ड्रिंक-डिनर का दौर और एक पत्रकार का दुख

ग्वालियर के एक पत्रकार, जो एक अखबार में सब एडिटर पद पर कार्यरत हैं, ने आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष के कथित फेसबुक एकाउंट पर लोड कई तस्वीरों को ‘सेव एज’ करके अपने एक राइटअप के साथ अटैच कर भड़ास4मीडिया के पास मेल के जरिए रवाना कर दिया. उन्होंने जो कुछ लिखा है, वह यूं है…


आशू की डिनर पार्टी मीडिया का काला सच : मीडिया में शबाब और शराब : हॉट सीट के तारनहार, जाने-माने पत्रकार आशुतोष जैन आशू की डिनर पार्टी ने मीडिया के स्याह सच को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। फेसबुक जैसी सोशल साइट पर उन्होंने अपने साथ और भी कई नामी-गिरामी पत्रकारों की तस्वीरें शेयर की जो मीडिया की उन सच्चाईयों को उजागर करती हैं, जिनके चलते मीडिया हमेशा आरोपों से घिरा रहता है। हो सकता है डिनर पार्टी की फोटो लोड करते समय साब को होश ही न हो। मैं आशुतोष का विरोधी नहीं। लेकिन मीडिया की सच्चाई का तरफदार जरूर हूं। आशतोष की डिनर पार्टी जो कि स्वतंत्रता दिवस के इर्द-गिर्द मनी है, उसमें चारो तरफ महंगी शराब की बोतलें और अर्धनग्न (खासतौर पर आम आदमी की नजर में) महिला पत्रकार दिख रही हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि हाईक्लास मीडिया का हाल शबाब और शराब ही है। जो आरोप हमेशा से लगते आ रहे हैं उनको सच किया है आशू ने। शराब के नशे में झूमती महिला पत्रकारों के साथ लिपटे साथी गण…. यही सच्चाई बयां कर रही हैं फेसबुक की तस्वीरें। यकीन न आए तो पैसे वापस तो नहीं कहूंगा, आप स्वयं देख लें। कृपया मेरा नाम व परिचय न प्रकाशित करें। ”


मैं इस पत्रकार साथी की राय की इज्जत करता हूं लेकिन मेरे निजी विचार उनसे अलग हैं. शराब छुपकर पीना अपराध नहीं और सामने आकर पीना अपराध कैसे हो गया? अगर किसी ने अपने घर पर डिनर का आयोजन किया है और उसके पहले ड्रिंक का दौर चला हो तो इसे गलत कैसे मान सकते हैं? दिक्कत यही है कि हम हिप्पोक्रेटिक समाज में रहते हैं जहां सारा आनंद छुपकर लेना चाहते हैं और सामने आकर सिर्फ भाषण देना चाहते हैं, बड़ी-बड़ी और भारी-भारी शब्दों के जरिए, ताकि उसे सुनकर सामने वाला ज्ञानी महोदय के ज्ञान से घबराकर बेहोश हो जाए. जिन्हें आप अर्द्धनग्न कह रहे हैं, वे हमारे आप की घरों की बेटियां ही हैं. हम अगर हाफ पैंट पहनें तो फैशन, आरामदायक, अगर वो पहनें तो अश्लीलता. हद है भाई. किस दुनिया में जी रहे हैं आप. लगता है आप मुंबई-दिल्ली नहीं आए. या अपने ग्वालियर की सड़कों पर चलने वाली युवा लड़कियों को नहीं देखा. अगर आरोप लगाने के लिए आप ये आरोप लगा रहे हैं तो फिर तो कोई बात नहीं. लेकिन आप थोड़े भी संजीदा हैं तो एक बार जरूर सोचिए कि क्या आपके घर की कोई लड़की अपने पहनावे व रहन सहन में पहले के मुकाबले आधुनिक नहीं है? हम आधुनिक होएं तो वाह वाह, वे आधुनिक बनें तो हाय हाय?? यार, कब बदलेंगे हम अपनी मेंटेलिटी???

ये सही है कि दिल्ली मुंबई का समाज ज्यादा खुला और सहज है, तुलना में गांवों और कस्बों के. यहां डिस्कोथे, देर रात की पार्टीज, नाच-गाना, खाना-पीना, सैर-सपाटा, लांग ड्राइव, काकटेल पार्टीज का चलन खूब है. पर हिंदी समाज के जितने लोग हैं, वे इन मौके की तस्वीरें नहीं चाहते कि सामने आए. अगर आशुतोष और उन जैसे अन्य लोग यह साहस कर पा रहे हैं कि ऐसी तस्वीरें भी सामने आएं तो हमें उनके साहस की दाद देनी चाहिए. कोई अपने घर में दोस्तों की दावत कर उनके साथ खा-पी रहा है, हंसी ठट्ठा कर रहा है, तस्वीरें खिंचवा रहा है तो इसमें क्या प्राब्लम है पार्टनर? ये उनका बड़प्पन और सहजता है कि वे इन तस्वीरों को अपने फेसबुक प्रोफाइल पर डालते हैं ताकि सब लोग देख सकें. वाकई, आशुतोष को उनके इस कदम के लिए मैं दिल से बधाई देता हूं, अगर उन्होंने ही फोटो अपलोड की है तो. (फोटो अपलोड किसके प्रोफाइल में है, इसके बारे में आगे बात करेंगे)

बाकी यह बहस कि शराब पीना सही है या गलत, मांस खाना सही है या गलत, लड़की का लड़के जैसा कपड़ा पहनना सही है या गलत, बहुत ही आदिम किस्म की और मूर्खों वाली बहस है. इसके चक्कर में पड़ना बेकार है. अगर कोई नहीं पीता तो बहुत अच्छा. कोई पीता है तो उससे भी अच्छा. अपने शौक और संस्कार की बात है. अगर आप अपने घर की स्त्री को बांध कर रखना चाहते हैं तो बहुत अच्छा. हालांकि तभी तक अच्छा जब तक वह स्त्री खुद बंधने को तैयार हो. जिस दिन उसने कानून का सहारा लिया तो आप खुद बंधे मिलेंगे थाने में.

कोई लड़की अगर मेरे साथ मित्रवत खड़ी है, साथ में हाथ डालकर चल रही है तो जरूरी नहीं कि वो मेरी गर्लफ्रेंड हो. वो मेरी बेटी भी हो सकती है. वो मेरी बहन भी हो सकती है. वो मेरी दोस्त की प्रेमिका भी हो सकता है. मैं समझ सकता हूं कि गाजीपुर और ग्वालियर में लड़कियों के साथ बात करना मुश्किल होता होगा, उनके साथ खाना-पीना तो असंभव सी बात है. तब जो भी बात करता दिखे, उस पर शक करना हम देहातियों की नियति बन जाती है.

मेरे गांव में ढेर सारे पंडित जी लोग मांस खाते हैं, दारू पीते हैं. पर उनके पिता जी, दादा जी बिलकुल नहीं छूते थे. अब कैसे हम उन पंडित जी को कहें कि वे गलत हैं. हमारे गांव के क्षत्रिय जाति के 99 फीसदी घरों में हर दूसरे दिन मुर्गा पकता है  और पुरुष लोग शराब पीकर ही खाते हैं. यही संस्कार बचपन से देखकर बड़े हुए बच्चे कैसे न मांस खाएं और शराब पिएं. पर मांस खाने वाले और शराब पीने वाले सभी लोग अनैतिक होते हैं, यह मानना सौ फीसदी मूर्खता है. दुनिया के महाभ्रष्टों में आपको उनकी संख्या ज्यादा मिलेगी जो नानवेज – ड्रिंक नहीं खाते-पीते. आप अपने प्रोफेशन में ईमानदार हैं. आप जो सोचते हैं, वह कहते हैं. आप जो करते हैं, उसके प्रति सार्वजनिक स्वीकार्य भाव रखते हैं. ऐसा हिंदी पट्टी में न के बराबर है. हिप्पोक्रेसी का आलम यह है कि सहज आदमी हीनता बोध में आत्महत्या कर ले. अगर कुछ लोग अपनी घर-परिवार के खाने-पीने के क्षणों की तस्वीरें सार्वजनिक कर रहे हैं तो यह हिंद्दी पट्टी के मेच्योर होने की निशानी है. भले ही इसकी शुरुआत दिल्ली से हो रही हो पर यह हवा तो देर-सबेर गांव-कस्बों तक भी पहुंचेगी. पहुंच भी रही है. शराब और मांस के प्रति गांव-कस्बों में अब सहजभाव ज्यादा दिखने लगा है. लोग यह सब करते हुए छिपते-छिपाते नहीं. हालांकि कम कमाने वाला जब ज्यादा पीने-खाने लगे तो यह सब उसके व उसके परिवार की तबाही का कारण बन जाता है. लेकिन अगर कोई शालीनता से अपने घर में सबकी राय, आम सहमति से खा-पी रहा है तो बुरा बिलकुल नहीं है. ये सब मेरी निजी राय है. भले आप इससे सहमत न हों. आपकी असहमति का स्वागत है.

आखिर में बता दूं कि ये तस्वीरें आशुतोष के घर की हैं या नहीं, ये कनफर्म नहीं है. आशुतोष की प्रोफाइल के फोटो सेक्शन में इस आयोजन की सिर्फ एक तस्वीर है. उस पर क्लिक करने पर नीचे लिखा आता है…. mast mast dinner party @ home by Savvy Dilip. जब इस लिंक पर क्लिक करते हैं तो आयोजन की जो तस्वीरें खुलती हैं, वे Savvy Dilip की प्रोफाइल के फोटो सेक्शन से कनेक्ट हैं.

खैर, फोटो चाहे जिसके प्रोफाइल में हों, ये सारी तस्वीरें बिलकुल जेनुइन हैं. हिंदी समाज में आ रहे इस खुलेपन की हम सराहना करते हैं. ये बहस कभी और कि गरीबी बहुत है तो महंगी शराब क्यों पीते हैं दिल्ली वाले और भुखमरी है तो खा-खा कर मोटे क्यों हो रहे हैं दिल्ली वाले. शायद इन्हीं बहसों के डर से ढेर सारे कामरेड चोरी से दारू पीते हैं और चोरी से मुर्गा खाकर अगले दिन बेहद गरीब लोगों के बीच गरीबों को गोलबंद करने और गरीबी पर भाषण देने निकल पड़ते हैं. अगर हम डेमोक्रेटिक नहीं हो पाए तो कम्युनिस्ट और कामरेड कतई नहीं बन सकते. अगर हम डेमोक्रेटिक नहीं बन पाए, अपनी आदतों, अपनी गल्तियों को खुद स्वीकार करने का साहस नहीं बटोर पाए तो समाज और देश की अगुवाई नहीं कर सकते. शायद इसी हिप्पोक्रेसी का नतीजा है कि देश में आज गांधी के आदर्शों का व्यवहार में कहीं कोई नामो-निशान नहीं.  जो संविधान और जो कानून हैं, व्यवहार में उससे ठीक उलट हो रहा है, और वो सब संविधान व कानून के नाम पर. इसे तो हिप्पोक्रेसी की इंतहा कहेंगे. तभी तो हमारा राम नामी देश भ्रष्टाचार में दुनिया भर के देशों को पछाड़ने में लगा है. जहां जितना पाखंड होगा, वहां उतनी ज्यादा बदबू व गंध होगी. फिलहाल इतना ही. बहस आगे बढ़ी तो फिर मैं अपनी बात रख सकता हूं. अगर चुप्पी कायम रही तो फिर अभी से स्वीकारें… जय राम जी की.

-यशवंत

तस्वीरें इस प्रकार हैं….


