पटना यात्रा (5) : क्या है ‘मौर्य टीवी’ का भविष्य?

पटना में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान मौर्य टीवी को लांच करते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार.

पटना में मीडिया के एक परिचित साथी ने मुझसे पूछा कि ‘मौर्य टीवी’ का भविष्य क्या है? उनका सवाल दरअसल पिछले दो वर्षों के दौरान ‘मौर्य टीवी’ में हुई उठापटक के कारण था. मैंने जवाब दिया- ‘पहले तो यह जान लीजिए, मैं मौर्य टीवी का हिस्सा नहीं हूं.

पटना यात्रा (4) : ‘जवान जहाजी’ के घंटे भर

[caption id="attachment_16864" align="alignleft"]यशवंत सिंहयशवंत सिंह[/caption]जहाज से पटना क्या, दिल्ली क्या, सब लगते हैं कागज के खिलौने. मटमैली धरती पर जड़े चांदी के अंगूठी-से दिखते हैं, बशर्ते, आपका वायुयान आसमान में उस वक्त अग्रसर हो रहा हो जब खूब दोपहरी हो और सूर्यदेव चौतरफा रोशनीबारी कर रहे हों. उस वक्त धरती से मन उचाट हो जाता है. प्यार भी आता है तब धरती वालों से. उपर से दिखते इत्ते छोटे से बिंदु जैसे शहर में समाए लाखों-करोड़ों घरों में रहने वाले लोग अपनी दीवार के अंदर की दुनिया को ही पूरी दुनिया मान लेते हैं और दीवार के अंदर सुख-चैन शांति के लिए दूसरों के दीवारों की सुख-शांति में सेंध मारने में जुटे रहते हैं. यही धंधा है देश-दुनिया का. काहे का किचकिच. कुछ भी नहीं है. सब निस्सार है. सब बेकार है. पर प्यार धरती के लोगों पर ये आता है कि कि यार, देखो, ये दुनिया वाले कितनी छोटी चीजों के लिए भागादौड़ी करने में जुटे हैं और ब्रह्मांड के हजारों सुखों से वंचित हैं. कितने भोले हैं बेचारे. ध्यान रखिए, इस कैटगरी में मैं भी हूं. अल्प समय के लिए आए तत्व ज्ञान बोध के आधार पर मुझे इस भीड़ से अलग नहीं कर सकते. सोचता रहा… ओबामा की जिंदगी तो तब भी सफल है, अंबानी की जिंदगी तो तब भी सफल है…. साले दिन भर जहाज पर रहते हैं, सारी सुख सुविधाओं के साथ.

पटना यात्रा (3) : कैलाश का गाना, मेरा चिल्लाना

कैलाश खेर जब गाते हैं तो लगता है कि कोई संत गा रहा है. कोई सूफी गा रहा है. कोई फक्कड़ गा रहा है. कोई पागल गा रहा है. कोई औघड़ गा रहा है. कोई दीवाना गा रहा है. वे दिल से गाते हैं. आत्मा से गाते हैं. कैलाश खेर के गाने मैं अपने मोबाइल में एमपी3 के रूप में सहेजकर रखता हूं. जब मौका मिलता है तो सुनता हूं और गाता हूं. दो गानों को इन दिनों खासकर दीवाना हो गया हूं. बमम बम बमम, बमम बम बमम, बमम बम बमम, बम लहरी… और छाप तिलक सब छीनी….. इन दो गानों को कैलाश खेर ने मौर्य टीवी की लांचिंग के समारोह में नहीं गाया. कोई नहीं, नहीं गाया तो मैं सुनवा रहा हूं और खुद भी सुन रहा हूं, यूट्यूब के सौजन्य से. कैलाश खेर कार्यक्रम शुरू होते समय पटना वालों के ठंडे रिस्पांस से थोड़े निराश थे. सो, पूछ-पुचकार रहे थे कि भइयों, गानों पर मन करे हिलने का तो हिलो, नाचने का मन करे तो नाचो. हां, झूमना-नाचना जरूर लेकिन पड़ोसी का ध्यान रखकर 🙂 इसी बीच मैंने चिल्लाकर कहा- छाप तिलक सब छीनी वाला सुनाइए कैलाश जी! मैंने अपनी चिल्लाहट को दो-तीन बार रिपीट किया पर शायद कैलाश तक मेरी आवाज पहुंची नहीं, ये सोचकर खुद को तसल्ली दे रहा हूं.

