सरान ने सीएनईबी से बड़े पैमाने पर छंटनी की

सीएनईबी न्यूज चैनल से खबर है कि यहां करीब दर्जन भर से ज्यादा लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक सीएनईबी चैनल के मालिक और वर्तमान चैनल हेड अमनदीप सरान ने छंटनी की लिस्ट जो तैयार कराई, उसे एचआर विभाग ने इंप्लीमेंट करना शुरू कर दिया है. करीब 16 लोगों को बता दिया गया है कि उनकी सेवा इस माह के आखिर तक ही है, वे चाहें तो आफिस आ सकते हैं या चाहें तो घर रह सकते हैं, उन्हें 30 सितंबर तक की सेलरी दे दी जाएगी.

उसके बाद उनका संस्थान से कोई लेनादेना नहीं रह जाएगा. छंटनी के शिकार लोगों में कई लोग ऐसे हैं जो करीब तीन वर्षों से सेवा दे रहे थे. कुछ लोग अनुरंजन झा के कार्यकाल में रखे गए थे. सूत्रों के मुताबिक प्रबंधन जहां नए लोगों की भर्ती में लगा हुआ है वहीं पुराने लोगों को निकालने का काम तेज कर दिया है. निकाले गए लोगों में सभी प्रोड्यूसर और उसके नीचे के पदों पर कार्यरत हैं. छंटनी की लिस्ट में जिन जिन का नाम है, उनकी सूची भड़ास4मीडिया के पास भी है पर इनके करियर पर नकारात्मक असर पड़ने को देखते हुए वह सूची प्रकाशित नहीं की जा रही है.

उल्लेखनीय है कि सीएनईबी चैनल के दिन प्रतिदिन के कामकाज का इन दिनों सीधे चैनल के मालिक अमनदीप सरान संचालन कर रहे हैं. कभी यह चैनल इस बात के लिए मशहूर था कि यहां मालिकान अपने उदार रवैये के कारण किसी की रोजी-रोटी नहीं छीनते. पर अब यह मिथ टूट चुका है. खुद चैनल के मालिक छंटनी की लिस्ट तैयार कराकर उसे एचआर डिपार्टमेंट के जरिए एक्जीक्यूट करा रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि इस चैनल के संचालन पर खर्च कम करने की कवायद के तहत ही छंटनी की जा रही है और अन्य खर्चों में भी कटौती की जा रही है. आने वाले दिनों में चैनल के भीतर कई और बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

उपरोक्त तथ्य चैनल से जुड़े कुछ लोगों से बातचीत पर आधारित है. अगर सूचनाओं में कोई कमी-बेसी दिखे तो उसका खंडन-मंडन नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए कर सकते हैं.

चेयरमैन अमनदीप सरान सीधे हैंडल कर रहे हैं सीएनईबी न्यूज चैनल

सीएनईबी से अनुरंजन झा और उनकी टीम की विदाई के बाद कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं. सबसे बड़ा बदलाव तो यही है कि इस चैनल को अब किसी बड़े एडिटर की जरूरत बिलकुल नहीं है. खुद अमनदीप सरान चैनल को हैंडल कर रहे हैं. वह ग्रुप की मीडिया कंपनी के चेयरमैन हैं. अभी तक उनका न्यूज चैनल में दखल पालिसी मैटर तक ही हुआ करता था लेकिन अनुरंजन झा के जाने के बाद वह हर एक से सीधे मिल रहे हैं और सभी को यह कह चुके हैं कि किसी को कोई समस्या हो तो वो सीधे उनसे मिले.

इस बीच, पता चला है कि अनुरंजन झा ने जिस अंशुल शुक्ला को बाहर का रास्ता दिखा दिया था, उन्होंने वापसी कर ली है. उन्होंने आउटपुट हेड का काम संभाल लिया है. नए आए रजनीश सिर्फ कंटेंट का काम देख रहे हैं. रजनीश दिन भर न्यूज रूम में मिलते हैं. सबके स्क्रिप्ट चेक करने तक का काम रजनीश ने अपने हाथ में ले लिया है. बाइट कटवाने का काम भी वे संभाल लेते हैं. इस कारण आउटपुट और इनपुट हेड कई बार खुद को लाचार महसूस करते हैं. अनुरंजन झा, किशोर मालवीय, अबुल और मीनाक्षी से जुड़े सभी प्रोग्राम इन लोगों के जाते ही बंद कर दिए गए. एंकर बाइट्स पर आधारित एक घंटे का एक नया प्रोग्राम शुरू किया गया है. दूसरे चैनलों से कई लोग लाए जा रहे हैं.

सूत्रों का कहना है कि सरान पिता-पुत्र ने अब समझ लिया है कि उनका न्यूज चैनल जैसे चल रहा है, वैसे ही चलेगा, पर अब वे लोग किसी बड़े एडिटर को नहीं लाएंगे क्योंकि जो आता है वह अपने हिसाब से अपने हित में चैनल का यूज करके चला जाता है. यह भी बताया गया है कि अमनदीप सरान इन दिनों एक लिस्ट बनवा रहे हैं जिसमें उन लोगों का नाम लिखा जा रहा है जो अनुरंजन झा द्वारा लाए गए हैं. इनकी छंटनी की तैयारी की जा रही है. हालांकि इन बातों की अभी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है लेकिन सूत्र कहते हैं कि चैनल जिस तरफ दिनोंदिन जा रहा है, उससे यही जाहिर होता है कि निकट भविष्य में इस चैनल का कोई नामलेवा नहीं रहेगा. यह चिटफंड का धंधा करने वाले पिता-पुत्र के हाथों का मनबहलाने वाला खिलौना बनकर रह जाएगा.

इस बीच, अनुरंजन झा के बारे में पता चला है कि सीएनईबी से विदाई के बाद वे एक नई पार्टी पर डोरे डालने में लगे हैं. हालांकि उन्होंने सीएनईबी छोड़ने के बाद ही फेसबुक समेत कई जगहों पर ऐलान कर दिया था कि बहुत जल्द वे नया न्यूज चैनल लाने जा रहे हैं पर अभी तक कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं है और न अनुरंजन झा फेसबुक समेत अन्य जगहों पर कोई बयान दे रहे हैं. माना जा रहा है कि अनुरंजन झा की बात किसी नए या पुराने चैनल में बन नहीं पाई है और कुछ नए लोग जो चैनल लाना चाहते हैं, उनके साथ भी उनकी ट्यूनिंग जम नहीं पा रही है. पर कयास लगाया जा रहा है कि देर-सबेर अनुरंजन कोई नया शिगूफा लेकर आएंगे और उसे मूर्त रूप देने में जुट जाएंगे क्योंकि वह बहुत देर तक चुप रहने वाले शख्स नहीं है. किशोर मालवीय भी अभी चुप्पी साधे हैं. वे कहां, कब और किस रूप में नई पारी शुरू कर रहे हैं, इस बारे में कोई चर्चा नहीं है.

सीएनईबी से आठ मीडियाकर्मियों का इस्तीफा

सीएनईबी न्यूज चैनल से खबर है कि इसके मुंबई ब्यूरो से कई लोगों ने इस्तीफा दे दिया है. ये लोग चैनल की वर्तमान हालत से तंग थे. काम करने की बुनियादी सुविधाएं और जीने के लिए जरूरी सेलरी न मिलने की वजह से इन लोगों ने चैनल से नाता तोड़ने का ऐलान किया. इस्तीफा देने वालों में मुंबई ब्यूरो का काम देख रहे इंद्रजीत सिंह भी हैं. सूत्रों के मुताबिक बकाया भुगतान न होने और चैनल की हालत लगातार खराब होने के कारण इन लोगों ने मजबूरी में इस्तीफा दिया.

चैनल से नाता तोड़ने वालों की संख्या करीब आधा दर्जन बताई जाती है. उधऱ, सूत्रों का कहना है कि चैनल के दिल्ली नोएडा आफिसों से भी काफी संख्या में लोगों ने इस्तीफा दिया है या फिर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया है. कर्मियों को आए दिन जलील और परेशान किया जाता है. दूसरे पैसे बचाने के चक्कर में बलि का बकरा कर्मियों को बनाया जा रहा है.  बिना किसी अपराध या नोटिस के ही दर्जन भर से ज्यादा लोगों को चुपचाप कार्यमुक्त कर दिया गया. यहां सेलरी इनक्रीमेंट के नाम पर बढ़ी हुई सेलरी की भांति-भांति तर्कों-कुतर्कों के जरिए कटौती कर दी जाती है. कभी यह कृत्य टीआरपी गिरने के नाम पर तो कभी एलटीए इत्यादि के नाम पर किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक टीआरपी की गाज कायदे से बड़े पदों पर बैठे लोगों पर गिराई जानी चाहिए लेकिन शिकार बनाए जा रहे हैं कम सेलरी पाने वाले सीधे-साधे मीडियाकर्मी.

सूत्रों के मुताबिक एलटीए फंड के नाम पर हर महीने कर्मियों की सेलरी डिडक्ट की जा रही है. इससे भी लोग परेशान और दुखी हैं. इस कारण जिसे जब मौका मिल रहा है, चैनल से इस्तीफा दे रहा है. चैनल के नोएडा आफिस से भी दो लोगों के इस्तीफा देने की खबर है. सुप्रियो विश्वास और सुमित चटर्जी. सुप्रियो के बारे में बताया जाता है कि वे आटी हेड थे जबकि सुमित चटर्जी सैटेलाइट और नेटवर्किंग देखते थे. कहा जा रहा है कि आगे आने वाले दिनों में कई और लोग संस्थान को गुडबाय बोल सकते हैं.

अनुरंजन झा और किशोर मालवीय के आने के बाद सीएनईबी के हालात में कितना हुआ है सुधार या फिर कितना कुछ हुआ है बेकार… कितने लोग लाए गए या भगाए गए… टीआरपी का कैसा है हाल… माहौल में कितनी है मानवीयता या अमानवीयता… इस पर आप अपनी टिप्पणी या रिपोर्ट हमें भेज सकते हैं. आपकी पहचान का खुलासा न करने का वादा है. आप अपनी बात नीचे कमेंट बाक्स के जरिए कह सकते हैं या फिर हम तक मेल bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं. -एडिटर

नकवी जी की सेलरी 10 लाख रुपये महीने है!

अनुरंजन झा ने अपनी संपत्ति घोषित करते हुए अपनी सेलरी का जो खुलासा किया है, उसके आधार पर लोग टीवी इंडस्ट्री के बिग बॉसों की सेलरी का अंदाजा लगाने लगे हैं और इस तरह ”सेलरी रहस्य” से पर्दा उठने लगा है. अनुरंजन ने खुद लिखित रूप से बताया कि वे सालाना तीस लाख रुपये के पैकेज पर सीएनईबी गए हैं. महीने का ढाई लाख रुपये हुआ. लेकिन ये सेलरी कुछ नहीं है, अगर आप सुनेंगे कि दूसरे न्यूज चैनलों के संपादकों की सेलरी क्या है.

अनुरंजन झा से संबंधित पोस्ट पर एक कमेंट आया है, जिसमें कुछ बिग बॉसेज की महीने की सेलरी के बारे में बताया गया है. इस कमेंट के अनुसार- ”बाकी लोगों की सेलरी भी जरा सुन लीजिए. जानकारी के अऩुसार अजीत अंजुम छह लाख, शाजी जमां आठ लाख, आशुतोष 6 लाख, विनोद कापड़ी सात लाख, राहुल देव चार लाख, सुधीर चौधरी 5 लाख की सेलरी पाते हैं. चाहो तो चेक करवा लो. और नकवी भी आठ लाख पाते हैं.” इस कमेंट के दावे की पड़ताल करते हुए जब टीवी न्यूज इंडस्ट्री के कुछ वरिष्ठ लोगों से बात की गई तो सच्चाई इसी आंकड़े के आसपास मिली.

इन लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर भड़ास4मीडिया को बताया कि आजतक की संपादकीय टीम के नेता और वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी की तनख्वाह आठ लाख रुपये महीने नहीं बल्कि दस लाख रुपये महीने है. सीएनबीसी आवाज के एडिटर संजय पुगलिया, जो कभी एसपी सिंह की टीम के खास आदमी हुआ करते थे, भी दस लाख रुपये महीने पाते हैं. उपेंद्र राय जो सहारा मीडिया के सर्वेसर्वा हैं, 11 लाख रुपये के आसपास पाते हैं. दीपक चौरसिया की तनख्वाह स्टार न्यूज में चार लाख रुपये के आसपास है. पुण्य प्रसून बाजपेयी जी न्यूज में कांट्रैक्ट पर हैं और बतौर एडवाइजर काम करते हैं, उन्हें तकरीबन डेढ़ लाख रुपये मिलते हैं, ऐसा सूत्रों ने बताया. यह भी पता चला है कि जब पुण्य सहारा में गए थे तो उनकी सेलरी 11 लाख रुपये महीने के आसपास थी.

एनडीटीवी के रवीश कुमार की तनख्वाह एक लाख रुपये के आसपास है जबकि एनडीटीवी के ही विजय त्रिवेदी तकरीबन चार लाख रुपये पाते हैं. ध्यान रखें कि ये सेलरी एनडीटीवी के संपादकों की नहीं, वहां काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों की हैं. संपादकों की सेलरी वहां दस लाख रुपये से ज्यादा ही होगी. अजीत अंजुम पांच से छह लाख रुपये महीने पाते हैं, इस पर ज्यादातर लोगों की आम राय है. आशुतोष भी पांच से छह लाख रुपये महीने पाते हैं. वायस आफ इंडिया लांच कराने के लिए संपादक बनकर आए रामकृपाल सिंह ने उस समय आठ लाख रुपये महीने की सेलरी ली थी और ज्वायनिंग के वक्त तीन महीने का एडवांस साइनिंग एमाउंट लिया था. मतलब चौबीस लाख रुपये रामकृपाल सिंह को वीओआई आने के लिए दिए गए थे. उस चैनल के तत्कालीन सीईओ राहुल कुलश्रेष्ठ, जो आजतक से आए थे, उन्हें 12 लाख रुपये महीने तनख्वाह दी जाती थी.

