कहिन ‘माफी मांगिए, प्रभाषजी माफ कर देंगे’ बाद ए मुख़लिफ़ से न घबरा ए उक़ाब, ये तो चलती हैं तुझे ऊंचा उड़ाने के लिए : दुनिया में बहुत कम लोग होते... bhadas4media.comNovember 6, 2009
कहिन ‘फूल चढ़ा पल्ला झाड़ो या धूल को भस्म बनाओ’ उनका चेहरा नीला पड़ गया था। मुझे लगा कि यह मृत्यु के गरल का असर है। लेकिन मित्रों ने बताया कि शव को खराब... bhadas4media.comNovember 6, 2009