justice for मां : डीएनए, लखनऊ ने फिर साबित की अपनी जनपक्षधरता, मां को समर्थन

डीएनए, लखनऊ में प्रकाशित खबर
डीएनए, लखनऊ में प्रकाशित खबर
: पत्रकार की मां व परिजनों को बंधक बनाए जाने की खबर पहले पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित की : गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक का बयान प्रकाशित कर रवि कुमार लोकू के झूठ की खोली पोल : लखनऊ और इलाहाबाद से प्रकाशित अखबार डेली न्यूज एक्टिविस्ट ने अपनी जनपक्षधरता को फिर साबित किया है. परेशान, उत्पीड़ित और सरकार व सिस्टम से त्रस्त लोगों की आवाज जोरशोर से व बिना डरे उठाने वाले इस अखबार ने आज के अपने संस्करण में पहले पन्ने पर पत्रकार यशवंत सिंह के परिजनों के साथ हुए बुरे व्यवहार की खबर समग्रता के साथ छापी है. ऐसे मामले में जिसमें पुलिस उत्पीड़न की तस्वीरें व वीडियो जैसे प्रमाण मौजूद हैं, गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक का यह बयान देना कि उन्हें इस प्रकरण के बारे में पता ही नहीं, यह दर्शाता है कि गाजीपुर पुलिस की मंशा ठीक नहीं है.

महिलाओं को अवैध तरीके से थाने में बिठाए जाने के दृश्य व उनके बयान इंटरनेट पर कई दिनों से तैर रहे हैं, मेलों के जरिए व वेब ब्लागों के जरिए यहां वहां प्रचारित प्रसारित हो रहे हैं लेकिन गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक रवि कुमार लोकू डेली न्यूज एक्टिविस्ट के रिपोर्टर द्वारा संपर्क किए जाने पर कहते हैं कि उन्हें तो इस मामले में कुछ मालूम नहीं और न ही उन्हें कोई शिकायत मिली है. उल्लेखनीय है कि गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक समेत यूपी पुलिस के सभी छोटे बड़े अधिकारियों की आफिसियल मेल आईडी पर पत्रकार यशवंत सिंह ने अपनी मां व परिजनों के उत्पीड़न, बंधक बनाए जाने और परिवार के निर्दोष युवकों को थाने ले जाकर प्रताड़ित करने की शिकायत पहले ही भेज दी है. लेकिन गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक कहते हैं कि उन्हें कहीं से कोई शिकायत नहीं मिली है. यशवंत सिंह का कहना है कि उन्होंने खुद अपने मोबाइल नंबर से गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक रवि कुमार लोकू को घटना के दिन फोन कर महिलाओं को थाने में रखे जाने की जानकारी दी थी. इसी तरह बनारस रेंज के डीआईजी आरके सिंह या आरबी सिंह को भी यशवंत ने फोन कर महिलाओं को थाने में अवैध तरीके से बिठाए जाने की जानकारी दे दी थी. लेकिन पुलिस के इन दोनों बड़े अधिकारियों ने शिकायत किए जाने के बाद भी पूरी रात महिलाओं को थाने में रखे जाने के निर्देश दिए और अगले दिन दोपहर बाद तब घर जाने दिया जब आरोपी चचेरे भाई ने थाने में सरेंडर कर दिया. फिलहाल, यहां डेली न्यूज एक्टिविस्ट में प्रकाशित खबर दी जा रही है, जिससे समझा जा सकता है कि प्रकरण कितना गंभीर है और यूपी पुलिस व प्रशासन कितना बेशरम है.

डीएनए, लखनऊ में प्रथम पेज पर प्रकाशित खबर

डीएनए, लखनऊ में प्रथम पेज पर प्रकाशित खबर का शेष.

