: राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर गोष्ठी आयोजित : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष कैलाशचंद्र पंत तथा मुख्यवक्ता वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने की।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता के सामने आज कई तरह की चुनौतियां हैं जिनसे युवा पत्रकारों को ही निपटकर रास्ता खोजना होगा। पत्रकारिता में मूल्यबोध की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और मूल्यों की रक्षा से ही लेखन को सार्थकता मिलती है।
साहित्यकार एवं चिंतक कैलाशचंद्र पंत ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ पत्रकारिता बहुत सक्षम तरीके से लड़ाई लड़ रही है। सामान्य सा पत्रकार भी अगर चाह ले तो सत्ता को सीधा संदेश दे सकता है। भ्रष्टाचार की कथाएं प्रायः पत्रकार ही सामने लेकर आते हैं। इससे समाज में पत्रकारिता के प्रति भरोसा जगता है, आरोपियों की नींद हराम होती है। उन्होंने कहा यह विश्वास हमने सालों की तपस्या से अर्जित किया है, उसे बचाए रखने की जरूरत है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने प्रेस कौंसिल को अधिकार संपन्न बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि मीडिया के सामने आज चुनौतियां किसी भी समय से ज्यादा है। मीडिया में आचार संहिता की जरूरत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे ही जनविश्वास और शुचिता की रक्षा हो सकेगी। प्रो. कुठियाला ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षाविदों, मीडिया कर्मियों और संचार क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ मिलकर आचार संहिता बनाने का काम करेगा और उसे मीडिया के विचारार्थ प्रस्तुत करेगा।
संचालन विश्वविद्यालय के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी राघवेन्द्र सिंह ने तथा आभार प्रदर्शन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर वर्किग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा, रेक्टर प्रो. सी.पी. अग्रवाल, रजिस्ट्रार एस.के. त्रिवेदी, पुष्पेंद्रपाल सिंह, डा. पवित्र श्रीवास्तव, सौरभ मालवीय, डा. अविनाश वाजपेयी, डॉ. मोनिका वर्मा, डा. आरती सारंग, जया सुरजानी, लालबहादुर ओझा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।












Ram Bhuwan Singh Kushwah
November 17, 2010 at 4:02 am
कल पत्रकारिता दिवस था । मैं संयोग से माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविध्यालय के कुलपति श्री बृजकिशोर कुठियाला जी से मिलने उनके कार्यालय में गया था । समय लेकर गया था । पर वे उस समय एक मीटिंग में व्यस्त थे । उसी समय उनके सहयोगी श्री संजय द्विवेदी भी उनसे मिलने पहुँचे थे । हम दोनों काफी समय करीब आध घंटे तक तक बातचीत करते रहे । श्री कुठियालजी के साथ भी चर्चा करने की,चाय पी,इसके बाद मैं सौजन्य का पालन करने श्री राघवेंद्र सिंह से भी मिलने गया ,वे इस आयोजन की व्यवस्था में लगे थे ।….. मेरे सभी से मिलने के कुछ देर बाद ही यह आयोजन शुरू होनेवाला था । पर न तो श्री कुठियाला जी ने और न श्री संजय द्विवेदी ने और न ही श्री राघवेंद्र सिंह ने मुझसे इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा ।
मैंने लगभग 35 साल तक स्वदेश में मैदानी पत्रिकारिता की है और इस समय भारत की पत्रिकारिता के क्षेत्र में सबसे बड़ी ट्रेड यूनियन एनयूजे(इंडिया) का निर्वाचित उपाध्यक्ष हूँ । मेरे मन में भी पत्रकारिता के क्षेत्र में आ रहीं गिरावट और संवेदनहीनता के प्रति चिंता है । …. पर मुझे आश्चर्य हो रहा है कि पत्रिकारिता विश्वविध्यालय जो सरकारी पैसे से चल रहा है और जिसका नियंत्रण भी जनसंपर्क विभाग के द्वारा होता है, वह एक गिरोहवंदी का इस तरह शिकार हो रहा है कि वह एक विचारधारा के अंदर भी एक नया ‘सुविधाभोगी’ खेमा खड़ा करने में लगा हुआ है। तब यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता ही है कि क्या माखनलाल पत्रिकारिता विश्वविध्यालय उन उद्येश्यों को पूरी करने में सक्षम हो सकेगा जिसके लिए मध्यप्रदेश की सरकार और जनता ने बहुत बड़े सपने सँजोये हैं ???
dhanish sharma
November 17, 2010 at 4:58 am
koi to hai jo insaaniyat ki baat karta hai.good.