किसी एक को 12 लाख रुपये महीने सेलरी मिलती है और कई सारे साल भर के लिए 12 लाख का पैकेज तलाशते घूम रहे हैं. बाजार में सब चलता है. जो बाजार व कारपोरेट के ज्यादा अनुकूल होता है, उसे ज्यादा सेलरी मिलती है. जो कंपनियों के एजेंडे पर काम कर कंपनियों को ग्रोथ दिलाने में मददगार साबित होते हैं, उन्हें मैनेजमेंट पुरस्कृत करता रहता है, नोटों की बरसात करता रहता है. पर न्यूज चैनलों के मामले में दुर्भाग्यपूर्ण बात ये है कि संपादक लोगों को इतनी तनख्वाह इसलिए नहीं दी जाती कि वे ठीकठाक पत्रकारिता करेंगे, उन्हें पैसे इस बात के मिलते हैं कि कैसे कम से कम स्टाफ व खर्चे में ज्यादा से ज्यादा टीआरपी लाई जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन चैनल को मिल सके.

कैसे ज्यादा से ज्यादा बड़े डील डाल को मैनेज किया जाए, ताकि भरपूर बाहरी और अप्रत्यक्ष निवेश चैनल में हो सके. तो, एक तरह से ये संपादक मार्केट और न्यूज के बीच लचीले दीवार की तरह हैं जो दोनों तरफ के प्रवाह-दबाव को झेलते हुए संतुलन कायम कर अंततः अंदरुनी तौर पर कंपनी का हित साधते हैं और बाहरी तौर पर आम जनमानस के लिए काम करते हुए खुद को दिखाते रहते हैं.

यहां अनुरंजन झा को जरूर बधाई दी जानी चाहिए जिन्होंने मीडिया में शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्तियों के पारदर्शी होने को जरूरी मानते हुए अपनी संपत्ति व सेलरी का खुलासा कर दिया. क्या अनुरंजन की ही तरह अन्य मैनेजिंग नुमा एडिटर, डायरेक्टर नुमा एडिटर, चीफ नुमा एडिटर, ओ नुमा सीईओ व सीओओ अपनी अपनी सेलरी व संपत्ति का खुलासा करेंगे? आरटीआई और जन लोकपाल जैसे शब्दों-भावनाओं-माहौल के इस दौर में मीडिया के शीर्ष पर बैठे लोगों को पारदर्शी बन जाना चाहिए वरना वह दूर नहीं जब इन नामधारी संपादकों के घरों के सामने संपत्ति खुलासे के लिए सैकड़ों मीडियाकर्मी धरने पर बैठा करेंगे और तब ये लोग मुंह छिपाने को मजबूर हो जाएंगे.

अगर किसी सज्जन को लगता है कि उनकी सेलरी ज्यादा बढ़ाकर बता दी गई है तो वे अपनी बात नीचे कमेंट बाक्स के जरिए कह सकते हैं या मेल कर सकते हैं. उनकी बात को पूरा सम्मान दिया जाएगा और तदनुसार उनकी यहां उल्लखित सेलरी में संशोधन कर दिया जाएगा. यहां स्पष्ट कर दें कि उपरोक्त आंकड़े वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत पर आधारित हैं और इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि आंकड़े वास्तविकता के नजदीक हों. फिर भी संभव है कि किसी किसी के मामले में दस बीस फीसदी की कमी-बेसी हो जाए. और हां, मीडिया जगत के लोगों से अनुरोध है कि वे भी अपने-अपने बिग बासेज की सेलरी का नीचे उल्लेख करें ताकि सेलरी व पैकेज की गोपनीय दुनिया से पर्दा हट सके और देशभर के लोग जान सकें कि आजकल के संपादक क्यों कुर्सी से चिपके रहते हैं और किस कारण इन कुर्सियों को पाने के क्रम में अपने रीढ़ की हड्डी को बाहर निकाल फेंकने का काम करते रहते हैं और अंततः मालिक के सामने एक लोटने वाले जीव में तब्दील हो जाते हैं और जनता के सामने खुद को ईश्वर के रूप में पेश करने में लग जाते हैं. इस मसले पर आपको क्या लगता है, अपनी राय, विचार, आलेख जरूर भेजें, bhadas4media@gmail.com पर या नीचें कमेंट बाक्स में लिख दें. -एडिटर, भड़ास4मीडिया

हर महीने ढाई लाख रुपये तनख्वाह पाते हैं अनुरंजन झा

सोचिए, अगर किसी को महीने में ढाई लाख रुपये सिर्फ तनख्वाह के रूप में मिले तो उसे भ्रष्ट या बेईमान होने की जरूरत पड़ेगी? बिलकुल नहीं. लेकिन लोग हैं कि इतना पाकर भी चैन से ईमानदार नहीं बने रह सकते. पर अनुरंजन झा ने दावा किया है कि वे भ्रष्ट व बेईमान कतई नहीं हैं क्योंकि वे अपना कच्चा चिट्ठा खुद खोल रहे हैं. पंद्रह दिनों के भीतर अपनी संपत्ति घोषित करने के फेसबुकिया ऐलान के बाद अनुरंजन ने पंद्रहवें दिन फेसबुक पर संपत्ति का ऐलान कर ही दिया.

इस ऐलान में उन्होंने यह भी खुलासा किया है कि उनका सेलरी पैकेज 30 लाख रुपये सालाना है. जोड़ते रहिए महीने के कितने बैठेंगे. और, ये तो सीएनईबी के सीओओ की सेलरी का हाल है. जरा पता लगाइए कि आशुतोष, अजीत अंजुम, विनोद कापड़ी, शाजी जमां, राहुल देव, एमजे अकबर आदि इत्यादि को महीने में कितने पैसे मिलते हैं? सुनेंगे तो कई लोग बेहोश होकर गिर जाएंगे. खुद इन लोगों ने भी अपने करियर के शुरुआत में ये कल्पना न की होगी कि उन्हें इतने पैसे मिलेंगे, पर जब मिलने लगते हैं तो लोगों का माइंडसेट भी इसी के अनुरूप ढलने-बदलने लगता है. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि देश के कोने-कोने में, जिले-जिले में कार्यरत स्ट्रिंगर बेचारे तो फाकाकशी के शिकार है. न संस्थान से मिलता है और न ही जनता-जनार्दन से. ज्यादातर लोगों का यही हाल है. ऐसे में अगर वे महीने में दस बीस पचास हजार के लिए दाएं-बाएं कर कराके कमा लेते हैं तो उन्हें दलाल घोषित कर दिया जाता है.

ये सेलरी पैकेज की बात तो हम सिर्फ हिंदी वाले संपादकों, मैनेजिंग एडिटरों, सीईओ, सीओओ आदि की कर रहे हैं. अंग्रेजी वालों की सुनेंगे तो होश उड़ जाएंगे. जब संपादकों, सीईओ, सीओओ आदि को इतने पैसे मिलते हैं तो जाहिर है कि वह अपना निजी जीवन भी दांव पर लगाकर, अपना सब कुछ झोंककर कंपनी की तरक्की के लिए काम करेगा और कंपनी के खिलाफ लिखने बोलने वाले को अपना परम दुश्मन समझेगा, मालिकों को भगवान से कम न मानेगा और नौकरी जाने को जीवन की सबसे बड़ी ट्रेजडी महसूस करेगा. और इसी प्रक्रिया में समाज, सरोकार, पत्रकारिता सब तेल लेने चले जाते हैं क्योंकि कंपनी को आगे बढ़ाना है, चाहे जो भी करना-कराना हो.

और यही कारण है कि जब ये दो-चार-पांच-दस-बारह-पंद्रह-बीस लाख रुपये महीने पाने वाले संपादक अचानक जब पैदल हो जाते हैं तो उनका चेहरा मोहरा सब लटक जाता है, कई तरह के धंधे करने की कोशिश करते हैं लेकिन किसी भी धंधे से अचानक महीने में दो चार दस बीस लाख रुपये तो नहीं आने लगेंगे, सो ये लोग सब कर कराने के बाद फिर नौकरी पाने व मालिक को पटाने के अभियान में लग जाते हैं. अनुरंजन झा को ही लीजिए. नौकरियां छोड़ते रहते हैं और कुछ गैप के बाद, कई तरह के काम करने के बाद फिर नौकरियां पाते-पकड़ते रहते हैं. इंडिया न्यूज से पैदल हुए थे तो मीडिया सरकार नामक वेबसाइट की शुरुआत कर दी. बिहार में चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी. पर भाग्य ने ऐसा पलटा खाया कि जिस राहुल देव ने इनकी वेबसाइट मीडिया सरकार का उदघाटन किया था, उन्हीं राहुल देव का तख्तापलट कर अनुरंजन झा सीएनईबी के बॉस बन गए. और, अब उन्होंने अपनी संपत्ति का ऐलान करके वर्तमान व आधुनिक संपादकों से लीड लेने की कोशिश की है.

अनुरंजन झा के उर्वर दिमाग ने एक और काम किया है. उन्होंने खुद तो संपत्ति का ऐलान किया है, बाकी लोगों से भी अपेक्षा की है कि वे अपनी अपनी सेलरी व संपत्ति बताएंगे. और इसके लिए उन्होंने एक वेबसाइट का भी निर्माण कर दिया है, जर्नलिस्ट्सएसेट्स डॉट कॉम. अपनी संपत्ति की लिस्ट में अनुरंजन ने पूरी ईमानदारी से बताया है कि वे और उनकी पत्नी मिलकर एक कंपनी भी चलाते हैं जिसके 75 प्रतिशत शेयर उनकी पत्नी और 25 प्रतिशत शेयर अनुरंजन के पास हैं. अनुरंजन ने फेसबुक पर संपत्ति का ऐलान करते हुए जो लिखा है, वह इस प्रकार है- ”लीजिए .. अपने पास जो है सब बता दिया। बैंक में 2 लाख 80 हजार रुपए, दो गाड़ी जिसमें esteem कर्जमुक्त, लीनिया पर 5 लाख का लोन, पत्नी के नाम पर घर.. उनके एकाउंट में कुछ पैसे, पैतृक गहने, बेटे के नाम पर FD.. सालाना 30 लाख की नौकरी। सब विस्तार से देखें http://journalistsassets.com पर। और हां, इस वेबसाइट के जरिए आप भी अपनी संपत्ति का ब्यौरा देना चाहें तो आपका स्वागत है। कुछ सुझाव हो तो जरुर बताएं।”

अनुरंजन झा को इस साहस और नई शुरुआत के लिए बधाई. हालांकि भड़ास पर अनुरंजन से पहले हिमांशु डबराल और अनुज सिन्हा ने अपनी-अपनी संपत्ति घोषित कर दी है. लेकिन सीईओ, एडिटर, सीओओ जैसी प्रोफाइल में अभी तक सिर्फ अनुरंजन ने अपनी संपत्ति को पब्लिक किया है, जिसके लिए वे वाकई बधाई के पात्र हैं. देखना है कि अनुरंजन की ही तरह अन्य सीईओ-सीओओ नुमा संपादक या मैनेजिंग नुमा एडिटर अपना-अपना लेखा-जोखा पेश करते हैं या नहीं.

अतियों को जीता एक न्यूज चैनल

एक ऐसा न्यूज चैनल जिसमें सुबह और शाम डेढ़-डेढ़ घंटे गुरुद्वारा से सीधा प्रसारण होता है, गुरुवाणी का. ऐसा इसलिए क्योंकि ये मालिकों का आदेश है. इस आदेश का पालन राहुल देव ने भी किया और अनुरंजन झा भी कर रहे हैं. आजकल की पत्रकारिता में मालिक ऐसा प्राणी होता है जो सारे महान महान संपादकों के लिए आदरणीय और भाई साहब और चेयरमैन सर या एमडी सर होता है.

बाकी दुनिया में चाहें जितने ऐब या गुण हों लेकिन मालिक में कोई ऐब-कमी की गुंजाइश नहीं क्योंकि मालिक मालिक होता है और मालिक इसलिए मालिक होता है क्योंकि वो लाखों रुपये और ढेर सारे सुख हमें देता है. वो चाहे सहारा हो या सीएनईबी, पी7न्यूज हो या इंडिया न्यूज, हर जगह चेयरमैन सर सर्वोच्च होते हैं. हर जगह मदर कंपनी अपनी असली मां से सगी होती है कर्मियों के लिए. और इन इन कंपनियों में काम करने वाले लोग अपनी मदर कंपनीज के खिलाफ कुछ नहीं सुनना चाहते. अन्ना हजारे में, प्रशांत भूषण में लाखों गुण दोष ये लोग निकालेंगे लेकिन अपनी अपनी कंपनीज के फ्राड, अपने अपने चेयरमैनों के फ्राड पर आंख मूंदे रहेंगे.

बात कुछ और कर रहा था और लिख कुछ और गया. लेकिन मुद्दा यही है कि मालिक ने कह दिया तो कह दिया. सीएनईबी के मालिक पंजाबी हैं. उनका अरबों खरबों का कारोबार है और सीएनईबी पर जो इनवेस्टमेंट है वो कारोबार से होने वाले मुनाफे में चुटकी बराबर है. सीएनईबी उनके लिए किसी आध्यात्मिक शांति की तरह है. इसीलिए इन मालिकों ने राहुल देव के जमाने में राहुल देव से कह रखा था कि क्राइम की खबर, अपराध की खबर न दिखाइए और सुबह शाम नियम से गुरुद्वारे की गुरुवाणी का सीधा प्रसारण करवाइए. राहुल देव मालिकों के आदेश को अच्छे शब्दों में ढालकर तार्किक तरीके से पेश करने की कला में माहिर हैं. उन्होंने मालिकों की इस उदारता को पत्रकारिता से कनेक्ट कर सीएनईबी को एनडीटीवी जैसा बता डाला.

