justice for मां : मां को न्याय दिलाने के आदेश, अफसरों की जांच टीम बयान लेने गांव गई

: गाजीपुर के नंदगंज थाने के भीतर बिना अपराध जबरन बंधक बनाकर रखी गईं महिलाएं : लाल साड़ी में खड़ी मेरी मां, पैर व कूल्हे में दिक्कत के कारण लेटी हुईं चाची, बैठी हुईं दो स्त्रियों में चचेरे भाई की पत्नी हैं. एक अन्य दूसरे आरोपी की मां हैं.‘justice for मां’ अभियान शुरू होने के बाद यूपी पुलिस को रक्षात्मक मुद्रा में आना पड़ा है. गाजीपुर के एएसपी (सिटी) शलभ माथुर के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम लखनऊ से मिले निर्देश के बाद जांच के लिए मां युमना सिंह के नंदगंज थाने स्थित अलीपुर बनगांवा गांव पहुंची. इस टीम में गाजीपुर के भुड़कुड़ा सर्किल के क्षेत्राधिकारी (सीओ) धर्मेंद्र सिरोही भी थे. साथ में अन्य कई पुलिस अधिकारी व कर्मी थे. नंदगंज थाने में कार्यरत कुछ पुलिसकर्मी भी थे. इन लोगों ने तीनों महिलाओं से एक एक कर बयान लिया. मौके पर पीड़ित महिलाओं के परिवार के दो वकील भी मौजूद थे, रामनगीना सिंह और शशिकांत सिंह. करीब तीन घंटे के अपने बयान में तीनों महिलाओं ने अपने उपर गुजरी एक एक बात को दोहराया.

साथ में ये भी कहा कि पुलिस वाले थाने ले जाते वक्त और थाने में रहने के दौरान बार बार कह रहे थे कि उपर से आदेश होने के कारण हम लोगों को मजबूरी में आप लोगों को यहां लाकर अवैध तरीके से रखना पड़ा. इन पुलिस वालों का यह भी कहना था कि अगर आरोपी थाने में आकर सरेंडर करेगा तभी हम लोग आपको यहां से घर जाने देंगे, क्योंकि इस तरह का आदेश गाजीपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अलावा डीआईजी, आईजी और लखनऊ के उच्चाधिकारियों का है. महिलाओं के इस बयान से साफ है कि यूपी पुलिस पूरे प्रदेश भर में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर संगठित तरीके से महिला उत्पीड़न के काम में लगी है.

इससे पहले कल लखनऊ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों ने यूपी के एडीजी ला एंड आर्डर बृजलाल के सामने पत्रकार यशवंत सिंह की मां समेत उनके परिवार की तीन महिलाओं को नंदगंज थाने में रात भर बंधक बनाए रखने का प्रकरण उठाया. तब ब्रजलाल ने इस मामले की जांच कराकर दोषियों को दंडित करने का आश्वासन दिया था. उसके बाद आज सुबह लखनऊ डीआईजी पुलिस कंप्लेंट सेल की तरफ से एक मेल गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक रवि कुमार लोकू को भेजा गया. इस मेल को गाजीपुर पुलिस की सर्विलांस सेल, आईजी जोन पुलिस वाराणसी के पास भी भेजा गया. इसकी प्रति शिकायतकर्ता पत्रकार यशवंत को भी भेजा गया. इस मेल में कही गई बातें इस प्रकार हैं-


from DIG Police ComplaintCell Lucknow ([email protected])

to SP Ghazipur ([email protected]), Surveillance Cell Police Gazipur ([email protected]), IG Zone Police Varanasi ([email protected])

cc [email protected]

Sir,

The complaint Shri. Yashwant Singh, CEO & Editor of web media Company www.bhadas4media.com, Mb No. 09999330099, r/o- Village Alipur Bangaoun, PS-Nandganj, Distt. Ghazipur, E-mail To: [email protected]  is being forwarded for enquiry and necessary action. If there is no legal hassle regarding this matter then kindly send brief reply to the complainant regarding action taken.

