जनपक्षधरता के लिए पत्रकार का एक्टिविस्ट होना भी ज़रूरी है

“आइए हेम चंद्र पांडे को याद करें. हेम एक्टिविस्ट पत्रकारों की उस परंपरा में आते हैं जो जॉन रीड, एडगर स्नो, जैक बेल्डेन, हरीश मुखर्जी, ब्रह्मा बंधोपाध्याय से लेकर सरोज दत्त तक फ़ैली है. इस परंपरा में वे अज्ञात किंतु सचेत पत्रकार भी शामिल हैं जो हमारे देश के अलग-अलग हिस्सों में न्याय के पक्ष में साहस के साथ खड़े हैं.” सुमंतो बनर्जी ने जब पत्रकार हेम चंद्र पांडे के पहले शहादत दिवस पर ये महत्वपूर्ण बातें कही तो लोगों को हेम होने के मतलब को नए सिरे से समझने में मदद मिली.

पत्रकार हेमचंद्र एनकाउंटर मामले में केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार हेमचंद्र पांडेय तथा नक्‍सली नेता चेराकुड़ी राजकुमार उर्फ आजाद के एनकाउंटर की कड़ी आलोचना की है. कोर्ट ने केन्‍द्र सरकार और आंध्र प्रदेश पुलिस को नोटिस जारी किया है. इस मामले में पत्रकार हेमचंद्र की पत्‍नी बबीता पांडेय सहित तीन लोगों ने याचिका दायर की थी.

Role of Journalists in Undeclared Emergency

Dear All, The fake encounter of a freelance journalist Hem Chandra Pandey alias Hemant Pandey has clearly exposed that Indian journalists are working in an undeclared emergency situation. United Nation’s premier agency UNESCO has demanded probe into the circumstances in which the scribe was killed. IFJ, PCI, civil society organisations and various journalist unions including Uttarakhand political leaders across the party line have condemned this killing in cold blood. Although the Union Home Minister has denied the probe demand, that was put forward by Swami Agniwesh on behalf of the civil society at large.

‘आइसा’ से राजनीतिक सफर शुरू किया था हेम ने

: आज मैं उन्हीं के नाम पर मार दिया जाऊंगा, जिनके लिए संसार देखा है, मैंने : आदिलाबाद में माओवादी नेता आजाद के साथ मारे गये पत्रकार हेम चन्द्र पाण्डे को याद करके हुए उनके गृह जनपद पिथौरागढ़ में गुरुवार को एक श्रद्धाजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें समाज के हर तबके के लोगों ने शिकरत की। स्व. हेम पाण्डे की हत्या की सभी लोगों ने एक स्वर में निंदा की और केन्द्र सरकार से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। पत्रकारों द्वारा आयोजित इस श्रद्धाजलि सभा में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सत्ताधारी भाजपा के प्रदेश महामंत्री, कांग्रेसी विधायक, पूर्व छात्र नेता, पत्रकारों, वकीलों, मानवाधिकारी कार्यकर्ताओं, सहित सभी राजनैतिक दलों के लोगों ने हिस्सा लिया।