खैर, सीएनईबी कभी एनडीटीवी तो बन नहीं पाया लेकिन हां इतना जरूर हुआ कि चैनल की बची-खुची साख खत्म होने लगी और चैनल से जुड़े प्रमुख लोग एक एक कर अलविदा कहते गए. अचानक अनुरंजन झा परिदृश्य में आए. छंटनी, इनक्रीमेंट, रंगरोगन, लेआउट-कलेवर, कंटेंट, विजन, लोगो, टीम… सभी में बदलाव की घोषणा की और सबको एक एक कर बदल डाला. अब जिस तरह का सीएनईबी सामने आया है, वो कितना अच्छा-बुरा है, ये तो नहीं पता लेकिन हां, पिछले कुछ दिनों तक चैनल देखने के बाद लगने लगा है कि ये चैनल अतियों को जीता है.

मतलब ये कि सुबह-शाम गुरुवाणी का सीधा प्रसारण और आधी रात को सेक्स समस्याओं का निराकरण. कोई डाक्टर जैन हैं जो सेक्सोलाजिस्ट हैं वह आधी रात में लिंग और योनि की सभी समस्याओं को एंकर के श्रीमुख से सुनते हैं और उसका मौखिक समाधान पेश करते हैं. सेक्स समस्याओं का प्रोग्राम आना चाहिए टीवी पर. अखबारों में भी इसे प्रकाशित होना चाहिए. मैं तो इसके पक्षधर हूं. हालांकि भारतीय परंपरा को हर बात पर सामने रखने वाले लोग कह सकते हैं कि सेक्स समस्याओं पर खुलेआम चर्चा नहीं होनी चाहिए क्योंकि बच्चों पर गलत असर पड़ सकता है लेकिन आधी रात को न्यूज चैनल पर सेक्स समस्याएं तो दिखाई ही जा सकती हैं.

पर सवाल ये भी है कि अपराध की खबरें न दिखाने वाले चैनल पर घनघोर सेक्सी सवाल जवाब आधी रात को भी कितना उचित है. लगता है कि सीएनईबी के मालिकों को भी सेक्स समस्याओं वाले कार्यक्रम में अच्छी खासी रुचि है तभी तो वे शाम को जनता को गुरुवाणी सुनाने के बाद देर रात को गुप्तांगवाणी सुनाने वाले कार्यक्रम को प्रसारित करा रहे हैं. मैं इन दो अतियों वाले कार्यक्रम को लेकर संशय में हूं कि इन्हें अच्छा कहूं या बुरा. हां, लेकिन ये अटपटा जरूर लगता है कि शाम के वक्त गुरुवाणी और रात के वक्त सेक्स समस्याएं. है न कंट्रास्ट. और, ये कंट्रास्ट ही किसी को भीड़ से अलग बनाता है. तो कह सकते हैं कि अनुरंजन झा ने सीएनईबी को कुछ अलग बना दिया है.

15 दिनों के भीतर अपनी संपत्ति घोषित करेंगे अनुरंजन झा

Anuranjan Jha : देश से करप्शन कम करने में पहला कदम यह हो कि हम पत्रकारों को अपनी संपत्ति और उसके स्रोत का खुलासा करना चाहिए… क्योंकि हम सच दिखाने का दावा करते हैं …समाज के हितैषी का भरोसा दिलाते हैं। सबसे पहले शरुआत इसी समुदाय से होनी चाहिए। मैं 15 दिनों के अंदर करने जा रहा हूं। ...People’s Outburst against Barkha Dutt at INDIA GATE...

Rajendra Jha : Nothing will happen……it’s remain same..

Patanjali Dubey : shurat vahi karte hai, jo special vision rakhte hai…………..

Rajendra Jha : Kucch nahi ho sakta haii ye hindustan hai……..Kanoon banta hai baad mein …pahlee torne ka rule banta hai…..

Sunil Dogra : Aameen! Sir ek blog bnaye jisme sab log ek sath apna detail bhar sken.

Sharma Santosh : अच्छी पहल है.. उम्मीद है भ्रष्टाचार के खिलाफ ये मुहिम हम पत्रकारों की बिरादरी में द

Nishikant Jha : Media or politic are sam. one r head 2nd r teal

Rajendra Jha : Yupp u r right…

Anuranjan Jha ‎: @राजेंद्र.. इतने निराश न हों .. समय आएगा और सब ठीक होगा … यह सोच लेने से कि कुछ नहीं होगा …कैसे चलेगा

Dharmendra Kumar : संपत्ति है ही नहीं… घोषणा किसकी करें… 🙂

Anuranjan Jha : धर्मेंद्र जी तभी तो आप सीना ठोक के चलते हैं .. और देखिए उनको जिनके यहां आप काम करते हैं

Shyam Tyagi : Sir Kahin Aisa Na Ho Jaaye Ki Aapki Sampati Janne Ke Baad Kuch Don Typ Log Firoti Maangne Lge……

Rajendra Jha : Sirr aap batoo mainee aone 26 sal ke agee meinn 1 lac corrupt meinn see 0.1% ko punishment miltee nahii dekha haii sirr..

Jamshed Qamar Siddiqui : Thats me in the black T shirt (Long Hair) 🙂

Deepak Shrivastava : sir aapne bohot achhcha kadam uthaya hai.anna ko schcha samarthan esi roop mi diya ja sakta hai.bhed ka hissa banna bohot aasan hai.par sach ka samna krna bohot kathin.badhai sir.

Rajendra Jha : Aur sayedd kavii milegaa v nahii kiyoki 100 mein se 99 corrupt hai.

Ashish Singh : jaisa karega waisa barega chahe wo neta ho officer ya journalist

Kishore Thakur : भ्रस्टाचार से मुक्ति चाहिए सभी को ………….. पर करेगा कौन और कैसे ? भ्रस्टाचार है क्या और क्यों ? इसपे सोचने की आवश्यकता है ……………… धन की भूख ऐसी क्यों ? इसपे सोचने की आवश्यकता है …………….. फिर भ्रस्टाचार खुद ही भ्रष्ट हो जाएगा I

Rajendra Jha : Good 1 Kishore ji..

Swarntabh Like Own Way : वाकई ये पहल काबिलेतारीफ़ है ,इससे पत्रकारों की लोगों में साख तो बढ़ेगी ही साथ ही एक नया भरोसा कायम होगा…इस पहल के लिए आपको बधाई

Satya Brata : very good initiative jha jee. hats off to u…..

Kishore Thakur : अगर कोई अपने धन का ब्यौरा देता है तो क्या वो भ्रष्ट नहीं होगा ……….. भ्रष्टाचार तभी मिटेगा जब आप किसी को उसके व्यक्तित्व से, कर्मो से पहचाना जाएगा… भ्रस्ताचार तभी मिटेगा जब सभी सरकारी अस्पताल और विद्यालयों के कर्मचारी बदलेंगे… भ्रस्ताचार तभी मिटेगा जब लोग अपने संबिधान ( मात्र देश का नहीं , किसी भी संस्था का जहाँ वो कार्यरत है ) की गरिमा को समझेंगे… भ्रस्ताचार तभी मिटेगा ………………….. जब हम बदलेंगे …………

Shivendra Shahi : sir aap ne sahi kaha hai sabse pehle aone se hi suruvat karni chahiye

Prakash K Ray : haha…unse wafa ki ummeed jo nahin jante wafa kya hai…

Shambhu Bhadra : idea is great, but about 90 percent journalists r living like hand to mouth situation. they hve nothing to show. only ten percent have asset to show. so why r u trying to open ‘NANGA SACH’ of journalist?

Anuranjan Jha : Jis 90% ki baat kar rahe hain unse problem nahi hai hum to baat unki kar rahe hain jo aapki nazar me 10 % me aate hain .. 121 cr me kitne ke paas galat paisa hai ye samjhne ki jrurat hai …. agar sabke paas hoti to samasya thi kya ???

Shambhu Bhadra : i think ten percent hve no dare to cooperate ur mission against corruption.

Gopal Jha : Mai aapki baat se sahamt hu. samptti ka khulasa karne ke liye bhi.

Akhilesh Krishna Mohan : सर अपनी बात कहने के पहले मांफी चाहुंगा हो सकता है कि कोई मेरे विचार से सहमत न हो । लेकिन अच्छे लोगों को अपना काम जिम्मेदारी से करने के लिए कानूनों की जरुरत नहीं होती, जबकि बुरे लोग कानून के बीच से ही रास्ता निकाल लेते हैं । इन बातों पर गौर कीजिएगा । देश के नब्बे फ़ीसदी पत्रकार (अंशकालिक संवाददाता) बिना पैसे के काम करते हैं। वो क्या सार्वजनिक करेंगे । यानी देश के ९० फ़ीसदी पत्रकार आप का साथ मजबूरी में नहीं दे सकते । क्योंकि जब कुछ है ही नहीं तो भला दिखाएं क्या। आप अपनी (यानी उच्चदर्जें के मोटी तनख्वाह वाले ) सम्पति को सार्वजनिक कर सकते हैं ।लेकिन इससे कुछ होने जाने वाला नहीं है क्यों कि उपरोक्त सूक्ति अक्षरश: सही है । तमिलनाडु में तैनात आईएएस अधिकारी यू सागायम ने वेबसाईट पर अपनी संपत्ति घोषित करके राज्य के पहले आईएएस अफ़सर के तौर पर इतिहास बनाया है ईमानदारी की यह मिशाल है । वैसे हर कोई स्वतंत्र है लेकिन सौ फ़ीसदी ईमानदारी के साथ आप जिंदा नहीं रह सकते । आप को बेईमानी करने के लिये मजबूर किया जाता रहेगा और आप होगें भी, किसी को भी इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता । हमारे देश में सिस्टम ही गलत है तो फिर हम ईमानदारी के रास्ते पर कैसे चलें। बीमारी की हालत में अपनी आमदनी से ज्यादा खर्च होने के बाद भी इनकम टैक्स चुकाना ही पड़ता है । तो फिर सौ फ़ीसदी ईमानदारी के साथ जीना आसान नहीं है ।

Digvijay Chaturvedi : जो काला धन कमाना जानता है वो उसे छुपाना भी जानता है ..कोइ जरूरी नही जो अपने संपत्ति और उसके स्रोत का खुलासा कर दे वह ईमानदार हो…..हां कोई जब इतना खाता है कि पेट फट जाए तब ही खुलासा होता है….

Surya Kumar Upadhyay : wah kya baat hai

Minnat Rahmani : Agar sampatti khulasa karne se curptn khatm hojaega to Jan lokpal bil ki kya jarurat he. Aur agar ye itne imandar hote ke sahi khulasa kar dete, to shayad curptn hota hi nahi. Kyo curptn me to wahi lipt he jo daulatmand he. Anuranjan ji aap to islie taiyar hogae sampati ka byora dene kyoke ap aur iss grp me ham sab koi bhi crorpati nahi honge. Sab 50k se 2lakh mahine ki salary wale he. Jisme jyadatar ki 6k car instlmnt+ 15k house loan or rent+ 4k petrol + 2k phone + 15k ghar ka rashan + 5k bachche ki fee + 3k trtmnt + 5k clothes + wife expandture(unexpected). Ha mujhe lagta he ke shayad jan lokpal bill aur right to recall ke bad kuch kami ke asar dikhenge kyoke isi dar ke wajah se shayad jab adwani ji bhi home ministr the to bjp walo ne bhi nahi lae is bill ko.

Parul Tiwari : sahi bat kahi aap ne sir its necessary… very good thought sir

Jaikumar Jha : बहुत ही शानदार शुरुआत की बात कही है आपने…शानदार सोच से उपजी शानदार पहल का प्रयास…

Rajesh Jha : Yes Brother

Ashraf Khan : आपके साहस को सलाम

Rajesh Jha : ‎@ Aadarsh Ji.. sahi Bole 15 din me kya karne ja rahe hai Hame bhi to bataye..

Aadarsh Rathore : ‎15 दिनों में क्या सेटिंग करने जा रहे हैं ? 😉 पत्रकारों की आय का स्रोत उसका व्यवसाय ही होगा यानी उनका संस्थान जहां से उन्हें वेतन मिलता है. और क्या खुलासा किया जाना चाहिए? हां, जो इस पेशे से अलग दलाली करके पैसा कमा रहे हैं वो अपनी संपत्ति उतनी ही आसानी से छिपाकर खुद को पाक साफ भी साबित कर देंगे…

Ashraf Khan : ये वो दलाल हैं जिन्होंने शर्म की परिभाषा ही बदल दी है. बस मुंह उठाकर पहुंच जाते हैं कहीं भी. इन्हें याद रखना चाहिए कि ये नेताओं की जमात नहीं पब्लिक है, जिन्हें अब बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता.

Harsh Vardhan Ojha : ‎Anuranjan Jha It would be noble beginning do it soon.

Shahid Rizvi : great sir

Shahid Rizvi : bahut achchi sonch hai..i am with you

Banwari Yadav : अच्छी पहल है..पर असल पत्रकारों की तो इनकम ही क्या होती है..?? आप भी जानते हैं.।

Arun Arun Gangwar : This is called chairity begains at home ……………you hv raised a very valid point …..

Ranu Choudhary : Jha Sir, Most regard effort! There is dire need to root out the corrupts in the field of journalism. In order for a journalist to fulfill their duty of providing the people with the information, they need to be free and self-governing. They must follow these guidelines:

Journalism’s first obligation is to the truth.

Its first loyalty is to the citizens.

Its essence is discipline of verification.

Its practitioners must maintain an independence from those they cover.

It must serve as an independent monitor of power.

It must provide a forum for public criticism and compromise.

It must strive to make the news significant, interesting, and relevant.

It must keep the news comprehensive and proportional.

Its practitioners must be allowed to exercise their personal conscience.

Vineet Singh : झा सर मैं भी आपके साथ हूं …. जरा अपनी सम्पत्ति का हिसाब लगा लूं फिर दो एक दिन में मैं भी घोषणा कर दूंगा

Shagun Kashyap : Very True Sir…we r the voice of Nation so we never need to forget that we are Journalists not the money-makers….!!!!!!!!!!

