When journalists turn brokers

[caption id="attachment_18701" align="alignleft" width="80"]कुलदीप नय्यरकुलदीप नय्यर[/caption]Credibility is like virginity. It either exists or does not. Unfortunately, some top names in Indian journalism have lost their credibility. In the few cases that are in the public domain, they have been found lobbying for the scam-ridden A. Raja. Transcripts of tapped telephone talks by the income-tax department have revealed the manner in which these journalists were throwing their weight around, trying to get the “right” minister from the “right” party.

कुलदीप से गोयनका ने इस्तीफा लिया था!

[caption id="attachment_17494" align="alignleft" width="99"]एसएन विनोदएसएन विनोद[/caption]क्या जेपी की संपूर्ण क्रांति बेमानी थी! : हां! जेपी ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। अपनों द्वारा किए गए विश्वासघात को वे झेल नहीं पाए। गांधी और जेपी की मौत में सिर्फ एक फर्क था। गांधी के सीने में गोली मारी गई जबकि जेपी के सीने के अंदर दिल ने आहत हो काम करना बंद कर दिया। अपनों द्वारा दी गई असहनीय चोट मौत में तब्दील तो होती ही है। लेकिन कुर्बानियां कुछ औरों की भी ली गईं।

The credit for it goes to Harivansh

कुलदीप नैय्यरप्रभात खबर के 25 साल पूरे होने पर दिग्गजों की राय (2) : A span of 25 yerars is not a long period in a newspaper’s life. But the difficulties that the ‘Prabhat Khabar’ has faced must have made the journey arduous. That it is number one paper in the Jharkhand despite a tough competition speaks volumes about the paper’s integrity and objectivity. A newspaper is hard to sell. But if it builds the reputation of service to the people, it becomes their guide and philosopher. ‘Prabhat Khabar’ has stayed independent when pressure or prize was exerted to tilt it. The credit for it goes to Harivansh, the Chief Editor, who has stood his ground and has not compromised.

मीडिया को अपने आपसे खतरा

[caption id="attachment_15378" align="alignleft"]कुलदीप नैय्यरकुलदीप नैय्यर[/caption]चंद रोज पहले दिल्ली में एक सेमिनार में आरोप लगाया गया कि पिछले चुनावों में कई मीडिया हाउसों ने उम्मीदवारों से पैसे लेकर उनके माफिक खबरों का प्रकाशन किया। सेमिनार का उदघाटन करने वाले मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें मालूम है, खबरों का गोरखधंधा कैसे हुआ। कई पत्रकारों ने स्वीकारा कि पैसों का लेन-देन हुआ। सेमिनार का कोई नतीजा नहीं निकला पर एक वरिष्ठ नेता ने मुझे बताया कि अगर मीडिया के इस भ्रष्टाचार की जांच के लिए कोई कमीशन बना तो वे उसमें गवाही देने जाएंगे। मुझे बहुत ताज्जुब हुआ जब मैंने इस सेमिनार और कपिल सिब्बल के आरोपों के बारे में अखबारों या टीवी चैनलों में कोई चर्चा नहीं देखी। इस खबर को ब्लैक आउट कर दिया गया था। हम जैसे कुछ लोगों ने प्रेस कौंसिल से निवेदन किया है कि चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल हुई नंबर दो की रकम की जांच की जाय।