खुशवंत सिंह ने बरखा दत्त की फिर जय जय की

बरखा दत्त के लिए जमाना चाहे जो बोले, प्रख्यात स्तंभकार खुशवंत सिंह पर इसका असर नहीं पड़ता. वे अपनी बानी बोलते हैं. उन्हें बरखा दत्त पसंद हैं तो हैं. बरखा की पत्रकारिता उन्हें अच्छी लगती है तो लगती है. दूसरी दफा खुशवंत सिंह ने अपने कालम में बरखा दत्त की जयगान की है. कल रविवार के दिनों कई अखबारों में छपे खुशवंत सिंह के कालम में बरखा दत्त का जयगान काफी लोगों ने पढ़ा. आप भी पढ़ लीजिए…

बरखा दत्त

मैं यह सोच कर ही परेशान हो जाता हूं कि अगर बरखा दत्त पत्रकारिता छोड़ती हैं, तो हिन्दुस्तानी टेलीविजन का क्या होगा? कई साल से मैं दो कार्यक्रम जरूर देखता हूं। एक बरखा का ‘वी द पीपुल’ और दूसरा राजदीप सरदेसाई का ‘द बिग फाइट।’ बरखा और राजदीप अपना होमवर्क करते हैं। इसीलिए वे ठीक से सवाल दाग पाते हैं। वे अपने कार्यक्रम में अलग-अलग विचार रखने वालों को बुलाते हैं, ताकि चीजें एकतरफा न हो जाएं।

बरखा तो अपने उस कार्यक्रम के अलावा भी बहुत कुछ करती हैं। जहां कहीं भी कोई खबर होती है, बरखा वहां होती हैं। कहीं भी हिंसा और दंगे होते हैं, तो बरखा जरूर मिलेंगी। बरखा पहली टीवी पत्रकार होती हैं, जिनकी रिपोर्ट बताती है कि वहां क्या हो रहा है? और क्यों हो रहा है?

हाल ही में एबटाबाद में ओसामा को मार डाला गया। दुनिया भर में लोग यह जानना चाहते थे कि आखिर पाकिस्तान का अवाम कैसा महसूस कर रहा है? बरखा पाकिस्तान गईं। ताकि उनकी बात रख सकें। पाकिस्तानी अवाम अमेरिका के बाद हिन्दुस्तानियों से ही सबसे ज्यादा नफरत करता है। बरखा जैसी बेखौफ बिंदास औरत ही यह कर सकती थी। वह खूबसूरत हैं। बेहतरीन पहनती-ओढ़ती हैं। वह भी उसकी शख्सीयत में जुड़ता है। यों ही लोग उन्हें पसंद नहीं करते। (खुशवंत सिंह लिखित कालम से साभार)

Comments on “खुशवंत सिंह ने बरखा दत्त की फिर जय जय की

  • barkha smart hai, bold hai aur itna hi nahi sexy air glamorous bhi hai… lihaja wo best journo hai… khuswant singh ko aise bhi sundar aur sexy ladkiya jyada appeal karti hai….

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  • madan kumar tiwary says:

    भाई खुशवंत सिंह की दो कमजोरी या पंसद जो आप कहें वह है , शराब और सलीकेदार खुबसुरत महिलाएं । नेहरु जी के साथ -साथ लेडी माउंटबेटन के दरवाजे पर जाडे की ठंढ में जानेवाले ये भी थें। जैल सिंह के बेडरुम में जाकर शराब पिने का लालच नही रोक पायें। पाकिस्तान की बरखा वाली रिपोर्‍टिंग में बरखा ने वहां के होम मिनिस्टर रहमान मल्लिक के साथ बातचीत करते ह्ये वैसे सभी भारतीयों को हार्ड लाईनर कहा जो चाहते हैं कि पाकिस्तान से संबंध तोड लिया जाय । मैने उस इन्टरव्यू को देखने के बाद सोचा था क्या देशभक्ति की बात करने वाले सभी भारतीय हार्ड लाईनर हैं ? आखिर बरखा देशभक्तो को हार्ड लाईनर बता कर क्या जाहिर करना चाहती है । खैर खुशवंत सिंह को कुछ कहने की जरुरत नही हैं बुढापे में कुछ तो नैन सुख लेने दें ।

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  • anurag sharma says:

    बरखा के खिलाफ आग उगनले वालों को पहले यह साबित करना चाहिए की बरखा गलत है. हवा में उडी अफवाहों के आधार पर बरखा के योगदान को ख़ारिज करने वाले पहले अपनी गिरेबान में झांके. यदि बरखा ने कोई अपराध किया होता तो उस पर मुकदमा चल रहा होता और वो जेल में होती. बरखा जैसे पत्रकारों को बदनाम करने के लिए ऐसे लोग सक्रिय है जो अपने जीवन में कोई उपलब्धि हासिल नहीं कर सके. देश की जनता जानती है बरखा के योगदान को. चंद चाटुकार और जलने वाले लोग बरखा को बदनाम कर रहे है. बरखा की आलोचना से पहले देश और पत्रकारिता में उनके योगदान का मूल्याङ्कन करे, अपने गिरेबान में झांके, फिर भी गुंजाईश बचे तो गली दे सकते है.
    अनुराग शर्मा
    टी.वी.पत्रकार.