Vibhuraj Chaudhary : हम आपका अनुकरण करने के लिये तैयार हैं… कोई भूखे-नंगे तो हैं नहीं… कुछ न कुछ तो निकलेगा ही…

Manish Chauhan : बहुत ही वाज़िब और ज़रूरी सवाल… पहल ख़ुद से, इससे अच्छा आदर्श क्या हो सकता है… सलाम!!

Chaman Gupta : great sir…

Rabindra Jha : Congrats for ur right move. In public perception , media is also stained/ daagi. Plz raise ur voice . Public will follow u……

Hasan Jawed : achchi koshish h

Abhay Pandey : aap badhai k patra hain .aapke himmat ko mai salam kerta hun ,aaj mujhe laga ki patrakarita ka wajood abhi barkarar hai aur patrakar ab bhi sambhrant hain………..

अनुरंजन झा ने फेसबुक पर ये जो घोषणा की है, उस पर लोगों के राय देने का क्रम जारी है. आप भी शरीक हों, क्लिक करें- अनुरंजन झा स्टेटस

तुम्हें क्या लगता है मैं बीमार हूं, आज का नवभारत टाइम्स देखो…

: मैं तलाशता हूं अपना नाम और धाम! : पिछले दिनों मैं बनारस गया था। गंगा के घाट पर अपने फोन से अपनी एक तस्वीर उतारी ब्लैकबेरी के जरिए और फेसबुक पर डाल दिया। अभी मैं घाट पर ही था कि एक मैसेज आया- घर आए नहीं घाट पहुंच गए। वो संदेश आलोक जी का था। दरअसल एक रोज पहले ही हमने उनसे कहा था कि घर आ रहा हूं आपके लेकिन बनारस पहुंच गया।

बनारस से लौटते ही सपरिवार उनसे मिलने गया। काफी बीमार थे। 27 बेअसर कीमोथेरेपी हो चुकी थी और रेडियोथेरेपी की जा रही थी। सुप्रिया भाभी ने हमारे आने की जानकारी दी, उठकर बैठ गये. मैने कहा लेटे रहिए तो बोले अरे तुम्हें क्या लगता है मैं बीमार हूं आज का नवभारत टाइम्स देखो … । उस रोज भी उनका लेख छपा था। बोले पत्रकार जबतक लिख रहा है जिंदा है। अब वो ठसक देखने को नहीं मिलेगी। सच तो ये है कि दूसरा आलोक तोमर नहीं मिलेगा। बेबाक, निर्भीक, जाबांज और तेवर वाले तोमर आज के दौर में नहीं हो सकते। आज जहां लोग महज नौकरी करते हैं वहीं आलोक जी सारा जीवन पत्रकारिता करते रहे।

स्व. प्रभाष जी के स्कूल के चुनिंदा और उम्दा पत्रकारों में शुमार किये जाने वाले आलोक तोमर ने जीवन में कभी समझौता नहीं किया। जो मन आया लिखा, जो मन बोला और जो मन आया किया। तभी तो दिल्ली से लेकर भिंड तक अपनी लेखनी से अलग पहचान बनाई। जहां भी गलत लगा लड़ने-भिड़ने में कभी गुरेज नहीं किया। हालांकि पत्रकारीय करियर में हमने बहुत कम समय साथ-साथ काम किया लेकिन आत्मीयता के साथ। दरअसल हमारे और आलोक जी के बीच एक सेतु था हमारा दोस्त शैलेंद्र जो दो साल पहले हमें छोड़ गया।

शैलेंद्र को काफी प्यार करते थे आलोक जी और शायद इसीलिए हमें भी। जब हम पत्रकारिता में संघर्षरत हुए तो आलोक जी अपनी फीचर एजेंसी चलाते थे शब्दार्थ। टीवी की दुनिया में रमने की वजह से लिखना पढ़ना कम होने लगा था, शैलेंद्र बार-बार कहता कुछ लिखो और आलोक भाई को भेजो तुम्हारे बारे में पूछ रहे थे। शायद एक –दो बार ही ऐसा हो पाया। तकनीक के सहारे हम एक दूसरे से लगातार जुड़े रहे, पहले फोन..फिर ब्लॉग..फेसबुक और आखिरी दिनों में ब्लैकबेरी। पिछले अगस्त में जब मैं सीएनईबी पहुंचा तो आलोक जी बीमार हो चुके थे। कीमोथेरेपी कराते और ऑफिस चले आते किसी को कुछ बताते नहीं।

एक रोज सुप्रिया भाभी से हमें हकीकत का पता चला फिर मैंने उनसे कहा कि आपको इलाज के दौरान आराम की सख्त जरुरत है इसमें कोताही न करें। कहने लगे अरे यार बिना काम किए मैं नहीं रह सकता फिर मैने कहा आप घर से काम करें जो करना चाहते हैं। इस तरह के कर्मठ इंसान थे आलोक जी। कभी उनको कोई सलाह देनी होती तो फोन करते और बोलते मैं अपने दफ्तर के सीओओ से नहीं अनुरंजन से बात करना चाहता हूं अगर वो बात करना चाहे तो। ऐसे सुलझे इंसान थे आलोक जी। एक दिन मैसेज किया फुर्सत हो तो आओ…मैने कहा कल आता हूं … बोले मत्स्य भोजन का इरादा है … मैने कहा बिल्कुल… बोले फिर शाम में आना।

जा नहीं पाया भाभी को फोन कर कहा आप परेशान नहीं होना क्योंकि हमें पता था मेरे नहीं पहुंचने तक कौन सी मछली अच्छी होती है, किसका स्वाद कैसा होता है जैसे तमाम मुद्दों पर वो भाभी से बार बार पूछेंगे क्योंकि खुद नहीं खाते थे। फोन करके मना करने की हिम्मत हममें नहीं थी इसलिए मैंने भी सुबह-सुबह मैसेज किया आज नहीं कल आता हूं । जवाब आया.. चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले। ऐसे जिंदादिल इंसान थे आलोक जी। कभी-कभार ही मिलने जा पाता लेकिन जब कभी आने की इजाजत मांगता तो तपाक से जवाब आता..मछली पकड़ूं।

उन्हें मालूम था मुझे मछली बहुत पसंद है और मैं हर बार उनको निराश करता बिना बताए पहुंचता। अब मैं उनको और निराश नहीं कर पाउंगा। एक शिकायत, एक तकलीफ मौजूदा मीडिया जगत से रहेगी कि आलोक जी जो डिजर्व करते थे वो हम उन्हें नहीं दे पाए। लिखने, बोलने और करने में सामंजस्य बिठा पाना बहुत मुश्किल होता है। आलोक जी की यही खासियत थी। मौजूदा दौर के मठाधीशों ने आलोक जी खूबियों, खासियतों को दरकिनार कर उनके अक्खड़पन को सबसे आगे रखा जो उनके साथ घोर ना इंसाफी  है। लिखने को तो और भी बहुत कुछ है लेकिन फिर कभी फिलहाल आपलोगों को आलोक जी की एक कविता के साथ छोडे जाता हूं।

जैसे ओस तलाशती है दूब को,

जैसे धूप तलाशती है झील को

जैसे सच तलाशता है तर्क को

जैसे अघोरी साधता है नर्क को

जैशे हमशक्ल तलाशता है फर्क को

मैं तलाशता हूँ अपना नाम और धाम

जिस नाम से तुम मुझे जानते हो

जिस शक्ल से पहचानते हो

वह नहीं हूँ मैं फिर भी

भोला मन जाने अमर मेरी काया

अनुरंजन झा

सीओओ

सीएनईबी न्यूज

सीएनईबी में करिश्मा दिखा पाएंगे अनुरंजन?

सीएनईबी के नए चीफ आपरेटिंग आफिसर (सीओओ) और एडिटर इन चीफ अनुरंजन झा से आप ईर्ष्या कर सकते हैं और सीख भी सकते हैं. ईर्ष्या इसलिए कर सकते हैं कि कम उम्र में ही इस व्यक्ति ने पत्रकारिता की उस उंचाई को छू लिया है जिसे पाने की हसरत तमाम लोग ता-उम्र लिए रहते हैं. और खासबात ये कि उन्होंने राहुल देव जैसे वरिष्ठ पत्रकार को रिप्लेस कर सीएनईबी की कमान संभाली है. सीख इसलिए सकते हैं कि पत्रकारिता में रहने के साथ-साथ ही अनुरंजन झा अपने सरोकारों को भी जीते रहते हैं. राजनीति से लेकर समाजसेवा तक के काम को वे बखूबी जारी रखे हुए हैं. वे एक बातचीत में कहते हैं कि मैं तो बिहार चुनाव से ठीक पहले चुनाव लड़ने की तैयारियों में व्यस्त था, मौर्य टीवी के लिए चुनाव पर एक कार्यक्रम तैयार करने में मशगूल था तभी आदेश आया कि मुझे सीएनईबी की कमान संभालनी है.

अनुरंजन कहते हैं कि इसे मैंने ईश्वरीय अनुकंपा माना, उपर वाले का आदेश माना और निभाने आ गया. ट्रस्ट के जरिए अस्पताल बनवाकर गरीबों की सेवा करने वाले अनुरंजन झा ने सीएनईबी में आते ही चैनल को एक ऐसी सफलता दिलाई है जिस पर उन्हें खुद भरोसा नहीं हो रहा है. बिहार चुनाव में मतगणना के दिन सीएनईबी चैनल नंबर वन बन गया. ऐसा टैम वालों की रिपोर्ट कहती है. भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के साथ एक वीडियो इंटरव्यू के दौरान बातचीत की शुरुआत अनुरंजन झा इसी सफलता से करते हैं. बिना मुगालता पाले अनुरंजन साफ करते हैं कि बारह नंबर का यह चैनल अगर अचानक एक नंबर पर एक दिन पहुंच जाता है तो इससे जाहिर है कि हम नंबर छह पर आने की हैसियत तो रखते ही हैं और जल्द ही इस मिशन को पूरा किया जाएगा. राहुल देव की सीएनईबी से विदाई, सीएनईबी को लेकर अनुरंजन झा की योजनाएं, निजी जीवन की आकांक्षाओं-महत्वाकांक्षाओं, खुद के गुस्से, आध्यात्मिक रुझान आदि के बारे में अनुरंजन ने विस्तार से बातचीत यशवंत सिंह के साथ की.

अनुरंजन बताते हैं कि नीरा राडिया टेप कांड को जिस तरह सीएनईबी ने अपने यहां लगातार पेश किया, (एक दिन का शो देखें- टेप एक और टेप दो), वह किसी और चैनल में किसी को देखने को नहीं मिला होगा. टेलीविजन को पैशन और प्यार की तरह जीने वाले अनुरंजन उन दिनों को याद करते हैं जब उनके साथी कहा करते थे कि आफिस का काम तो आठ घंटे का हुआ करता है, तुम जी न्यूज के आफिस में दो-दो दिन तक क्यों रुक कर काम करते रहते हो, इससे क्या मिलेगा. वह दौर अनुरंजन के करियर का शुरुआती दौर था. अनुरंजन याद करते हैं कि सरकारी नौकरी छोड़कर पत्रकारिता में आने के कारण वे न्यूज चैनल के काम को कभी नौकरी की तरह नहीं लेते और न ही इस काम में कभी अनिर्णय की स्थिति में आते हैं. जो कुछ करना है, फटाफट फैसले करो ताकि दर्शकों को न्यूज चैनलों पर बोरियत व  पुरानेपन का अनुभव न हो. अनुरंजन से बातचीत का 20 मिनट का वीडियो नीचे दिए गए वीडियो प्लेयर पर क्लिक करके देखें और सुनें…..

सीएनईबी के सलाहकार संपादक बने किशोर

किशोर मालवीयकिशोर मालवीय सीएनईबी न्यूज चैनल से जुड़ गए हैं. वे सलाहकार संपादक बने हैं. इस तरह सीएनईबी में दो-दो सलाहकार हो गए हैं. आलोक तोमर पहले से ही सलाहकार के रूप में सीएनईबी में काम कर रहे हैं. फर्क बस इतना है कि किशोर मालवीय सीओओ अनुरंजन झा के राज में सलाहकार बने और आलोक तोमर सीईओ राहुल देव के राज में. सूत्रों का कहना है कि किशोर मालवीय की नियुक्ति से यह स्पष्ट होने लगा है कि राहुल देव अब संस्थान में वापसी के मूड में नहीं हैं. वे लंबी छुट्टी पर चले गए हैं.

राहुल देव के छुट्टी पर चले जाने और सीएनईबी के मामले में चुप्पी साध लेने से कई लोग उनके बारे में तरह-तरह की अफवाहें उड़ा रहे हैं. कुछ लोग मेलों के जरिए अनर्गल बातें विभिन्न जगहों पर पहुंचा रहे हैं. पर जानकारों का कहना है कि सीएनईबी मैनेजमेंट से राहुल देव के रिश्ते अच्छे हैं इसलिए राहुल देव के इस्तीफा देने और न देने को दोनों ही पक्ष मुद्दा नहीं बनाना चाहते. विवाद खड़ा किए बगैर स्मूथ ट्रांजीशन के रास्ते को प्रबंधन ने अपनाया है.

सीएनईबी में सलाहकार संपादक के रूप में आज ज्वाइन करने वाले किशोर मालवीय कई महीनों से विभिन्न राज्यों में विभिन्न ग्रुपों से जुड़कर सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे. उससे पहले वे वायस आफ इंडिया में ग्रुप एडिटर थे. किशोर मालवीय ने करियर की शुरुआत 1990 में नभाटा, दिल्ली से की. 1997 में वे जी न्यूज से जुड़े. नलिनी के चैनल ‘नेपाल-1’ में हेड आफ न्यूज रहे. इंडिया टीवी में भी अच्छी खासी पारी खेली. इंडिया न्यूज में भी रहे. अनुरंजन और किशोर मालवीय, दोनों लोग इंडिया न्यूज में एक साथ काम कर चुके हैं. सीएनईबी में किशोर मालवीय कंटेंट देखेंगे और एंकरिंग भी करेंगे.

तीन पत्रकारों के दुख भरे दिन

: अनुरंजन – रवींद्र शाह को डेंगू : विभूति दुर्घटना में घायल : आप लाख चाहें की चीजें आपके हिसाब से ठीकठाक चलें, लेकिन अक्सर ऐसी अप्रत्याशित घटनाएं, हादसे हो जाते हैं जिससे सोचा-विचारा प्लान फेल हो जाता है और पूरी लड़ाई अस्तित्व बचाने की शुरू हो जाती है. बीमारी और दुर्घटना, दो ऐसे राक्षस हैं जिससे हम पत्रकार आए दिन दो-चार होते रहते हैं.

इन दो राक्षसों से तीन पत्रकारों के परेशान होने की सूचना है. सीएनईबी में सीओओ के रूप में ज्वाइन करने के कुछ ही दिनों बाद अनुरंजन झा डेंगू से पीड़ित हो गए. एक मच्छर ने उन पर चुपचाप हमला किया और उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा. डेंगू जब सवार होता है तो कमजोरी और अवसाद भारी मात्रा में शरीर व मन पर छिड़क जाता है. अनुरंजन इन दिनों स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं. अपने घर पर हैं. कमजोरी की स्थिति से उबरने में लगे हैं. हम उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं.

डेंगू के दूसरे पीड़ित रवींद्र शाह हैं जो आजाद न्यूज में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं. वे हाल-फिलहाल नोएडा के सेक्टर 11 स्थित मेट्रो स्पेशियेलिटी हास्पिटल में भर्ती कराए गए हैं. उनका इलाज चल रहा है. तीसरी सूचना बनारस से है कि पीटीआई और इंडिया न्यूज में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे

विभूति नारायण चतुर्वेदी एक सड़क हादसे में बुरी तरह जख्मी हो गए. विभूति ने इंडिया न्यूज, दिल्ली से हाल में ही इस्तीफा दिया. वे इस्तीफे के बाद बनारस स्थित अपने घर गए थे. बनारस की पतली सड़कें, भारी भीड़, बेलगाम ट्रैफिक और शोर-धुएं के बीच विभूति की गाड़ी से एक दूसरी गाड़ी आकर टकरा गई. सबसे ज्यादा चोट विभूति की गाड़ी को आई है, उससे कम चोट विभूति को है. विभूति भी फिलहाल स्वास्थ लाभ कर रहे हैं. रवींद्र शाह और विभूति के भी हम जल्द नार्मल होने की कामना करते हैं.

अनुरंजन के खिलाफ सीएनईबी चेयरमैन को चिट्ठी

किसी भी अखबार, चैनल में बदलाव स्वाभाविक नियम होता है. कभी टीम लीडर बदल दिया जाता है तो कभी टीम के सदस्य. सीएनईबी भी बदलाव के दौर से गुजर रहा है. राहुल देव के हाथों सीएनईबी को पूरी तरह सौंपने, उन्हें काम करने-कराने व टीम बनाने की पूरी आजादी देने के कई वर्ष बाद सीएनईबी के मालिकान ने फिर बदलाव का रास्ता पकड़ा है.

राहुल देव से पहले भी सीएनईबी में जो टीम लीडर हुआ करते थे, वे बदले गए, और राहुल देव भी एक न एक दिन बदले जाने थे. हालांकि वे अब भी सीएनईबी में हैं, उनका इस्तीफा नहीं हुआ है. लेकिन उनके लोग हटाए जाने लगे हैं. अपूर्व श्रीवास्तव व श्रीपति पर गाज गिरी है. इन्हें बचाने की कवायद हुई, राहुल देव ने इनके जाने को प्रेस्टीज इशू बनाया. पर संभवतः ये दोनों बच नहीं पा रहे हैं. इन्हें हटाए जाने के आदेश दुबारा आ गए हैं. कई और लोग निशाने पर हैं. अनुरंजन ने हाथ-पांव खोल लिया है अपना. बैटिंग शुरू कर दी है. सो, सीएनईबी में हलचल मची हुई है. अब जब दोनों खेमे आमने-सामने आ चुके हैं तो चरित्र-हनन का खेल भी शुरू हो चुका है. मेलबाजी का दौर प्रारंभ हो गया है.

फिलहाल राहुल देव के लोगों ने सीएनईबी के चेयरमैन को चिट्ठी लिखकर सीएनईबी के हालात व अनुरंजन के चरित्र के बारे में उनको बताया है. संभव है, कल अनुरंजन के लोग सीएनईबी के चेयरमैन को चिट्ठी लिखकर सीएनईबी के अब तक खराब रहे हालात की वजह और राहुल देव के चरित्र के बारे में बताने में जुट जाएं. आज अनुरंजन के खिलाफ सीएनईबी के चेयरमैन को गई चिट्ठी को हम यहां छाप रहे हैं. कल राहुल देव के खिलाफ जाने वाली चिट्ठी को भी हम छापेंगे, अगर प्राप्त हुई तो. पर सबसे मजेदार तथ्य यह है कि सीएनईबी के मालिकान भी चाह रहे हैं कि एक बार दोनों खेमों में जमकर दो-दो हाथ हो ही जाए.

आमतौर पर जब किसी अखबार या न्यूज चैनल में टीम लीडर के स्तर पर  बदलाव होता है तो सब कुछ हफ्ते भर में स्पष्ट हो जाता है. यह तो स्पष्ट हो ही जाता है कि अब किसकी चलेगी. ऐसे में पुराना टीम लीडर खुद ब खुद छोड़कर चला जाता है. उनके लोग भी एक-एक कर इस्तीफा दे जाते हैं. कुछ लोग होते हैं जो निष्ठा पलट कर खुद की कुर्सी बचा ले जाते हैं और नए राज में भी पुराने राज की तरह सुखों का भोग करते रहते हैं.

पर सीएनईबी में सरदार जी लोगों ने दोनों को लालीपाप थमा रखा है. राहुल देव इस्तीफा नहीं दे रहे हैं, अनुरंजन खुद को सीईओ और एडिटर इन चीफ से कम मान नहीं रहे हैं. जो नए डेवलपमेंट हैं, उससे तो पता यही लग रहा है कि अनुरंजन को सरदारजी लोगों का पूरा समर्थन प्राप्त है. लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि सरदार जी लोग राहुल देव से जाने को साफ-साफ क्यों नहीं कह पा रहे हैं या फिर राहुल देव बिना साफ-साफ सरदार जी लोगों के मुंह से सुने चैनल क्यों नहीं छोड़ रहे. अगर राहुल देव को रखना ही है तो उन्हें सीईओ और एडिटर इन चीफ के रूप में रखना चाहिए, जिस रूप में वे रहते आए हैं. फिर अनुरंजन में राहुल देव की शक्तियां क्यों ट्रांसफर कर दी गई हैं. चलिए, इस नूराकुश्ती के ताजा एपिसोड के बारे में जानें. वो पत्र पढ़ें जो सीएनईबी के चेयरमैन को भेजी गई है.

-एडिटर, भड़ास4मीडिया



आदरणीय चेयरमैन सर,

यह पत्र आपको आश्चर्य में भी डाल सकता है और नहीं भी। लेकिन यह हम उन लोगों की चिंता है जो श्री राहुल देव के निमंत्रण और आपकी शुभकामनाओं को साथ ले कर सीएनईबी को एक आदर्श चैनल बनाने में पिछले बहुत समय से लगे हुए है। हमें अच्छा लगता रहा कि हमारे मार्ग दर्शक के तौर पर आपने चैनल को आकार देने में पूरी रचनात्मक आजादी दी और खास तौर पर सिर्फ टीआरपी बटोरने के लिए अपराध और सस्ती लोकप्रियता के कार्यक्रमों से चैनल को दूर रखा। इसी वजह से संसाधनों की कमी के बावजूद चैनल को एक अलग तरीके की प्रतिष्ठा मिली। राहुल देव के तौर पर भारतीय पत्रकारिता का  एक सबसे बड़ा नाम चैनल के साथ था और इससे भी हमारी विश्वसनीयता और बढ़ी।

हाल के दिनों में चैनल में जो हो रहा है उससे हम लोग सिर्फ आहत ही नहीं, चैनल के भविष्य को ले कर काफी चिंतित भी है। चैनल के स्वामी आप है इसलिए फैसला निश्चित तौर पर आपका ही होगा किंतु हम नहीं चाहते कि अब यह चैनल भी दलालों द्वारा चलाया जाने वाला एक और विचारहीन चैनल मान लिया जाए।

जब अनुरंजन झा को चैनल में लाया गया था तो हममें से सब को उम्मीद बंधी थी कि आप प्रशासन और आमदनी के पक्ष की ओर भी सोच रहे हैं और इससे सबका भला होने वाला है। खुद श्री झा ने अलग अलग पोर्टलों और वेबसाइटों पर कहा था कि वे आपकी आज्ञा से राहुल देव के हाथ मजबूत करने आए हैं।

मगर जो हो रहा है उससे जो कहा गया था, उसका जरा भी आभास नहीं मिल रहा। हमे नहीं मालूम कि पता नहीं कब अनुरंजन झा संपादकीय मामलों के भी जिम्मेदार हो गए और अपनी मर्जी से लोगों को भर्ती करने और निकालने लगे? क्या श्री राहुल देव को प्रधान संपादक और सीईओ के पद और जिम्मेदारियों से मुक्ति दे दी गई थी? महाखबर के बहाने बहुत सारे महत्वपूर्ण लोग चैनल से जुड़े मगर अब तो हालत यह है कि उस अयोध्या फैसले पर हमारे यहां कोई कार्यक्रम नहीं गया जिसका स्वागत देश के हर वर्ग ने किया है। हमें यह कहने की अनुमति दीजिए कि हमारी इस एक गलती ने हमारी प्रतिष्ठा को बहुत चोट पहुंचाई है।

श्री अनुरंजन झा की कोई तो प्रतिभा होगी जिससे आप प्रभावित हुए होंगे। मगर जहां जहां उन्होंने काम किया है, वहां से पता लगा कर देखिए या किसी को जिस पर आप विश्वास करते हों, पता लगाने के लिए नियुक्त करिए तो आप जान पाएंगे कि श्री झा पर ब्लैकमेलिंग से ले कर प्रबंधन के खिलाफ बगावत करने तक के आरोप लग चुके हैं। हमारे चैनल में जहां हम सब आपके नेतृत्व में एक परिवार की तरह रह रहे थे वहां वरिष्ठ महिला सहयोगियों के साथ भी अब अमानवीय व्यवहार होने लगा है। चैनल में काम करने वाली महिलाएं भी इससे आहत और आतंकित हैं।

श्री झा पत्रकारिता का कितनी रुचि रखते हैं इसका उदाहरण ये ही है कि इस बिहार चुनाव में भी उन्होंने टिकट मांगा था और उनका कहना है कि आखिरकार तो उन्हें राजनीति में ही जाना है। आप इसकी पुष्टि बिहार के राजनेताओं और खासतौर पर जनता दल यूनाइटेड के अलावा कांग्रेस के नेताओं से भी कर सकते हैं। पत्रकारिता में उनकी छवि के बारे में आप खुद जिन्हे उचित समझे उनसे उनके बारे में पूछ सकते हैं। एस-1 चैनल से इन्हे निकाला ही ब्लैकमेलिंग के आरोप में गया था। और इसकी पुष्ठि आप एस-1 के मालिक विजय दीक्षित से कर सकते हैं… उनका मोबाइल नंबर 9811057970 है। इंडिया न्यूज जहां से भी इन्हें निकाला गया और अब वहां से बर्खास्त लोगों को सीएनईबी को कूड़ेदान समझकर पटका जा रहा है वहां श्री झा की प्रतिष्ठा कितनी है इसके लिए इस चैनल के मालिक कार्तिकेय शर्मा से 9910116669 पर बात की जा सकती है।

हम ने आपके साथ सपना देखा कि हमारे चैनल को समाज में आदर और विश्वास मिले और उस दिशा में हम काफी सीमा तक कामयाब भी हुए। और इसकी वजह कोई और नहीं राहुल देव का नाम है। जो प्रतिष्ठा पद और कद के अलावा ज्ञान में समकालीन पत्रकारिता में सबसे आगे माने जाते हैं। अब भी मीडिया बाजार में बात करिए तो हमारे चैनल को लोग राहुल देव वाला चैनल कह कर ही पहचानते हैं।

आप बड़े हैं इसलिए हम आपसे ही दिशा मिलने की उम्मीद करते हैं कि हमें अपने चैनल और पत्रकारिता के प्रति अपनी निष्ठा का ध्यान रखना चाहिए या  एक घोषित दलाल की हर बात मान लेनी चाहिए। यह दूसरा विकल्प हमें काफी कठिन महसूस हो रहा है फिर भी हम  नियमानुसार काम कर रहे हैं। सीएनईबी में काम करना हमारे लिए सिर्फ रोजगार नहीं है। हम पहले काम कर रहे थे बड़े चैनलों में काम कर रहे थे और काम तो हमे मिल ही जाएगा। जिस वाहे गुरु ने जन्म दिया है उसकी कृपा और अपनी क्षमता पर हमारी पूरी आस्था है।

चैनल आपका है। फैसला आपका होगा। लेकिन जिस दिशा में चैनल जा रहा है उसका भविष्य बहुत अच्छा नहीं लग रहा है और यही हमारी चिंता है। आपसे सवाल करने की हमारी हैसियत नहीं है लेकिन आप खुद अपने आप से सवाल करना चाहे तो पूछ सकते हैं। कहां क्या गलत हुआ है और क्या उसे सुधारा नहीं जा सकता। हम आपके साथ हैं और हमें पूरा विश्वास है कि आपका आशीर्वाद भी हमारे साथ हमेशा बना रहेगा।

(पत्र लेखकों का नाम नहीं दिया जा रहा है. मेल व पत्र की मूल प्रति भड़ास4मीडिया के पास सुरक्षित है)

सीएनईबी में राहुल राज खात्मे की ओर!