पटना यात्रा (2) : प्रकाश झा में दम तो है गुरु

गोरिया करि के सिंगार… गोरिया करि के सिंगार…. अंगना में पीसे लीं हरदिया… होली है!!! जोगीरा सारा रा रा रा : मुफ्त टिकट मिल गया था जाने के लिए और उनका नमक खाकर लौटा हूं, साथ में इस साइट पर मौर्य  टीवी का विज्ञापन भी चल रहा है, इसका हक अदा करने के लिए नहीं लिख रहा हूं कि प्रकाश झा में तो बड़ा दम है. परसों शाम जिन लोगों ने पटना में मौर्य टीवी के लांचिंग समारोह को देखा होगा, उन्हें महसूस हुआ होगा कि जमीन से उठा यह आदमी सिर्फ अपनी प्रतिभा, सोच, मेहनत, क्षमता, साहस और सही समय पर सही फैसले लेने के गुण के कारण आज देश के जाने-माने लोगों में शुमार है. कुछ हद तक हम हिंदी वालों के लिए रोल माडल भी है. मुझ जैसे धंधेबाज (अंग्रेजी के अंटरप्रिन्योर या इंटरप्रेन्योर या हिंदी के उद्यमी जैसे शब्दों का ठेठ देहाती वर्ड तो धंधेबाज ही होता है, ऐसा मैं मानता हूं.) के लिए तो वो बिलकुल रोल माडल सरीखे हैं. कैसे आप किसी की नौकरी-चाकरी-गुलामी में दुखी दिल से जिंदगी खपा देने की जगह अपने पर भरोसा करते हुए कोई काम शुरू करते हैं और उसमें कामयाबी के झंडे गाड़ने के बाद नए-नए क्षेत्रों में भी वैसा ही धमाल कर गुजरने की तमन्ना से बढ़ चलते हैं, यह प्रकाश झा से सीखता हूं.

पटना यात्रा (1) : हवाई अड्डा, मीडिया, नेता

मौर्य टीवी की लांचिंग पर मुझे भी पटना बुलाया गया. न्योता कुबूल किया. जहाज से मुफ्त में उड़ने का प्रस्ताव हो और प्रस्तावित प्रोग्राम में कैलाश खेर जैसे मस्त व महान गायक को सुनने का मौका मिल रहा हो तो मेरे जैसा देहाती क्या, अच्छे से अच्छा शहरी भी इस लोभ को त्याग नहीं सकता. सो, मैं परसों दोपहर जहाज से फुर्र से उड़कर सवा घंटे में पटना पहुंच गया. पटना मैं कभी नहीं गया था. बिहार के बार्डर पर अपना गृह जिला गाजीपुर होने के बावजूद बिहार दर्शन का कभी सौभाग्य नहीं मिला था. पटना हवाई अड्डे पर उतरकर गेट से बाहर निकल रहा था तो जिंदाबादा के ढेर सारे नारे को मुंह में लिए ढेर सारे कंधे और हाथ लहराते दिख रहे थे. कुछ नेताजी लोग गर्वित भाव से खिसक-खिसक कर बाहर की ओर सरक रहे थे. उनके पीछे मैं भी मजबूरन रेंग रहा था क्योंकि गेट नेतागिरी वाली भीड़ से लबालब था. बाहर निकल कर देखा कि माल्यार्पण और भाषणबाजी के हल्के दौर के बाद नेताजी को मीडिया ने घेर लिया. मुझसे रहा न गया. मैंने भी मोबाइल को वीडियो आन किया और लगा रिकार्डिंग करने. लाख धंधेबाज होने के बावजूद अंदर का पत्रकार मरा नहीं है, ऐसा मुझे प्रतीत-आभास-महसूस होता है 🙂