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Comments on “ड्रिंक-डिनर का दौर और एक पत्रकार का दुख

  • Kumar Sauvir, MAHUAA NEWS, Lucknow says:

    लेकिन भइया इसमें गलत अंदाज और नीयत तो हमें कहीं दिख ही नहीं रही।
    ऐसी एक नहीं सैकडों की तादात में बेहूदगी से भरी तस्वीरें आपको किसी भी पत्रकार के परिवार में हुई किसी शादी में बारात के दौरान बाकायदा सडक पर नाचते समय की मिल जाएंगी और उसके साथ होगी उनके तथाकथित करीबी रिश्तेदारों की उन पर टकटकी लगाये-जमाये निगाहें।
    यह तो शराब पार्टी है। बिना शराब के सरेआम नंगी होती पोशीदगी आप किसी के भी घर पर ऐसे ही आयोजनों के एलबम में झांक सकते हैं जिन्हें उन आयोजनों के वक्त सैकडों-हजारों ने जमकर निहारा और वक्त की नजाकत से पैदा अपनी मजबूरी के चलते खुद को कोसा होगा।

    Reply
  • yashwant g is lekh ki sachchai isi s jahir hoti h ki isk liye apko achchi khasi safai deni padi. jo asu k prati apka moh bhi darsati h.

    Reply
  • Sachendra Singh says:

    मैं आपकी बात से कुछ हद तक सहमत हूं। दुनिया तर‍ह-तरह के लोग तरह-तरह के शौक, रवायतों, संस्‍कारों से बंधे हुए हैं। जो चर्या किसी के लिए अनैतिक है वह किसी और के लिए नैतिक हो सकती है। परन्‍तु आप जिस खुलेपन की वकालत कर रहे हैं वह कही न कहीं समाज को विक्रत करने की व्‍यवस्‍था है। इतना तो जाहिर है कि खुलापन शराब पीने या माइक्रो स्‍कर्ट पहिनने से नही आता। दिल्‍ली या अन्‍य शहर भले वहां के युवा कई हजार रू; खर्च कर डिस्‍कोंथेक पर थिरकते हों पर जब ग्‍वालियर-चम्‍बल जैसे इलाकों में बेरोजगार युवाओं की फौज निकलती हो, कुपोषढ से नैनिहाल दम तोडते हो तब आप जैसे पत्रकार येलो जर्नलिज्‍म पर ज्‍यादा फोकस करते नजर आते ही है।।

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  • kisi achche drycleaners ke yahan Is bhai ke dimagh ki safai Zaruri.Hai.

    Inhe batayen , Jo Sharab Photo Me Dikh Rahi Hai, Normal cost Wali Hai.

    Inhe Mahangi Brand Wali Sharab Ka Pata Hi Nahi Hai.

    Inme KAUN SI MAHILA अर्धनग्न Hai?

    MORAL POLICE HAR JAGAH BANANA THIK NAHI.

    SABKO JINE KA HAQUE HAI.

    Reply
  • kisi achche drycleaners ke yahan Is bhai ke dimagh ki safai Zaruri.Hai.

    Inhe batayen , Jo Sharab Photo Me Dikh Rahi Hai, Normal cost Wali Hai.

    Inhe Mahangi Brand Wali Sharab Ka Pata Hi Nahi Hai.

    Inme KAUN SI MAHILA अर्धनग्न Hai?

    MORAL POLICE HAR JAGAH BANANA THIK NAHI.

    SABKO JINE KA HAQUE HAI.

    Reply
  • आशु जी की हिम्मत देखिये यह हिमाकत नहीं है शराब पीना गलत है बात सही है जो नहीं पीता उसकी आदत ना पड़े कितने खुलेपन से स्वीकार किया मीडिया के इन लोगो ने इनकी तस्वीरो से रूबरू हुए पर्दा नहीं डाला किसी नेता या किसी बड़े अधिकारी की इस तरह की फोटो देखी कभी अरे भाई बड़े लोग है बड़ी टेंसन लेते है और उसको एक साथ एन्जॉय करते अपने दर्द को मिटाते है और नए सवेरे की तैयारी में जुटते है फालतू बातो को मुद्दा ना बनाइये घर में है हंगामा नहीं है कोई ऐसा काम नहीं कर रहे है जो गलत तस्वीर पेश करता है जो प्राक्रतिक ना हो

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  • Sanjay Sharma. Editor, Weekand Times says:

    दरअसल हमारी समस्या ही यह हैं कि हम सच को स्वीकार नहीं कर सकते. जो भाई आशुतोष की पार्टी में खामियां निकाल रहे हैं वो खुद न पीते हो इसकी संभाबना कम ही हैं. और जिस महंगी शराब की बात कर रहे हैं तो आशुतोष इस हैसियत के तो हैं ही कि वो 3000 की वोदका पी सके. क्या पत्रकार का फटेहाल रहना और सस्ती शराब पीना ही सिद्ध करता हैं कि वो सच्चा पत्रकार हैं. पता नहीं हमारी बिरादरी बाले भाई लोग कब अपना नजरिया बड़ा करेगे.