: अपडेट : आम्रपाली ग्रुप ने चैनल में पैसा लगाया : लो कास्ट मोड में चैनल को लाने की तैयारी : थानेश्वर का इस्तीफा : अनुरंजन के करीबी लोग महत्वपूर्ण पदों पर काबिज : राहुल समेत उनकी टीम के कई लोग छुट्टी पर : सीएनईबी न्यूज चैनल में अंदरखाने उठापटक शुरू हो गई है. अनुरंजन झा के सीओओ के रूप में ज्वाइन करने के बाद जो आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं, वे अब सच साबित हो रही हैं.

सीएनईबी के मालिकों ने अनुरंजन को लाकर और उनके अपने लोगों को वरिष्ठ पदों पर ज्वाइन कराकर राहुल देव व उनकी टीम को बाहर जाने का संकेत दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक अनुरंजन ने अपने दो करीबियों अंशुल मिश्रा व राकेश योगी को वरिष्ठ पदों पर ज्वाइन कराया है. अंशुल आउटपुट का काम देखेंगे और राकेश प्रोग्रामिंग संभालेंगे. अभी तक आउटपुट अपूर्व देख रहे हैं व प्रोग्रामिंग कामाक्षी. राहुल देव कई दिनों से आफिस नहीं आ रहे हैं. उनका खास प्रोग्राम महाखबर भी कई दिनों से प्रसारित नहीं हो रहा है. राहुल देव के करीबी अपूर्व व पंकज शुक्ल आफिस नहीं आ रहे हैं. उधर, सीएनईबी में काफी दिनों से साइडलाइन चल रहे थानेश्वर ने इस्तीफा दे दिया है. वे सीएनईबी में इनपुट हेड के रूप में भी काम देख चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक सीएनईबी प्रबंधन राहुल देव के बड़े कद को देखते हुए उनसे सीधे-सीधे कुछ नहीं कह पा रहा है लेकिन अनुरंजन व अनुरंजन के करीबी लोगों के हाथों में चैनल को धीरे-धीरे सौंपकर एक तरह से पुरानी टीम को किनारे करने का काम शुरू कर दिया है.

यह भी पक्की खबर है कि सीएनईबी के मालिकों ने चैनल का एक हिस्सा आम्रपाली वालों को बेच दिया है. आम्रपाली ग्रुप रीयल इस्टेट की बड़ी कंपनी है. इस विनिवेश से सीएनईबी के मालिकों को अच्छी-खासी रकम मिली है. कम से कम, चैनल पर अब तक हुए खर्च का एक बड़ा हिस्सा अर्जित करने में सफल हुए हैं. पहले ही सीएनईबी के मालिकों ने चैनल के वरिष्ठों की बैठक में कह दिया था कि वे चैनल बेचना चाहते हैं और आप लोग ऐसा समूह तलाशिए जो चैनल ले सके व आप लोगों को भी सेलरी दे सके. तभी से चैनल के बिकने की अफवाह उड़ने लगी थी. अब पता चल रहा है कि चैनल पूरी तरह नहीं बिका है बल्कि माइनारिटी का स्टेक आम्रपाली ग्रुप ने लिया है. सीएनईबी के मालिक चैनल को अब लो कास्ट मोड में रखना चाहते हैं. कह सकते हैं कि धीरे-धीरे यह चैनल एस1, आजाद न्यूज, वीओआई, हमार की कैटगरी का हो जाएगा.

उधर, अनुरंजन ने ट्रेनियों को नियमित कर संकेत दे दिया है कि वे भारी-भरकम पैकेज वालों की जगह कम सेलरी वालों से काम चलाना ज्यादा पसंद करेंगे ताकि चैनल पर पड़े रहे आर्थिक बोझ को कम किया जा सके. वैसे भी अनुरंजन की नियुक्ति संपादकीय लिहाज से कम, आर्थिक लिहाज से ज्यादा हुई है. वे चैनल के खर्चों में कटौती के अलावा चैनल के लिए अतिरिक्त रेवेन्यू जनरेट कराने पर काम करेंगे. साथ ही, इसी हिसाब से एडिटोरियल कंटेंट भी पेश करेंगे ताकि कंटेंट के जरिए बिजनेस हो सके. अंशुल व राकेश की नियुक्ति से स्पष्ट है कि अनुरंजन व उनकी टीम ही एडिटोरियल कंटेंट तय करेगी. बिहार पर आधारित नए कार्यक्रम की परिकल्पना अनुरंजन की है. इस नए कार्यक्रम के जरिए अनुरंजन बिहार चुनाव के प्रचार-प्रसार पर खर्च होने वाली भारी-भरकम विज्ञापन राशि में सेंध लगाकर चैनल को आर्थिक फायदा कराने की तैयारी कर चुके हैं.

उधर, सीएनईबी में राहुल देव की टीम फिलहाल सदमें की स्थिति में है. सीएनईबी चैनल को राहुल देव अपने नाम व साफ-सुथरे कंटेंट के जरिए अच्छा खासी पहचान दिला चुके हैं. साथ ही आलोक तोमर व प्रदीप सिंह जैसे लोगों को चैनल से जोड़कर टीवी मीडिया इंडस्ट्री में सीएनईबी का मजबूत चैनल के रूप में पेश किया. टीआरपी भी कुछ समय तक अच्छी रही लेकिन क्राइम केंद्रित खबरें न चलाने व अन्य कारणों से टीआरपी ने कुछ समय के बाद साथ नहीं दिया. प्रदीप सिंह ने विपरीत स्थितियों की आहट देखकर पहले ही इस्तीफा दे दिया और यूएनआई टीवी के हिस्से बन गए. अब देखना है कि राहुल देव व उनके लोग आने वाले दिनों में कब व किस तरह चैनल से नाता तोड़ने का ऐलान करते हैं.

: अपडेट :

सीएनईबी के सीओओ अनुरंजन झा ने फोन कर जानकारी दी कि आम्रपाली के साथ सीएनईबी का किसी तरह का कोई समझौता नहीं हुआ है. आम्रपाली ने कोई पैसा सीएनईबी में नहीं लगाया है और न ही कोई स्टेक खरीदा है. ऐसी खबरें निराधार हैं. अनुरंजन के मुताबिक सीएनईबी के भीतर किसी किस्म का कोई उथल-पुथल नहीं है और सभी लोग चैनल की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग सीएनईबी को बदनाम करने के लिए अफवाहें फैला रहे हैं जो निन्दनीय है.

मधु कोड़ा से कोई रिश्ता नहीं : अनुरंजन

: न्यूज में भी रहेगा मेरा दखला : सीएनईबी न्यूज चैनल में चीफ आपरेटिंग आफिसर के पद पर पहुंचे पत्रकार अनुरंजन झा ने भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित खबरों में दिए गए कुछ तथ्यों पर आपत्ति जताई. उनका कहना था कि उनका नाम मधु कोड़ा से जोड़ बदनाम करने की साजिश रची जा रही है.

उन्होंने फोन पर हुई बातचीत में कहा- ”मधु कोड़ा से मेरे संबंध के बारे में जो बात की जा रही है, उस पर मेरा यह कहना है कि यह सब मेरे बारे में सोची समझी राजनीति और साजिश है. जो लोग कोड़ा से मेरे संपर्क के बारे में बता रहे हैं तो उनसे मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं कभी भी मधु कोड़ा से नहीं मिला हूं और ना ही वो मुझे मेरे चेहरे या नाम से जानते हैं. मैं अमिताभ बच्चन और मनमोहन सिंह को जितना जानता हूं, उतना ही मधु कोड़ा को भी जानता हूं. हो सकता है किन्‍ही वहजों से, मैं पत्रकार हूं, तो वो मुझे जानते हों, इसके अलावा मेरी उनसे कोई जान पहचान नहीं है.”

सीएनईबी में अपनी नई पारी को लेकर अनुरंजन ने कहा कि वे सिर्फ मार्केटिंग देखने के लिए नहीं आए हैं. उनका न्यूज में भी दखल रहेगा. उन्होंने कहा-  ”राहुल जी ने मेरे बारे में जो कहा है, सही कहा है, उनके कहे मुताबिक सारी जिम्‍मेदारियां मैं निभाऊंगा. लेकिन मेरा दखल न्‍यूज सेक्‍शन में भी रहेगा. मैं मार्केटिंग में भी हाथ आजमाना चाहता हूं. बड़ा पद और नई जिम्‍मेदारी है तो यहां सीखने और करने को काफी कुछ मिलेगा. मैं साफ कहना चाहता हूं कि मैं यहां राहुल जी के हाथ को मजबूत करने के लिए आया हूं.”

दुखी हुए तो माफ करो : हरीश गुप्ता

हरीश गुप्ता ने इंडिया न्यूज के साथियों को भेजा अलविदा पत्र : जो इस दुनिया में आया है, उसे जाना ही है. जो कहीं नौकरी कर रहा है, उसे वहां से विदा होना ही है. एक न एक दिन. हरीश गुप्ता भी इंडिया न्यूज छोड़ गए. एडिटर इन चीफ और सीईओ पद त्याग गए. उनके जाने की चर्चाएं काफी दिनों से थीं. काफी दिनों से वे आफिस नहीं आ रहे थे. अब उन्होंने इस्तीफा भी भेज दिया है. 

साथ ही, जाते-जाते एक पत्र इंडिया न्यूज के साथियों के नाम भी लिख गए हैं. यह उनका इंडिया न्यूज के साथियों के नाम आखिरी पत्र है. इस पत्र में हरीश गुप्ता ने बड़प्पन दिखाया है. एक संपादक जैसा बड़प्पन, जो अब काफी कम देखने को मिलता है.

हरीश गुप्ता इंडिया न्यूज के सबसे पावरफुल शख्स रहे हैं. उनका नाम लेकर कई लोग चैनल छोड़ गए. उनके नाम पर कई लोग चैनल से जुड़े. लोग आते-जाते रहे पर हरीश गुप्ता की कुर्सी कभी नहीं डोली. कई तरह के आरोप उन पर लगे. कई तरह की राजनीति भी उनके इर्द-गिर्द हुई. पर वे किसी किंवदंती की तरह इंडिया न्यूज के पर्याय बने रहे.

लेकिन हर शख्स का एक अच्छा और एक बुरा दौर होता है. कह सकते हैं, अच्छा वक्त धीरे-धीरे बुरे वक्त में तब्दील होता जाता है. खासकर बेहद असंगठित और असुरक्षित क्षेत्र मीडिया में तो अच्छा-बुरा बहुत शीघ्रता से आता-जाता रहता है. मीडिया क्षेत्र का क्रूर प्रबंधन किसी की उपयोगिता कम होते देख उसे साइडलाइन करने लगता है. जब तक वह उपयोगी होता है, उसे असीमित अधिकार मिलता जाता है. लेकिन जिस दिन उपयोगिता खत्म हो जाती है, प्रबंधन धीरे-धीरे नजरों से उतारने लगता है. बिलकुल साइडलाइन कर ऐसी स्थिति बना देता है कि आप या तो खुद चले जाएं या फिर उसी संस्थान में दोयम दर्ज की हैसियत में काम करते हुए एक-एक दिन मुश्किल से काटते रहें.

हरीश गुप्ता और इंडिया न्यूज के मालिक विनोद शर्मा कभी अच्छे दोस्त रहे. इसी दोस्ती के तहत हरीश गुप्ता को विनोद शर्मा ने अपने मीडिया प्रोजेक्ट का सर्वेसर्वा बनाया. लोग इनकी दोस्ती को लेकर कई आफ दी रिकार्ड बातें भी करते हैं पर सच्चाई यही है कि हरीश गुप्ता और विनोद शर्मा ने एक दूसरे पर खूब भरोसा किया, एक दूसरे का भला करने के लिए दोनों ने खूब साथ काम किया. पर दिन-महीने-साल बीतते बीतते हरीश गुप्ता की पावरफुल स्थिति कमजोर होने लगी. धीरे-धीरे उनके जाने की चर्चाएं होने लगीं. धीरे-धीरे चैनल के अंदर उनके विदा लेने की स्थितियां बनती गईं. अब जब वे फाइनली चले गए तो उन्होंने जाते-जाते अपने अधीन काम करने वाले साथियों से दो-चार बातें मेल के जरिए कही हैं.

उन्होंने इंडिया न्यूज के साथियों को भेजे पत्र में पूरी विनम्रता से चैनल की अच्छाइयों और बुराइयों, दोनों के लिए खुद को जिम्मेदार माना. उन्होंने यह भी इशारा किया है कि ”ऐसा कुछ हुआ जिससे अचानक सबकुछ गड़बड़ाने लगा, यह ‘कुछ’ क्या है, यह अब भी रहस्य है.” हरीश गुप्ता ने अपने पत्र में साफगोई से स्वीकारा कि वे अपने मिशन में फेल रहे. हरीश गुप्ता ने एक बड़े दिल वाले संपादक का व्यवहार प्रदर्शित करते हुए पत्र में अपने उन साथियों से माफी मांगी है जिन्हें उनकी वजह से किसी प्रकार का दुख-कष्ट-नुकसान हुआ हो. हालांकि हरीश गुप्ता ने यह भी लिखा है कि उन्होंने अपने सभी निर्णय हमेशा मेरिट और प्रोफेशनलिज्म के पैमाने पर लिए, बावजूद इसके, अगर कुछ लोग दुखी हुए हों तो उनसे माफी.

टीवी-प्रिंट दोनों मीडिया में समान रूप से दक्ष हरीश गुप्ता ने अपने साथियों को भेजे मेल में कई और बातें भी कही हैं. उन्होंने चैनल के साथियों को चैनल को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए शुभकामनाएं दी हैं. हरीश गुप्ता का अपने अधीनस्थों के नाम भेजा गया संपूर्ण पत्र इस प्रकार है….


Dear colleagues,

On this auspicious day, I would like to wish you well. It has been a long journey with you. In fact, when I joined the Information TV group almost three years ago, I thought it will be a lasting innings of my career. We were successful in launching a national news channel in the shortest possible time. Some of the colleagues who were part of this initial struggle would vouchsafe those tumultuous times. Despite being a new born baby, the channel was creating an impact, breaking stories, winning even consolation prizes, getting coverage in newspapers, periodicals and websites.

