अनुरंजन के खिलाफ सीएनईबी चेयरमैन को चिट्ठी

किसी भी अखबार, चैनल में बदलाव स्वाभाविक नियम होता है. कभी टीम लीडर बदल दिया जाता है तो कभी टीम के सदस्य. सीएनईबी भी बदलाव के दौर से गुजर रहा है. राहुल देव के हाथों सीएनईबी को पूरी तरह सौंपने, उन्हें काम करने-कराने व टीम बनाने की पूरी आजादी देने के कई वर्ष बाद सीएनईबी के मालिकान ने फिर बदलाव का रास्ता पकड़ा है.

राहुल देव से पहले भी सीएनईबी में जो टीम लीडर हुआ करते थे, वे बदले गए, और राहुल देव भी एक न एक दिन बदले जाने थे. हालांकि वे अब भी सीएनईबी में हैं, उनका इस्तीफा नहीं हुआ है. लेकिन उनके लोग हटाए जाने लगे हैं. अपूर्व श्रीवास्तव व श्रीपति पर गाज गिरी है. इन्हें बचाने की कवायद हुई, राहुल देव ने इनके जाने को प्रेस्टीज इशू बनाया. पर संभवतः ये दोनों बच नहीं पा रहे हैं. इन्हें हटाए जाने के आदेश दुबारा आ गए हैं. कई और लोग निशाने पर हैं. अनुरंजन ने हाथ-पांव खोल लिया है अपना. बैटिंग शुरू कर दी है. सो, सीएनईबी में हलचल मची हुई है. अब जब दोनों खेमे आमने-सामने आ चुके हैं तो चरित्र-हनन का खेल भी शुरू हो चुका है. मेलबाजी का दौर प्रारंभ हो गया है.

फिलहाल राहुल देव के लोगों ने सीएनईबी के चेयरमैन को चिट्ठी लिखकर सीएनईबी के हालात व अनुरंजन के चरित्र के बारे में उनको बताया है. संभव है, कल अनुरंजन के लोग सीएनईबी के चेयरमैन को चिट्ठी लिखकर सीएनईबी के अब तक खराब रहे हालात की वजह और राहुल देव के चरित्र के बारे में बताने में जुट जाएं. आज अनुरंजन के खिलाफ सीएनईबी के चेयरमैन को गई चिट्ठी को हम यहां छाप रहे हैं. कल राहुल देव के खिलाफ जाने वाली चिट्ठी को भी हम छापेंगे, अगर प्राप्त हुई तो. पर सबसे मजेदार तथ्य यह है कि सीएनईबी के मालिकान भी चाह रहे हैं कि एक बार दोनों खेमों में जमकर दो-दो हाथ हो ही जाए.

आमतौर पर जब किसी अखबार या न्यूज चैनल में टीम लीडर के स्तर पर  बदलाव होता है तो सब कुछ हफ्ते भर में स्पष्ट हो जाता है. यह तो स्पष्ट हो ही जाता है कि अब किसकी चलेगी. ऐसे में पुराना टीम लीडर खुद ब खुद छोड़कर चला जाता है. उनके लोग भी एक-एक कर इस्तीफा दे जाते हैं. कुछ लोग होते हैं जो निष्ठा पलट कर खुद की कुर्सी बचा ले जाते हैं और नए राज में भी पुराने राज की तरह सुखों का भोग करते रहते हैं.