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Comments on “justice for मां : डीएनए, लखनऊ ने फिर साबित की अपनी जनपक्षधरता, मां को समर्थन

  • ASHISH PRATAP SINGH CNEB NEWS says:

    bhai yaswant ji mai yeh sunkar bahut aahat hu ki ye do kaudi ke police wale bade bujuge maa ke sath aisa kiye ye hame kattai bardast nahi hai iske liye hum puri tarah se ladne ke liye taiyaar hai , sabse pahle is mamle me jitne police wale samil the unko turant suspent karaya jay

    Reply
  • मेरे मित्र आपके इस व्यथा से निबटने के लिये हम कानूनी तौर पर क्या कर सकते है, इसको ध्यान मे रखकर मैने कानूनी राय ली है। इसको इस प्रश्न उत्तर के माध्यम से समझा जा सकता है।

    प्रश्न
    परिवार के किसी अन्य सदस्य के आरोपित जुर्म में पुलिस क्या परिवार के किसी पुरुष अथवा महिला सदस्य को रात भर थाने बंद कर सकती है, ताकी दबाव में आकर आरोपित व्यक्ति थाने में समर्पण कर दे। अगर ऐसा नहीं है तो सम्बंधित पुलिस वालों के खिलाफ क्या कारवाई की जा सकती है?

    कानूनी सलाह
    पुलिस को यह अधिकार है कि वह किसी अपराध के दर्ज हो जाने पर उस के अन्वेषण के लिए किसी व्यक्ति को पुलिस थाने में बुला कर उस से पूछताछ कर सकती है। लेकिन उसे बेवजह किसी व्यक्ति को थाने में बंद करने का अधिकार नहीं है। पुलिस द्वारा ऐसा किया जाना भारतीय दंड संहिता की धारा 340 में वर्णित सदोष परिरोध है। ऐसे परिरोध कर्ता को धारा- 342 के अंतर्गत एक वर्ष तक का कारावास या एक हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनो दंडों से दण्डित किया जा सकता है।

    यदि सदोष परिरोध तीन दिनों या उस से अधिक का हो तो धारा-343 के अंतर्गत दो वर्ष तक का कारावास या या जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जा सकता है। यदि यही परिरोध दस या अधिक दिनों का हो तो धारा-344 के अंतर्गततीन वर्ष तक के कारावास तथा जुर्माने दोनों से दण्डित किया जा सकता है।

    तीनों ही अपराध संज्ञेय हैं और पुलिस इन अपराधों को दर्ज कर अन्वेषण आरंभ कर सकती है। इन अपराधों के लिए कोई भी मजिस्ट्रेट प्रसंज्ञान ले सकता है। यदि आप के साथ या आप के किसी मित्र या परिवार के सदस्य के साथ ऐसा अपराध पुलिस द्वारा किया गया है तो आप इस की शिकायत उस क्षेत्र पर क्षेत्राधिकार रखने वाले मजिस्ट्रेट से कर सकते हैं तथा उस के सामने गवाहों के बयान करवा कर मुकदमा दर्ज करवा सकते हैं।

    Reply
  • Rizwan Mustafa says:

    Maya Ki Zalim Police Patrakaro Par Tow Zulm Kar Hi Rahi Thi Ab Gharwalo Par Bhi Zulm Shuru Kar Diya. Maa Jaisi Azeem Shaksiyat Ki Tauhin Hui Hai Iske Liye SSP Ko Mafi Mangni Chahiye.Nahi Tow Sabhi Patrakar mill kar Police K Khilaf Pardarshan Lucknow me kare.Hum Yaswant Aapke Sath Hai.

    Reply
  • shailendra parashar says:

    yaswant ji
    Jara hm se to milo aise case to hmare bundelkhand main aam bat dehli main baith kar ek hi mudde par mat raho? maya raj ke es police gundo ki to tuti bolti hai?

    Reply
  • Dhirendra choubey nagar untari .garhwa says:

    bhai yashwant ji app ke ghar par police ne police ka kam bilkul nahi kiya hai. police ne wardi ki aad me jo gundagardi ki hai usse up police ko laaj lage ya na lage lekin laaj to laja hi gai hai.jin police walo ne budi maa ko hath lagaya hai unhe desh ka andha kanoon bhale hi saja nahi dila payee lekin upar wale ke yaha se un logo ko saja awasya milega.lekin bhai yashwant ji iska matalab yah nahi ki hum sab kuchh upar wale par chod de hame un wardi wale gundo ko saja dilane ke supreme court me jana chahiye.ham sabhi aap ke sath hai

    Reply
  • Ajay Shukla says:

    Bhai ji Hume dukh hai ki Aaj samaj Lucknow se nahi Chhapta hai, nahi to Mayavati aur unki police ki baja deta. Chandigarh mai etni baja di hai ki AFSAR baukhla gaye hai, magar hum har nahi manne wale. Yashwant ki MAA meri MAA bhi hain. jaise bhi jarurat hogi nipat liya jayega bhai

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *