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बातों बातों में

आजकल अखबार और खबरिया चैनल खबरों के कम मनोरंजन के केन्द्र ज्यादा बने हुए हैं। राजनेताओं के साफ-सुथरे और पारदर्शी फूहड़पन को जितनी चुस्ती-फुर्ती...

साहित्य जगत

: दयानंद पांडेय का उपन्‍यास : ‘ख़ुश रहो।’ कह कर दीपक ने फ़ोन रख दिया। वह रमेश की इस सर्द बातचीत से बहुत उदास...

राजनीति-सरकार

आडवाणी जी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर फिर से एक रथ यात्रा पर निकालने का ऐलान किया है। आडवाणी जी द्वारा रथ यात्रा के ऐलान...

बातों बातों में

एक पागल पूरे देश में घूम-घूम कर चिल्ला रहा था। भ्रष्टचारी दानव! भ्रष्टाचारी दानव! भ्रष्टाचारी दानव! घूमते-घूमते वह दिल्ली आ गया। दिल्ली में उसने...

तेरा-मेरा कोना

नेट पर लन्दन से एक लेखिका की लिखी रिपोर्ट ने वास्तव में भारतीय होने पर शर्मिंदगी का भाव पैदा किया है. उस रिपोर्ट के...

मेरी भी सुनो

हिंदी दिवस, हिंदी पखवाड़े और हिंदी माह लगभग सभी सरकारी विभागों में आयोजित किये जाते हैं। जिसमें कि हिंदी के प्रतिष्ठित कवि-पत्रकार-कथाकार भाग लेते...

तेरा-मेरा कोना

स्त्री वामा है, अर्धांगिनी है, श्रेष्ठा है। वह कमला भी है शक्ति भी है और दुर्गा भी है, वह कुलटा, हरजाई और भोग्या भी...

राजनीति-सरकार

दोहरे चरित्र रखने वाले व अति हिन्दू विरोध से लथपथ देश के बुद्धीजीवियों व गैर तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक संवर्ग निश्चित तौर पर मुस्लिम आबादी...

साहित्य जगत

: दयानंद पांडेय का उपन्‍यास : वह क्या करें? किंकर्त्तव्य विमूढ़ हुआ एक वृद्ध पिता सिवाय अफ़सोस, मलाल और चिंता के कर भी क्या...

राजनीति-सरकार

राजनीति से मर्माहत एक विद्वान ने कहा था कि ‘पॉलिटिक्स इज द गेम आफ स्कॉन्ड्रल्स’ अर्थात राजनीति ‘घाघ लोगों का खेल’ है। 15वीं लोकसभा...

मेरी भी सुनो

अपनी बातें दूसरों तक पहुंचाने के लिए पहले रेडियो, अखबार और टीवी एक बड़ा माध्यम था। फिर इंटरनेट आया और धीरे-धीरे उसने जबर्दस्त लोकप्रियता...

मेरी भी सुनो

हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं बल्कि हमारी राज भाषा है. संविधान के भाग-१७ के अनुच्छेद ३४३ के अनुसार हिंदी को संघ की राजभाषा का दर्ज़ा...

देश-प्रदेश

औपचारिक समारोह का प्रतीक बनकर रह गया है-हिन्दी दिवस, यानी चौदह सितम्बर का दिन। सरकारी संस्थानों में इस दिन हिन्दी की बदहाली पर मर्सिया...

साहित्य जगत

मुक्ति व्यक्ति की चेतना का अनन्य सहजता की दिशा में रुपांतरण है। यह व्यक्ति का महत्तम महामौन है, जो अपनी प्रचंड चुप्पी में अप्रतिहत...

बातों बातों में

नेताजी के यहां चोरी हो गई। शहरभर में तहलका मच गया। कोई पुलिस व्यस्था को कोस रहा था तो कोई चोर की दिलेरी की...

साहित्य जगत

: दयानंद पांडेय का उपन्‍यास : ‘क्या?’ रमेश बिदका। ‘आई लव यू। आई लव मुनमुन। आई लव बांसगांव। आल आफ़ बांसगाव। लव-लव-लव!’ ‘क्या बक...