दैनिक भास्‍कर से तीन लोगों ने शुरू की नई पारी

दैनिक भास्‍कर, दिल्‍ली में इन दिनों आवाजाही काफी तेज है. खबर है कि तीन लोगों ने भास्‍कर के साथ अपनी नई पारी शुरू की है. दैनिक जागरण से इस्‍तीफा देकर राहुल कुमार ने अपनी नई पारी दिल्ली में ही दैनिक भास्‍कर के साथ शुरू की है. राहुल जागरण में दिल्‍ली लोकल की खबरों को कवर करते थे. भास्‍कर में भी उन्‍हें यही जिम्‍मेदारी सौंपी गई है.

अभिषेक गुप्‍ता भी दैनिक जागरण से इस्‍तीफा देकर दैनिक भास्‍कर पहुंच गए हैं. उन्‍हें भी रिपोर्टिंग टीम में शामिल किया गया है. ये दोनों लोग काफी समय से जागरण की लोकल रिपोर्टिंग टीम से जुड़े हुए थे. कमलेश राय भी दैनिक भास्‍कर के साथ अपनी नई पारी शुरू की है. उन्‍हें डेस्‍क पर सब एडिटर के पद पर ज्‍वाइन कराया गया है. वे आईएनएस न्‍यूज एजेंसी से इस्‍तीफा देकर यहां पहुंचे हैं. उल्‍लेखनीय है कि पिछले कुछ समय में दैनिक भास्‍कर, दिल्‍ली से कई लोगों ने इस्‍तीफा दिया है.

दैनिक भास्‍कर की टीम में शामिल क्राइम रिपोर्टर अभिषेक राव, सीनियर रिपोर्टर धनंजय कुमार तथा सीनियर रिपोर्टर शैलेंद्र सिंह ने कुछ समय पहले इस्‍तीफा दे दिया था तथा दिल्‍ली में ही नई दुनिया की टीम के साथ जुड़ गए थे. इनके अलावा सब एडिटर अजीत झा भी दैनिक भास्‍कर, दिल्‍ली से इस्‍तीफा देकर नईदुनिया, इंदौर से जुड़ गए थे. माना जा रहा है कि कुछ और लोग भास्‍कर से इस्‍तीफा दे सकते हैं.   

भास्‍कर, बठिंडा में कंपनी की जगह अपनी जेबें भरने की होड़

दैनिक भास्कर, बठिंडा एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. भास्कर की इस यूनिट में पहले से निचले कर्मचारियों में रोष है. उन्हें छुट्टी माँगने पर साफ़ कह दिया जाता है कि छुट्टी चाहिए तो नौकरी छोड़ दो. मगर अब यहाँ कंपनी नहीं अपनी जेब भरने की होड़ मची है. जिससे आजकल अंदरखाने विज्ञापन विभाग और संपादकीय विभाग में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. विज्ञापन विभाग टारगेट पूरा करने के लिए दिन रात एक कर रहा है, मगर संपादकीय विभाग से अब उसे सहयोग नहीं मिलने से उसके सामने दिक्कत आ रही है.

दरअसल विज्ञापन विभाग के भी कुछ क्लाइंट होते हैं जो अपनी खबर छपवाना चाहते हैं, मगर अब बठिंडा यूनिट में बड़ों के इशारे पर कुछ पत्रकारों को सिर्फ वसूली अभियान में लगा दिया गया है. स्वयं ब्यूरो चीफ भी वसूली अभियान में लगे हैं.  उन्हें खुली छूट दे दी गयी है कि वे ऐसे क्लाइंट से पैसे लेकर खबर लगायें, मगर वो पैसा कंपनी में नहीं जमा होना है. भास्कर, बठिंडा के न्यूज़ एडिटर की भी पत्रकारों से रोज़ विशेष ब्रांड की मांग रहती है. उसे पूरा करने के लिए और अपनी जेब भरने के लिए कुछ पत्रकार तो इसमें शामिल हो गए हैं. मगर जो पत्रकार ऐसा नहीं कर पा रहे हैं वो परेशान हैं.

