”मौका देख पंवार ने मेरा हाथ दबाया”

डीएनए की महिला रिपोर्टर ने बर्खास्त ग्रुप एडिटर डीपीएस पंवार पर लगाए कई गंभीर आरोप : पंवार ने हाथ दबाकर कहा था – अच्छा करोगी तो दूर तक जाओगी : एक दिन बोले- तुमने अगर कोई जवाब नहीं दिया तो मर जाऊंगा : लखनऊ-इलाहाबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक डेली न्यूज एक्टिविस्ट (डीएनए) के ग्रुप एडिटर पद से हटाए गए देशपाल सिंह पंवार पर उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला रिपोर्टर ने अपने साथ हुए बर्ताव को लेकर एक पत्र सार्वजनिक किया है। महिला रिपोर्टर ने आपबीती को भड़ास4मीडिया के पास मेल किया है।

इस पत्र में महिला रिपोर्टर ने कई बातों का खुलासा किया है और कई तरह के आरोप देशपाल सिंह पंवार पर लगाए हैं। महिला रिपोर्टर ने अपनी मेल आईडी और नाम से पत्र को मेल किया। साथ ही, फोन करके पूरे मामले के बारे में जानकारी दी। अपना बिना नाम दिए पत्र प्रकाशित करने के महिला रिपोर्टर के अनुरोध को स्वीकार करते हुए उसने जो कुछ लिखा है, उसे यहां अक्षरशः दिया जा रहा है। -एडिटर


‘सब कुछ मेरे हाथ में होगा, मीडिया हाउस भी’

मैं ही वो लड़की हूं जिसको लेकर पवार प्रकरण चल रहा है। दोषी कौन है? का सवाल उठा है। बड़ी दुविधा है जीवन में। एक तरफ समाज और दूसरी ओर हैं पंवार जैसी छोटी मानसिकता के लोग जिन्होंने मुझसे न सिर्फ अनर्गल वार्तालाप किया बल्कि 55 वर्ष से ज्यादा उम्र होने के बावजूद 27 वर्ष की लड़की के साथ शादी करने के लिये दबाव बनाया। अगर मुझे यही करना होता तो मैं उनकी फोन काल टेप पर मीडिया जगत में उनका पर्दाफाश कर सकती थी। पर मैं इतनी सजग और चालाक नहीं थी। लेकिन मेरे पास इस घटनाक्रम के दो गवाह मौजूद हैं।

पवार जैसे लोग जो अपनी आयु और पद की गरिमा को न ध्यान में रखकर अनैतिक कार्य करने से भी नहीं चूकते हैं। मैं एक महिला हूं और विषम परिस्थितियों में भी काम करने से आम महिलाओं की तरह नहीं घबराती हूं। मेरे अनगिनत नाम हो सकते हैं लेकिन मीडिया जगत में काम करने वाली सभी लड़कियों की पीड़ा लगभग एक ही है। अन्तर इतना है किसी में तुच्छ मानसिकताओं का कोढ़ उजागर करने की क्षमता है, किसी में नहीं। बहरहाल मीडिया मेरा कर्मक्षेत्र है। मैं यहां काम करूंगी तो दुशासन जैसे पंवार रूपी लोग मिलेंगे। लेकिन फिर भी मैं कर्म करूंगी। मेरे इस पत्र में जो घटनाक्रम मेरे साथ 4 माह में घटा उसकी जो पीड़ा है वो उजागर कर रही हूं-

1. 25 अक्टूबर को पंवार मेरे कार्यालय का निरीक्षण करने के लिये आये। मैंने उन्हें सम्मानपूर्वक बिठाया। हमारे रीजनल मैनेजर को आने में 5 मिनट की देरी हो गयी। मौका देख उन्होंने मेरा हाथ दबाया और बोले अच्छा करोगी तो दूर तक जाओगी। चूंकि मैं थोड़ा गर्म मिजाज हूं लेकिन खुद पर नियन्त्रण रख कर बात को टाल दिया। जिस पद और आयु के मोड़ पर वो खुद हैं वहां मुझे कुछ कहने में कुछ शर्मिंदगी-सी लगी।

