अनिल अब्राहम की सहारा में वापसी से संबंधित सहाराश्री का ‘शासनादेश’ पढ़ें

अनिल अब्राहम की सहारा में वापसी से संबंधित अफवाह सच निकली. सहाराश्री सुब्रत राय के हस्ताक्षरों से जारी एक पत्र सहारा मीडिया के सभी कार्यालयों में चस्पा कर दिया गया है. उसकी एक प्रति भड़ास4मीडिया के पास भी है. इस पत्र के मुताबिक अनिल पर जो आरोप लगे थे, वे झूठे पाए गए. उन पर लगे आरोपों की जांच पूरी होने और आरोप निराधार होने के बाद उन्हें फिर से पुराने पद पर ससम्मान वापस किया जा रहा है. पत्र ये है-

सहारा प्रमुख सुब्रत राय सहारा के खिलाफ वारंट

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने सहारा इंडिया के चेयरमैन सुब्रत रॉय के खिलाफ वारंट जारी किया। उनकी कंपनी पर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के मामले में मुख्य मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट विनोद यादव ने दिल्ली पुलिस को रॉय और अन्य चार लोगों को 9 फरवरी तक पेश करने को कहा है। नीरज पांडे की शिकायत पर यह नोटिस जारी किया गया है। शिकायत में कहा गया कि कंपनी ने 2007 में सहारा स्वर्ण योजना शुरू की थी जिसके तहत एनसीआर सहित देश भर में 217 टाउनशिप विकसित करने की बात कही गई।

सुब्रत राय सहारा के जीवन पर किताब

: पुस्तक समीक्षा : ‘मुझे याद है- दादाभाई और हमारा परिवार’ : पुस्तक ‘मुझे याद है’ दादाभाई और सहारा परिवार के कर्ताधर्ता सुब्रत रॉय सहारा, जो कि प्यार से ‘सहाराश्री’ के नाम से जाने जाते हैं, के जीवन और समय पर केन्द्रित है। पुस्तक की लेखिका हैं श्रीमती कुमकुम रॉय चौधरी, जो कि उनकी छोटी बहन हैं और उन्हें प्यार से ‘दादाभाई’ कह कर सम्बोधित करती हैं। सहारा इंडिया परिवार में ‘छोटी दीदी’ स्वयं एक वरिष्ठ एग्ज़ीक्यूटिव होने के साथ ही लोकप्रिय सामाजिक हस्ती हैं जो अपनी बहुआयामी व लोकहितैषी सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जानी जाती हैं।

सहारा समय : इंतजाम अली, चैनल हेड, लड़की-दारू सप्लायर!

प्रिय यशवंत जी, सहारा समय के स्ट्रिंगर का दर्द पढ़कर कुछ आश्चर्य नहीं हुआ. सहारा समय में हमेशा से काम करने वालों की दुर्गत हुई है और चमचों ने मलाई काटी है. सहारा में किसी भी खुद्दार व्यक्ति का काम करना असंभव है. अगर आप दारू और लड़की अपने बॉस को सप्लाई कर सकते हैं तो आप निश्चिंत होकर हर महीने अपनी सेलरी बिना कुछ किए पा सकते हैं और इनक्रीमेंट तथा प्रमोशन भी समय से पूर्व पा सकते हैं.

‘हे सहाराश्री, अब मैं बेरोजगार और असुरक्षित, दोनों हूं’

श्रीमान सहाराश्री सुब्रत राय सहारा जी, सादर प्रणाम, क्या कोई ऐसा परिवार होता है जो अपने ही परिवार के किसी सदस्य को मुश्किल वक्त में अकेला छोड़ देता है? पर अपने सहारा परिवार में ऐसा हो रहा है। जब तक मैं चैनल को टीआरपी दिलाता रहा, सबका दुलारा रहा लेकिन चैनल के लिए खबर करते-करते जब कुछ लोगों ने मुझे अपना दुश्मन मानकर मेरे से भिड़ गए तो चैनल ने ही मुझे दुत्कार दिया। मैं राजेश स्थापक हूं। सहारा समय (मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़) में काम करता रहा हूं। मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अब मुझे महसूस होता है कि सहारा समय न्यूज चैनल सिर्फ लोगों को अपना काम निकालने के लिए जोड़ता है और काम निकलते ही अकेला छोड़ देता है। मैं सहारा परिवार का अभिन्न हिस्सा रहा हूं लेकिन मेरे पर जब मुसीबत आई तो इस परिवार ने मेरा साथ छोड़ दिया। मुझे दरकिनार कर दिया। ऐसा हम मानते थे कि सहारा समय वाले अपने रिपोर्टर का पूरा साथ देते हैं पर यह मेरे मामले में मिथ्या साबित हुआ है।