शुक्रिया सुप्रीम कोर्ट, आदिवासी भाइयों का दर्द समझने के लिए : इरा झा

इरा झा की पत्रकारिता में अलग पहचान है। राष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता में पहली ‘न्यूज वूमन‘ होने के अलावा उन्होंने रिपोर्टिंग में भी मुकाम बनाए हैं। विषेष रूप से आदिवासी-नक्सल रिपोर्टिंग में। बरसों से वह आदिवासियों की समस्याओं / संस्कृति पर लिख रहीं है। करीब तीस साल से पत्रकारिता में सक्रिय इरा झा नक्सलियों का उनकी मांद में (बस्तर के बीहड़ इलाके से) उनका इंटरव्यू कर लाईं।

आइए, मुख्यमंत्री रमन को मक्खन मलें

[caption id="attachment_16134" align="alignnone"]रमन सिंह के व्यक्तित्व-कृतित्व पर लिखी गई किताब का विमोचन करते गणमान्य जनरमन सिंह के व्यक्तित्व-कृतित्व पर लिखी गई किताब का विमोचन करते गणमान्य जन[/caption]

सत्ता में बैठे नेताओं की तारीफ करने वालों के बारे में आमतौर पर यही समझा जाता है कि जरूर इस बंदे का संबंधित नेता से कोई स्वार्थ है वरना आजकल नेता ऐसे होते कहां हैं कि उनकी तारीफ की जा सके। इसी तरह अगर कोई किसी सत्ताधारी नेता की तारीफ में किताब लिख मारता है तो इसे सहज ही समझा जा सकता है कि लेखक का मंतव्य साहित्य सेवा नहीं बल्कि नेता को खुश करना है। ऐसी ही एक किताब का पिछले दिनों दिल्ली में विमोचन हुआ। किताब का नाम है ‘छत्तीसगढ़ के शिल्पी’। इस किताब में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में ढेर सारी बातें की गई हैं। जाहिर है, इस किताब का विमोचन किसी भाजपा नेता के हाथों ही कराया जाएगा। सो, भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री और सांसद प्रभात झा के हाथों इसका विमोचन दिल्ली में करा दिया गया।

डीजीपी के फरमान से बस्तर के पत्रकार दहशत में

छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित संभाग बस्तर के पत्रकारों पर इन दिनों संकट के बादल मंडरा रहे है. एक तरफ पुलिस तो दूसरी ओर नक्सली. दोनों के बीच पत्रकार पिस रहे हैं. नक्सलियों के खिलाफ ज्वाइंट ऑपरेशन की तैयारी पुलिस द्वारा की जा रही है. इसके बारे में राज्य के डीजीपी विश्वरंजन ने स्पष्ट कहा है कि बस्तर के कुछ पत्रकार भी नक्सलियों का सहयोग करते हैं और ऐसे पत्रकारों की सूची उनके पास है. बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकार, जिनका पाला अक्सर नक्सलियों से सीधा पड़ता है, वे इस फरमान से दहशतज़दा हैं.

नक्सली इलाके के पत्रकारों पर पुलिसिया दबाव

एकजुट हुए बस्तर के पत्रकार : ‘संवेदनशील क्षेत्र में मीडिया’ विषय पर पत्रकारों की संभागीय कार्यशाला आज 11 अक्टूबर को नया बस स्टैंड रोड स्थित डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी सभागार (टाऊन हॉल), जगदलपुर में आयोजित हुई। इस कार्यशाला में बस्तर संभाग के जगदलपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जिले के पत्रकार शामिल हुए। 4 घंटे तक चली बैठक के अंत में एक प्रस्ताव पारित किया गया। बाद में केंद्रीय गृहमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तैयार किया गया।  इस दौरान ग्रामीण अंचल के पत्रकारों ने अपने कर्तव्य निर्वहन में आ रही दिक्कतों का विस्तार से जिक्र किया।

इस रिपोर्ट ने पुण्य को दिलाया प्रिंट का एवार्ड

ब्लागमशहूर पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी को दो बार रामनाथ गोयनका एक्सलेंस एवार्ड  दिया जा चुका है। पहली बार उन्हें टीवी के लिए दिया गया था, इस बार प्रिंट के लिए मिला। एक टीवी जर्नलिस्ट को प्रिंट के लिए गोयनका एवार्ड देने पर कई लोगों को थोड़ा अजीब लगा तो कुछ लोगों ने दबी जुबान से एवार्ड देने में मशहूर और नामी पत्रकारों को तवज्जो देने और हिंदी अखबारों के पत्रकारों को उपेक्षित रखने का आरोप लगाया। पुण्य प्रसून ने 13 अप्रैल 2009 को गोयनका एवार्ड लेने के बाद इसके अगले दिन 14 अप्रैल को अपने ब्लाग पर वो पूरी रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसके लिए उन्हें यह एवार्ड देने लायक समझा गया। पुण्य ने स्वीकार किया है कि इस रिपोर्ट को कवर करने के लिए और दिखाने के लिए न्यूज चैनल में स्पेस नहीं था।