पर सीएनईबी में सरदार जी लोगों ने दोनों को लालीपाप थमा रखा है. राहुल देव इस्तीफा नहीं दे रहे हैं, अनुरंजन खुद को सीईओ और एडिटर इन चीफ से कम मान नहीं रहे हैं. जो नए डेवलपमेंट हैं, उससे तो पता यही लग रहा है कि अनुरंजन को सरदारजी लोगों का पूरा समर्थन प्राप्त है. लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि सरदार जी लोग राहुल देव से जाने को साफ-साफ क्यों नहीं कह पा रहे हैं या फिर राहुल देव बिना साफ-साफ सरदार जी लोगों के मुंह से सुने चैनल क्यों नहीं छोड़ रहे. अगर राहुल देव को रखना ही है तो उन्हें सीईओ और एडिटर इन चीफ के रूप में रखना चाहिए, जिस रूप में वे रहते आए हैं. फिर अनुरंजन में राहुल देव की शक्तियां क्यों ट्रांसफर कर दी गई हैं. चलिए, इस नूराकुश्ती के ताजा एपिसोड के बारे में जानें. वो पत्र पढ़ें जो सीएनईबी के चेयरमैन को भेजी गई है.

-एडिटर, भड़ास4मीडिया



आदरणीय चेयरमैन सर,

यह पत्र आपको आश्चर्य में भी डाल सकता है और नहीं भी। लेकिन यह हम उन लोगों की चिंता है जो श्री राहुल देव के निमंत्रण और आपकी शुभकामनाओं को साथ ले कर सीएनईबी को एक आदर्श चैनल बनाने में पिछले बहुत समय से लगे हुए है। हमें अच्छा लगता रहा कि हमारे मार्ग दर्शक के तौर पर आपने चैनल को आकार देने में पूरी रचनात्मक आजादी दी और खास तौर पर सिर्फ टीआरपी बटोरने के लिए अपराध और सस्ती लोकप्रियता के कार्यक्रमों से चैनल को दूर रखा। इसी वजह से संसाधनों की कमी के बावजूद चैनल को एक अलग तरीके की प्रतिष्ठा मिली। राहुल देव के तौर पर भारतीय पत्रकारिता का  एक सबसे बड़ा नाम चैनल के साथ था और इससे भी हमारी विश्वसनीयता और बढ़ी।

हाल के दिनों में चैनल में जो हो रहा है उससे हम लोग सिर्फ आहत ही नहीं, चैनल के भविष्य को ले कर काफी चिंतित भी है। चैनल के स्वामी आप है इसलिए फैसला निश्चित तौर पर आपका ही होगा किंतु हम नहीं चाहते कि अब यह चैनल भी दलालों द्वारा चलाया जाने वाला एक और विचारहीन चैनल मान लिया जाए।

जब अनुरंजन झा को चैनल में लाया गया था तो हममें से सब को उम्मीद बंधी थी कि आप प्रशासन और आमदनी के पक्ष की ओर भी सोच रहे हैं और इससे सबका भला होने वाला है। खुद श्री झा ने अलग अलग पोर्टलों और वेबसाइटों पर कहा था कि वे आपकी आज्ञा से राहुल देव के हाथ मजबूत करने आए हैं।

मगर जो हो रहा है उससे जो कहा गया था, उसका जरा भी आभास नहीं मिल रहा। हमे नहीं मालूम कि पता नहीं कब अनुरंजन झा संपादकीय मामलों के भी जिम्मेदार हो गए और अपनी मर्जी से लोगों को भर्ती करने और निकालने लगे? क्या श्री राहुल देव को प्रधान संपादक और सीईओ के पद और जिम्मेदारियों से मुक्ति दे दी गई थी? महाखबर के बहाने बहुत सारे महत्वपूर्ण लोग चैनल से जुड़े मगर अब तो हालत यह है कि उस अयोध्या फैसले पर हमारे यहां कोई कार्यक्रम नहीं गया जिसका स्वागत देश के हर वर्ग ने किया है। हमें यह कहने की अनुमति दीजिए कि हमारी इस एक गलती ने हमारी प्रतिष्ठा को बहुत चोट पहुंचाई है।

श्री अनुरंजन झा की कोई तो प्रतिभा होगी जिससे आप प्रभावित हुए होंगे। मगर जहां जहां उन्होंने काम किया है, वहां से पता लगा कर देखिए या किसी को जिस पर आप विश्वास करते हों, पता लगाने के लिए नियुक्त करिए तो आप जान पाएंगे कि श्री झा पर ब्लैकमेलिंग से ले कर प्रबंधन के खिलाफ बगावत करने तक के आरोप लग चुके हैं। हमारे चैनल में जहां हम सब आपके नेतृत्व में एक परिवार की तरह रह रहे थे वहां वरिष्ठ महिला सहयोगियों के साथ भी अब अमानवीय व्यवहार होने लगा है। चैनल में काम करने वाली महिलाएं भी इससे आहत और आतंकित हैं।

श्री झा पत्रकारिता का कितनी रुचि रखते हैं इसका उदाहरण ये ही है कि इस बिहार चुनाव में भी उन्होंने टिकट मांगा था और उनका कहना है कि आखिरकार तो उन्हें राजनीति में ही जाना है। आप इसकी पुष्टि बिहार के राजनेताओं और खासतौर पर जनता दल यूनाइटेड के अलावा कांग्रेस के नेताओं से भी कर सकते हैं। पत्रकारिता में उनकी छवि के बारे में आप खुद जिन्हे उचित समझे उनसे उनके बारे में पूछ सकते हैं। एस-1 चैनल से इन्हे निकाला ही ब्लैकमेलिंग के आरोप में गया था। और इसकी पुष्ठि आप एस-1 के मालिक विजय दीक्षित से कर सकते हैं… उनका मोबाइल नंबर 9811057970 है। इंडिया न्यूज जहां से भी इन्हें निकाला गया और अब वहां से बर्खास्त लोगों को सीएनईबी को कूड़ेदान समझकर पटका जा रहा है वहां श्री झा की प्रतिष्ठा कितनी है इसके लिए इस चैनल के मालिक कार्तिकेय शर्मा से 9910116669 पर बात की जा सकती है।

हम ने आपके साथ सपना देखा कि हमारे चैनल को समाज में आदर और विश्वास मिले और उस दिशा में हम काफी सीमा तक कामयाब भी हुए। और इसकी वजह कोई और नहीं राहुल देव का नाम है। जो प्रतिष्ठा पद और कद के अलावा ज्ञान में समकालीन पत्रकारिता में सबसे आगे माने जाते हैं। अब भी मीडिया बाजार में बात करिए तो हमारे चैनल को लोग राहुल देव वाला चैनल कह कर ही पहचानते हैं।

आप बड़े हैं इसलिए हम आपसे ही दिशा मिलने की उम्मीद करते हैं कि हमें अपने चैनल और पत्रकारिता के प्रति अपनी निष्ठा का ध्यान रखना चाहिए या  एक घोषित दलाल की हर बात मान लेनी चाहिए। यह दूसरा विकल्प हमें काफी कठिन महसूस हो रहा है फिर भी हम  नियमानुसार काम कर रहे हैं। सीएनईबी में काम करना हमारे लिए सिर्फ रोजगार नहीं है। हम पहले काम कर रहे थे बड़े चैनलों में काम कर रहे थे और काम तो हमे मिल ही जाएगा। जिस वाहे गुरु ने जन्म दिया है उसकी कृपा और अपनी क्षमता पर हमारी पूरी आस्था है।

चैनल आपका है। फैसला आपका होगा। लेकिन जिस दिशा में चैनल जा रहा है उसका भविष्य बहुत अच्छा नहीं लग रहा है और यही हमारी चिंता है। आपसे सवाल करने की हमारी हैसियत नहीं है लेकिन आप खुद अपने आप से सवाल करना चाहे तो पूछ सकते हैं। कहां क्या गलत हुआ है और क्या उसे सुधारा नहीं जा सकता। हम आपके साथ हैं और हमें पूरा विश्वास है कि आपका आशीर्वाद भी हमारे साथ हमेशा बना रहेगा।

(पत्र लेखकों का नाम नहीं दिया जा रहा है. मेल व पत्र की मूल प्रति भड़ास4मीडिया के पास सुरक्षित है)

Comments on “अनुरंजन के खिलाफ सीएनईबी चेयरमैन को चिट्ठी

  • Kaha Rahul Dev ji aur Anuranjan jha ? Zameen-Aasmaan ka antar ! Anuranjan ko Rahul dev ban ne mein kam se kam 2 janm to lena hi padega. Anuranjan ko itni badi post ya Zimmedaari kaise saunp dete hain , Aashcharya hota hai ! Ghrina aati hai in Media Maaliqo se , jo kisi ko kuch bhi bana dete hain . Na yogyata dekhte hain na Qaabiliyat ! Bus , Kahin se naam sun liya aur bula liya ! Kaam ki jagah Naam ke zariye Media ke beda-garq karne waalo ki taadad badhti ja rahi hai .
    Kuch dinon mein Media Maaliq log JOURNALIST ki jagah SALESMEN ko News Head banaane lagenge .
    Ye hai NATIONAL ka THAPPA lagaaye News Channels ka haal ! Puri Tarah Behaal.
    Par vinaash kaale-Viprit Buddhi ! CNEB ne koyle ko heera samajh liya hai ! Upar waala khair kare !

    Reply
  • subhpratap singh says:

    desh main saaf-suthre tareeke se baat (khabar) batane bale channel baise hee nahi (DD ko chhodhkar) .uper se CNEB bhi lagta hai dusre khabria channel ke raste par jane kee taiyari main hai….ham shrotaon kee kismat hee lagta hai kharab hai..Allah khair karen!
    shubh

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  • What is in name says:

    Dear Yashwant, Plz start this planned propogenda against Anuranjan Jha. Kuchh dino pahe to aap unako apna website bechna chahte the ab kyo gariya rahe ho.

    Reply
  • यशवंत says:

    ‘What is in name’ वाले भाई साहब, भड़ास के सैकड़ों खरीदार पैदा हो चुके हैं. उनमें एक अनुरंजन झा भी हुआ करते थे. अब नहीं हैं, क्योंकि उन्हें बेचा नहीं, और वो खरीद नहीं पाए. मुझे कभी कभार खुद को दाम लगवाने का शौक चढ़ जाता है, इसका मतलब तो नहीं कि मैं भड़ास बेच रहा हूं. दूसरी बात, अनुरंजन को नजदीक से तभी जान पाया जब उनसे कुछ एक बार नजदीक से संवाद हुआ, तमाम मुद्दों पर बात हुई. अनुरंजन अगर नेता बनना चाहते हैं, मीडिया पोर्टल खरीदकर कुछ और करना चाहते हैं, सीओओ बनकर सीएनईबी और खुद का उद्धार करना चाहते हैं तो ये कोई गलत बात नहीं है. हर आदमी अपने बेटरमेंट के लिए लड़ रहा है और जी रहा है. जो जितना शार्प, सधा हुआ, कनिंग, स्वार्थी, सेल्फ-सेंट्रिक होता है, वो उतना ही आगे जाता है. इसमें कोई बुरा मानने वाली बात नहीं. और, भड़ास को बेचना या न बेचना तो उस तरह का काम तो नहीं है जैसे किसी की हत्या कर देना या बलात्कार कर देना. अपन की चीज है, जब तक चलाएंगे चलाएंगे. जब बेचना होंगे बेच देंगे. जब बंद करना होगा बंद कर देंगे. लेकिन इतना मैं जरूर कह सकता हूं कि ये काम सिर्फ यशवंत ही कर सकते हैं कि क्योंकि वे जो करते हैं ईमानदारी से करते हैं, सामने आकर करते हैं और डंके की चोट पर करते हैं. वरना मैं भी ‘What is in name’ टाइप का नाम रखकर देश के सैकड़ों लोगों के चरित्र की समीक्षाएं किया करता और रात तक यह सब कर कर खाली हाथ, खाली दिमाग और खाली चरित्र के साथ मुंह बाए सो लिया करता. बंधु, जो कहना हो सामने आकर कहो, खुलकर लिखो, और भेजो. उसे मुझे छापने में कोई दिक्कत नहीं होगी. कंटेंट के मोर्चे पर काम करने के साथ साथ मैं बिजनेस के मोर्चे पर ढेर सारी प्लानिंग करता रहता हूं. कभी पास बैठिएं तो बताऊं मेरे पास क्या क्या बिजनेस प्लांस हैं. जानेंगे तो आंखें फटी की फटी रह जाएंगी. क्योंकि जो प्लान हैं, वे ढके छुपे नहीं, खुलेआम हैं. इस सिलसिले में दर्जनों लोगों के साथ बैठकें होती रहती हैं. जब इच्छा होगी तो करेंगे, न होगी न करेंगे. कहने का आशय इतना कि अनुरंजन से न दोस्ती है न दुश्मनी, राहुल देव से न दोस्ती है न दुश्मनी. किसी से न पैसा लिया है, न किसी को पैसा दिया है. किसी से न पंगा है, और न किसी से प्यार है. खबर है तो छपेगी. डंके की चोट पर छपेगी. यही भड़ास की यूएसपी है, जिसे अनुरंजन और आप जैसे अनुरंजन के शिष्यों को सीखना व समझना चाहिए.

