सोपान और मयंक का इस्तीफा, शिरीष व अवधेश की नई पारी

शिरीष खरे और अवधेश मिश्रा ने तहलका के साथ नई पारी शुरू की है. शिरीष मुंबई में सोशल एक्टिविस्ट रहे हैं. अवधेश दिल्ली में प्रभात खबर के साथ जुड़े थे. उधर, तहलका से ही एक सूचना है कि सोपान जोशी ने इस्तीफा दे दिया है. सोपान इसके पहले डाउन टू अर्थ में थे. अब वे …

सफेद रात सा रोमांस

फिल्म- इन दा मूड फार लव : साल- 2000 : वक्त- 98 मिनट : किरदार- टोनी लियांग और केम-वाह कू : निर्देशक- बांग कर वहाई : निर्माता- ये चेंग चा और विलियम चेंग :  बात 1962 की है।  यह सिर्फ इत्तेफाक ही था कि नायक चाउ मो व्हान और नायिका सुलि झेन एक ही अपार्टमेंट के पड़ोसी बने। पहली मुलाकात बहुत सभ्य और गुमसुम भरी थी। इधर व्हान को उसकी पत्नी ने जोड़ा था, उधर झेन को उसके पति ने। दोनों बीते कल का अधूरा हिस्सा लिए थे और आहिस्ता-आहिस्ता जीते थे। उनके बीच रोमांस नहीं था, फिर भी उनकी मुलाकातों के दृश्य रोमांस से भर जाते थे। रोमांस के इन दृश्यों का सिलसिला रफ़्तार पकड़ता गया। ऐसे रोमांस के दृश्यों की निर्मलता सफेद होती रात की तरह बढ़ती गई। उन्होंने शहर की काली सड़क, काफी हाउस और गलियों को अपनी मुलाकातों से रंगीन बना डाला था। देखते ही देखते समर्पण और मनोविज्ञान की अनछुई परतों का खुलासा होने लगा।

सूचना के अधिकार कार्यकर्ता पर हमला

[caption id="attachment_15229" align="alignnone"]हमलाअस्पताल में भर्ती सुरेश बंजन[/caption]

मुंबई में सूचना के अधिकार से जुड़े कार्यकर्ता सुरेश बंजन पर गुण्डों ने जानलेवा हमला किया। मुंबई के बाहर शायद ही कोई उन्हें जानता हो लेकिन मुंबई में वह लंबे समय से सूचना के अधिकार और झोपड़पट्टियों के लिए काम करते रहे हैं। उन्होंने विकास परियोजनाओं की आड़ में बिल्डरों के कई नाजायज धंधों को उजागर किया है। उन्होंने शहर के भू-माफिया से जुड़ी कई जानकारियों का पता-ठिकाना ढ़ूंढ़ लिया था। इसी से उन पर हमले की आशंकाएं बढ़ गईं थीं। 

यह तानी मौसी और उसकी नन्ही भांजी की कहानी है

फिल्म 'कैरी' का एक दृश्यसमीक्षा : फिल्म- कैरी : यह फिल्म इंसानी रिश्तों का मार्मिक ताना-बाना है जो सीधी-साधी कहानी को सहज ढंग से कहती है. इसमें संगीत और कैमरे के जरिए दृश्यों को खूबसूरत रंग-रूप दिया गया है. हर दृश्य बीती यादों का फ्रेम दिखता है. हर कलाकार आसपास का आदमी लगता है. इसलिए फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शक कुछ देर के लिए सोचता रहता है. वह कुर्सी से तुरंत नहीं उठ पाता. यह फिल्म तानी मौसी और उसकी नन्ही भांजी की कहानी है. कहानी में 10 साल की बच्ची मां-बाप के मरने पर श्रीपू मामा के साथ तानी मौसी के घर आती है. तानी की कोई संतान नहीं है. वह बच्ची को हर खुशी देने का भरोसा देती है. लेकिन वह खुद खुशियों से दूर है. तानी के पति भाऊराव को उसकी जरा भी फ्रिक नहीं. भाऊराव और घर की नौकरानी तुलसा का नाजायज रिश्ता है. तुलसा भी भाऊराव की आड़ से मालकिन को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं चूकती. इन हालातों से परेशान तानी जिदंगी को अपने हाल पर छोड़ देती है. लेकिन भांजी के आने के बाद वह फिर से जीना चाहती है.

आपके संघर्ष में हमारी भी ‘एक बंद मुट्ठी’!

हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप और प्रमोद जोशी द्वारा किए गए मुकदमें के मामले में भड़ास4मीडिया की मदद के लिए ढेरों हाथ उठ खड़े हुए हैं। चंडीगढ़, हैदराबाद, मुंबई, फरीदाबाद, दिल्ली समेत कई शहरों से भड़ास4मीडिया के शुभचिंतकों और समर्थकों ने 100 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक की राशि भेजी है। कुछ लोगों ने यह राशि सीधे भड़ास4मीडिया के एकाउंट में जमा कराया है तो कुछ ने ड्राफ्ट बनाकर भड़ास4मीडिया के पते पर भेजा है। हैदराबाद के वरिष्ठ साथी भरत सागर ने 500 रुपये के ड्राफ्ट के साथ एक पत्र भी भेजा है। इस पत्र को उनकी अनुमति लेकर यहां सार्वजनिक किया जा रहा है। इसी तरह मुंबई के साथी शिरीष खरे ने एक मेल के जरिए सहयोग राशि देने और अन्य कुछ बातें कही हैं। उनके मेल को भी यहां नीचे प्रकाशित किया जा रहा है। कई अन्य साथियों ने योगदान किया है, उनके प्रति हम दिल से आभारी हैं। – संपादक, भड़ास4मीडिया


सबसे पहले हैदराबाद से प्रभात सागर का पत्र