ऐसे पत्रकार संपादक महेंद्र कुशवाहा से भी अपना दर्द नहीं कह पा रहे. दरअसल दफ्तर में अन्दर खाने यह चर्चा रहती है कि संपादक का भी संरक्षण इसमें मिला हुआ है. क्योंकि संपादक वही करते हैं जो उन्हें उनके न्यूज़ एडिटर समझाते हैं. खुद का नाक कान बंद किये रखने से स्थानीय यूनिट के लोगों में संपादक के प्रति भी रोष है, मगर अप्रैल में इन्क्रीमेंट के लालच में अभी वे कुछ बोल नहीं पा रहे हैं. जबकि डेस्क और रिपोर्टिंग के कई लोग दूसरे संस्थानों में अपनी बात चला रहे हैं. कंपनी के लोगों का भी मानना है कि यदि जल्दी हालात नहीं बदले तो यहाँ भगदड़ फिर मच सकती है.

कानाफूसी

न्‍यूज24 से इस्‍तीफा देकर डीबी स्‍टार के नेशनल हेड बनेंगे हेमंत शर्मा

वरिष्‍ठ पत्रकार एवं मुंबई में न्‍यूज24 के आरई हेमंत शर्मा इस्‍तीफा देने वाले हैं. वे न्‍यूज24 से पिछले चार सालों से जुड़े हुए थे. खबर है कि वे जल्‍द ही अपनी नई पारी दैनिक भास्‍कर ग्रुप के टैबलाइड अखबार डीबी स्‍टार के साथ करने जा रहे हैं. उनको इस अखबार का नेशनल हेड बनाया जा रहा है. वे इस अखबार के सभी नौ एडिशनों की जिम्‍मेदारी संभालेंगे. वे फिलहाल मुंबई में ही बैठेंगे. दैनिक भास्‍कर ग्रुप के साथ उनकी यह दूसरी पारी है.

हेमंत शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत 1988 में चौथा संसार, इंदौर से की थी. कुछ समय तक फ्री प्रेस के साथ भी जुड़े रहे. इसके बाद उन्‍होंने दैनिक भास्‍कर ज्‍वाइन कर लिया था. दैनिक भास्‍कर के साथ लगभग चौदह सालों तक इंदौर, दिल्‍ली, मुंबई, राजस्‍थान, चंडीगढ़ में जुड़े रहे. भास्‍कर के राजस्‍थान ऑपरेशन की शुरुआत के समय लांचिंग टीम के साथ भी रहे. 2007 में उन्‍होंने दैनिक भास्‍कर से इस्‍तीफा दे दिया तथा न्‍यूज24 से जुड़ गए. वे पिछले चार सालों से न्‍यूज24 और ई24 को अपनी सेवाएं दे रहे थे. बताया जा रहा है कि डीबी स्‍टार के एडिशनों की जिम्‍मेदारी संभालने के साथ वे इसके नए प्रोजेक्‍टों पर भी काम करेंगे.

दैनिक भास्‍कर, रतलाम में हड़कम्‍प, नीमच के सिटी चीफ हटाए गए

दैनिक भास्‍कर, रतलाम में हड़कम्‍प मचा हुआ है. भ्रष्‍टाचार के आरोपों के बाद प्रबंधन ने जांच के लिए भोपाल के स्‍थानीय संपादक आनंद पांडे को रतलाम भेजा था. उनकी रिपोर्ट के बाद खबर है कि नीमच जिले के सिटी चीफ मूलचंद खिची को हटा दिया गया है. वे काफी समय से भास्‍कर के साथ जुड़े हुए थे. डेस्‍क इंचार्ज कैलाश नागर से भी मैनेजमेंट ने त्‍याग पत्र देने को कह‍ दिया है. इतना ही नहीं विनोद सिंह सोमवंशी से पहले यहां के संपादक रहे तथा वर्तमान में भंटिडा में एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर का काम देख रहे महेंद्र कुशवाहा की भी जांच कराई जा रही है.

यह कार्रवाई भ्रष्‍टाचार के आरोप लगने के बाद की गई है. इसके बाद से ही रतलाम में हड़कंप मचा हुआ है. बताया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ और लोगों पर भी गाज गिर सकती है. फिलहाल इस घटना को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं. इस संदर्भ में आनंद पांडे से बात करने की कोशिश की गई परन्‍तु सफलता नहीं मिल पाई.

