‘बहसबाजी से बचने का प्रयास लाभकारी होता है’

प्रिय यशवंत जी, काफी समय से बी4एम देख रहा हूं। खुशी और रंज तो लगा रहता है। आपको जानता भी हूं, जब लखनऊ जागरण में रहे। आपका यह सार्थक प्रयास अच्छा लगा कि इसके जरिए विश्वभर में पत्रकार एक दूसरे से रू-ब-रू हो रहे हैं। राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ की शुरुआत से यहीं हूं। विष्णुजी को भी देखा-सुना बतियाया है। कभी उग्र तो नहीं देखा, जाति-प्रांत विभेद से भी वे दूर हैं। हां, कामचोरों से उन्हें जरूर नफरत रही है। मुझे भी है। मगर विष्णुजी के मुंह से अपशब्द तो नहीं ही सुने।

‘फालतू बहस खड़ा करने वाले बयान न छापें’

[caption id="attachment_15335" align="alignright"]आनंद सिंहआनंद सिंह[/caption]प्रिय यशवंत जी, आपका पोर्टल खूब पढ़ा जा रहा है। साल भर में आपने जो यश पाया है, उसके लिए आप बधाई के पात्र हैं। आपका कांसेप्ट हिट हो गया। अब थोड़ा गंभीर हो जाएं। आपके पोर्टल को लोग नानसेंस कहने लगे हैं। ये वही लोग हैं जो आपके पोर्टल की तारीफ करते थे। क्या हो गया? आपकी नीतियां चरमरा गईं या फिर लोगों का मन डोल उठा? विचारिए। फालतू बहस खड़ा करने वाले बयान क्यों छापते हैं? इसे बंद कर दें। बहस से कुछ नहीं होता। अरविंद शर्मा के बारे में जो कुछ कहा गया या जिस तरीके से संत शरण अवस्थी जी के बारे में विशु जी ने लिखा, वह पत्रकारिता की मर्यादा का तो उल्लंघन है ही, हमारी-आपकी साख पर भी इसलिए बट्टा लगाता है कि हमने इसे प्रकाशित क्यों किया? जो दारू पीने वाला है, वह दारू पीयेगा ही। हमारे छाप देने से वह संत क्योंकर हो जाएगा? आपका पड़ोसी आपको किसी बात पर गाली दे सकता है। क्या वह खबर है आपके लिए? इस पोर्टल पर कई अच्छे-अच्छे इंटरव्यू पढ़ने को मिले, कई सकारात्मक खबरें मिलीं।

‘तब विष्णुजी ने ही तुम्हें पनाह दी थी’

यशवंत जी, तुम्हारा श्री विष्णु जी के बारे में क्या राय है? तुम भी खुद को ठाकुर बताते हो. मैं पत्रकार तो नहीं, लेकिन पत्रकारों के साथ मण्डली लगती है. इसलिए खबर सबकी मिलती है. चर्चा यह भी थी की जब तुम मेरठ जागरण से चलता कर दिए गए थे तो विष्णु जी ने ही तुम्हें पनाह दी थी. मैंने जो सुना है वह सही है गलत? तुम्हारे ऊपर परशुरामी फरसा रखा की नहीं विष्णु जी ने?

बी4एम की टीआरपी बढ़ाने की रणनीति है यह?

प्रिय यशवंत, विष्णु त्रिपाठी के बारे में खबर पढ़कर बहुत दुख हुआ। यह तो पहले से ही सुना था कि पत्रकारिता में कोई किसी को अच्छा नहीं बोलता, लेकिन यहां तो हद ही पार हो गई। सरेआम किसी पर जातिवादी और क्षेत्रवादी होने का आरोप मढ़ा गया। उसकी तुलना परशुराम से की गई। क्या यह टीआरपी बढ़ाने की रणनीति है या अपनी भड़ास मिटाने की। जागरण में बिहारियों की कमी नहीं और ऐसा भी नहीं कि वहां से बिहारियों को निकालने का अभियान चला रहे हैं त्रिपाठी जी। दरअसल जो लोग काम नहीं करना चाहते और मैनेजमेंट उनकी चापलूसी बर्दाश्त नहीं कर पाता, वे किसी के बारे में कुछ भी अफवाह उड़ा सकते हैं।

