‘तब विष्णुजी ने ही तुम्हें पनाह दी थी’

यशवंत जी, तुम्हारा श्री विष्णु जी के बारे में क्या राय है? तुम भी खुद को ठाकुर बताते हो. मैं पत्रकार तो नहीं, लेकिन पत्रकारों के साथ मण्डली लगती है. इसलिए खबर सबकी मिलती है. चर्चा यह भी थी की जब तुम मेरठ जागरण से चलता कर दिए गए थे तो विष्णु जी ने ही तुम्हें पनाह दी थी. मैंने जो सुना है वह सही है गलत? तुम्हारे ऊपर परशुरामी फरसा रखा की नहीं विष्णु जी ने?

हटा क्यूँ दिए गए, यह मुझे नहीं मालूम. सुनते हैं लिक्खाड़ भी बहुत बड़े हो. उम्मीद है, विष्णु जी के बारे में अपनी राय को भड़ास4मीडिया पर डालोगे. वैसे, परशुराम जी ने अपना उत्तराधिकारी राम को ही माना था क्योंकि राम में परशुराम जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने का ताकत और कौशल था. परशुराम पर टिप्पणी के लिए राम बनना पड़ता है. दुनिया में ठाकुर और भी हैं, राकेश और विकास के अलावा. अब निरंतर लिखता रहूंगा.

राघव, दिल्ली

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