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  • मुकल मिश्रा says:

    खुशवंत सिंह चुतिया आदमी है. खूबसूरत लड़की बुदी नहीं हो सकती यह उसका पूर्ण विश्वास है. अपने दिनों में वह खुद हीं संजय गाँधी की दलाली करता था. अब वह दलाली को प्रोत्साहन नहीं देगा तो और क्या करेगा?

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  • Arvind Mishra says:

    Barkha Dutt is nothing but one among many power brokers in Delhi. There should not be any doubt that these journos do all sort of things in India…she not an exception rather more into corruption and wheeling-dealing. But is she the only one — No certainly not. Then she should not be singled out and victimised. Prabhu Chawla, Vir Shanghvi and others should also be prosecuted. And efforts should be made to expose all those journalists who dance to the tune of their masters in Delhi Darbar and fill their pockets by all available means. In corruption-ridden India, they just forget their social obligation and become “dalal.” But then they should not behave in public as if they are the most pious person around. “Ye public hai sab janti hai; Radia kisko kya deti hai sab janti hai; andar kya hai bahar kya hai; sab pehchanti hai, kiski goti kahan se chalti hai sab janti hai.” It should be our endevour, where ever we sit, with who ever we interact with to tell the truth. As far as Khushwant Singh is concerned, it’s better not to take him seriously at this age…he is senile now.

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  • sikander hayat says:

    angrezi valo se kuch umeed karna vakat ki barbadi sab k sab sharab shabab aaramtalbi me gale tak dube rehte ha ye log premchand k pero ki dhool bi nahi ha ye sabi log

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  • Gabbar Singh says:

    Jo Chaplus log hai hum uske baare me kuch nahi kahenge..Khushwant Singh bahut chutiyaa aadmi hai..ab Uskaa Dil Barkha Dutta Pe aaya hai to ham kya kare…usko khupsurat ladki pasand hai to ham kya kare ?Lekin ye desh se judaa hua mudda hai….ispe Barkha Dutta kya bade se badaa patrakar bhi jail me rahanaa chahiye…lekin uspe CBI+MANTRI+POLITICIANS kaa saaya hai isiliye vo abhi bhi Jail ke bahaar hai…..

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  • Gabbar Singh says:

    Sunane me to yeh bhi aaha raha hai ki NDTV Hindi aur Pranov Roy ke business ko ubharne me Barkha Dutta kaa sahara liya hai ? Ye sach hai kya ?

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  • Gabbar Singh says:

    Pranav Roy ne loss me chal rahe NDTV Hindi ko chalane me Barkha Dutta ne 2-G se bahut paisa kamaaya aisi charcha bazar me hai ye sach hai yaa nahi ? Eskaa bhi khulaasaa honaa chahiye…

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  • rashbihari dubey says:

    choron ki vakalat kar rahe hain khuswant singh babau.
    waise sardar ke baat ka bura nahi manana chaihye kyonki sardar ko khud kitni budhdhgi haoi??????????????????

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  • मैं इस मामले पर कोई कमेंट नहीं करना चाहता था, क्योंकि सच क्या है किसी को पता नहीं हमारे पत्रकार साथियों को इस देश के कानून पर मेरे हिसाब से थोडा भरोसा रखना चाहिए, हमें ये याद रखना चाहिए के आज करुनानिधी जैसे राजनेता की बेटी तिहाड की रोटी खा रही है इतना ही नही खुद ए. राजा सलाखों के पिछे पहुंच चुके हैं, अगर बरखा दत वाकई गुनहगार है तो आज न कल उसे भी भुगतना ही पडेगा । लेकिन कुछ साथी अपने आक्रोशों को ब्यक्त करने के लिए जो भाषा का प्रयोग किया है वह कहीं से भी एक सभ्य समाज कि पहचान नहीं हो सकती और भारतीय संस्कृती तो हमें इस तरह कि भाषा सार्वजनिक तौर पर प्रयोग कि इजाजत कतई नहां देती । हम पत्रकार हैं समाज के सामने सच लाना हमरा फर्ज है जरा सोचिये अगर इस तरह कि भाषा का प्रयोग हमलोग करेंगे तो फिर हमारे उपर से लोगों का भरोसा उठना लाजमी हे।

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  • as a reporter barkha is ok.bot barkha dutt and rajdeep sardesai both r pseudo secular.we the people has a lot of useless people on the debate.i saw certain viodes of her on youtube and was sad to see .faith of people is being abused on her show and she sits dumb.

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