2. उसके बाद मुझे लेकर आरएम पर दबाव बनाया। कहा कि तुम समझदार हो, क्या करना है, बेहतर जानते हो।

3. ईद के दिन ‘ईद मुबारक’ का एसएमएस आया। शाम को काल आयी कि तुम तो चांद हो, प्यार में उम्र मायने नहीं रखती, जबसे तुम्हें देखा है, मुझे चैन नहीं है। काश, तुम मुझे 10 साल पहले मिली होती तो मैं तुमसे शादी कर लेता। अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है। मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। मैं तुम्हें हर सुख दूंगा जो तुमने सोचा भी न होगा। मैं जो भी चीज हासिल करना चाहता हूं उसे हासिल कर लेता हूं।

4. तुमने अगर जवाब नहीं दिया तो मैं मर जाऊंगा। तुम मेरे पास यूनिवर्सिटी आ जाओ। अच्छा, दिल्ली आ जाओ। मैं व्यवस्था कर दूंगा। मैं तुम्हारा हाथ सारी दुनिया के सामने पकड़ने को तैयार हूं।

5. तुम मेरे बच्चों से उमर में छोटी हो परन्तु फिर भी मैं तुमसे शादी करने को तैयार हूं।

6. तुम आती क्यों नही? मैं तुम्हें नौकरी से निकलवा दूंगा या मीडिया में कैरियर खत्म करवा दूंगा।

7. अखबार मालिक बेवकूफ है। चरित्रहीन है। तुम मेरा साथ दो तो हम मीडिया अम्पायर खड़ा कर सकते हैं। बस तुम साथ दो तो सब कुछ मेरे हाथ में होगा, मीडिया हाउस भी।

8. वो मेरा क्या कर लेगें। एक जगह से 7 करोड़ रुपये मिलने थे। अब उनको नहीं दूंगा। तुम आती क्यों नही? कोई जवाब क्यों नहीं देती। मैं इनके सब मुख्य आदमी हटाने की शर्त रखूंगा तो लाइन पर आयेंगे।

मैंने ये सभी बातें कम्पनी के प्रतिष्ठित सीट पर आसीन सम्बन्धित अधिकारी को पहले ही बता दी थी तथा रीजनल मैनेजर भी इस बात को जानते हैं। ये सब बड़ा संक्षिप्त घटनाक्रम है। लेकिन ये परेशानी मैंने 4 माह झेली है। दो बार अपना मोबाइल नम्बर भी बदला है। फिर भी कुछ नहीं कहा। मेरा मानसिक सन्तुलन बिगड़ गया। मेरा एक माह तक मनोचिकित्सक से इलाज चला। मैंने किसी से कुछ नहीं कहा, और सोचा कि कहीं और शिफ्ट करूंगी। लेकिन पंवार ने मुझसे आगे नुकसान होने की आशंका में मेरी छवि मेरे कार्यालय में बिगाड़ दी। लगभग एक माह की छुटटी ली। जब पंवार का काम नहीं बना तो इन्होंने मेरे खिलाफ अखबार मालिक को भड़काया। जाहिर है इन्सान गलत होने की स्थिति में ऐसा ही कदम उठाता है।

इससे पहले मैं कुछ कहूं, उन्होंने मुझे सफाई देने के काबिल भी नहीं छोड़ा। जाहिर है, जब बात मेरे चरित्र को लेकर उठती है और वो शख्स उंगली उठाता है जिसने खुद मेरे साथ गलत करने की कोशिश की तब चुप रहना मुनासिब नहीं था। इतना तो मुझे बताना ही था कि क्या सही है और क्या गलत है। मैंने 6 जून 2010 को चेयरमैन साहब को पहले मौखिक रूप से बताया फिर 9 जून 2010 को लिखित रूप में दे दिया।

इनकी नोटिस छपने के बाद मेरे पास पंवार के शुभचिन्तकों की तरफ से फोन किये गये और मेरे ऊपर दबाव बनाने की कोशिश की गयी। लखनऊ कार्यालय में और भी लड़कियां हैं। पवार को ये कैसे पता कि इनके चरित्र पर मैंने ही उंगली उठायी है। जाहिर है, मेरे साथ कुछ तो ऐसा किया होगा जिससे उन्हें अदांजा होगा कि ये शिकायत मैं ही कर सकती हूं। मैं इनके साथ होती तो इसकी विटनेस न होती जबकि इनकी कारगुजारियों की गवाह कम्पनी के दो अन्य लोग भी हैं।

