सिर्फ कंपनी से रिटायर हुआ हूं : प्रमोद जोशी

प्रिंटलाइन (हिंदुस्तान, दिल्ली)

प्रताप सोमवंशी हिंदुस्तान, दिल्ली के नए स्थानीय संपादक : प्रमोद जोशी जी विदा हो गए. हिंदुस्तान छोड़ गए. 58 साल उम्र होने के चलते रिटायर हो गए. रिटायरमेंट में कई महीने बाकी थे लेकिन उन्होंने अरली रिटायरमेंट ले ली. प्रिंटलाइन से आज उनका नाम गायब हो गया. प्रताप सोमवंशी नए स्थानीय संपादक के रूप में प्रिंटलाइन में दर्शनीय हो चुके हैं. हिंदुस्तान में शशि शेखर के साम्राज्य विस्तार का एक चरण पूरा हो गया है. दिल्ली फतह कर लिया है. अब कोई कांटा नहीं रहा. दिल्ली में जो कांटे हैं भी, वो छोटे-मोटे हैं और हल्के-फुल्के प्रयास से खत्म हो जाएंगे. मृणाल पांडे के प्रधान संपादक पद से हटने और वहां शशि शेखर के विराजने के बाद से ही मृणाल जी के करीबी रहे प्रमोद जोशी के जाने की चर्चाएं शुरू हो गई थी. और वो चर्चाएं अब अपने मुकाम पर पहुंच गई हैं. बीच का रास्ता निकाला गया. न इस्तीफा, न जंग. अरली रिटायरमेंट. इस तरह प्रमोद जोशी का हिंदुस्तान और एचटी ग्रुप से नाता टूट गया.

दिनेश जुयाल बनेंगे अमर उजाला, कानपुर के संपादक

दिनेश जुयालअमर उजाला, कानपुर के संपादक का भी नाम तय हो गया है। उम्मीद के मुताबिक, दिनेश जुयाल ही नए एडिटर होंगे। भास्कर, लुधियाना से इस्तीफा देने वाले अभिजीत मिश्रा को लखनऊ का आरई बनाए जाने के बाद से यह माना जाने लगा था कि अमर उजाला प्रबंधन अपने जमे-जमाए एडिटरों से छेड़छाड़ करने की जगह नए भर्ती किए गए लोगों को संपादक के खाली पदों पर एप्वाइंट करेगा।

रिलीवर का इंतजार कर रहे हैं प्रताप सोमवंशी

गोरखपुर संस्करण की प्रिटलाइन में तीरविजय सिंह का नाम : अमर उजाला, कानपुर के नए संपादक को लेकर कयास का दौर जारी है। दिनेश जुयाल और अभिजीत मिश्रा, ये दो ऐसे लोग हैं जिन्होंने क्रमशः दैनिक हिंदुस्तान और दैनिक भास्कर छोड़कर अमर उजाला ज्वाइन किया है। सबसे पहले नाम इन्हीं दोनों का लिया जा रहा है। दिनेश जुयाल अमर उजाला के कानपुर संस्करण में पहले भी संपादकीय प्रभारी के रूप में काम कर चुके हैं। इसलिए उनके नाम की चर्चा कानपुर के नए संपादक के रूप में की जा रही है।

फिलहाल शंभूनाथ पहुंचे लखनऊ, चार्ज लिया

अमर उजाला, लखनऊ का रेजिडेंट एडिटर कौन होगा, इसको लेकर कई तरह के कनफ्यूजन पैदा हो गए हैं। पहले यह तय था कि प्रताप सोमवंशी के लखनऊ का चार्ज संभालने से मना करने के बाद उदय कुमार अशोक पांडेय की जगह नए आरई होंगे लेकिन नए घटनाक्रम के हिसाब से अमर उजाला, नोएडा में कार्यरत शंभूनाथ शुक्ला को प्रबंधन ने निर्देश दिया है कि वे लखनऊ जाकर अशोक पांडेय को रिलीव कर दें। सूत्रों के मुताबिक शंभूनाथ शुक्ला लखनऊ पहुंच गए हैं और उन्होंने प्रबंधन के कहे अनुसार अशोक पांडेय से कार्यभार ग्रहण कर उन्हें रिलीव भी कर दिया है पर आरई के रूप में शंभूनाथ शुक्ला ही कार्य करेंगे या फिर उन्हें तात्कालिक व्यवस्था के तहत वहां भेजा गया है, यह अभी पता नहीं चल पा रहा है।

अब प्रताप सोमवंशी और निशीथ जोशी की बारी?

सुधांशु श्रीवास्तव और अशोक पांडेय के बाद अब कौन? यह सवाल इन दिनों अमर उजाला में चर्चा का विषय है। लोग कई-कई लोगों का नाम ले रहे हैं। लेकिन हिंदुस्तान के उच्च पदस्थ सूत्र अमर उजाला से फिलहाल जिन दो लोगों के आने की पुष्टि कर रहे हैं वे हैं प्रताप सोमवंशी और निशीथ जोशी। प्रताप अमर उजाला, कानपुर के स्थानीय संपादक हैं। निशीथ जोशी देहरादून में रेजीडेंट एडिटर हैं। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों के आफर लेटर बन चुके हैं और इन लोगों ने आफर लेटर एसेप्ट भी कर लिया है। रही बात ज्वायनिंग की तो एक अगले महीने की पंद्रह तारीख को ज्वाइन करेंगे तो दूसरे ने अभी ज्वायनिंग की तारीख अभी नहीं बताई है। ये ज्योतिष व ग्रह-नक्षत्र के आधार पर ज्वायनिंग की तारीख तय करेंगे। पर प्रताप सोमवंशी और निशीथ जोशी, दोनों ही भड़ास4मीडिया से बातचीत में हिंदुस्तान जाने की खबरों को अफवाह बता रहे हैं। प्रताप सोमवंशी ने कहा कि वे दिल्ली में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं। वे हिंदुस्तान नहीं जा रहे हैं। हिंदुस्तान जाने को लेकर उड़ रही अफवाहों का उन्होंने खंडन किया। 

हिंदी अखबारों के पत्रकार एवार्ड लायक नहीं होते?

रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म एवार्ड 2007-08 की किसी कैटगरी में हिंदी प्रिंट का काई भी पत्रकार विजेता नहीं रहा। जिन लोगों को एवार्ड दिया गया है, उनमें ज्यादातर टीवी और अंग्रेजी अखबारों के पत्रकार हैं। प्रभात खबर, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला, राजस्थान पत्रिका, दैनिक हिंदुस्तान, नई दुनिया, नवभारत टाइम्स समेत दर्जनों हिंदी अखबारों और सैकड़ों हिंदी पत्रिकाओं के हजारों पत्रकारों में से कोई भी इस लायक नहीं था कि उसे पुरस्कार के लिए चुना जाए। भड़ास4मीडिया के पास कई हिंदी प्रिंट पत्रकारों के फोन आए और सभी ने पुरस्कार दिए जाने के पैमाने पर सवाल उठाया। ज्यादातर लोगों ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर किन पैमानों पर ये पुरस्कार दिए जाते हैं और उन पैमानों पर क्या हिंदी हर्टलैंड के किसी भी पत्रकार की रिपोर्ट खरी नहीं उतरी। कहीं ऐसा तो नहीं कि दिल्ली में रहने वाले पत्रकारों को ही पुरस्कार देने के लिए सर्वथा उपयुक्त माना जाता है?