Organization news . it si very sad for every one Reporter to all of call Amar ujala Employee , becoz this is Crucial time for Amar ujala. But you are a strong man & your Decision is very perfect in Amar ujala fover. so keep & cool becoz the coming time is golden for Amar Ujala. Thnx
    Your

    Bobby Pandey (Reporter in Kanpur)

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  • hakikat kuch aur he hai. Sab apni naukri bchane may lge hain. Mrt unit jis cheez k liye jaani jati thi ab wo baat khtm ho gyi hai. Polytics charam pr phuch gyi hai. Kaam ki bajay jehazoori ki badaulat naukri ho rhi hai aur kai kripapatr ais kr rhe hain. darr is baat ka hai ki ye smjhne may khi der na ho jaye.
    Ek subhchintak

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  • Santosh Verma says:

    Aadarniya Atul ji, jab kisi cheez ko dheel diye kaafi samay ho jaaye to chamkane me samae hi lagta hai.administration should be strict for good result.

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  • Yashwant ji , please do look into content before it is published here. The Hindi is all wrong ,especially the “maatraas”.

    Bobby ji , we should not do things which we don’t know. I guess you should better stick to Hindi rather than raping the English language.

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  • rahul gaziyabadi says:

    lagta hai ki pichle kuch saalon main hue nuksaan ki ab bharpai ki ja rahi hai. jab bhi kuch kade faisle liye jaate hain to der se hi sahi magar natije achche hi milte hain.

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  • Man Ki Aawaz says:

    जब गधों की बराबरी घोडों से की जाएगी तो ऐसा ही होगा। अमर उजाला की मेरठ यूनिट में पिछले दिनों हुई नियुक्तियों ने एक बात तो साफ कर दी कि वहां अब प्रतिभावान नहीं, हाथ में तेल की शीशी लिए खडे लोगों की जरूरत है। अमर उजाला की मेरठ यूनिट में 60 फीसदी से ज्‍यादा कथित बुद्ध‍िजीवी हैं, जिनकी संपादन क्षमता तो शून्‍य है ही। समाचार की दुनिया से भी दूर तलक कोई वास्‍ता नहीं है। इनका काम एक दूसरे को सिफ हाजी और काजी कहने तक सीमित है। अतुल जी, अभी भी संभल जाइए वरना बहुत देर हो जाएगी।

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  • swamibhakt says:

    amar ujala mei kaam nahi dekha ja raha balki sampaadko ki chaplusi kerne walon ko terjih di ja rahi hai. jo chaplusi nahi ker raha aur imaandaar use tarah tarah se pratadit kiya jata hai. sampadkon k upper amarujala mei lagaam lagane wala ab koi nahi reh gaya. is baar b bahut se kaam kerne walon ko isliye promotion nahi milega qki wo sampadko k kehne mei aaker galat kaam nahi ker rahe. jab aisi istithi ho to sansthan ko nuksaan hoga hi. weldone atul ji…..aap isi mood mei rahe aur sampadkon per najar rakhein sansthan ka isisse bhala hoga

    please dont use and print email id.its a request

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  • swamibhakt says:

    jab sampadak belagaam ho jayenge aur unk uper fatkaar lagane wala koi nahi rahega to yahi hoga. amarujala k sampadak aajkal khud ko atul ji samjhte hain aur niche k karamchariyon per kai tarah k anaitik dabav banate hain. jo nahi maanta aur galat kaam mei sath nahi deta use pratadit kiya jata hai. is baar apraisel mei aise kai logon ko promotion sirf isliye nahi mil raha qki sampadak naraj hai. narajgi kaam k karan nahi anya karano se. kya atul ji isper b dhyan dete hain ki jo log unke wafadaar aur imaandaar hain aur sirf unk liye kaam ker rahe hain unka promotion b wo khud dekhen. jisse jo unke wafadaar hain man laga k aur kaam ker sakein. khair, kam se kam atul ji ne dhyan dena suru kiya hai to behter hi hoga lekin sampadk logon ka decision aakhiri nahi hona chaiye qki wo bhedbhav kerte hain

    please dont print email id. its a request

    Reply
  • Nimesh kumar, Meerut says:

