लोन ले लो, बीमा करा लो, शेम्पू लगा लो…

उपदेश अवस्थीअखबारों में बीमा, लोन और शैंपू से जुड़े विज्ञापनों की बाढ़ : मंदी की मार व कर्मचारियों की भगदड़ से गड़बड़ायी जीवन बीमा कंपनियों की गाड़ी पटरी पर लौट रही है. प्रिंट मीडिया में बीमा कंपनियों ने विज्ञापन अभियान तेज कर दिया है. वर्ष 2008-09 की तुलना में इन कंपनियों ने 2009-10 में विज्ञापन में 26 प्रतिशत की वृद्धि की है.

40 हजारी क्लब में शामिल हुआ भड़ास4मीडिया

तेजी से बढ़ रहा भड़ास4मीडिया का ग्राफ : अभी जश्र मनाने की जरूरत नहीं लेकिन खबर अच्छी है. भारतीय मीडिया इण्डस्ट्रीज की हलचल से वाकिफ कराने वाली बेवसाइट भड़ास4मीडिया दुनियाभर की सभी भाषाओं में संचालित 40 हजार सबसे लोकप्रिय वेबसाइट्स की सूची में शामिल हो गई है. सनद रहे कि दुनिया की 1 लाख सबसे लोकप्रिय वेबसाइट्स की सूची में शामिल होने के लिए हजारों वेबसाइट संचालक होड़तोड़ मेहनत करके डाटा जुटाते हैं.

‘जबलपुर में नईदुनिया नहीं, राज एक्सप्रेस है नंबर दो’

भड़ास4मीडिया पर दिनांक 4 जनवरी को प्रकाशित ‘पत्रिका ने जबलपुर में हरिभूमि का स्लोगन चुराया‘ शीर्षक के साथ प्रकाशित जबलपुर के किसी साथी की चिट्ठी पढ़ी। पढ़कर थोड़ा कष्ट हुआ। कृपया पत्र लेखक महोदय से पूछिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि हरिभूमि ने पत्रिका का स्लोगन चुराकर जबलपुर लांच किया हो? क्या यह पत्र लिखने से पहले उन्होंने यह विश्वास करने के लिए पर्याप्त तथ्य जुटा लिए थे कि हरिभूमि के जबलपुर लांच से पहले पत्रिका ने अपने किसी भी लांच में इस पंचलाइन का उपयोग नहीं किया था? मैं माननीय पत्र लेखक महोदय से ये भी पूछना चाहता हूं कि वे किस आधार पर कह रहे हैं कि जबलपुर में नईदुनिया दूसरा बड़ा अखबार है, राज एक्सप्रेस नहीं? मैं जानना चाहता हूं कि इस टिप्पणी का स्रोत क्या है?

मां के प्राण गंवाकर चुकाई पत्रकारिता की कीमत

[caption id="attachment_16372" align="alignleft" width="159"]मांमां[/caption]एक पत्रकार को पत्रकारिता की कीमत अपनी मां के प्राण गंवाकर चुकानी पड़ी। इस प्रसंग को पढ़कर कोई युवा पत्रकारिता में करियर तलाशने की हिम्मत न करेगा। एक पत्रकार कितनी नफरत और विरोध सहन करता है, इसका जीता जागता उदाहरण है यह प्रसंग। मामला मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ का है। वही जिला, जहां छुआछूत के मामले सर्वाधिक उजागर होते हैं। जहां जंगल माफियाओं ने जंगलों को मैदान बना दिया है। जहां गरीबों को पुलिस बिना लिखापढ़ी के महीनों तक लॉकअप में बंद रखती है। जहां पुलिस अपराधियों को बिना प्रकरण दर्ज किए सजा दे डालती है। जहां शिक्षा का स्तर बहुत कम है। जहां मूल अधिकारों का सरेआम हनन होता है। जहां के स्कूल जुए के अड्डे व हॉस्पिटल्स बीयर बार बने हैं। जहां गरीब प्रेम दिखाने राहुल गांधी एक आदिवासी के घर ‘मेहमानी’ कर गए।