इंडिया न्यूज से दो एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसरों का इस्तीफा

: विभूति और विवेक के जाने से चैनल को लगा झटका : इंडिया न्यूज से दो एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसरों के इस्तीफे की खबर है. दोनों इंडिया न्यूज के स्तंभ माने जाते थे. विवेक सत्य मित्रम और विभूति नारायण चतुर्वेदी ने कुछ घंटे पहले इंडिया न्यूज को गुडबाय बोल दिया है. विवेक करीब तीन साल इंडिया न्यूज में थे. उससे पहले वे स्टार न्यूज में थे. विवेक ने अपनी प्रतिभा के दम पर इंडिया न्यूज में बहुत जल्द बहुत अच्छी जगह बना ली थी. पीटीआई की आठ साल की नौकरी के बाद न्यूज एजेंसी छोड़कर साल भर पहले इलेक्ट्रानिक मीडिया में इंडिया न्यूज के जरिए उतरे विभूति नारायण चतुर्वेदी ने भी ईपी के पद से इंडिया से इस्तीफा दे दिया है.

बनारस के रहने वाल विभूति ने बीएचयू से जर्नलिज्म किया हुआ है. वे बनारस में अमर उजाला, आज जैसे अखबारों में काम कर चुके हैं. दो एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसरों के अचानक व एक साथ इस्तीफा दे देने से इंडिया न्यूज का माहौल गर्म हो गया है. चैनल के एमडी कार्तिकेय शर्मा के गुडबुक में कहे जाने वाले विवेक सत्य मित्रम का इस्तीफा बाकी लोगों के लिए प्रत्याशित है. सूत्रों का कहना है कि दोनों ही लोगों के पास कुछ अच्छे विकल्प हैं, इस कारण इस्तीफा दिया है. ये दोनों अपनी नई पारी की घोषणा जल्द करेंगे.

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Comments on “इंडिया न्यूज से दो एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसरों का इस्तीफा

  • एक पूर्व इंडिया न्यूज कर्मी says:

    विवेक जी निस्संदेह काफी प्रतिभावान हैं, लेकिन ईपी के तौर पर इंडिया न्यूज में उनके तौर तरीके विवादों में रहे…कंटेंट के मोर्चे पर इंडिया न्यूज सुधरा, लेकिन लोगों में असंतोष बढ़ता गया…इसकी वजह से चैनल से कितने ही अच्छे लोग चले गए…वो मैनेजमेंट को ये समझाने में नाकाम रहे, कि चैनल की टीआरपी के लिए कंटेंट के साथ साथ डिस्ट्रीब्यूशन भी अहम होता है…उन्हीं के नाम ये बुरा रिकॉर्ड भी दर्ज होगा, कि इंडिया न्यूज नेशनल की टीआरपी 000 तक पहुंच गई..

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  • ritesh sharma says:

    विभूति जी को तो इस सत्मित्रम के चक्कर में नौकरी से हाथ धोना पड़ा… सत्मित्रम को तो करनी का फल मिला है… उसके चैनल का बच्चा बच्चा जानता है कि वो कितना काम का आदमी है… धेले भर का काम नहीं आता… स्टार न्यूज से भी निकाले गए थे.. और इंडिया न्यूज से भी निकाले ही गए हैं… एमडी के गुडबुक्स में कभी हुआ करते थे… लेकिन पिछले कई महीनों से एमडी ने अपने चेंबर में घुसने भी नहीं दिया था…ईपी बनन के बाद जो उनके तेवरे बदले थे…उससे तो सभी त्रस्त थे.. यशवंत जी.. अपनी साइट पर एक पोल करा लीजिए… कि सत्मित्रम कैसा आदमी है..आपको 99 फीसदी जवाब उसके खिलाफ ना गए तो कहिएगा… काम के बदले लौंडियाबाज़ी करता था… उसके किस्से तो ओखला सब्जी मंडी तक में मशहूर हैं…

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  • इंडिया न्यूज का एक मामूली कर्मचारी says:

