महंगाई डायन वाले मास्साब और पीपली लाइव

प्रवीण दुबे: देखो मीडिया बना रहा है बजरंगबली : बजरंगबली बेहद बलशाली थे लेकिन कहते हैं, उन्हें अपनी ताकत का गुमान नहीं था. वो तब जाग्रत होते थे जब उन्हें ताकत का भान कराया जाता था. मीडिया भी ऐसी ही ताकत का भान कराकर कई लोगों को बजरंगबली बनाता है.

कुंजीलालों की पत्रकारिता और पीपली लाइव

: मास्टर कहें मीडिया काहें बैंड बजात है, पीपली लाइव मार जात है : भोपाल से 70 किलोमीटर दूर रायसेन जिले का एक गाँव बड़बई इन दिनों खासी शोहरत बटोर रहा है. सारा मीडिया इस गांव की ओर भाग रहा है पिछले दो तीन दिन से. मैं भी वहां चक्कर मार कर लौटा हूं. गांव की लोकप्रियता बढ़ने की वजह भी बड़ी माकूल है. आमिर खान की आने वाली फिल्म “पीपली लाइव” इसी गांव में शूट हुई है. ‘लगान’ के बाद ठेठ देसी अंदाज़ की फिल्म बनाने का जोखिम आमिर खान ही इस दौर में ले सकते हैं. इस फिल्म का एक गाना भी ख़ासा चर्चित हो रहा है….. सखी सैंया तो खूबई कमात हैं, महंगाई डायन खाई जात है…. इसे लिखा है इसी गांव के एक सरकारी स्कूल के मास्साब गया प्रसाद प्रजापति ने. इस गाने को फिल्म में रघुवीर यादव ने गाया है.

भ्रष्ट महिला आईएएस ने कहा… तुम दो-दो कौड़ी के पत्रकार

[caption id="attachment_16940" align="alignleft"]प्रवीण दुबेप्रवीण दुबे[/caption]भोपाल में इन दिनों मीडिया के लिए बेहद हंगामे भरे और थकाऊ दिन बीत रहे हैं. दरअसल आयकर विभाग भ्रष्ट आईएएस दंपत्ति अरविन्द जोशी और टीनू जोशी के काले खजाने की पड़ताल में जुटा है. पहले दिन एक चैनल पर करारे नोटों के विजुअल्स क्या चले, बाकी चैनलों के रिपोर्टरों पर भारी दबाव बन गया. लिहाजा अब कोई पिछड़ना नहीं चाहता. बीते सोमवार को इनके लॉकर खुलने की शुरुआत हुई. पहले खबर आई कि आईएएस दंपत्ति सहयोग नहीं कर रहे. इस पर उन्हें लेने पुलिस को भेजा गया है ताकि बैंक लॉकर खुलवाये जा सकें. मीडिया के लोग फ़ौरन उत्साहित होकर उनके बंगले की ओर इस उम्मीद में भागे कि अच्छे शॉट बनेंगे लेकिन वे दंपति वहां से निकल चुके थे. इन अधिकारियों का ज़खीरा भोपाल के दो बैंकों में है. एक बैंक में जब सारा मीडिया पहुंचा तो मैडम गाड़ी से उतरने को तैयार नहीं हुई. आयकर विभाग उन्हें फ़ौरन दूसरे बैंक में ले गया. जब तक मीडिया वहां शिफ्ट हुआ, तब तक वे तमाम लोग बैंक के अन्दर हो चुके थे और प्रतिष्ठित बैंक एसबीआई के शटर दोपहर ढाई बजे गिराए जा चुके थे. अघोषित रूप से यह बैंक का कामकाज बंद किये जाने का ऐलान था. खबर आई कि एक चैनल का रिपोर्टर स्पॉय कैमरे के साथ अन्दर जा चुका है. बाहर खड़े बाकी लोगों को अपनी नौकरी खतरे में नज़र आई तो कुछ लोग और अन्दर चले गए. मोबाइल से उसके ज़खीरे के शाट बनाए और नौकरी बचाए रखने लायक सामान जुटा कर उसे चैनल को फीड करवाया.

कुत्ते के लिए सर्किट हाउस नहीं, रेस्ट हाउस बुक था

प्रवीण जी, आपने 12 अगस्त के दिन भड़ास4मीडिया में अपने लेख में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कुत्ते के बारे में जो लिखा है कि सीएम के कुत्ते को सर्किट हाउस में रखा गया था, उसकी वेटेनरी कालेज से दूरी 12 किसी थी। सही बात तो ये है कि सर्किट हाउस से वेटेनरी कालेज की दूरी डेढ़ किमी से भी कम है क्योंकि वेटेनरी कालेज के बगल से ही सर्किट हाउस लगा हुआ है।

हम भी अगर कुत्ते होते……!

'कृष बाबा'शीर्षक आपको आपत्तिमिश्रित प्रतिक्रिया के लिए उकसा रहा होगा लेकिन कुछ देर ठहर जाइये. शायद थोड़ी देर बाद आप भी यही शीर्षक दोहराने को बाध्य हो जाएँ. बात हो रही है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जिगर के छल्ले “कृष” की. डालमेशियन नस्ल के ये “डीओजी साहेब” पिछले दिनों बीमार पड़ गए. जब भोपाल के जानवरों के अस्पताल में बीमारी का इलाज़ ठीक तरह से नहीं हो पाया तो इन्हें फटाफट एयर एम्बुलेंस से जबलपुर ले जाया गया. जबलपुर वेटरनरी यूनिवर्सिटी के डीन महोदय सहित डॉक्टरों की एक पूरी टीम उनके इलाज़ में जुट गई. इस  दौरान जबलपुर के सर्किट हाउस के दो कमरे मुख्यमंत्री निवास के नाम से आरक्षित रहे. सर्किट हाउस से वेटरनरी कोलेज तक की दूरी 12 किलोमीटर है, लिहाजा चार गाड़ियों का काफिला पूरे समय “कृष बाबा” की देखभाल में जुटा रहा. हालांकि पता चला की “कृष बाबा” को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। बस थोड़ा खाने-पीने से उनका मन उचट-सा गया था.

वास्तविक जरूरतमंद कौन था- वो महिला या खुद हम?

प्रवीण दुबेएक देसी कहावत है, रपट पड़े तो हर-हर गंगे। मतलब, आप इरादतन पूजा न करना चाहें लेकिन पूजा हो जाए। मैंने भी पिछले दिनों एक ऐसी ही समाजसेवा की, जो थी तो स्टोरी की कवायद, लेकिन समाजसेवा-सी दिखती है। पचमढ़ी में 70 फीट की ऊंचाई से फेंकी गई बच्ची इन दिनों सभी न्यूज़ चैनलों की बड़ी खबर है। यहां तक कि उसके बारे में कोई भी अपडेट प्रतिस्पर्धी चैनल के सामने पिटने या पीटने का पैमाना बना हुआ है। कल उस बच्ची की मां और पिता पहली बार उसे देखने भोपाल आए।