मैंने कई जगह काम किया। किसी का किसी के साथ प्रेम सम्बन्ध को लेकर चर्चाएं उठती हैं। इसके लिए हम महिलाओं को पुरूष प्रधान समाज में तैयार रहना चाहिए। लेकिन अपने 10 साल के पत्रकारिता कैरियर में आज तक मैंने किसी के ऊपर उंगली नहीं उठायी। फिर इनके ऊपर क्यों उंगली उठायी? जाहिर है इन्होंने मेरे साथ अच्छा सलूक नहीं किया, तभी उंगली उठायी।

अगर मेरे अन्दर प्रतिभा है और अपने ऊपर विश्वास है तो मैं कहीं भी काम कर सकती हूं। लेकिन बिना गलती मेरे ऊपर कोई मीडिया जैसे रण क्षेत्र में बदनाम करे और अगर मैं चुप रहती हूं तो मैं ही गलत साबित होती हूं। मैं गलत नहीं हूं इसलिये खुलकर बोल रही हूं। अन्याय करने वाले से बड़ा आदमी वो गुनाहगार है जो सह रहा है। हो सकता है मुझे इस प्रकरण के बाद अपना मार्ग बदलना पड़े लेकिन खुद में एक संतोष है। और सबक है उन लड़कियों के लिये जो देश के चौथे स्तम्भ से जुड़ी हैं और सन्देश है पवार जैसी तुच्छ मानसिकता के उन लोगों के लिये जो अपने यहां काम करने वाली कर्मचारी लड़कियों को सीट की तरह इस्तेमाल करने को अपने सेलरी पैकेज में शामिल समझते हैं।

ये मेरा आप सभी पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिये इस प्रकरण पर पत्र है और इस प्रकरण को लेकर मैं सामने आयी। और ज्यादा सफाई देना उचित नहीं समझती क्योंकि मुझे लगता है गलत इन्सान बार-2 सफाई देता है। इस पत्र पर उनकी क्या टीका टिप्पणी होती है, मुझे इससे कुछ लेना देना नहीं है। वो स्वतन्त्र हैं। कुछ भी कहें करें। मुझे इस प्रकरण पर और कुछ नहीं कहना है।

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Comments on “”मौका देख पंवार ने मेरा हाथ दबाया”

  • chandbanu says:

    Madam,
    Aadab.
    Aab bahut hogaya , mera sujhav hai ki aap Mahila Aayog chali jaye. Doodh ka doodh paani ka paani nikal aayega.mahilao ko aage aana hee hoga nahi to purush pradhan samaj jeene nahi dega.aab aap ne kadam bara diya hai. thora aur aage jaye.patrakarita jagat aap ke jajabe aur himmet ko salam karta hai.

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  • aapne bahut sahi action liya he. me bhi isi media ka ek hissa ho aur ye bat achi tarah janti hu ki dusre li ladail ma sath deen par bahut sabasi mile par bat jab hamare kud ke charitya ko pak saf aur sahi sabit karne ki aati he to hame kai muslilo aur ochi bato ka samna karna padta he.lakin aapki himmat kabile tarif he aur apni bat pe kayam rahiye kunki anch ko anch kaha.

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  • PREM SARSWAT. says:

    madam ji aap mahan h or aapko uske khilap awaj uthani hi hogi taki aise logo ko sabak mile…………………hum aapke sath h………….09416357601

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  • raghwendra says:

    hmmmmm. kahani puri filmi hai. apne likha hai ki october me hi unhone apko khopche me lene ka prayas kiya tha, phir is khulaase ke liye itne dino ka intezaar kyon kiya madam.pehle bata diya hota to jyada achha rehta. dusri baat ye ki bhadas koi police wala to hai nahi, aapko to police complain karni chahiye naa ki yahan wahan apne tesu bahakar logon ki sahanubhuti lene ka prayas karna chahiye.

