आंखों देखी सच्चाई : पत्रकारिता की बरसी पर कारपोरेट की जय, मुर्गे की टांग की जय-जय

16 नवंबर के दिन हर साल पूरे देश में दम तोड़ चुकी पत्रकारिता की बरसी मनाई जाती है। सरकारी दस्तावेज में इसे प्रेस दिवस के नाम से जाना जाता है। बरसी के दिन राजधानी पटना में भी राज्य सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सौजन्य से होटल पाटलिपुत्र अशोक के दरबार हाल में एक ब्रह्म्भोज का आयोजन किया गया। चूंकि पत्रकारिता की बरसी थी, इसलिये राज्य सरकार की ओर से राजधानी के कई बड़े पत्रकार शामिल थे। मंच पर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव राजेश भूषण और दैनिक जागरण के संपादक शैलेन्द्र दीक्षित का कब्जा था। हिंदुस्तान की कमी खल रही थी। पूछने पर ज्ञात हुआ कि हिन्दुस्तान वालों ने पत्रकारिता की याद में ब्रह्म्भोज में शामिल होने से इन्कार कर दिया है। खैर, नियत समय से करीब 1 घंटा बाद पत्रकारिता की याद में शोक संदेश पढे गये। सबसे पहले पहल सचिव और सरकार के नुमाईंदे राजेश भूषण ने की।

पत्रकारिता में संवेदना जरूरी : रमेश शर्मा

: राष्‍ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर गोष्‍ठी आयोजित : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष कैलाशचंद्र पंत तथा मुख्यवक्ता वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने की।