    यशवंत
    भड़ास4मीडिया

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  • SUKUMAR SEN GUPTA says:

    Rahul Deo ke liye mere man mein bahut izzat hai… main hi kyon sabhi unki izzat karte hain LEKIN is episode ke baad unhone khud apni izzat kharab kar li hai. itne senior pad ke logon ko malik kabhi hataata nahi balki ishara karta hai.ye ishara Rahul ji ko usi din mil gaya tha jis din unki merzi aur jankari ke bina Anuranjan ka appointment hua tha. Agar koi khuddar vyakti CEO ke pad per hota to usi din isteefa de deta… lekin afsos Rahul ji ab wo samman desrve nahi karte.. AB KYA MALIK GARDAN PE HAATH RAKH KAR NIKALENGE TABHI JAYENGE ?

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  • अपूर्व श्रीवास्तव जी आप अपने मुह पर हाथ रख कर देखो, आप जैसे आरोप दूसरो पर लगा रहे हो , सुना है की आप ने भी तरक्की उन सभी गलत काम कर के पाई है . अब नौकरी जा रही है तो मालिक को बता रहे है पहले जब मलाई चाट रहे थे तब मालिक याद नहीं आया ………………………

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  • hemant mishra says:

    sikayat karna kitna aasan hai bas kagaj kalam utaiye aur jo bhadas ho nikal lijiye.cneb ke in mahanubhawo ne abhi tak jo jangal raj banakar rakha tha waha jaise hi aag lagi to machal gaye.inhe agar cneb ki chinta sata rahi hoti to sayad aaj chitthi me kewal aur kewal anuranjan ji ki tareef hoti.mera koi lenadena nahi hai cneb se lekin channel ko pahle aur ab dekhe …..sayad sabhi ko aisa hi lage ga jaise budha ab jawan ho gaya hai.kisi ykti ke bare me aaroop lagana kitna aasan hai …aur jab aise log aarop lagaye jinke khud ke hath kichad se sane hai…jinhe channel ke content se jyada channel me kam karne wali mahila karmchariyo ki jyada fikar rahti hai….apoorv ji aapke bare me to kya kaha jaye…..bas ek kahawat yad aagai…soop bole to bole chalni kya bole jise saikdo ched.khed hai mujhe ye kahne me ki media me aaaj bhi aaise log hai jo kewal channel ko hi nahi balki patrkarita ko noch kar khane me lage hai.dhany hai ye chitthi aur dhany hai ise likhne wale……are ab to sudhar jao….pata hai sabko ki yaha se nikale jane ke bad sayad hi aap ko koi naukari de..naukari bachane ke liye aisi rajneeti?

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