The best part of it was that we had created “Hope” in the industry that we shall do it. We all were fighting together for every inch to make India News a success story. The management gave its un-stinted support. But suddenly something happened and we started tumbling. Its still a mystery what hit us and why dithering began.  However, as in-charge if anybody was  responsible for the state of affairs, it was me. I may have taken good decisions, I may have wrong decisions or taken no decision or stand on certain issues and allowed things to happen, it was me. I am responsible for it. I can only say that I kept trying in the “Hope” that we shall succeed. I am pained to confess I failed in my mission.

Though merit and professionalism were the only guiding factors in all my decisions. If I  have done anything wrong or caused pain to any of you during this journey at India News,  I apologize for the same. I apolozise to those who left us for one reason or the other.

I wish you well and urge you to work hard to take this channel to new heights. Thanks once again for all the help and cooperation you lent to me during this period.

Please feel free to call me. SMS would be preferred.  I will always be happy to assist you.

Sincerely yours,

Harish Gupta

March 17, 2010

शुक्लाजी को फोन करना भी एक स्ट्रेटजी

अनुरंजन झाशाहरुख ने खबरों के लिहाज से शिथिल 15 अगस्त में जान डाल दी : अपनी नई आने वाली फिल्म “माई नेम इज खान” को खूब प्रमोट किया : 15 अगस्त को जब देश आजादी की 63वीं सालगिरह मना रहा था, तब अचानक ‘शाहरुख पुराण’ ने एक साथ पूरे देश की जनता को झकझोर दिया, मानो कोई सुनामी आया हो… सारे न्यूज चैनलों पर बड़े-बड़े अक्षरों में ब्रेकिंग न्यूज- ‘शाहरुख के साथ बदसलूकी’, ‘किंग खान के साथ अमेरिका में दुर्व्यवहार’ और न जाने क्या क्या। और हो भी क्यूं न, शाहरुख ठहरे देश के सुपर स्टार, नौजवानों के आदर्श। न्यूज चैनलों ने इस खबर को ऐसे परोसा कि जैसे अमेरिका ने अभी माफी नहीं मांगी तो भारत सीधे पेंटागन पर हमला कर देगा और मनमोहन सिंह व्हाइट हाउस को कब्जाने खुद कूच कर जाएंगे। मैं खुद खबरों से खेलने का गवाह हूं इसलिये अच्छी तरह जानता हूं कैसे न्यूज रुम में अफरा-तफरी मची होगी… कौन कैसे चिल्लाया होगा।

देखते-देखते मनमोहन सिंह के लाल किले के प्राचीर से दिए गए भाषण पर चर्चा करने की बजाए सब शाहरुखमय हो गये होंगे। मैं ब्रेक पर हूं। लेकिन चूंकि इन्हीं न्यूज चैनलों का हिस्सा रहा हूं, इसलिये आपको बड़ी शिद्दत से बता सकता हूं कि ये खबर जैसे ही न्यूज रूम में टपकी होगी सबकी बांछे खिल गई होंगी, क्योंकि उससे पहले सब इसी बात को तरस रहे होंगे कि आखिर आज पंद्रह अगस्त है आजादी की 63वीं सालगिरह.. आज दिखाएं क्या … दिन भर चलाएं क्या… प्राइम टाइम में परोसें क्या…आदि-आदि।

शाहरुख ने खबरों के लिहाज से शिथिल 15 अगस्त में जान डाल दी। सब तरफ तेरा जलवा ….। शाहरुख के इस कदम को जरा गौर से देखिये .. वो जिस कार्यक्रम में भाग लेने अमेरिका गये थे वहां एक दिन पहले भी जा सकते थे या यूं कहें कि कुछ घंटे पहले भी जाते तो ये बात हिंदुस्तान में 14 की रात को ही हो जाती लेकिन शाहरुख तो शाहरुख ठहरे उन्हें अपने देश की जनता और मीडिया पर पूरा भरोसा है उन्होंने ऐसा दिन चुना जब सारा देश छुट्टियां मना रहा हो और न्यूज चैनलों पर आजादी के परवानों के किस्सों के अलावा परोसने को कुछ न हो। और ठीक ऐसा ही हुआ अचानक एक खबर फ्लैश हुई और देखते देखते ….। शाहरुख कमाल के मैनेजमेंट गुरु हैं… एक तो उन्होंने तारीख चुनी आजादी की सालगिरह जिस दिन देश के निठल्लों में देशभक्ति की भावना हिलोंरे मारने लगती है। और फिर जिस फ्लाइट से वो गये उसमें अपना सामान भी नहीं ले गये (जैसा कि अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारी का कहना है) उनका सामान दूसरी फ्लाइट से आ रहा था लिहाजा उनको जांच के लिये तो रुकना ही था। हकीकत में शाहरुख के साथ क्या हुआ या फिर शाहरुख ने अपने साथ क्या क्या होने दिया ये तो सिर्फ वही बता सकते हैं लेकिन उन्होंने जिस तरह अपनी नई आनेवाली फिल्म “माई नेम इज खान” को प्रमोट किया वो वाकई काबिलेतारीफ है।

नेवार्क एयरपोर्ट से जब उन्होंने अपने घर, अपने सेक्रेटरी को फोन किया तो साथ ही अपने कांग्रेसी सांसद मित्र राजीव शुक्ला को फोन करना नहीं भूले, हालांकि राजीव शुक्ला ने उनकी मदद की, एंबेसी में बात की लेकिन अगर गौर से देखें तो शुकलाजी को फोन करना भी एक स्ट्रेटजी के तहत था क्योंकि शाहरुख ये बखूबी जानते हैं कि उनपर जो आंच आई है उसे भारतीय न्यूज चैनल खूब भुनाएंगे तो क्यों न खबर ब्रेक करने का सेहरा उनके मित्र के चैनल को मिले जिसके बारे में कहा जाता है कि उसमें शाहरुख ने भी पैसे लगाए हैं। इतना ही नहीं जब ये खबर दावानल की तरह न्यूज चैनलों में फैली तो हर कोई शाहरुख से बात करने की जुगत में लग गया…. लगभग हर चैनल से शाहरुख ने फोन पर बातचीत की और बातचीत में बार बार बोला माइ नेम इज खान, शाहरुख चाहते तो ‘माइ नेम इज शाहरुख खान’ भी बोल सकते थे। लेकिन उन्होंने यहां भी बड़ी बारीकी से अपने फिल्म को प्रमोट कर दिया।

दरअसल ऐसे ही हैं शाहरुख, आज जिस नस्लवाद का सताया हुआ खुद को बताते हुए नहीं अघा रहे वही शाहरुख पिछले महीने मुंबई में इमरान हाशमी को एक सोसाइटी द्वारा घर न दिये जाने के मामले पर इमरान को नसीहत दे रहे थे। अंग्रेजी-हिंदी में खुद इतना फर्क करते हैं कि न कभी मंच पर हिंदी बोलते सुने जाते हैं और न ही जल्दी किसी हिंदी न्यूज चैनल पर इंटरव्यू देते हैं लेकिन ये हिंदी न्यूज चैनल वाले हैं कि शाहरुख को देखा नहीं कि लार टपकाते-दुम हिलाते नजर आते हैं। ये तो थी बात शाहरुख की अब जरा फिल्म इंडस्ट्री और मीडिया को गौर से देखिए।

अभी कुछ दिनों पहले ही इससे भयानक हादसा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ हुआ। खबर चलाई गई, ब्रेकिंग भी चली, संसद में हंगामा भी हुआ, मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने एफआईआर दर्ज कराने की बात भी कही लेकिन हुआ क्या । न तो इस घटना के विरोध में बॉलीवुड से कोई मुखर आवाज सामने आई। रसोई से लेकर नासा तक हर मु्द्दे पर अपनी बेबाक राय रखने वाले महेश भट्ट ने भी चुप्पी साध ली। शाहरुख की खबर में लटके-झटके थे , शाहरुख की खबर के साथ दीपिका और प्रियंका चोपड़ा के फोनो चलाए जा सकते थे और ये सारे खेल कलाम की खबर के साथ नहीं हो सकता था लिहाजा वो खबर ठीक से खबर नहीं बन सकी। न्यूज चैनलों के लिए शायद कलाम उतने बड़े मुसलमान नहीं है जैसे शाहरुख हैं क्योंकि शाहरुख बार बार कहते हैं माई नेम इज खान। नेताओं के लिये कलाम के दिल में उतना दर्द नहीं है जितना शाहरुख के लिये है क्योंकि उनके बच्चे कलाम के नहीं शाहरुख ऑटोग्राफ चाहते हैं।

कलाकारों की इज्जत होनी चाहिए लेकिन नई पीढ़ी के लिए आदर्श क्या हो इस पर हमें गंभीरता से सोचना होगा, और कलाम ने किस तरह अपनी प्रतिक्रिया दी थी इसका जिक्र इसलिये नहीं करुंगा क्योंकि वो फिर कलाम और शाहरुख की तुलना हो जाएगी और ये गुस्ताखी किसी हिंदुस्तानी को नहीं करनी चाहिए।

बाकी ब्रेक के बाद ।


लेखक अनुरंजन झा वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं। कुछ दिनों पहले उन्होंने इंडिया न्यूज के चैनल हेड पद से इस्तीफा देकर छोटा सा ब्रेक लिया हुआ है। टीवी की किच-किच से दूर अनुरंजन इन दिनों परिजनों के अलावा अपने ब्लाग को भी वक्त दे रहे हैं। यह लेख उन्होंने अपने ब्लाग पर लिखा, जिसे साभार यहां प्रकाशित किया जा रहा है। अनुरंजन के ब्लाग पर जाने और टिप्पणी देने के लिए क्लिक करें-  आर्यावर्त

अनुरंजन झा समेत तीन वरिष्ठ कार्यमुक्त

अनुरंजन झाब्रेकिंग न्यूज : इंडिया न्यूज के चैनल हेड अनुरंजन झा, क्राइम इंचार्ज मुकुंद शाही और आउटपुट शिफ्ट इंचार्ज राकेश योगी के कार्यमुक्त होने की खबर मिली है। चैनल से जुड़े सूत्रों के अनुसार डिप्टी डायरेक्टर न्यूज अनुरंजन झा का प्रबंधन से कई मुद्दों को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। आंतरिक राजनीति के कारण अनुरंजन ने कई बार इस्तीफे की पेशकश की पर उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाता रहा। बताया जाता है कि चैनल के अंदरुनी कामकाज में शीर्ष लोगों के अनावश्यक हस्तक्षेप का अनुरंजन ने कई बार विरोध किया और अपनी सख्त आपत्ति उपर तक पहुंचाई। अंततः जब स्थितियां पूरी तरह प्रतिकूल होती दिखीं तो अनुरंजन ने इस्तीफा दे दिया। अनुरंजन के साथ दो अन्य लोग भी चैनल से कार्यमुक्त हुए हैं। ये दोनों चैनल के लिए महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे थे। इनमें एक मुकुंद शाही क्राइम इंचार्ज और दूसरे राकेश योगी शिफ्ट इंचार्ज के बतौर चैनल को अपनी सेवाएं दे रहे थे।

उधर, प्रबंधन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चैनल हेड अनुरंजन झा समेत तीनों लोगों को प्रबंधन ने कार्यमुक्त कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक चैनल में चल रही आंतरिक रस्साकस्सी को हद से पार जाते देख प्रबंधन को आखिरकार कुछ तय करना पड़ा।

उल्लेखनीय है कि चैनल के सीईओ हरीश गुप्ता से चैनल हेड अनुरंजन झा का द्वंद्व मीडिया जगत के लिए नया नहीं है। वैसे भी, अनुरंजन से पहले डिप्टी डायरेक्टर न्यूज किशोर मालवीय, एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर अजीत द्विवेदी और एडिटर एसएन विनोद के भी हरीश गुप्ता से आंतरिक झगड़े होते रहे हैं। इन झगड़ों के चलते ही आखिरकार सभी को जाना पड़ा या इस्तीफा देना पड़ा। अनुरंजन के जाने के बाद इंडिया न्यूज से बेहद वरिष्ठ लोगों के बेआबरू होकर जाने की परंपरा पुष्ट हुई है।

इस्तीफे के मुद्दे पर अनुरंजन झा से भड़ास4मीडिया ने संपर्क किया तो उन्होंने कहा- ‘पिछले महीने जो पचास लोग निकाले गए, उस मुद्दे पर मैनेजमेंट के साथ मेरा काफी मतभेद रहा। निकाले गए कई लोगों के लिए मैंने मैनेजमेंट से बात की। मैनेजमेंट ने भरोसा दिया इस पर विचार किया जाएगा पर उधर से अभी तक कोई विचार नहीं किया गया। 10 दिनों पहले एक खबर को लेकर चैनल के सीईओ के साथ मेरी तीखी बहस हुई। उस दिन भी मैंने इस्तीफे की पेशकश कर दी। मैंने जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय एमडी के अमेरिका से लौटने का इंतजार किया। मैंने सीईओ हरीश गुप्ता से उस दिन कह दिया कि ये चैनल या तो हरीश गुप्ता चलाएंगे या मैं चलाऊंगा। मेरा हरीश गुप्ता से मतभेद जगजाहिर था। मुझे संपादकीय काम में अनावश्यक दखलंदाजी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं थी। आज के दिन जो मामला हुआ उसमें बड़ी वजह निकाली गई मेकअप आर्टिस्ट की वापसी थी। आज मैं दफ्तर नहीं गया था। वैसे मैं साप्ताहिक अवकाश नहीं लेता पर आज मैंने पारिवारिक कारणों से साप्ताहिक अवकाश लिया। आज मुझे मालूम चला कि एक मेकअप आर्टिस्ट की वापसी कराई गई है। मैंने उसका विरोध किया। जिस मेकअप आर्टिस्ट की वापसी कराई गई उसके कामकाज व अन्य चीजों को लेकर मेरी आपत्ति थी। मैंने मैनेजमेंट को कहा कि अगर काम करने वाले लोग हटाए गए हैं तो मेकअप आर्टिस्ट की तरह उन लोगों की भी वापसी कराई इसी के साथ होनी चाहिए। इस बात पर मैनेजमेंट का रवैया टालमटोल वाला था। लिहाजा मैंने अपने पद से त्यागपत्र देने की घोषणा कर दी।”