    हमने वर्ष 86 के आखिर में अमर उजाला के मेरठ आने पर उससे ज्यादा बिकने और पढा जाने वाला एक छोटा अखबार बंद करके अमर उजाला पढना शुरु किया था. तब अमर उजालाई खूब मेहनत करते थे और घुसकर खबरे निकाला करते थे। कई दिन तो सुबह अखबार देखकर चौंक जाते थे कि अच्छा ऐसा हो गया। धीरे धीरे भीड बढी और वे तेवर कहीं गुम हो गए. अब तो वे खबरें ही नजर आती हैं, जो कोरी लफ्फाजगिरी से ज्यादा कुछ नहीं लगती या वे खबरें दिखती हैं , जिन्हें समारोह वाले या नेता खुद कॉफी पिलाने के साथ कवर कराते हैं। जासूस की तरह परत दर परत खोलने की परिपाटी तो अमर उजाला ने खो ही दी है। उन्हीं तेवरों ने इस अखबार को बाजार का राजा बनाया था। भगवान जाने ऐसा क्यों हुआ, लेकिन अब ज्यादातर स्थानों पर सिर्फ कोरा पाण्डित्य झाडने वाले सम्पादक ही दिखाई देते हैं। भगवान बचाए…इस ग्रुप को।

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  • ek do sampadkon ne to ati kar di hai. Atul ji, agar aapne dhyan nahi dia to merrut ke pas ki unit aur pathak dono gawa denge.
    Plz do’nt show my email id.

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  • शुभचिंतक says:

    अतुल जी,
    मेरठ यूनिट के ब्यूरो आफिस में दो तरह के ‘गधे’ है | एक- आंख बंद कर काम करने वाले, जो सीनियरो के सामने पैंट खोलकर खड़े हो जाते है| कुछ एसे लोग भी है जो ‘तुम मेरी सहलाओ मै तेरी सहलाउगा ‘ की तर्ज पर काम कर रहे है | इन लोगों ने तो दुकान खोल रखी है | कलेक्टर से काम करने का अलग तथा कप्तान से काम करने का अलग रेट है | दूसरे, वे जिनमे सोचने समझने की क्षमता है| इसे लोग ‘हाथ में तेल लेकर नहीं चलते है, लिहाजा इनके ऊपर क्षमता से अधिक काम का बोझ लाद दिया जाता है | इसे लोगों को सुबह की समीक्षा के दौरान छोटी -२ खबर छूटने पर सवाल-जवाब कर प्रताड़ित किया जाता है| ब्यूरो आफिस में जो जितने बड़े पोस्ट पर है या लम्बे समय से है, वह उतना ही अधिक मौज कर रहा है | मौका-ए-वारदात की रिपोर्टिंग नाम मात्र की हो रही है| रिपोर्टर शाम ७ बजे तक प्रेस विज्ञप्तियो का इंतजार करते है, विज्ञप्ति न आने सम्बन्धित लोगों तथा दलाल किस्म के रिपोर्टरों को टेलीफोन करते है, इसके बाद खबर लिखते है, जिसके चलते रात ८ बजे के बाद डेक्स पर अचानक खबरों की बाढ़ आ जाती है|

