भोपाल के रामभुवन सिंह कुशवाह, एके भंडारी, सुरेश शर्मा, राजेंद्र तिवारी, राजेंद्र शर्मा जैसे पत्रकारों-मालिकों ने जेनुइन पत्रकारों का हक मारा : भोपाल स्थित ‘राजधानी पत्रकार गृह निर्माण सहकारी समिति’ के पदाधिकरियों ने पत्रकारों के लिए सस्ते दर पर सरकार से मिली भूमि को आपस में बांटकर आवासहीन पत्रकारों के अधिकारों पर न केवल अतिक्रमण किया है बल्कि शासन की आंखों मे धूल झोंककर धोखाधड़ी भी की है। जरूरतमंद पत्रकार आज भी घर की तलाश में दर-दर की ठोकरें खाते फिर रहे हैं। घर का सपना दिखाते हुए पत्रकारों की भीड़ जुटाकर राजनीति करने वालों ने एक साथ चार-चार भूखण्ड जुगाड़ लिये। इस घटना से ये भी साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश की पत्रकारिता में धंधेबाजों का कितना दख़ल है और वे किस तरह पत्रकारिता की आड़ में धीरे-धीरे भू-माफि़या बनते जा रहे हैं। इन कथित पत्रकारों की करतूत के कारण ही समाज में पत्रकारों की इज्जत नहीं बची है। आइए, समिति के पदाधिकारियों के बारे में एक-एक कर बात करते हैं-
सबसे पहले बात करते हैं समिति के अध्यक्ष रामभुवन सिंह कुशवाह की। उन्होंने एक भूखण्ड अपने और तीन भूखण्ड अपने पुत्रों के नाम कर लिए। शातिरपन देखिए कि पत्रकारों के सामने नंगे होने से बचने के लिए अपने पुत्र विजय सिंह के पिता के नाम की जगह अपना पूरा नाम लिखने की बजाट शार्ट नाम आरबी सिंह लिख दिया ताकि कोई ये न समझे कि यह रामभुवन सिंह कुशवाह का पुत्र है।
इसी प्रकार समाचार एजेंसी के एक पत्रकार एके भंडारी ने एयरपोर्ट रोड पर स्थित पंचवटी में लाखों रुपये का आलीशान बंगला होते हुए भी भूखण्ड ले लिया। सहकारिता के नियमानुसार भूखण्ड प्राप्त करने से पूर्व समिति के सदस्य को एक शपथ पत्र देना होता है जिसमें इस बात की कसम खाई जाती है कि शपथकर्ता के पास कोई मकान नहीं है। जाहिर है कि भंडारी ने प्लाट के लालच में झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत किया है।
इसी कड़ी में शामिल हैं सुरेश शर्मा। इनके अखबार के नाम पर सरकार ने करोड़ों रुपये की जमीन आवंटित की थी लेकिन धन के लालच में इन्होंने जमीन के साथ अख़बार भी बेच दिया। सुरेश शर्मा के पास पहले से निजी मकान है। उसके बाद भी सरकारी मकान के मज़े ले रहे हैं। प्लाट जुगाड़ा सो अलग। भगवान जाने इनकी इच्छापूर्ति कब होगी।
राजेंद्र तिवारी दैनिक अख़बार के मालिक हैं। इन्होंने एक भूखंड अपने, एक अपने भाई सुरेंद्र तिवारी और एक अपने भतीजे विश्वास तिवारी के नाम बुक करा लिया।
एक अन्य दैनिक के मालिक हैं राजेंद्र शर्मा। शर्मा जी ने भी एक अपने और अपने पुत्र अक्षत शर्मा के नाम भूखण्ड लिया। मनीष शर्मा दिल्ली के एक अखबार का काम देखते हैं। इनके पास भी सिर छुपाने के लिए अच्छी खासी छत है।
समाज को दिशा देने का दम भरने वाले इन पत्रकारों से क्या पत्रकारों के हित की उम्मीद की जा सकती है? अखबारों में काम करने वाले पत्रकारों के विरोध से बचने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए इन्होंने पूर्वनियोजित तरीके से समिति में अखबार मालिकों को रखा और जनसम्पर्क विभाग के अधिकारियों को इसलिए समिति में रखा ताकि समय-समय पर वे इनके काले-जाले में पर्दा डालने में मदद कर सकें।











