: पुलिस कल्याण के नाम पर वसूली का मामला : गाजीपुर जिले के सीजेएम ने दिया आदेश : पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक छोटे जिले गाजीपुर से बड़ी खबर आई है. यहां के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उ.प्र के एक सिपाही ब्रिजेन्द्र यादव की याचिका पर उत्तर प्रदेश स्पेशल डीजी (कानून व्यवस्था) बृजलाल व गाजीपुर के एसपी मनोज कुमार व अन्य के खिलाफ 156/3 के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया है.
याचिकाकर्ता के वकील नवीन कुमार राय ने बताया कि ये मामला काफी बड़ा और संगीन है क्योंकि जबसे उ.प्र पुलिस का गठन हुआ है, तबसे इन छोटे पुलिस कर्मियों की तनख्वाह से 25 रुपए प्रति व्यक्ति काटा जाता है और कुल लगभग चार लाख लोगों की तनख्वाह से ये रुपए काटा जाता रहा है. ये अब करोड़ों का मामला है, जो इन्ही के वेलफेयर के नाम पर कटता रहा है, किन्तु इन लोगों को उसका कोई लाभ नहीं मिलता था. इसके खिलाफ जब सिपाही न. 202 ब्रिजेन्द्र यादव ने आवाज़ उठाई तो उसे कई बार ट्रांसफर और लाइन हाज़िर कर प्रताड़ित किया जाता रहा और ये बार-बार कोर्ट आदेश से बहाल होते रहे.
हाईकोर्ट में दी गई पीआईएल No.68426/2010 के अनुरूप 19 दिसंबर 2010 को एक अखबार में कलंक कथा निकाली गयी तो इसी खबर के प्रकाशन के बाद स्पेशल डीजी बृजलाल के आदेश पर विभाग ने इसे अनुशासन हीनता मानते हुए जांच करा कर पुनः ब्रिजेन्द्र यादव को सस्पेंड कर दिया. इन्ही सब बातों को लेकर ब्रिजेन्द्र ने अपनी व्यथा वकील के माध्यम से स्थानीय कोर्ट के समक्ष रखी और न्यायालय दंडाधिकारी, गाजीपुर ने मामले की गंभीरता का संज्ञान लेते हुए कोतवाल गाजीपुर को अपने आज के आदेश संख्या – 533 /2011 ब्रिजेन्द्र सिंह यादव बनाम श्री बृजलाल आदि में आदेशित किया है कि “प्रस्तुत मामले में मुकदमा पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना करें”.












praveen upadhyay, ambedkar nagar
September 15, 2011 at 10:03 am
Brijendra bhai jee aapko iss leakhan ke liya badhi ho….
arvind tripathi
September 14, 2011 at 6:33 am
ये खबर तब और सुर्ख़ियों में आई जब इलाहाबाद के हिन्दुस्तान अखबार में कार्यरत ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह ने इसे ख़बरों की सुर्खियाँ बनाया. सिपाही ब्रजेन्द्र कि लड़ायी को धार हिन्दुस्तान की ख़बरों से मिली. धीरे-धीरे आज ये इस अंजाम तक आई है. जिस संगठन के नाम से ये रुपया काटा जाता है उसमें सभी पदों पर प्रदेश में तैनात आला पुलिस अधिकारीयों की पत्नियां काबिज हैं.