    -शुभचिंतक

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  • shubhchintak says:

    atul ji!
    Abhi kuch din pahle noida me sampadkon ki meeting hui thi. Har sampadak ne project report aur sujhav die. Iske bad daily report me chhooti khabron ko bhejne se mana kar dia gaya. Ab unit mngr ye kam karenge. Sampadkon ki halat kharb ho gai. Mngr ki balle balle. Mngr se pahle hi bat ho chuki thi. Magar aapne socha kyon nahi ki unit mgr bhi sampadkon ke jhanse me aa sakte hain. Hua bhi yahi. Moradabad unit iska taja udahran hai. Ab samay aapke chet jane ka hai. Varna kai aise log editorial se vida ho jayenge jin par amar ujala aur mbd city ke logon ko bhi naz tha. Ab wo sampadak ka shikar ho gaye. Yaha tak ki star reporter bhi. Maine kahne ki himmat jutai hai kyonki amar ujala meri dhadkno me basta hai. Aur log to wakt se samjhauta kar chal denge. Jane ki koshish me bhi hai. 5 ki batchit finel daur me hai. Mafi chahta hu aapse yah kahne k lie.
    Plz do’nt show my email id. Thanks.

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  • जागरुक पाठक says:

    दो तीन महीने पहले इस अखबार ने देहरादून में अपने स्थापना दिवस पर अपनी कामयाबियों के सफर पर एक आलेख प्रकाशित किया था। उसे देखकर घोर आश्चर्य हुआ और मैनेजमेंट पर तरस भी आया। अमर उजाला की कामयाबियों और उपलब्धियों की पूरी लिस्ट में कई साल पुरानी खबरों का ही उल्लेख है। क्या अमर उजाला हाल के सालों में ऐसा कुछ नहीं कर सका है, जिसे वह अपनी उपलब्धी के रुप में प्रस्तुत कर सके । सालों पहले जिन स्कैंडलों का पर्दाफाश किया था, उन्हें कब तक भुनाते रहेंगे। अच्छा हो कि दूसरे अखवारों से ही कुछ सीख ले लें।

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  • Amarujala ka EK subhchinak says:

    khabar hai ki amarujala meerut compact main 01 april 2010 ko 1st page par local cover story ke saath bikenar ke incometax deptt. ka photo compact ke incharge ashok priyaranjan ne laga diya. yeh baat atul ji kisi khas aadmi ne un tak phuncha di. abhi jab pichle dino atul ji meerut aaye to unhone suryakant dwivedi aur priyaranjan se is baare mein pooncha kya local photo nahi tha ki net se photo download karna pada. Is par ashok priyaranjan ne Us din ke 1st page incharg DILIP ki galti bada di. atul ji ke aane wale din dilip chuthi par tha is karan uska spastikaran nahi liya ja saka. Sutra batae hain ki ashok priyaranjan Dilip par DILIP par apni galti swikar karne ka dabab bana rahe jabki usne galti ki hi nahi . Jankari mili hai ki DILIP ne aisa na karke Suryakant dwivedi ko bataya ki is galti ke liyae ASHOK PRIYARANJAN hi zimmedar hain, main nahi. sutra bata rahe hain ki SURYAKANT DWIVEDI aur ASHOK PRIYARANJAN purane saathit hain. isliya dwivedi ji Ashok priyaranjan ko bachakar Dilip par istifa dene ka dabab bana rahe hain, kyonki atul ji ko bhi report deni hain. Samajh mein nahi aata ye bade log kab tak apni galti choton par dalkar unki bali lete rahenge. Bechara PATRAKAR bahar walon ki awaj uthatha jabki uski apni awaj uske ghar mein hi daba di jati hein. BHAGWAN KARE BEKASOOR Dilip ki naukari bach yjaye aur kasoor bar ko uske kiye ki saja mile. Sutra batate hain ki SHASHIKANT JAISWAL ke istife ke peeche bhi PRIYRANJAN ki sajish thi. kyonki Priyaranjan compact main apne kuch khas logon ko aage badana chathe hain, jiske liye kisi na kisi ki bali to chahiye hi.
    AADRNIAYN ATUL JEE AAGE FAISLA AAP KO HI KARNA HAIN KI AAP KASOORBAR BADE ADHIKARI KO KO SAJA DENGE YA EK CHOTE BEKASOOR KARMACHARI KO.

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