अब प्रताप सोमवंशी और निशीथ जोशी की बारी?

सुधांशु श्रीवास्तव और अशोक पांडेय के बाद अब कौन? यह सवाल इन दिनों अमर उजाला में चर्चा का विषय है। लोग कई-कई लोगों का नाम ले रहे हैं। लेकिन हिंदुस्तान के उच्च पदस्थ सूत्र अमर उजाला से फिलहाल जिन दो लोगों के आने की पुष्टि कर रहे हैं वे हैं प्रताप सोमवंशी और निशीथ जोशी। प्रताप अमर उजाला, कानपुर के स्थानीय संपादक हैं। निशीथ जोशी देहरादून में रेजीडेंट एडिटर हैं। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों के आफर लेटर बन चुके हैं और इन लोगों ने आफर लेटर एसेप्ट भी कर लिया है। रही बात ज्वायनिंग की तो एक अगले महीने की पंद्रह तारीख को ज्वाइन करेंगे तो दूसरे ने अभी ज्वायनिंग की तारीख अभी नहीं बताई है। ये ज्योतिष व ग्रह-नक्षत्र के आधार पर ज्वायनिंग की तारीख तय करेंगे। पर प्रताप सोमवंशी और निशीथ जोशी, दोनों ही भड़ास4मीडिया से बातचीत में हिंदुस्तान जाने की खबरों को अफवाह बता रहे हैं। प्रताप सोमवंशी ने कहा कि वे दिल्ली में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं। वे हिंदुस्तान नहीं जा रहे हैं। हिंदुस्तान जाने को लेकर उड़ रही अफवाहों का उन्होंने खंडन किया। 

उन्होंने कहा कि मैंने शशि जी से अपने रिश्ते को कभी नहीं छिपाया। शायद यही वजह है कि लोग मेरे नाम को उनसे जोड़ते हुए हिंदुस्तान जाने की अफवाह उड़ा रहे हों। निशीथ जोशी का कहना है कि उनकी शशि जी से कोई बातचीत तक नहीं हुई है। लोग बिना वजह अफवाह उड़ा रहे हैं। इस बीच, अमर उजाला से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन को विभिन्न माध्यमों से यह सूचना पहले ही मिल चुकी थी कि चार से पांच संपादक हिंदुस्तान जा सकते हैं। इसलिए प्रबंधन ने इनके जाने पर वैकल्पिक व्यवस्था भी शुरू कर दी थी। अमर उजाला से जुड़े रहे कई पूर्व संपादकों व दूसरे अखबारों के संपादकों से अमर उजाला प्रबंधन संपर्क में है।

सूत्रों का कहना है कि अमर उजाला में इस समय जितने भी एडिशनों के एडिटर हैं, वे सब शशि शेखर के प्रिय पात्र रहे हैं या शशि शेखर द्वारा ही एडिटर पद पर बिठाए गए या प्रमोट किए गए हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि हर एक का नाम शशि शेखर से जोड़कर उसके जाने की चर्चा फैलाई जा रही हो। इसी कारण पुष्पेंद्र शर्मा (एडिटर, आगरा) और केके उपाध्याय (एडिटर, बरेली) के नाम भी अफवाहबाजों की लिस्ट में प्रमुखता से हैं। सूत्रों के मुताबिक शशि शेखर जिस स्टाइल से काम करते हैं, उसे ये संपादक अच्छी तरह समझते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि हिंदुस्तान में नई व्यवस्था लागू कराने में जमे-जमाए संपादकों की बजाय अमर उजाला से लाए गए संपादक ज्यादा प्रभावी होंगे। अमर उजाला से संपादकों को लाने से हिंदुस्तान के अंदर भी जमे-जमाए संपादकों की कुर्सी हिलने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। 

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