    Reply
  • Sanjay Sharma. Editor, Weekand Times says:

    दरअसल हमारी समस्या ही यह हैं कि हम सच को स्वीकार नहीं कर सकते. जो भाई आशुतोष की पार्टी में खामियां निकाल रहे हैं वो खुद न पीते हो इसकी संभाबना कम ही हैं. और जिस महंगी शराब की बात कर रहे हैं तो आशुतोष इस हैसियत के तो हैं ही कि वो 3000 की वोदका पी सके. क्या पत्रकार का फटेहाल रहना और सस्ती शराब पीना ही सिद्ध करता हैं कि वो सच्चा पत्रकार हैं. पता नहीं हमारी बिरादरी बाले भाई लोग कब अपना नजरिया बड़ा करेगे.

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  • बेनामी लाल says:

    जाहिद शराब पीने दे, मस्जिद में बैठ कर
    या फिर जगह बता दे, जहां पर ख़ुदा न हो

    मैं ज़ाहिर है समझ नहीं पाता कि कब आखिर हम एक इंसान के अच्छे या बुरे होने का निर्णय उसकी जीवन शैली की जगह उसके विचारों और दुनिया के प्रति रवैये को ध्यान में रख कर करेंगे….और सबसे पहला सवाल उन्ही महाशय से है जिन्होंने ये तस्वीरें भेजी हैं कि क्या उन्होंने कभी शराब पी है…पी है तो वो ये आपत्ति करने के अधिकारी नहीं हैं…और नहीं भी पी है तो उन्हें किसी के व्यक्तिगत जीवन में दखल देने का कोई हक़ नहीं….मैं ऐसे कम से कम 50 नाम गिना सकता हूं जो बेहद शानदार कलाकार, साहित्यकार, विचारक, राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं….और शानदार इंसान भी….और वे मदिरापान करते हैं….फौजियों में तो ये आम बात है तो क्या वे भर्त्सना योग्य हैं….
    दिमाग को थोड़ा फैलाइए….और हां मैं आशुतोष का प्रशंसक नहीं हूं…न ही चमचा क्योंकि व्यक्तिगत तौर पर और एक पत्रकार के तौर पर मैं उन्हें पसंद नहीं करता पर किसी के निजी जीवन में दखल….वो भी फ़र्ज़ी दखल…बेहूदा बात है….
    और हां एक भी महिला अभद्र वस्त्र नहीं पहने थी और न ही अर्धनग्न थी….और अगर आपको दिखाई दे रही महिलाएं अर्द्धनग्न लगीं….तो महोदय आपकी दृष्टि में ही दोष है….आप शायद एक पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं जो व्यक्ति को बिना जाने उसके चरित्र का निर्धारण करने का है….और कई सारे पत्रकार साथी इससे ग्रसित हैं…
    कृपया उस संस्कृति की दुहाई न दें, जहां खजुराहो को कला माना जाता है….और वात्स्यायन को ऋषि….नकली नैतिकता और व्यर्थ वर्जनाएं केवल मूर्खतापूर्ण विषम समाज बनाती हैं और कुछ नहीं….और हां आइंदा किसी महिला को उसके पहनावे पर सलाह न ही दें क्योंकि उससे ज़्यादा ज़रूरत पुरुषों को अपने चरित्र को साधने की है….जांस पहने महिलाएं भी नौकरी के साथ घर और बच्चे संभाल रही हैं….पुरुष आज तक अधिकतर वैसे ही हैं….
    अंत में सूत्र वाक्य….नैतिकता का बहुत कीड़ा है तो अपने पेशे में उतारें…पत्रकार के काम की नैतिकता पर बात करें…न कि उसके खान पान की….

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  • avinash kumar jha says:

    nonseence topic hai…..yaswant ji stop dis ….
    har ek journalist aapni line badi karne ki bajay dusro ki line chhoti karne ke firak me rahta hai…..so dear xyz u accept d chalenge n make yrself….its nt mean dt i m d follower of aasutosh..

    Reply
  • Rakesh Ranjan says:

    ”आशू की डिनर पार्टी मीडिया का काला सच : मीडिया में शबाब और शराब”
    Bhai sahab,
    Uprokt headline ke saath aapne jo kuch bhi likha wo to maine padha. Lekin aapne jo kehna chaha wo ya to main samajh nahin paya….ya phir aap is kabil nahin lagte ki usey samjha bhi jaye!

    Aapne shuruaat kuch aise ki jaise aap koi bahoot bada khulasa karne ja rahe hon jo hum soch bhi nahin sakte…..lekin jab padha to aisa laga ki aap sahi hain. Aap itna kuch soch sakte hain ki hum soch bhi nahin sakte.

    Aapko dekhna chahta hun ki kaun hain aap? Kaise dikhte hain aap? Itna jabardast tark-pranali aapne kaise izad kiya? Itni pragatisheelta aapne haasil kahan se aur kaise kiya?

    Aapka likha hua padha to Shree Lal Shukla ji ki ”Raag Darbari” yaad aa gayi jisme bhades darshan-shashtra pela gaya hai…..upanyas me ek prasang ata hai….shayad Karnal Ranjeet ya phir Surendra Mohan Pathak type upanyas rehi hogi jo ShivpalGanj ke ganjhe padha karte the…..ek prasang ayaa darshan se labrez……”Nikku ne nikki ke jalte hue hothon per apne jalte hoth rakhte hue kaha….Nikki kya tumhara satya mere satya se alag hai……Nikki ne sulagte hue kaha….nahin Nikku tumhara satya mere satya se alag nahin hai……aur Nikki ki……!!ra…chookar zameen per gir jati hai”…..Shrilal Shukl ji likhte hai……..”Aur ise kehte hain tthany” (Yane desi darshan-shashtra)

    Shriman lekhak ji…..mujhe bhi kuch aisa hi laga……

    Aap chahe to Ashutosh ji ko bhigakar maro….lekin kam-se-kam khud ko to baksh do.

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  • bhisham singh dewal says:

    आज के समाज में इस तरह की पार्टियाँ दिल्ली ही नहीं छोटे सहरों में भी आम है , पार्टी की सारी तस्वीरें देखीं मुझे तो ऐसा कुछ नहीं दिखा जिस पर बखेड़ा खड़ा किया जाये , किसी भी तस्वीर में ऐसा कुछ भी नहीं जिस पर शर्मिंदा होने की बात की जाये –भीष्म सिंह देवल

    Reply
  • प्रिय यशवंतजी,
    शराब की पार्टी को कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता… शराब पीकर लोग अपने होशो-हवास खो देते हैं… ये सही है… लेकिन आपने जिस तरह से इस खबर के पेश किया है… वैसी कोई अश्लिलता इन तस्वीरों में दिखाई नहीं पड़ती है… हां अगर अशुतोष जी से आपका व्यक्तिगत मनमुटाव है तो फिर आप कुछ भी कहने और करने को स्वतंत्र हैं… लेकिन आपसे गुजारिश है कि अगर आप-अपने साइट की विश्वसनियता कायम रखना चाहते हैं तो ऐसी खबरों से बचे

    Reply
  • भइया ये पत्रकार है कोई संत फकीरा और दरवेश नहीं, जो उनसे इतनी बड़ी उम्‍मीदें पाल बैठे हो।

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  • salil goswami says:

    dear sir aashutosh ki dinner partiki photos me mujhe koi aslilta nazar nahi aayi mera manna ye he ki koi sharab dayre me rahkar pita h tobhaiuse pine do jo nahipita tous par dabav mat dalo han apne job k prati imandari bart sakte ho to wahi achcha h thanks
    salil goswami corporate reporter evening plus jaipur raj.

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  • Anupn Srinarayan says:

    मान्यवर आप के वाक्य ” हिंदी समाज में आ रहे इस खुलेपन की हम सराहना करते हैं.” से हम सहमत है , किन्तु यही मीडिया फ्रेंड्स डे पर पार्टी मना रहे MBA छात्रो की तस्वीरों को तरह -तरह के अतिश्योक्ति के साथ प्रवचन दिए थे ,……….क्या वह सही था ?

    Reply
  • Yeh waisa hi atirekpoorna lekh hai, jaise PEEPLI LIVE film me media ki agdam bagdam chavi pesh ki gayi hai…photographs me ashlilta kahan hai ? koi sharab pi raha hai to usme galat kya hai ? shayad lekh bhejne waale sahab ko hum media walon ke cheron par khushi dekne ki aadat nahi hai…aise log farzi ki gyan ganga na hi bahayen to behtar.

    Reply
  • girish kesharwani says:

    मुझे अच्छी तरह याद है बीते माह आशु जी साधना न्यूज़ चैनल के वर्षगाँठ पर छत्तीसगढ़ आये हुए थे जहां वे विकसित भारत को लेकर काफी कसीदें पढ़े और वे साम्यवादी विचारधारा की काफी आलोचना कर रहे थे मैं यहाँ बता दूँ की मैं कोई साम्यवाद का समर्थक नहीं हूँ मैं तो केवल एक अदना सा पत्रकार हूँ अब समझ में आया की हमारा देश किस तरह से विकाश कर रहा है | हमसे ज्यादा आप समझ रहे होंगे आशु जी के यहाँ की डिनर पार्टी को देखकर वह भी स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर |
    गिरीश केशरवानी
    रिपोर्टर p7 न्यूज़
    रायपुर (छ.ग.)

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  • rakesh pathak, gwalior says:

    party ko rangeen chasme se dhekhne wala gwalior ka fattu patrakar kya khud nahi peeta. khoob peta hai par jab doosree pete hai to uske pet me dard hota hai. iske bad bha….shar rakhta hai ki naam na prakasit kia jaye. bha….

    Reply
  • संजय says:

    जिस महानुभाव ने यह पत्र लिखा है वह बेहूदा और बदतमीज़ है. पर आप संपादक लोग भी अपनी अक्ल लगाएं. पार्टी में शराब पीना या पिलाना असभ्यता की निशानी नहीं है. आप को पसंद नहीं है मत पीजिए पर ऎसी असहिष्णुता का इस वेबसाइट पर प्रदर्शन बेहद शर्मनाक है. दूसरे लिखने वाले महोदय को शर्म आनी चाहिए कि उन्होंने कुछ महिला पत्रकारों और एक पत्रकार के महिला अतिथियों को शबाब कहा है. इन्हें कोई बतलाये कि औरतें सिर्फ शबाब नहीं नहीं होतीं. वो माँ, बहन, बीवी और इंसान भी होती है. खुदा आपको लानत भेजे ऎसी भाषा पर. ऐसे असहिष्णु लोग ही कभी मुसलमानों के खिलाफ, तो कभी ईसाईयों के खिलाफ, कभी हिंदुओं के खिलाफ, कभी मांसाहार के खिलाफ ज़हर उगलते हैं और जितनी नंगई इनके विचारों में है ये भाई साब दंगों में बेकसूरों का क़त्ल करने से नहीं घबराएँगे. ये सिर्फ आशुतोष से नहीं जलते, ये हर सफल इंसान से जलते हैं. इन तस्वीरों में वैसा कुछ नहीं पर गंदे दिमाग की गंदगी देखिये, वह सब लिख डाला जो ये महानुभाव करते अगर इनकी पार्टी करने की औकात होती. यशवंत ने सिर्फ एक झटके में अपनी विश्वसनीयता का क़त्ल किया. आप हर तरह का बकवास छापें, आपकी साईट है पर पत्रकारों के चरित्र पर बेवजह ऊंगली उठाने वाली बकवास को प्रश्रय देना शर्मनाक है.