A.S.P. (P/G),
D.G.P. Hqrs, U.P.

Lucknow


इस आदेश के गाजीपुर पहुंचते ही आईपीएस अधिकारी शलभ माथुर के नेतृत्व में पुलिस की टीम पीड़ित महिलाओं से बयान लेने उनके गांव पहुंची. पुलिस के फिर से दरवाजे पर आते देख एक बार परिवार के सभी लोग फिर डर गए कि कहीं ये पुलिस फिर से जबरन उठाने और प्रताड़ित करने तो नहीं आई है. लेकिन पुलिस के लोगों ने जब बताया कि वे उनके साथ हुए अन्याय के बारे में बयान लेने आए हैं तो सबकी जान में जान आई. इस प्रकरण के बारे में कयास लगाया जा रहा है कि गाजीपुर पुलिस के उच्चाधिकारी महिलाओं को अवैध तरीके से बंधक बनाए रखने के मामले में नंदगंज थाने के पुलिस वालों पर गाज गिराकर अपना पल्ला झाड़ने की तैयारी कर रहे हैं. जबकि नंदगंज पुलिस के कर्मियों का महिलाओं से व परिजनों से साफ कहना था कि वे जो कुछ कर रहे हैं, पुलिस के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कर रहे हैं.

ऐसे में कैसे माना जाए कि पीड़ित महिलाओं के असली दोषियों की शिनाख्त हो सकेगी और उन्हें सजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी. इस बात की क्या गारंटी है कि गाजीपुर में ही तैनात पुलिस अधिकारियों की जांच टीम लखनऊ में बैठे अपने आकाओं को सच्ची रिपोर्ट भेजेगी और खुद को भी दोष में बराबर का भागीदार मानेगी. पीड़ित महिलाओं के परिजनों का कहना है कि जब तक इस प्रकरण की जांच किसी दूसरे प्रदेश के बड़े अधिकारी या हाईकोर्ट के किसी जज से नहीं कराई जाती, पीड़ित महिलाओं को न्याय नहीं मिलेगा.  गाजीपुर पुलिस और यूपी पुलिस के लखनऊ में बैठे बड़े अधिकारियों के रुख को देखते हुए तय किया गया है कि justice for मां अभियान महिलाओं को उत्पीड़ित करने वाले असली दोषियों, जो उच्च पदों पर बैठे पुलिस अधिकारी हैं, के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू होने तक जारी रखा जाएगा.

Comments on “justice for मां : मां को न्याय दिलाने के आदेश, अफसरों की जांच टीम बयान लेने गांव गई

  • मेरे मित्र आपके इस व्यथा से निबटने के लिये हम कानूनी तौर पर क्या कर सकते है, इसको ध्यान मे रखकर मैने कानूनी राय ली है। इसको इस प्रश्न उत्तर के माध्यम से समझा जा सकता है।

    प्रश्न
    परिवार के किसी अन्य सदस्य के आरोपित जुर्म में पुलिस क्या परिवार के किसी पुरुष अथवा महिला सदस्य को रात भर थाने बंद कर सकती है, ताकी दबाव में आकर आरोपित व्यक्ति थाने में समर्पण कर दे। अगर ऐसा नहीं है तो सम्बंधित पुलिस वालों के खिलाफ क्या कारवाई की जा सकती है?

