….शराबी जितना बूढ़ा होता है उतना बच्चा हो जाता है…

बहुत दिनों बाद आज सुबह-सुबह जगा. उठ तो रोज ही जाता हूं पर महटिया के सो जाने में भलाई समझता था, सो, सोया ही रहता था. पर आज लगा कि नहीं, फाइनली उठ जाओ. खुद उठा तो सिर पर रखे लैपटाप को भी उठाया. कामधाम-मेल-सेल निपटाया. कई दिनों से कई तरह की नसीहतें कई लोगों से सुन रहा था. नसीहतों के निहितार्थ बताने वाले प्रमुख शब्द इस प्रकार हैं- जागिंग, जिंदगी, सुबह, मदिरा, लीवर, मौत, खुशी, उम्र…..। तो इन शब्दों को मिलाकर एक रचनावली तैयार की है, जो हाजिर है, इसे बस यूं ही पढ़ जाइएगा, सीरियसली लेने की कौनो जरूरत नहीं है। हालांकि कई लोग कह सकते हैं कि भड़ास को सीरियसली लेता कौन है यार :), क्यों सरकार :):) -यशवंत  


जब आदमी बुढ़ाने को होता है तो सुबह-सुबह उठने लगता है.

असली शराबी सुबह-सुबह चुपचाप पीने लगता है.

जब आदमी मरने से डरता है तो जागिंग करता है.

समझदार शराबी शराब के साथ मांस हमेशा खाता है.

स्कूली बच्चे सुबह उठते हैं तो रोते हैं क्योंकि वे बूढ़े नहीं होते.

बूढ़े सुबह उठते हैं तो भगवान-ध्यान कर स्माइल फेंकते हैं

लीवर खराब होने के डर से शराबी शराब नहीं छोड़ता

जवान लोग मौत के डर से सब कुछ छोड़ने लगते हैं

असली शराबी जितना बूढ़ा होता है उतना बच्चा हो जाता है

शरीफ भाई बूढ़े होने के साथ-साथ डरपोक भी होने लगते हैं.

शराबी और शरीफ में धन करें तो बराबर में क्या आएगा

शराब की एक भरी बोतल और शराब की एक खाली बोतल

इन दोनों बोतलों को आपस में लड़ाएंगे तो क्या आएगा

भरी हुई बोतल…. केवल भरी हुई बोतल……

इन दोनों बोतलों को आपस में मिलाएंगे तो क्या आएगा

आधी भरी बोतल…. आधी-आधी दो बोतल….

समझदार लोगों को अक्सर लगता है कि समाज उन्हीं से चलता है

शराबियों को नहीं लगता कि समाज को समझदारों की जरूरत है

समझदार लोग शराबियों को कोसते हैं, शराबी अपने आप को ही

समझदार टाइप लोग शराबी बनकर असली शराबियों को ठगते हैं

असली शराबी को लगता है कि वह भी समझदार बन ठग सकता है

समझदारी इसी में है कि समझदार समझदार रहे और शराबी शराबी

पर इस समझदारी को ताक पर रख कर अगर हम आपसे पूछें कि  

समझदार शराबी और शराबी समझदार में सबसे हरामी कौन हुआ?

तो आप क्या जवाब देंगे? यहीं न, कि, लगता है आप पिए हुए हैं!!!

पर समझदारों को यह तो पता ही नहीं कि उनकी शरीफ नींद

मेच्योर शराबी और मेच्योर आदमी, दोनों की तरह टूटती है

तब शराबी शराब छोड़ने को होता है और मेच्योर आदमी शराफत  

शराबी कभी शराब नहीं छोड़ता, समझदार शराफत अक्सर छोड़ देते हैं

शराबी सबसे मोहब्बत करने लगता है सिवाय अपने के

समझदार पहले अपने से, फिर परिजनों से प्यार करता है

इसीलिए पैग लिए शराबियों की एक जोरदार अपील है सभी से

समझदारों शराब छोड़ो, शराबियों शराफत छोड़ो, दिल्ली दूर नहीं है… 


अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Comments on “….शराबी जितना बूढ़ा होता है उतना बच्चा हो जाता है…

  • LaxmiKant Dubey says:

    Wah, Kya kaha hai Jaswant Bhai. Subah Subah Dil aur dimaag dono ko aanand mila. Roj subah aisa he kuch post kar diya kijiye jisase thodi rahat milaa kare.

    Reply
  • अंकित says:

    दादा, कमाल कर दिये, कई महीनों बाद रंग में लग रहे हो। वरना अभी तलक तो बस काम काम काम ही में लगे थे…. मज़ा आ गया….