भास्‍कर के नेशनल ब्‍यूरो से स्मिता मिश्रा का इस्‍तीफा

: यतीश राजावत के व्‍यवहार से नाराज हैं पत्रकार : दैनिक भास्‍कर के नेशनल ब्‍यूरो में स्थितियां बहुत खराब हो चुकी हैं. बिजनेस भास्‍कर के संपादक एवं मैनेजिंग एडिटर यतीश राजावत के व्‍यवहार से पत्रकारों में नाराजगी है. खबर है कि राजावत के व्‍यवहार से क्षुब्‍ध दैनिक भास्‍कर की स्‍पेशल करेस्‍पांडेंट स्मिता मिश्रा ने इस्‍तीफा दे दिया है. स्मिता का जाना भास्‍कर के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. स्मिता ने भास्‍कर के लिए कई खबरें ब्रेक की हैं. सूत्रों का कहना है कि स्मिता के बाद कुछ और सीनियर पत्रकार यतीश राजावत के रवैये से नाराज चल रहे हैं और जल्‍द ही इस्‍तीफा दे सकते हैं.

स्मिता साढ़े चार साल से भास्‍कर के साथ जुड़ी हुई थीं. अमर उजाला, जम्‍मू से चौदह साल पहले करियर की शुरुआत करने वाली स्मिता ने आतंकवाद के चरम दौर में कई स्‍टोरियां ब्रेक की, कई मानवीय एवं संवेदनशील स्‍टोरियां लिखीं. इसके बाद वे दिल्‍ली में ईटीवी एवं जनमत के साथ भी जुड़ी रहीं. जनमत से इस्‍तीफा देने के बाद वे भास्‍कर के साथ जुड़ गई थीं, जहां उन्‍होंने कई खबरें ब्रेक कीं. सूत्रों का कहना है कि जल्‍द ही वे दिल्‍ली में ही किसी नेशनल हिंदी अखबार के साथ जुड़ने वाली हैं. स्मिता मिश्रा ने अपने इस्‍तीफे की बात ट्विटर पर भी लिखा है. बताया जा रहा है कि राजावत के व्‍यवहार से नाराज कम से कम दो और सीनियर पत्रकार अपना इस्‍तीफा सौंप सकते हैं.

गौरतलब है कि इसके पहले भी भास्‍कर में सत्‍ता केंद्रों को लेकर टकराव की बात सामने आई थी, जब समूह संपादक श्रवण गर्ग को विश्‍वास में लिए बगैर यतीश राजावत ने अग्निमा दुबे और प्रमोद कुमार सुमन को निकाले जाने का फरमान सुना दिया था. यतीश के खिलाफ काफी समय से बगावत की आग सुलग रही है. कहा जा रहा है कि टॉप मैनेजमेंट ने अगर ध्‍यान नहीं दिया तो भास्‍कर के नेशनल ब्‍यूरो में स्‍तरीय पत्रकारों का टोटा हो जाएगा.

चेतन शारदा, मुकेश टंडन, विजय झा एवं राजन मिश्र ने शुरू की नई पारी

दैनिक भास्‍कर से सूचना है कि हिमाचल के संपादक एवं वरिष्‍ठ पत्रकार चेतन शारदा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अपनी नई पारी पंजाब से जल्‍द लांच होने जा रहे अखबार नया सवेरा से शुरू करने जा रहे हैं. इन्‍हें कार्यकारी संपादक बनाया गया है. बताया जा रहा है कि चेतन शारदा के नेतृत्‍व में ही यह अखबार लांच किया जाएगा. चेतन शारदा इसके पहले दैनिक जागरण और पंजाब केसरी को भी वरिष्‍ठ पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

अमर उजाला, पंचकूला से खबर है कि वरिष्‍ठ पत्रकार मुकेश टंडन यहां से विदाई लेने वाले हैं. उन्‍होंने प्रबंधन को अपना नोटिस थमा दिया है. खबर है कि वे अपनी नई पारी की शुरुआत पंचकूला में ही टाइम्‍स ऑफ इंडिया के साथ करने जा रहे हैं. मुकेश कई संस्‍थानों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

अंग्रेजी वेबसाइट डेली भास्‍कर से खबर है कि संपादकीय प्रभारी विजय झा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अब एनडीटीवी से जुड़ गए हैं. बताया जा रहा है कि उन्‍हें एनडीटीवी के वेब डिविजन की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है. विजय इसके पहले इंडियन एक्‍सप्रेस, हिंदुस्‍तान टाइम्‍स, स्‍टेटसमैन, साकाल टाइम्‍स को भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