    जो लोग भी विवेक सर के बारे में अनाप शनाप लिख रहे हैं दरअसल ये उनकी फ्रस्ट्रेशन का नतीजा है। उनसे ये बात कभी हजम ही नहीं हो पाई कि वो इतनी कम उम्र में, वो भी केवल दो साल के भीतर प्रोड्यूसर से ईपी कैसे बन गए। पूरा चैनल जानता है कि वो कैसे इंसान हैं। उनके चरित्र पर अंगुली उठाने वालों को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए। इंडिया न्यूज में छोटे से बड़ा हर कर्मचारी जानता है कि विवेक सर को क्या आता था और क्या नहीं । उनके खिलाफ घटिया आरोप लगाने वाले वो लोग हैं, जो निहायत ही कामचोर हैं, जो न्यूजरुम में सिवाए पालिटिक्स के कुछ नहीं करते। ये वो लोग हैं जो महिला सहयोगियों पर सरेआम फब्तियां कसते हैं। ये वो लोग हैं जो न्यूजरुम में खुल्लमखुल्ला मां-बहन की गालियां देते हैं। ये वो लोग हैं जो रोज रात को आफिस के बाहर शराब पीकर हंगामा करते हैं। और विवेक सर के रहते उन्हें ये सब कुछ करते हुए डर लगता था। उनका चैनल में रहते हुए तो ये कुछ उखाड़ नहीं पाए सो अब यहां पर बेहूदा आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करने की घिनौनी साजिश में जुटे हैं। मैं इंडिया न्यूज का बेहद मामूली कर्मचारी हूं, लेकिन मैंने देखा है कि जिस वक्त विवेक सर को चैनल में बड़ी जिम्मेदारी दी गई, उस वक्त कैसे हालात थे और अब क्या हैं। मैंने वो वक्त भी देखा है जब लोग बॉसेज के करीबी होने की धौंस दिखाया करते थे। जब चैनल में आउटपुट को लेकर कोई प्लानिंग नहीं थी। विवेक सर ने ना केवल गुंडागर्दी खत्म की, बल्कि काम करने का एक अच्छा माहौल तैयार किया। आउटपुट ही नहीं ग्राफिक्स, एडिटिंग और पीसीआर तक में काम करने वाले लोग उनकी लगन के कायल थे। मुझे नहीं मालूम कि किस चैनल में ईपी लेवल का आदमी खुद स्क्रिप्ट लिखे, पैकेजिंग में इन्वाल्व हो और पीसीआर में खड़ा होकर शो रोल कराए। चैनल में सब जानते हैं, वो किस हद तक काम में इन्वाल्व होते थे। वो काम को लेकर बेहद सख्त भी थे, यही वजह है कि सारे नाकारे उनके खिलाफ एकजुट हो गए। लोग ये भी जानते हैं कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाया, क्योंकि अपनी काबिलियत के बल पर वो चैनल के एमडी के बेहद करीब थे। ना जाने कितने ही लोग विवेक सर से सीनियर थे, लेकिन मैनेजमेंट ने जिम्मेदारी देते हुए किसी की परवाह नहीं की। चैनल में काम करने वाला हर ईमानदार कर्मचारी आज भी नहीं चाहता कि वो छोड़कर जाएं। ट्रेनीज की सैलरी बढ़ाने से लेकर गलत वजहों से निकाले गए लोगों की वापसी कराने तक के अपने कामों की वजह से वो सबके प्रिय हैं। पिछले कुछ दिनों से चैनल में क्या चल रहा हैं, ये भी किसी से छिपा नहीं है। जिन लोगों की कोई औकात नहीं है, ना ही उन्हें कोई ओहदा दिया गया है, वो हेकड़ी दिखाते घूम रहे हैं। और ये वो लोग हैं जिन्हें इनकी घटिया हरकतों की वजह से हर चैनल से निकाला गया है। ये लोग जब विवेक सर का कुछ नहीं बिगाड़ पाए तो अब उनके चरित्र हनन और काबिलियत पर अंगुली उठाने में जुट गए हैं। मैं ये बात दावे के साथ कह रहा हूं कि उनकी जैसी स्क्रिप्टिंग, पैकेजिंग और प्रोग्रामिंग की समझ इस चैनल में क्या, कई बड़े चैनलों में काम करने वाले लोगों में भी नहीं होगी। वरना ये कोई भी समझ सकता है कि जिसने कभी गुटबाजी नहीं की, जिसे ज्यादातर लोग कड़क मिजाज होने की वजह से नापसंद करते रहे, उसे कोई यूं ही प्रोड्यूसर से ईपी क्यों बनाएगा। यशवंत जी आपसे निवेदन है, कम से कम ऐसी टिप्पणियां न प्रकाशित करें, जिनका कोई आधार न हो। ये इंडिया न्यूज का दुर्भाग्य है कि विवेक सर और विभूति सर जैसे लोग यहां से चले गए।

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  • विवेक का जाना जरुरी था..वो किसी काम का नही था..यशवंत जी आप कुछ ज्यादा ही तारिफ कर रहे है विवेक का। आज अगर इंडिया न्यूज की जो हालत है वो इनकी ही देन है। इसे पहले ही निकाल देना चाहिए था..अब आप देखिएगा इंडिया न्यूज की हालत बहुत ही जल्द सही हो जायेगा

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