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  • apka patra confusion paida karta hai,mujhe lagta hai ap sahi hai,lekin filhal jo kuch likhee hain wo apne man se nahin,balki kisee aur ke kahne par.waise galat ka purjor virodh karne wala hee patrakar hai,bakee sab to parasite hai

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  • Shiv Narayan Yadav, Patna says:

    मैडमजी आपने जिस तरह से अपनी पीड़ा को लिखा है उससे साफ़ -साफ़ कहा जा सकता है की आप उन्ही लड़कियों में से है जो अपने काम को निकालने के लिए कोई भी बयान दे सकती है और समय आने पर पलट भी सकती हैं और अगर आप ऐसी नहीं है तो आप जल्द ही इस चूतिये पवार के खिलाफ देश की महामहिम राष्ट्रपति जो की खुद एक महिला हैं प्रतिभा देवी सिंह पाटिल को पत्र लिखिए ताकि ऐसे चूतिये पवार की पावर खुद समझ में आ जाये …………….ठीक है ……… 9934783000

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  • app jo bhi hai apko bahut bahut badhai ki apne ek uchhasin shoshankarta ko sansthan se bahar ka rasta dikha diya ye sabak aise bahut se logo ke liye kafi hai. aapko aur kuch karne ki zarurat nai hai. unka bahar jana hi apki jeet hai.is parkran ko bure sapne ki tarah bhul jaiye aur zayda zosh ke sath kaam kariye apni creativity ko tarashiye.ab un janab ko smajh me aa jaya hoga ki yaha sab dhan bais paseri nia hai. apko fir se badhai aur dhanyvad apne apne jaisi bahut se mahila patrakaro ke liye nazir pesh ki hai.apke sunahre bhavishya ki subh kamnaye.

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  • लड़कियों को हर क्षेत्र में क्यों संघर्ष करना पड़ता है ..इस पुरूष मानसिकता के कारण ..ये मानसिकता अभी यही दिख गई ..आपके इस पीड़ा को लोगों ने कहानी का नाम दिया है ..चोर-चोर मौसेरे भाई ..यहां दो पुरुषों के कमेंट हैं दोनो ने इसे कहानी बताया ..राघवेन्द्र जी का तो कहना ही क्या …राघवेन्द्र जी यही कारण है कि लड़कियां शुरूआत मे कोई बड़ा एक्शन लेने से डरती है ..आपलोगों को उनकी कही बात कहानी लगती है ..और टुच्चे पुरूषों की बात सही लगती है ….आप जो भी हैं आपने बड़ी हिम्मत काम किया है ..और अब पिछे कदम मत हटाइएगा .मिडिया जगत की लड़कियों का सपोर्ट है आपके साथ

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  • sandeep shrivastava says:

    ek charithin patrakar itne bade pad par pahuch jaye bharosa nahi ho raha hai.mahila ko sangharsh karne acche purush mitro ki pahchan karni chahiye
    jo vaicharik dharatal par vishvas ke saath patrakarita ki sewa karne pratibadh ho.
    bhagwan aapki raksha kare.
    sandeep shrivastava sr. journalist -chattishgarh

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  • is ladki ko pehle apne girebaan m dekna hoga kisi par is tra ke galat iljam nahi lagne chaiye. madam app aap jaise hi samaj ko gharnit karte hai;)

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  • sanjay sharma says:

    kaisa samay aa gaya hai…jis ladki ka na koi naam na pata uski jhooti kahani bhi logo ko sach lagti hai par jo vyakati itne saalo se apni izzat banaye hue hai wo jhoota…jo log sach likhte hain unhe toh bolne bhi diya nahi jaata aur jo bakwaas unka support kiya jaata hai……

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  • Lokesh choudhary says:

    Ye to lshvar hi janta hai ki jo apne likha hai usme kitni sachai hai..agar ye sach hai to nischit rup se apne ekdam sahi kadam uthaya hai,aise lampat logo ka yahi anzam hona chahiye..lekin agar ye sab sirf proffessional ranniti ka hissa hai to ap kisi naag kanya se kam nahi..kuki ye bhi atal satya hai ki ab se pahle iss vyakti k bare me aisa kuch nai suna gaya hai..

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  • ravishankar vedoriya gwalior says:

    galat niyat rakhne wale apni beti per bhi buri niyat rakhte hai saalo ko jinda jala dena chaiye

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