वो सलीब पर भी क्रिकेट का पारायण करता था

पदमपति शर्माराजन बाला के निधन से क्रिकेट समालोचना के महान युग का अंत : शनिवार की सुबह यशवंत भाई ने जब राजन बाला के निधन का हृदयविदारक समाचार बताया तो एकदम से हिल गया मैं. ये मौत अचानक नहीं हुई. इसका अंदेशा तो उनके करीबियों को था पर हर कोई चमत्कार की उम्मीद पाले हुए था कि शायद कोई मैच करने वाली किडनी मिल जाए. पर वो नहीं मिली और एक महान क्रिकेट समीक्षक अपने असंख्य चाहने वालों को रोता कलपता छोड़ कर इस दुनिया से कूच कर गया. इसके साथ क्रिकेट समालोचना के महान युग का अंत हो गया. महान इसलिए कि एनएस रामास्वामी, केएन प्रभु और राजन बाला त्रयी की आखिरी कड़ी भी कल टूट गई. इन तीनों ने क्रिकेट राइटिंग को जो आयाम दिए वो अतुलनीय है. क्रिकेट में गहरे डूबे रहने वाले एनएस रामास्वामी की खेल से संपृक्तता बेजोड़ थी. प्रभु ने लयात्मक संगीतमय लेखन किया. प्रभु के लेखन में बिथोवन की सिंफनी बजती थी. रविशंकर के सितार की मधुरता थी.

राजन बाला के निधन से खेल पत्रकार स्तब्ध

राजन बालामशहूर खेल पत्नकार और कमेंटेटर राजन बाला का बेंगलुरु में निधन हो गया। उनकी मृत्यु हार्ट अटैक के कारण हुई। वे 63 वर्ष के थे। परिवार में उनके पीछे पत्नी और दो पुत्र हैं। राजन बाला ने कई किताबें लिखी हैं जिसमें नवीनतम किताब ‘टाइम वेल स्पेंट’ इसी हफ्ते रिलीज होनी थी। राजन की लिखी पुस्तकों में कीवीज एवं कंगारुज, एन अकाउंट आफ न्यूजीलैंड्स 1969 टूर आफ इंडिया, ग्लांसेज एट परफेक्शन, द कवर्स आर आफ, द पॉलिटिक्स आफ इंडियन क्रिकेट और बायोग्राफीज आफ चंद्रशेखर एंड सचिन तेंदुलकर शामिल हैं। वे पांडिचेरी क्रिकेट एसोसिएशन के सीईओ रह चुके हैं। चार दशकों से ज्यादा समय से खेल पत्रकारिता से जुड़े रहे राजन ने देश के नामी-गिरामी अखबारों व मैग्जीनों के लिए काम किया। इन दिनों वे टीवी9 से जुड़े हुए थे। राजन बाला ने क्रिकेट की बाइबिल माने वाली पत्निका ‘विजडन क्रिकेटर’ और ‘विजडन अलामांक’ के लिए कई वर्षो तक भारतीय संवाददाता के रूप में काम किया।