देश लाइव न्‍यूज, पटना से खबर है कि एकाउंटस मैनेजर राजन मिश्र ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे अपनी नई पारी दैनिक जागरण के साथ शुरू करने जा रहे हैं. संभावना है कि उन्‍हें गया से शीघ्र लांच होने जा रहे दैनिक जागरण से जोड़ा जाएगा. राजन की जागरण के साथ यह दूसरी पारी है. वे दैनिक जागरण, भागलपुर से ही देशलाइव में आए थे. वे सिलीगुड़ी में भी जागरण को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

नाबालिग का फोटो छापकर कानूनी पचड़े में फंसा भास्‍कर

: जिला कपूरथला (पंजाब) के सीजेएम की कोर्ट करेगी सुनवाई : मानव अधिकार आयोग का सख्‍त आदेश है कि पुलिस प्रत्येक आपराधिक मामले में नामजद होने वाले आरोपी का चेहरा छुपाकर रखे और यह आदेश समाचार पक्षों पर भी लागू होता है कि वह आरोपियों का चित्र प्रकाशित न करे। वहीं, दूसरी तरफ आपराधिक मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले नाबालिग बच्चों के लिए अलग से एक खास कानून है, जिसके तहत नाबालिग बच्चों का मात्र चेहरा नहीं बल्कि नाम, पता तथा वह सभी जानकारियां छापने पर प्रतिबंध लागू है, जिससे उसकी पहचान उजागर हो।

मगर बीते दिनों भास्कर, जालंधर (पंजाब) ने इस एक्ट का उल्लंघन किया और परिणामस्वरूप जनहित में दायर एक शिकायत ने दैनिक भास्कर प्रबंधन को कटघरे में ला खड़ा किया है। कपूरथला के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज ने चीफ ज्यूडीशियल मैजिस्ट्रेट (सीजेएम) को आदेश दिया है कि वह भास्कर प्रबंधन के खिलाफ दायर शिकायत पर सुनवाई करे और दोषी पाए जाने पर एक्ट के तहत योग्य दंड दे। मामले की पहली सुनवाई 29 नवंबर 2011 को होगी।

कोटा में दूसरे अखबारों की खबरें छाप रहा है पत्रिका

यशवंत जी, आजकल राजस्‍थान पत्रिका, कोटा में काफी झोल हो गया है. यह अखबार अब ओरिजन कंटेंट देने की बजाय दैनिक भास्‍कर का नकल करने लगा है. आप देखिए की छठ पर्व के दौरान जिस हेडिंग से भास्‍कर ने खबर लगाई थी, लगभग उसी हेडिंग के साथ राजस्‍थान पत्रिका ने यह खबर अगले दिन प्रकाशित किया. पत्रिका में आजकल ऐसा ही घोटाला चल रहा है. समचारों में कूड़ा-कचरा कुछ भी छाप दिया जा रहा है. रिपोर्टर किसी पुरानी खबर को दुबारा लिखकर बाई लाइन स्‍टोरी बनाते हैं.

अखबार में हेडिंग और पेज में इतनी गलती जाती है कि पढ़ने वाला दंग रह जाता है. किसी भी घटिया समाचार को लीड छाप दिया जाता है. ऐसा लगता है कि देखने वाला कोई नहीं है. ऊपर बैठे लोगों में गुटबाजी के कारण अखबार का कबाड़ा हो रहा है.   

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

दैनिक भास्‍कर, रांची में कुछ आंतरिक बदलाव

दैनिक भास्‍कर, रांची से खबर है कि यहां पर कुछ आतंरिक बदलाव किए गए हैं. अब तक आसपास पेज की जिम्‍मेदारी संभाल रहे सीनियर सब एडिटर धर्मेन्‍द्र कुमार से यह जिम्‍मेदारी लेकर उन्‍हें डेस्‍क पर भेज दिया गया है. बताया जा रहा है कि कुछ आतंरिक शिकायतों के बाद उनसे इस डेस्‍क की जिम्‍मेदारी ली गई है. इस संदर्भ में जब धर्मेन्‍द्र से बात की गई तो उन्‍होंने बताया कि यह रुटीन चेंज है. इसमें शिकायत जैसी कोई बात नहीं है.

