पेड न्यूज में पकड़े गए जागरण व उजाला

नख-दंत विहीन संस्थान प्रेस काउंसिल ने दैनिक जागरण और अमर उजाला को ‘पेड न्यूज’ के एक मामले में अभियुक्त करार दिया है. प्रेस काउंसिल, जिसके पास खुद कोई एक्शन लेने की औकात नहीं है, अब इन दोषी अखबारों और आरोपी प्रत्याशी के खिलाफ एक्शन लेने के लिए अपनी जांच रिपोर्ट चुनाव आयोग के पास रवाना कर दी है. यह मसला पूर्व एमएलए योगेंद्र कुमार ने चुनाव आयोग और प्रेस काउंसिल के समक्ष उठाया था. उन्होंने अपने इलाके में चल रहे पेड न्यूज के धंधे की लिखित कंप्लेन की थी.

उन्होंने शिकायत की थी कि दैनिक जागरण और अमर उजाला के लोग उनकी विरोधी पार्टी राष्ट्रीय परिवर्तन दल के प्रत्याशी से पैसे लेकर सिर्फ उसी के पक्ष में बढ़ा-चढ़ाकर इकतरफा खबरें छाप रहे हैं.  पिछले दिनों प्रेस काउंसिल ने एक बयान जारी कर कहा कि यह कृत्य न सिर्फ पत्रकारीय नैतिकता के लिहाज से गलत है बल्कि चुनाव नियमों का उल्लंघन भी है. इस पूरे मसले पर दी ‘हिंदू अखबार’ ने जो खबर प्रकाशित की है, वो इस प्रकार है-


Press Council finds 2 papers guilty of ‘paid news’ 

In what seems to be its first action in a case of paid news, the Press Council of India has found two newspapers, Amar Ujala and Dainik Jagran, guilty of publishing advertisements masquerading as news before the Assembly elections in Uttar Pradesh. The case has been sent to the Election Commission for further action.

These newspapers published a one-sided news item in the form of an advertisement in favour of an opposition candidate of the Rashtriya Parivartan Dal. The complaint was filed by the former MLA Yogender Kumar.

At its March 31 meeting, the Council said the format of the item was such that it would appear as a news report to the layman and the word “ADVT” was printed at the lowest end, and it appeared to accompany a small boxed appeal by the candidate. “There was beyond doubt a possibility of confusing the voters when the elections were just a day away and all campaigning had stopped,” said the Council in a statement on Thursday. It added that the act was not only unethical by journalistic standards but also violated election laws. The Council’s decision, along with all the case papers, is being sent to the Election Commission.

Comments on “पेड न्यूज में पकड़े गए जागरण व उजाला

  • लेकिन मीडिया हाउस के ऊँचे पदों पर बैठे लोगों का क्या होना चाहिए जो सत्ता से करीबी या राज्य सभा से एंट्री के लिए पत्रकारिता के सारे मानदंड तोड़ देते हैं…..

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  • Ishwar Dhamu says:

    Paid-News mai Jagran aur Amar Ujala ka hi naam kyo liya jaye ? Haryana ke Assembly Election mai esa koi akhabar nahi thha, jisane Paid-News na chhapi ho . Paid-News ka Rate akhabar ki circulation ke anusar thha . Jagran ne to Haryana Chunav mai paid-news mai BAIMANI bhi ki . Mera Sujhav hai ki PAID-NEWS ka milkar Virodh hona chahiye. Pahale election mai Reporters ki Candidates se Paise lene ki shikayaton par Editor aur Malik action lete thhain . Ab paid-news par akhabar malikon par kanoon sammat action hona chahiye.

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  • sagarbandhu says:

    dhandhebaj aakhbaro ke khilaf kuch to action hona chahiye, nahi to chori karane ka dusra rasta aaopna lenge. action hone ke bad kam se kam chori ke kam me editorial ko shamil karne se darr jayenge. tab honest reporter baazar me sir uthakar chala karega.

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  • bhai sahib paterkar he nhi maleek bi beek jatye h. khi asye news paper h jo apnye paterkro ko ye kehtye ki anpni kho aho or hamari leye aho. yha sub kuch bikta h bus kreidar chahiye.

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  • Nimesh kumar says:

    अमर उजाला ने खोदकर खबर निकालने वाले जीवट के रिपोर्टरों के बलबूते पर मेरठ में पैर जमाकर आगे बढना शुरु किया था। कुछ साल बाद जहाज उड निकला तो मोटी मलाई खाने वाले आ गए। इन लोगों को मजबूत जडों वाले उन लोगों से सबसे ज्यादा डर लगता था, जिनसे मैनेजमेंट सीधे बात करता था। ऐसे लोगों के बारे में कान भरकर मोटी मलाई वालों ने उन्हें गलत साबित किया और इस अखबार की बुनियादों में मट्ठा डालकर चलते बने। पेड खबर इन्हीं का फंडा था। कान के कच्चे लोग ऐसे लोगों के चक्कर में फंसने के बाद इसी तरह रुसवा होते हैं।

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  • vineet kumar (gorakhpur) says:

    aachi shuruwaat to hui dahakana wali bat yah hai ki yah kahan tak paid news par rook laga pati hai.

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  • भज मन पेड न्यूज़ सुखदाई |
    जिसकी नसेनी साधि शाखामृग दिल्ली परमपद पाये ,
    जिसकी किरपा से केसरिया सुख संपति घर लाए ,
    ब्लैकस्टोन से हाथ मिला कनपुरिया अनगिन डालर पाये ,
    ‘ सुरुचि ‘ कहे सुनो प्रेस कौंसिल , काहे जाँच बिठाये ?

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