    Reply
  • Yashwant ji aap to patrakar hain.Kya aapko vivek ka istemal nahi karna chahiye tha.Assman par thookne wale ke shabdon ki sacchai to kam se kam dikhai gai tasviron se mila kar dekhni thi.abhivyakti ki swatantrta ka matlab ye to nahi ki kuch bhi bina soche samjhe shbdankit kar diya jaye aur aap use chaap bhi dein.Ye lanchan aik aise patrakar par hai jise mujh jaise adna tv reporter apna adarsh mante hain.Zahir hai main stream ke tv reporter hain to samicha ke baad hi adarsh mana hoga.

    Reply
  • vinod mahajan says:

    akhir in photo graps mai galat kaya dikh raha hai yashwant apko nahi lagta jo insan khud apnao snaips apni mail par dal raha hai usmai galat kaya hai shayad yashwant ji apko bhi yai sab nahi karna chahiyai tha jabki yai sab loag khabro kai chitai hai or chitai hi rahaingai …………….vinod mahajan

    Reply
  • bikash prasad says:

    kisi ki jindagi ki private photo open krna sara sar jurm hai….aur insab photo ko jinhone lick out kiya hoga woh bhi to is party me gae honge?agar unke pariwar ke sath ye sab kiya jae to kya wo ye bardast kar paenge?
    janab sudhar jao…AUR BHAWNAO KO SAMJHO…

    Reply
  • jhan do dil khulkar mil rahe ho. do baten sukoon se kar rahe ho.. usme bhala kaisi apatti agar pi kar bat kar rahe hai to aap ka thuthun kyu sikuda ja raha hai.. aur aap ne jo unki privet photo ujagar ki. uska kya… daroo pina koi bura nahi hai… bhagwan indra bhi shukrachar ke samne pite the aur sundariyo ka nach bhi dekhte the… to aakhir aashu ji bi insan hai. thodi si jo pili to kisi ka batuaa to ahi mara na….aapko kast hai to kaya kiya jay… himalay jaiyie aur samadhi lagayiye.. warna mumbayi ki galiyo me nikaliye janah ye sab aam bate,, ahi/….

    Reply
  • suresh singh says:

    कोई आदमी अपने नीजि जीवन में क्‍या करता है, इससे किसी को कोई दिक्‍कत नहीं होनी चाहिए। मरे हिसाब से यह कोई गलत चीजं नहीं है। अगर आप अपनी ज्रिदगी में इंजाय नहीं करते हैं तो दूसरों को रोकने का आपको कोई हक नहीं है।

    Reply
  • I ALSO THINK THE SAME AS MOST OF THE COMMENT WRITTEN BUT ONE QUESTION TO ALL OF YOU. HAS THERE BEEN ANY BODY ELSE IN THE PARTY WHETHER A CRICKETER, BOLLYWOOD STAR, A BUREAUCRAT OR EVEN A POLITICIAN ARE YOU SURE THESE SO CALLED THE GREAT JOURNALIST WOULD HAD REMAINED QUIET. NOOOOOOO. THEY WOULD HAVE OPENED THE PANDORA BOX- BREAKING NEWS, EXCLUSIVE NEWS AND MANY OTHER BAKWAAS KIND OF JARGONS THEY GENERALLY USE IN THE CHANNELLS. I THINK THIS IS ONLY THE HALF TRUTH THEY ARE MUCH BELOW CREST. IF THEY HAVE THE RIGHT OF PRIVACY THEN EVERBODY ALSO DESERVES THE SAME. ONE LAST THING YOU CANNOT FOOL ALL THE FOOL ALL TIME. UNDERSTAND MR ASHUTOSH SO BEWARE NEXT TIME IT COULD BE WORST NEXT TIME.

    Reply
  • qamaruddin farooqui says:

    is khabar ko post karne ki koi tuk nahi he yashvant ji……ye khabar sarasar bakvas he.. yaar hum sab ki pursnal life he…..ya ab bhadas4media bhi trp ke chchakar me pad gaya he..masala dikhao our mashhoor ho jao….

    Reply

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