खबर है कि उनकी जगह आसपास की जिम्‍मेदारी सीनियर सब एडिटर रवि प्रकाश सिन्‍हा को दी गई है. रवि प्रकाश प्रभात खबर से इस्‍तीफा देकर दैनिक भास्‍कर पहुंचे हैं. रवि इसके पहले भी कई अखबारों में काम कर चुके हैं. रवि से जब इस संदर्भ में बात की गई तो उन्‍होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

भास्‍कर, इंदौर ने वकील के उठावने का झूठा विज्ञापन छापा

: अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज : भास्‍कर ने प्रथम पेज पर छापा खंडन : इंदौर। इंदौर में एक राष्ट्रीय दैनिक के स्थानीय संस्करण में एक वकील के उठावने का झूठा इश्तेहार छपवाने के बाद एक वकील परिवार परेशान हो गया, उनके चार पुत्र भी वकालत के पेशे से जुड़े है। अधिवक्‍ता एवं अखबार की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है।

‘दैनिक भास्कर’ में 6 नवंबर के अंक में शोक संदेश के कॉलम ‘निजी’ में पेज 6 पर वकील शिवचरण शर्मा के उठावने का झूठा इश्तेहार (विज्ञापन) छपा था, इसमें उनका हाफ कालम फोटो भी छपा था। यह देखकर रविवार को कई वकील एवं परिजन श्री शर्मा के साउथ तुकोगंज थाना क्षेत्र स्थित गंगा-जमुना अपार्टमेंट पर पहुंचे, लेकिन वे वहां जाकर तब दंग रह गए जब उन्हें श्री शर्मा सकुशल मिले। मामला गरमाया तो शर्मा परिवार ने अखबार के दफ्तर से संपर्क साधा तो पता चला कि कोई शरारती तत्व ने परिजनों के नाम लिखकर इश्तेहार दिया था और फर्जी हस्ताक्षर किए थे।

यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि जो तस्वीर छपी थी वह चार साल पुरानी है। इस पर शर्मा परिवार ने तुकोगंज थाने में शिकायती पत्र दिया है। जबकि भास्कर की ओर से झूठा इश्तेहार छपवाने पर आरोपी के खिलाफ एमआईजी थाने में केस दर्ज कराया गया है। सीएसपी अमरेंद्रसिंह के मुताबिक प्रकरण में जांच की जा रही है। इस संदर्भ में इसे झूठे विज्ञापन के कारण परेशानी में आए शिव चरण शर्मा ने कहा कि भास्‍कर ने प्रथम पेज पर छापकर अच्‍छा व्‍यवहार किया है, इसलिए उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई या शिकायत नहीं की जाएगी। श्री शर्मा ने बताया कि मुझे कुछ लोगों पर शक है, भास्‍कर कार्यालय के सीसी टीवी में भी उनकी तस्‍वीरें मौजूद हैं, जल्‍द ही पता लग जाएगा कि यह शरारत किसने की है। उन्‍होंने कहा कि अब मामला खत्‍म हो गया है। नीचे भास्‍कर में प्रकाशित खबर …

                     वकील का झूठा विज्ञापन छपवाने वाले के खिलाफ केस

फर्जी दस्तावेज व हस्ताक्षर के आधार पर शहर के प्रतिष्ठित वकील शिवचरण शर्मा (एससी शर्मा एंड एसोसिएट्स) के उठावने का झूठा विज्ञापन छपवाने वाले के खिलाफ रविवार रात एमआईजी पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। सीएसपी अमरेंद्र सिंह व टीआई अनिल शर्मा ने बताया अज्ञात आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

रविवार को दैनिक भास्कर समाचार पत्र के पृष्ठ क्रमांक 6 पर प्रकाशित निजी कॉलम में किसी ने कूटरचित दस्तावेज के आधार पर साउथ तुकोगंज में रहने वाले एडवोकेट शिवचरण शर्मा के उठावने का झूठा विज्ञापन प्रकाशित करवाया था। विज्ञापन देखकर एडवोकेट श्री शर्मा भास्कर कार्यालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे पूर्ण स्वस्थ हैं। किसी ने रंजिश के चलते उनके साथ धोखाधड़ी की है। उन्होंने पुष्टि की कि किसी ने उनके परिवार के सदस्यों के नाम लिखकर विज्ञापन दिया है जिसमें फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए।

साथ ही आवेदन में श्री शर्मा के एक परिचित का मोबाइल नंबर भी दे दिया। दस्तावेज के साथ जो तस्वीर दी है वह भी लगभग चार साल पुरानी है। इस संबंध में उन्होंने अज्ञात आरोपी के खिलाफ तुकोगंज थाने में शिकायती आवेदन दिया है। श्री शर्मा के साथ हुई इस घटना के बाद भास्कर की शिकायत पर एमआईजी पुलिस ने झूठा विज्ञापन छपवाने वाले आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया है।

सूचना विस्‍फोट पर प्रतिबंध का ढक्‍कन लगाने की तैयारी!

