देशपाल सिंह पंवार का सन्मार्ग से इस्तीफा

पटना से सूचना है कि सन्मार्ग के एडिटर पद से देशपाल सिंह पंवार ने इस्तीफा दे दिया है. वे इन दिनों नोटिस पीरिडय पर चल रहे हैं. पंवार ने सन्मार्ग पिछले साल जुलाई में ज्वाइन किया था. उसके पहले वे डेली न्यूज एक्टिविस्ट, राष्ट्रीय सहारा, हिंदुस्तान, अमर उजाला आदि अखबारों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं.

देशपाल सिंह पंवार सन्मार्ग, पटना के एडिटर बने

यूपी के अखबार डेली न्यूज एक्टिविस्ट से विवादास्पद स्थितियों में हटाए गए देशपाल सिंह पंवार के बारे में सूचना है कि उन्होंने पटना में सन्मार्ग अखबार ज्वाइन किया है. वे एडिटर के पद पर पहुंचे हैं. पटना के सन्मार्ग अखबार में कई लोग पार्टनर हैं और कई लोगों के पैसे लगे हैं. इनमें से एक पत्रकार श्रीकांत प्रत्यूष भी हैं.

पंवार चाहें तो जांच करा लें : प्रो. निशीथ राय

प्रिय यशवंत, पोर्टल भड़ास4मीडिया में श्री देशपाल सिंह पंवार के द्वारा समूह संपादक के पद से अपनी बर्खास्तगी को लेकर डीएनए प्रबंधन के ऊपर कई तरह के आरोप लगाए हैं, जिनका लगातार जवाब देना मैं उचित नहीं समझता हूं और न ही मेरे पास इतना समय है।

”मौका देख पंवार ने मेरा हाथ दबाया”

डीएनए की महिला रिपोर्टर ने बर्खास्त ग्रुप एडिटर डीपीएस पंवार पर लगाए कई गंभीर आरोप : पंवार ने हाथ दबाकर कहा था – अच्छा करोगी तो दूर तक जाओगी : एक दिन बोले- तुमने अगर कोई जवाब नहीं दिया तो मर जाऊंगा : लखनऊ-इलाहाबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक डेली न्यूज एक्टिविस्ट (डीएनए) के ग्रुप एडिटर पद से हटाए गए देशपाल सिंह पंवार पर उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला रिपोर्टर ने अपने साथ हुए बर्ताव को लेकर एक पत्र सार्वजनिक किया है। महिला रिपोर्टर ने आपबीती को भड़ास4मीडिया के पास मेल किया है।

9 करोड़ होते तो नौकरी क्यों तलाशता : पंवार

माफिया भाई और नेताजी के नाम की धमकी देते थे : किसी बिल्डर शमशेर को नहीं जानता : पासवान से एक साल से मुलाकात नहीं : बिना आरएनआई नंबर वित्तपोषण संभव नहीं : लड़की वाली शिकायत मेरे टर्मिनेशन के दिन क्यों?  : डीएनए चेयरमैन ने मेरे बारे में जो लिखा है, उससे साबित हो रहा है कि उनकी बातें व आरोप कितने गलत हैं. वे बाहर से पैसा लाने के मुझ पर दबाव को खुद मान रहे हैं. मेरा सवाल यही है कि क्या खुद का एक पैसा लगाए बिना यूनिट खुल सकती है? ये करिश्मा हो सकता है?

डीएनए के नाम पर 9 करोड़ दबाए हैं पंवार ने!

[caption id="attachment_17565" align="alignleft" width="68"]प्रो. निशीथप्रो. निशीथ[/caption]डीएनए के चेयरमैन और प्रबंध संपादक निशीथ राय ने आरोपों का विस्तार से किया खुलासा :  पंवार ने दो करोड़ रुपये दिल्ली के बिल्डर शमशेर सिंह और सात करोड़ रुपये पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान से लिए : डीएनए की महिला रिपोर्टर से शादी के लिए दबाव बना रहे थे पंवार : महिला रिपोर्टर की लिखित शिकायत के बाद पंवार पर की गई कार्यवाही : महिला रिपोर्टर की लिखित शिकायत की स्कैंड कापी संलग्न है :

आरोपों पर पंवार ने चुप्पी तोड़ी

डीएनए में छपी सूचनालखनऊ और इलाहाबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक ‘डेली न्यूज एक्टिविस्ट’ (डीएनए) के ग्रुप एडिटर पद से प्रबंधन द्वारा बर्खास्त किए गए देशपाल सिंह पंवार ने अपने उपर लगे आरोपों का जवाब भड़ास4मीडिया को एक पत्र लिखकर दिया है. उनका पत्र इस प्रकार है- प्रिय यशवंत, एक सिद्धांत की वजह से झूठे और घटिया आरोपों का जवाब नहीं देना चाहता था.

ग्रुप एडिटर पद से पंवार बर्खास्त

लखनऊ से खबर है कि हिंदी दैनिक डेली न्यूज एक्टिविस्ट (डीएनए) के ग्रुप एडिटर देशपाल सिंह पंवार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है. प्रबंधन ने यह फैसला लेने के बाद बर्खास्तगी से संबंधित एक छोटी खबर भी अखबार में प्रकाशित करा दिया है. इस खबर में कहा गया है- ”गंभीर आर्थिक और चारित्रिक शिकायतों के कारण डेली न्यूज एक्टिविस्ट प्रबंधन ने देशपाल सिंह पंवार को तत्काल प्रभाव से समूह संपादक पद से बर्खास्त कर दिया है.” पंवार के खिलाफ किस तरह की शिकायतें थीं, इसका पता नहीं चल सका है. पंवार ने पिछले साल अगस्त महीने में डेली न्यूज एक्टिविस्ट ज्वाइन किया.

पंवार ग्रुप एडिटर और ठाकुर मेट्रो एडिटर बने

देशपाल सिंह पंवारदेशपाल सिंह पंवार ने हरिभूमि, रायपुर के स्थानीय संपादक पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने नई पारी डेली न्यूज एक्टिविस्ट (डीएनए), लखनऊ के साथ ग्रुप एडिटर के रूप में शुरू की है। पंवार राष्ट्रीय सहारा, पटना के आरई रह चुके हैं। उन्होंने हिंदुस्तान, बनारस व पटना में शीर्ष पदों पर काम किया। वे हिंदुस्तान संग 6 साल और अमर उजाला संग 12 साल तक रहे। मेरठ के किसान परिवार में जन्मे पंवार ने करियर की शुरुआत ‘विश्व मानव’ और ‘दून दर्पण’ से की। खरे-बेबाक स्वभाव और लेखन के लिए मशहूर पंवार का हिंदुस्तान, पटना में साप्ताहिक कालम ‘कड़वा सच’ काफी लोकप्रिय हुआ। बाद में इन लेखों को किताब के रूप में प्रकाशित किया गया।