    कानूनी सलाह
    पुलिस को यह अधिकार है कि वह किसी अपराध के दर्ज हो जाने पर उस के अन्वेषण के लिए किसी व्यक्ति को पुलिस थाने में बुला कर उस से पूछताछ कर सकती है। लेकिन उसे बेवजह किसी व्यक्ति को थाने में बंद करने का अधिकार नहीं है। पुलिस द्वारा ऐसा किया जाना भारतीय दंड संहिता की धारा 340 में वर्णित सदोष परिरोध है। ऐसे परिरोध कर्ता को धारा- 342 के अंतर्गत एक वर्ष तक का कारावास या एक हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनो दंडों से दण्डित किया जा सकता है।

    यदि सदोष परिरोध तीन दिनों या उस से अधिक का हो तो धारा-343 के अंतर्गत दो वर्ष तक का कारावास या या जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जा सकता है। यदि यही परिरोध दस या अधिक दिनों का हो तो धारा-344 के अंतर्गततीन वर्ष तक के कारावास तथा जुर्माने दोनों से दण्डित किया जा सकता है।

    तीनों ही अपराध संज्ञेय हैं और पुलिस इन अपराधों को दर्ज कर अन्वेषण आरंभ कर सकती है। इन अपराधों के लिए कोई भी मजिस्ट्रेट प्रसंज्ञान ले सकता है। यदि आप के साथ या आप के किसी मित्र या परिवार के सदस्य के साथ ऐसा अपराध पुलिस द्वारा किया गया है तो आप इस की शिकायत उस क्षेत्र पर क्षेत्राधिकार रखने वाले मजिस्ट्रेट से कर सकते हैं तथा उस के सामने गवाहों के बयान करवा कर मुकदमा दर्ज करवा सकते हैं। [b][/b][b][/b][b][/b][b][/b]

    Reply
  • yashwant ji qasoorwaar police waalon ke khilaf karwai zaroori hai. karwai tak khamosh nahin raha jaaye to behtar hai.

    A N Shibli
    bureau Chief
    Hindustan Express
    9891088102

    Reply
  • सृजन शिल्पी says:

    उपर्युक्त क़ानूनी सलाह वाकई व्यावहारिक और प्रभावी उपाय है। पहला काम तो यही करना चाहिए। मीडिया के दबाव से जो होगा, वह तो होता ही रहेगा।

    Reply
  • amitabh prasad singh says:

    yah bat kitni hasyashpad hai ki jin adhikariyoun ke aadesh par police walon ne mhilao ke shath aisha kam kiya un hi adhikariyon ko ishki janch ki jimmedari de di gai , iska shidha shidha arth yahi hai ki share police adhikari mil kar mamle ki khana purti kar rapha dapha karna chahte hai. police wale kanun ko apne bap ki jagir bana diye hai, wo shochne lage hai ki ham kanun ko jaise chahenge waishe chalayenge, hunse takrayega koun. unke ish bhram ko todane ki jarurat bhi .Hame tabtak ladna hoga jabtak inshaph nahi mil jata . chahe iske liye jitane bhi mushkilon ka shamna karna pade . yashwant ji aap aage badhate rahiye hum aap ke sath hai.

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  • aapkiawaz.com says:

    यशवंत जी, अभी बहुत सारे रास्ते बाकी है। हम लोग आये दिन इस तरह की घटना देखते रहते है। आप तो पत्रकार है, तो इतनी भी सुनवायी हो गई। वरना गरीबों व अन्य लोगो की कोई सुनने वाला है ही नही। कृपया धैर्य से काम लीजियें। आपकी मायूसी से दोषियों को बल मिलेगा। आगे की सोचियें, पीछे हटना वीर का काम नहीं है। ये कायरता है। मेरी राय है किसी दिन केन्द्रीय महिला आयोग, व अन्य संबंधित विभागों के मंत्रियों व राजपाल आदि से मिलकर ज्ञापन आदि देते है। सभी विभागों का अनुभव है कि कुछ भी कर लो, कुछ दिन लोग कोशिश करके चुप बैठ जाते है, जिसका उनको फायदा उन्हे मिलता है। मां ने आपके लिए कितनी राते-वर्ष आपको पालने में बिताये है और आप उनके लिए थोड़ी सी कोशिश करके ही थक गये, अपने लिए न सही देशहित में इस जंग को जारी रखियें। हम लोग आपके साथ है। संपादक- आपकी आवाज़.कांम।

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