मीडिया को लेकर देश के लगभग सभी राजनीतिक दल इस समय परेशान हैं। अधिकांश विपक्षी दल भी कम से कम इस एक मुद्दे पर तो सरकार के साथ हैं कि मीडिया पर लगाम लगाने की जरूरत है। सत्तारूढ़ सरकारें समय-समय पर मीडिया को कसने के प्रयोग करती रही हैं। आपातकाल के दौरान भी विपक्ष के पैरों में बेड़ियां व मीडिया के हाथों में चूड़ियां पहनाई गई थीं।

मीडिया का एक प्रभावशाली वर्ग तब घुटनों के बल झुकने की मांग करने पर रेंगने को भी बेताब था। पर तब भी प्रेस के खिलाफ सेंसरशिप का पुरजोर विरोध किया गया था। राजीव गांधी के शासनकाल में भी प्रेस को नियंत्रित करने का प्रयत्न हुआ था, पर तब भी इतना विरोध उभरा था कि वह संभव नहीं हो पाया था।

मीडिया एक बार फिर सरकार की चर्चा और सांसदों के हमलों की चपेट में है और उसके इरादों और नीयत को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं। अन्ना के आंदोलन के दौरान मीडिया द्वारा अपनाई गई भूमिका को लेकर फब्तियां कसी जा रही हैं और उसके ‘बेलगाम’ कवरेज पर सवाल उठाए जा रहे हैं। समझदार लोगों को और समझाया जा रहा है कि अगर मीडिया का समर्थन नहीं होता तो अन्ना के आंदोलन को इतना व्यापक समर्थन नहीं मिलता।

निष्कर्ष यह कि सरकार के खिलाफ सिविल सोसायटी के किसी भी सार्थक आंदोलन को अगर भोथरा करना हो तो उसके लिए पहले मीडिया पर डंडे चलाना जरूरी है। मीडिया को अनुशासित करने की पहल दो स्तरों पर की जा रही है। पहली यह कि अगर इलेक्ट्रॉनिक चैनलों द्वारा प्रसारित की जाने वाली सामग्री के लिए निर्धारित शर्तो और ‘अनुशासन’ में उल्लंघन होता है तो उनके लाइसेंसों का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। नए चैनलों के लिए लाइसेंस जारी करने को लेकर भी नए सिरे से प्रावधानों की व्याख्या की गई है। इलेक्ट्रॉनिक चैनलों ने ‘स्वानुशासन’ के पालन में न्यायमूर्ति जेएस वर्मा की देखरेख में अपने लिए पहले से दिशा-निर्देश तय कर रखे हैं और उनका यथासंभव पालन भी किया जा रहा है। पर सरकार की नई पहल इन आशंकाओं को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को उसके ‘स्वानुशासन पर्व’ से मुक्त करना जरूरी है।

मीडिया पर लगाम कसने का दूसरा उपक्रम वर्ष 2009 के चुनावों के बाद ‘पेड न्यूज’ को लेकर उठी बहस से उत्पन्न हुआ है। कहा जा रहा है कि पेड न्यूज की बुराई पर रोकथाम के लिए कड़े से कड़े कानूनी प्रावधानों की जरूरत है। पेड न्यूज के मुद्दे को हथियार बनाकर समाचार पत्रों की कथित ‘मनमानी’ रोकने को लेकर भी सभी दलों की सोच लगभग समान है। ‘जनहित’ के नाम पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिशें केंद्र में भी की जा रही हैं और उन राज्यों में भी, जहां कतिपय मुख्यमंत्री इतने ताकतवर हो गए हैं कि मौका मिलने पर प्रधानमंत्री बनकर देश को चलाने की भी महत्वाकांक्षा रखते हैं।