    Reply
  • ajay shukla says:

    yashwant
    the famous hemingway novel THE OLD MAN AND THE SEA bigins with following dialogue between a child and the protagonist buddha of the story:
    the child asks : why do old men rise so early
    old man wonders : perhaps to have one more longer day.
    i am giving you this sermon on the mount because at 51 i still sleep and rise very late. you are, as compared with me, very young. so please don’t feel old and don’t appear illogical.
    And, please for gossake do not romanticise boozing.ghalib was a great shayar not because he was a great drinker, but because he wrote great poetry. drinking was just a vice without which he might have been a greater poet.
    I am not denigrating your poem, which by the way, is makes a very interesting read. stylewise it is superb, even classy.
    remember : true geniuses never are drunkards. A Jinnah can be a boozer. Gandhies never are.
    with good wishes for bhadas and bhadasies
    yours
    ajay shukla

    Reply
  • कामता says:

    का बतायें, ये कलहंस साहब कबसे लॉपीपॉप दे रहे हैं कि किसी शाम प्रेस क्‍लब में मिलेंगे पर अभी तक तो दिल्‍ली दूर ही रही है।
    मुबारक हो, इस बेहतरीन कविता के लिए।

    Reply
  • devesh charan says:

    kamal kar rahe ho bhai. lage raho, harivansh rai bacchan ke baad halawaad sayad khatam ho gaya tha. bt my friend u have seen the logic and philosophy in alchohal. u r nt romanticizing daru as some people may beleive that u r propagating darubazi. . bt thru daru u r speaking the peotry called LIFE. and that too in a common man’s langauage as we all know common things are not so ‘common’

    Reply
  • Chandan Srivastava says:

    पर समझदारों को यह तो पता ही नहीं कि उनकी शरीफ नींद

    मेच्योर शराबी और मेच्योर आदमी, दोनों की तरह टूटती है

    तब शराबी शराब छोड़ने को होता है और मेच्योर आदमी शराफत

    शराबी कभी शराब नहीं छोड़ता, समझदार शराफत अक्सर छोड़ देते हैं

    शराबी सबसे मोहब्बत करने लगता है सिवाय अपने के

    समझदार पहले अपने से, फिर परिजनों से प्यार करता है

    …….क्या बात कही है आपने. मजा आ गया.

    Reply
  • Hemant shukla says:

    समझदार शराबी और शराबी समझदार में सबसे हरामी कौन हुआ?…. vahi, jo is kavita ka matlab na samajhe…. Badhayi ho. Hemant shukla, Lko. 09838689871, 21/01/10.

    Reply
  • mja aa gya bhai yashwant
    accha likha hai aapne
    kaafi dino baad kuch ranjdaar kuch majedaar likha hai
    aise hi likte raho

    Reply
  • chandra shekhar shaastri says:

    yashwant bhai!
    aajkal bachche bhi sharaabi ho gaye hai. budhaye logon to baat Kya hai.
    gadya likhte likhte padya shuru kar rahe hain. achchha hai
    razana likhiye naya vichar hai
    chandra shekhar shaastri
    Editor
    Media Today Plus
    Delhi

    Reply
  • piyakkaron ki jamat ko mil gaya ek bahana glass dharne ka. by the way its not only good but very good thanks 9852150766

    Reply
  • Prem Chand Gandhi says:

    इसे कृष्‍ण कल्पित की प्रसिद्ध कितबिया ‘एक शराबी की सूक्तियां’ की परंपरा में शुमार किया जा सकता है यशवंत भाई। ऐसी कविताएं सामूहिक भावनाओं को व्‍यक्‍त करती हैं, इसलिए मेरे खयाल से इन कविताओं को शराबियों की सामूहिक प्रार्थनाओं के रूप में लिया जाना चाहिए। बधाई।

    Reply
  • ish madhu talwar says:

    gandhi ji ne sahi kaha hai…mahatma gandhi ne nahi..hamaare samay ke aaj ke gandhi ne..is kavita ke liye sharaab mein dooba ek deepak mein bhi jalaata hoon…sweekar karein…!

    Reply
  • Siddharth Kalhans says:

    यशवंत, दिल की लगी छूट सकती है पर मुंह की लगी नही। हम बेवफा यार नही जसे एक बार पकड़ते हैं उसे जिदंगी भर नही छोड़ते। पीते रहो। रवींद्र कालिया को ये जरूर पढ़वाना खुद तो जी भर के पी और छोड़ के लिख मारी गालिब छुटी शराब।

    Reply
  • Ishwar Dhamu says:

    Kamaal hai shriman !!!! Yeh to bataye ki ye Kavita hai ya Gazal hai ya Quwali hai ya Geet hai ? Samjha BHADAS ho sakati hai.

    Reply
  • yashvant ji apki kavita aur dosto ke comment pad kar maza aa gaya aap log aisi hi duniya chahte hai sharaab ko justify kijiye aur three cheers……… sharabi kabhi nai sudhrenge isiliye unke ghar me koi unhe nai smjhta hai naa…………………….
    sudhar jao pyaro tum log kitne pyare ho. log tumko kitna pyar karte hai nai samjhte bus dum maro dam hai naa…………..jai ho apki jamghat ki but mera savinay nivedan hai thoda sa control me reh kar piya kariye aap logo ko bahut jina hai aur swasth rehna hai. hum sab ke liye……………..

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published.