‘विष्णुजी के मुंह से गाली कभी नहीं सुनी’

प्रिय यशवंत जी, आपके पोर्टल से पता चला कि विष्णु जी दिल्ली में हैं। विष्णु जी को मैं उस समय से जानता हूं जब वह लखनऊ, जागरण में थे। हालांकि वह मुझे नहीं जानते होंगे। लखनऊ विश्वविद्यालय से एमजे कंप्लीट करने के बाद काम सीखन के लिए कहीं ठिकाना नहीं मिल रहा था क्योंकि पत्रकारिता में कोई गाड फादर नहीं था। ऐसे में मुझे किसी ने बताया कि तुम विष्णु जी से मिलो, शायद कुछ बात बन जाए और पत्रकारिता सीखने के लिए जागरण में तुम्हें कुछ दिन बैठने का मौका मिल जाए। वर्ष 95 के आसपास की मुझे वह तिथि तो नहीं याद लेकिन मैं जागरण में उनसे मिला तो उन्होंने मुझे बहुत सलीके से समझाया।

‘खुशकिस्मत हूं, विष्णुजी के फरसे से बचा’

आक्षेप लगाने वालों को ईश्वर क्षमा करें : भड़ास4मीडिया पर पढ़ा, जागरण, नोएडा के किसी साथी ने लिखा कि विष्णु त्रिपाठी बहुत अपमानित करते हैं। गालियां देते हैं। राजपूत और बिहारी को साफ करने का अभियान चला रखे हैं। मैं भाई यशवंत को ये तो नहीं कहूंगा कि किसी का लिखा न छापें। आखिर जब पत्रकारों की बात इस मीडिया की वेबसाइट में नहीं जाएगी तो और कहां जाएगी। हां, एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि आक्षेप लगाने वाले इस वेबसाइट को कुंठा व्यक्त करने का जरिया मात्र न समझें। विष्णु जी को कोई एक दशक से मैं जानता हूं। साथ काम कभी नहीं किया। लखनऊ में वो जागरण में थे और मैं अंगेजी दैनिक पॉयनियर में। बाद में मैं इंडियन एक्सप्रेस चला गया और वो नोएडा शिफ्ट हो गए। कई सालों से मेल मुलाकात नहीं है। भड़ास4मीडिया पर जब पढ़ा कि विष्णु जी अपमानित करते हैं, कमरे में बुला गालियां देते हैं तो दिमाग पर बहुत जोर डाला कि कब सुनी उनके मुंह से गाली। खासकर किसी सहकर्मी के लिए। याद नहीं आया। कुछेक उनसे भी पूछा जो उनके साथ काम कर चुके थे।

‘बहुत अपमानित करते हैं विष्णु त्रिपाठी’

कई लोगों को निकाला और कई नौकरी छोड़ने पर मजबूर हुए : एडिटर, भड़ास4मीडिया, महोदय, दैनिक जागरण के नोएडा स्थित सेंट्रल डेस्क पर इन दिनों भयंकर उथल-पुथल मची हुई है। इस डेस्क के इंचार्ज विष्णु त्रिपाठी की बदतमीजियों और सरेआम लोगों को अपमानित करने, चैंबर में बुलाकर गाली देने की आदत के कारण लोग भयंकर तनाव में नौकरी कर रहे हैं। लालू यादव ने एक बार ‘भूरा बाल साफ करो’ की नीति का ऐलान किया था और यहां विष्णु त्रिपाठी ‘बिहारियों को साफ करो’, ‘महाप्रबंधक निशिकांत ठाकुर के नजदीक माने जाने वाले लोगों को साफ करो’ और ‘राजपूतों यानी ठाकुरों को साफ करो’ की नीति पर बेहद बेशर्मी से अमल कर रहे हैं। वे यदा-कदा कहते रहते हैं- ‘जिस प्रकार परशुराम ने पृथ्वी से ठाकुरों को मिटाया, उसी तरह मैं जागरण से बिहारियों-ठाकुरों को मिटा दूंगा’।