मीडिया को लेकर चल रही बहस में अब भारतीय प्रेस परिषद के नवनियुक्त अध्यक्ष न्यायमूर्ति मरकडेय काटजू का वह उद्बोधन भी शामिल हो गया है, जो उन्होंने पिछले दिनों दिया था। श्री काटजू के अनुसार कई लोगों, जिनमें जो सत्ता में हैं वे ही नहीं, बल्कि आमजन भी शामिल हैं, ने कहना शुरू कर दिया है कि मीडिया गैरजिम्मेदार व स्वच्छंद हो गया है, अत: उसे नियंत्रित किया जाना जरूरी है। उनका यह भी कहना है कि मीडिया की स्वतंत्रता भी संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) में दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ही हिस्सा है। पर कोई भी स्वतंत्रता असीमित नहीं हो सकती। उस पर उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।

श्री काटजू का यह भी मानना है कि मीडिया की कमियों को दूर करने के दो ही तरीके हैं। एक तो प्रजातांत्रिक तरीका, जिसमें आपसी चर्चा और समझाइश की व्यवस्था है, जिसे कि वे स्वयं भी महत्व देना चाहेंगे। दूसरा यह कि अगर मीडिया सुधरने से इंकार कर दे तो अंतिम उपाय के रूप में उसके खिलाफ कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि गलती करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए, उनके सरकारी विज्ञापन बंद कर दिए जाएं, लायसेंस रद्द कर दिए जाएं। श्री काटजू ने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया तथ्यों को तोड़ता-मरोड़ता है, गैर-जरूरी मुद्दों को उछालता है, देश की कड़वी आर्थिक सच्चाइयों की तरफ आंखे मूंदे रखता है और बम-धमाकों आदि घटनाओं की जानकारी देने के दौरान एक समुदाय विशेष को आतंकवादी या बम फेंकने वाला दर्शाने की प्रवृत्ति मीडिया की रहती है। श्री काटजू पूछते हैं कि क्या मीडिया का जाने-अनजाने ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति का हिस्सा बनना उचित है?

सरकार को सिविल सोसायटी के आंदोलन व उसके मीडिया कवरेज से परहेज है। टीम अन्ना पर किए जा रहे लगातार हमले इसका प्रमाण हैं। विपक्षी पार्टियों को सलाह दी जा रही है कि वे नकारात्मक रवैया छोड़ें यानी सरकार की कमियों और गलतियों को ढूंढ़ना बंद कर दें। न्यायपालिका के बारे में कहा जा रहा है कि वह लक्ष्मण रेखा लांघ रही है। और अब मीडिया को अनुशासित करने के लिए अलग-अलग माध्यमों की मदद ली जा रही है। इस भ्रम का कोई इलाज नहीं है कि मीडिया और मीडियाकर्मियों को ‘अनुशासित’ और ‘नियंत्रित’ करके सूचना के विस्फोट पर प्रतिबंधों के ढक्कन नहीं लगाए जा सकते।

‘मुक्त व्यापार’ और ‘नियंत्रित समाचार’ की जुगलबंदी की कोई भी कोशिश लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। मीडिया लक्ष्मण रेखा लांघता है तो उससे निपटने को बाजार की ताकतें व एक परिपक्व दर्शक/पाठक वर्ग हमेशा तैयार बैठा है। मीडिया को इस समय समाज की उन ताकतों के खिलाफ संरक्षण की जरूरत है, जो उसकी आवाज को कुचलने और कुतरने के षड्यंत्र में लगी हुई हैं। इसमें निहित स्वार्थो वाले सभी तरह के राजनेता, धर्मगुरु, कॉपरेरेट घरानों के लॉबिस्ट और हर तरह का माफिया शामिल हैं। एक तरफ सूचना उजागर करने वालों (व्हिसलब्लोअर्स) के खिलाफ हमलों की वारदातें बढ़ रही हैं और दूसरी तरफ ‘सूचना के अधिकार’ और ‘सूचना के वाहकों’ को नियंत्रित करने की कोशिशें भी जारी हैं। इन विरोधाभासी मुखौटों के साथ अपने लोकतंत्र का दुनिया से अभिषेक करवाने की उम्मीदें नहीं की जा सकतीं।

लेखक श्रवण गर्ग वरिष्‍ठ पत्रकार एवं दैनिक भास्‍कर के संपादक हैं. उनका यह लेख दैनिक भास्‍कर में छप चुका है. इसे वहीं से साभार लेकर प्रकाशित किया जा रहा है.