अनुरंजन को जब बताया गया कि उनके साथ दो अन्य लोगों ने भी इस्तीफा दिया है तो उनका कहना था- ‘ये खबर आपसे ही मुझे मिल रही है। हो सकता है कि जिन लोगों को मेरे विचार पसंद आएं हों, वे लोग मेरा साथ देने के लिए आगे आए हों। मैं नहीं जानता कि मेरा साथ देने वाले दो हैं या कई और।’

इस मसले पर बात करने के लिए जब इंडिया न्यूज के सीईओ हरीश गुप्ता से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उनके मोबाइल पर इस प्रकरण के बारे में उनका पक्ष जानने के लिए एसएमएस किया गया लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।

इंडिया न्यूज वाले चार नए चैनल लाने में जुटे

‘इंडिया न्यूज’ टीवी चैनल को चलाने वाली कंपनी इनफारमेशन टीवी प्राइवेट लिमिटेड को चार और नए चैनल लांच करने की मंजूरी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मिल गई है। ये नए चैनल हैं- दिल्ली न्यूज, मुंबई न्यूज, अवाम और समाज। ‘दिल्ली न्यूज’ और ‘मुंबई न्यूज’ मेट्रो न्यूज चैनल होंगे जो क्रमशः दिल्ली-एनसीआर और मुंबई-आसपास की खबरों पर केंद्रित होंगे। ‘अवाम’ एक संपूर्ण उर्दू चैनल होगा। इस चैनल पर खबरों के साथ मनोरंजन, शेर-ओ-शायरी, सीरियल, प्रतियोगिताएं आदि दिखाई जाएंगी। ‘समाज’ नामक चैनल अपने नाम के अनुरूप ही सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित होगा। इस चैनल पर गंभीर विषयों, बहसों और मुद्दों को उठाया जाएगा। यह चैनल उन लोगों की बात करेगा जिन्हें मीडिया और सत्ता ने उपेक्षित कर रखा है।

उल्लेखनीय है कि इनफारमेशन प्राइवेट लिमिटेड के पास इन चार चैनलों के अलावा तीन चैनलों की मंजूरी पहले से ही है। ये तीनों चैनल भी लांचिंग की बाट जोह रहे हैं। इसमें एक चैनल ‘गंगा’ नाम से है जिसे भोजपुरी चैनल बताया गया लेकिन इसकी लांचिंग की कवायद अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी है। यह प्रोजेक्ट लटका हुआ है। शुरुआत में ‘गंगा’ की लांचिंग का जिम्मा वरिष्ठ पत्रकार एसएन विनोद को दिया गया पर किन्हीं वजहों से उन्हें यह ग्रुप छोड़ना पड़ा। बाद में गंगा की लांचिंग का जिम्मा कामना प्रसाद को सौंपा गया।  कामना प्रसाद अब भी सलाहकार के बतौर इस ग्रुप से जुड़ी हुई हैं लेकिन ‘गंगा’ की लांचिंग नहीं हो सकी है। ‘गंगा’ के अलावा एक अंग्रेजी चैनल ‘आईटीवी’ भी यह ग्रुप लांच करने की योजना बनाए हुए हैं। इसी तरह एक यूथ सेंट्रिक चैनल भी लाने की योजना है।

अनुरंजन झाइंडिया न्यूज के डिप्टी डायरेक्टर न्यूज अनुरंजन झा ने बताया कि अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा तो इस साल के आखिर तक सभी चैनल आन एयर हो जाएंगे। इन चैनलों में नियुक्ति के बारे में श्री झा ने बताया कि अगस्त तक इन चैनलों के हेड नियुक्त किए जाएंगे। उसके बाद भर्ती प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू की जाएगी।

ज्ञात हो, अखबार आज समाज और मैग्जीन इंडिया न्यूज को लांच करने वाली कंपनी का नाम गुड मार्निंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड है और इंडिया न्यूज टीवी चैनल लांच करने वाली कंपनी इनफारमेशन टीवी प्राइवेट लिमिटेड है। इस समूह के चेयरमैन विनोद शर्मा हैं जो पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में काम देख रहे हैं कार्तिक शर्मा। युवा, प्रतिभावान और ऊर्जावान प्रबंध निदेशक कार्तिक के कुशल निर्देशन में ग्रुप लगातार आगे बढ़ रहा है। इंडिया न्यूज टीवी चैनल के सीईओ वरिष्ठ पत्रकार हरीश गुप्ता हैं।  

‘हबीब को पुरस्कार उस अवार्ड का सम्मान’

हबीब तनवीर

अचानक रंगमंच का पुरोधा हमें खाली हाथ छोड़ गया… भोपाल में 7 जून को सूरज के उगने के पहले ही रंगमंच पर अँधेरा छा गया… और चरणदास चोर का कांस्टेबल अँधेरे में हमेशा के लिये गुम हो गया….जिसे देखने के लिये उमड़ी भीड़ को देख किसी रैली का अहसास होता था…. मिट्टी की वो गाड़ी मिट्टी में मिल गई जिसे हबीब अहमद खान ने बनाया था ….

जी हां, तनवीर साहब का असली नाम यही था… तनवीर के नाम से तो वो अखबारों में लिखा करते थे जिसे बाद में उन्होंने अपने नाम के साथ जोड़ लिया। और एक वक्त आया जब हबीब तनवीर थियेटर के पर्याय बन गये। तनवीर ने थियेटर की दुनिया में उस वक्त कदम रखा था जब थिएटर के अंत की चर्चा जोरों पर थी. लेकिन उनकी जिद ने थियेटर को फिर अमर कर दिया। 1923 में रायपुर में जन्मे हबीब तनवीर एक नाटककार ही नहीं बल्कि बेहतर कवि, अभिनेता और निर्देशक भी थे…लेकिन इस जिद्दी इंसान का मन न तो पोलैंड में रमा था और न ही मुंबई में जमा, कुछ दिनों तक ऑल इंडिया रेडियो में नौकरी भी की लेकिन भारतीय जन नाट्य मंच से जुड़ने के बाद वे रंगमंच के होकर रह गए। छत्तीसगढ़ के लोक कलाकार और वहां का लोक जीवन उनके अंदर रचा बसा था। इसी लोक जीवन के रंग बिरंगे रूप को वे जीवन भर मंच पर रचते रहे। ‘आगरा बाजार’ हो या ‘चरणदास चोर’, ‘मिट्टी की गाड़ी’ हो या ‘शतरंज के मोहरे’, ‘बहादुर कलारिन’ हो या ‘पोंगा पंडित’, हर नाटक में लोक जीवन के रंग हबीब ने इस अँदाज में भरे कि परंपरागत भारतीय थियेटर की पूरी तस्वीर ही बदल गई।

तनवीर लोक जीवन ही नहीं, लोक कलाकार की अंतरराष्ट्रीय पहचान बन गए। सम्मान और पुरस्कार की चकाचौंध में हबीब कभी शामिल नहीं हुए …. दरअसल हबीब को पुरस्कार उस अवार्ड को सम्मान है…. 1982 में चरणदास चोर को एडिनबर्ग में जब फ्रिंग फर्स्ट अवार्ड से नवाजा गया तब वहां स्टेज पर ये बातें किसी ने कही थी। तनवीर साहब को 1983 में पद्म श्री और 2002 में पद्म विभूषण मिला। 1996 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी से भी सम्मानित किया गया। हबीब तनवीर 1972 से 1978 तक राज्यसभा के मनोनीत सदस्य भी रहे। तनवीर साहब एक ऐसा मंच सिरजना चाहते थे जिसका पर्दा कभी गिरे नहीं….लेकिन लंबी अनुरंजन झाबीमारी ने भारतीय रंगमंच के उस पर्दे को गिरा दिया जिसके उस पार रह गए हबीब तनवीर।


लेखक अनुरंजन झा हिंदी टीवी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ में डिप्टी डायरेक्टर (न्यूज) के पद पर कार्यरत हैं। अनुरंजन से संपर्क करने के लिए anuranjanjha@hotmail.com का सहारा ले सकते हैं।

अनुरंजन को प्रमोशन, इसरार देखेंगे इनपुट

अनुरंजन झा‘इंडिया न्यूज’ के आउटपुट एडिटर अनुरंजन झा को प्रमोशन देकर डिप्टी डायरेक्टर न्यूज बना दिया गया है। इसकी घोषणा मैनेजिंग डायरेक्टर कार्तिकेय शर्मा ने चैनल की एक मीटिंग में की। इनपुट की जिम्मेदारी इसरार अहमद शेख की दो गई है जिन्होंने हाल मे ही इंडिया टीवी को बाय बोलकर इंडिया न्यूज संग पारी शुरू की है। सूत्रों के मुताबिक मैनेजिंग डायरेक्टर कार्तिकेय शर्मा ने शनिवार रात न्यूज रूम से जुड़े लोगों की मीटिंग ली और चैनल के एक साल के कामकाज की समीक्षा की।

बताया जाता है कि प्रबंधन एक साल की प्रगति से खुश नहीं है लेकिन आने वाले समय से सकारात्मक उम्मीद है। बिहार में इंडिया न्यूज के लगातार बेहतर परफार्म करने और नंबर वन बनने पर खुशी जाहिर की गई। इस रफ्तार को बरकरार रखने पर जोर दिया गया। बैठक में चैनल के नाम और ज्यादा टीआरपी दर्ज कराने के लिए विस्तार से बातचीत हुई। सूत्रों का कहना है कि न्यूज रूम के बेहतरीन प्रदर्शन से प्रसन्न प्रबंधन ने अनुरंजन को प्रमोट कर संकेत दे दिया है कि चैनल में अब काम करने वालों को ही आगे बढ़ाया जाएगा। अनुरंजन 12 वर्षों से न्यूज और टीवी की दुनिया में सक्रिय हैं। वे इंडिया टीवी, नेपाल 1, एस 1, कोबरा पोस्ट, बैग फिल्म, आज तक, जी न्यूज में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। 

किशोर मालवीय ने इंडिया न्यूज से इस्तीफा दिया?

इंडिया न्यूज के डिप्टी डायरेक्टर न्यूज किशोर मालवीय के बारे में सूचना मिली है कि उन्होंने इंडिया न्यूज से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार न्यूज चैनल इंडिया न्यूज में आंतरिक गुटबाजी और अनप्रोफेशनल माहौल से जूझ रहे किशोर मालवीय ने आखिरकार यहां से विदा लेने का फैसला कर लिया है। वे कहां जा रहे हैं, अभी पता नहीं चल पाया है। उधर, कुछ लोगों का कहना है कि किशोर मालवीय ने इस्तीफा नहीं दिया है बल्कि मैनेजिंग डायरेक्टर कार्तिकेय शर्मा से मिलकर इस्तीफे की पेशकश की है। प्रबंधन ने उनका इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं किया है। किशोर मालवीय फिलहाल छुट्टी पर चल रहे हैं। भड़ास4मीडिया प्रतिनिधि ने इस बारे में किशोर मालवीय का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

उल्लेखनीय है कि इंडिया न्यूज के सीईओ हरीश गुप्ता हैं। इस न्यूज चैनल की लांचिंग के बाद से लगातार चल रहे उठापटक के केंद्र में हरीश गुप्ता बताए जाते हैं। बताया जाता है कि वायस आफ इंडिया से इस्तीफा देने के बाद किशोर मालवीय ने जब इंडिया न्यूज ज्वाइन किया तभी से उनका सीईओ हरीश गुप्ता से कामकाज को लेकर टकराव चल रहा है। कंपनी के चेयरमैन विनोद शर्मा के बेहद करीबी माने जाने वाले हरीश गुप्ता के कारण इंडिया न्यूज से कई लोगों ने इस्तीफा दिया और कई लोग निकाले भी गए। सूत्रों का कहना है कि चैनल में हरीश गुप्ता और किशोर मालवीय, दोनों लोगों के अपने-अपने ग्रुप हैं और ये दोनों ग्रुप एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश करता है। बताया जाता है कि इन दोनों ग्रुपों में से एक पर चेयरमैन का वरदहस्त है और दूसरे पर एमडी का। इसी दो ग्रुपों के बीच द्वंद्व में चैनल के कर्मचारी उलझे रहते हैं। देखना है कि किशोर मालवीय के इस्तीफा देने के बाद चैनल की अंदरूनी राजनीति में क्या मोड़ आता है।

अनुरंजन झा इंडिया न्यूज तो तारकेश्वर महुआ में आए

टीवी से जुड़ी तीन खबरें। पहली तो ये कि इंडिया न्यूज में अनुरंजन झा की आउटपुट हेड के रूप में ही वापसी कराई गई है। पिछली बार वे इस चैनल में आउटपुट एडीटर हुआ करते थे और अंदरूनी विवादों के चलते उन्हें एक महीने में ही चैनल से विदा होना पड़ा था। बदली हुई स्थितियों में उन्हें फिर से वापस बुला लिया गया है।

दूसरी खबर। राजस्थान पत्रिका, कोलकाता संस्करण के संपादक व प्रबंधक तारकेश्वर मिश्र ने इस्तीफा दे दिया है। वे दिल्ली में नए लांच होने वाले एक भोजपुरी चैनल महुआ में ज्वाइन कर चुके हैं। तारकेश्वर छपरा के हैं और पत्रकारिता में लंबे समय से हैं। वे ईटीवी में राजस्थान के प्रभारी रह चुके हैं।

आगे है…ईटीवी, हैदराबाद को कइयों ने कहा अलविदा

सूचना है कि रायपुर से लांच होने वाले न्यूज चैनल जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ में ईटीवी, हैदराबाद के दो दर्जन से ज्यादा लोगों ने ज्वाइन किया है। इनमें चार एंकर, 5 पैनल प्रोड्यूसर, पांच प्रोड्यूसर और अन्य कई लोग बताए जाते हैं। इससे पहले जब वीओआई लांच हुआ था तो उसमें इटीवी से लगभग 45 लोगों ने ज्वाइन किया था।