कहिन हां, अति स्थानीयता हमें सीमित करती है अमिताभ ठाकुर ने ठीक ही लिखा है... अति स्थानीयता या कूपमंडूकता?। मेरे जनसत्ता के अलावा ज्यादातर अखबार अति स्थानीय हो गए हैं। यह अपने... bhadas4media.comAugust 17, 2010
कहिन विनय बिहारी सिंह की दो टिप्पणियां जाति पाति पूछे नहिं कोई, हरि का भजे सो हरि का होई : ये लोकतंत्र है। किसी को भी किसी के खिलाफ या पक्ष... bhadas4media.comSeptember 4, 2009
कहिन डरावनी फिल्मों का विरोध क्यों नहीं होता? जब बात अंधविश्वास की चल रही है तो डरावनी फिल्मों की बात क्यों नहीं होती? कोई घर भयानक और भूतहा दिखा कर उसमें तरह-... bhadas4media.comAugust 14, 2009