: इंटरव्यू : कमाल खान (वरिष्ठ पत्रकार, एनडीटीवी) : मुझे पार्टियों में जाना, किसी के आगे-पीछे करना, बिलावजह डिनर पर जाना अच्छा नहीं लगता : पुरस्कार मिलते रहते हैं पर मैं यही मानता हूँ कि हर आदमी को अपना काम चुपचाप लो प्रोफाइल हो कर करते रहना चाहिए : मैंने एक मुख्यमंत्री की कुछ जनविरोधी बातों पर एक बार कहा था-“ तुझसे पहले एक शख्स जो यहाँ तख्तनशीं था, उसको भी अपने खुदा होने का उतना ही यकीं था” :
कमाल खान पत्रकार हैं. और रूचि कुमार भी. नाम से ही जाहिर हो जाता है कि दोनों दो धर्मों के मानने वाले हैं. हिंदुस्तान ही नहीं, पूरी दुनिया में धर्म का बड़ा ताना-बाना है, बहुत सारी पेचीदगियां हैं. कुल मिला कर धर्म में इतनी ताकत है कि किसी को भी किसी से लड़ा दे. फिर हमारे देश में तो इस तरह की लड़ाइयां दिखती ही रहती हैं. दंगे, आतंकवाद, अलगाववाद, बंटवारा इन सब की जड़ में धर्म ही तो है. ऐसे में कमाल और रूचि जैसे लोग कुछ गड़बड़ से दिखते हैं क्योंकि इन लोगों के मामले में यह धर्म रूपी धारदार हथियार काफी कुंद सा हो जाता है. कठमुल्लाओं और कट्टरपंथियों की कौन कहे, पारंपरिक सोच वाले तमाम लोगों को भी ऐसे लोगों से बड़ी परेशानी का अनुभव होने लगता है. अरे, ये कोई बात हुई? आप मुसलमान हैं, वो हिंदू है. पहले सरेआम प्रेम किया, फिर खुलेआम शादी कर ली. फिर शान से एक दूसरे के साथ आराम से रह रहे हैं. यह तो हद है. समाज भी कोई चीज़ है, दुनिया का भी कोई रिवाज़ है. या फिर बस जो मन में आया वही कर लिया? ऐसे तो चल चुकी दुनिया!
लेकिन कमाल और रूचि की गलतियां यहीं खत्म नहीं होतीं. वे और तरह से भी समाज के कई हिस्सों में गोलमाल कर रहे हैं. पत्रकार हैं, और वह भी आज के नहीं. बीस-बीस सालों का अनुभव है दोनों का, उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश के चोटी के पत्रकारों में उनकी गिनती है. दो बार राष्ट्रपति से पुरस्कृत हो चुके हैं कमाल और पिछले दो सालों में पांच पुरस्कारों से. रूचि ने दुनिया के सबसे बड़े टीवी समूह सीएनएन से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से जुड़े वृत्तचित्र तक पर काम किया है. पर इतने गलत लोग हैं ये कि अभिमान ही नहीं करते, ना नखरा, ना अदाएं और ना किसी से बदसलूकी. आप से बात करेंगे तो सर-सर कह के, जबकि सैकड़ों आईएएस अफसर और उत्तर प्रदेश का हर बड़ा नेता इनकी एक आवाज पर भागे चले आयें.
पर इन्हें है कि बस अपने काम से मतलब- पत्रकारिता से जुड़े तमाम अन्य कार्यों से जैसे कोई वास्ता ही नहीं. अरे ट्रांसफर, पोस्टिंग कराते नहीं हो, कोई पैरवी करते नहीं हो, अपने पावर को दिखाते नहीं हो, यहाँ-वहाँ लॉबीगिरी करते नहीं हो, नेताओं के यहाँ डिनर पर जाते नहीं, तीन-पांच करना नहीं. तो फिर भैया, काहे को पति-पत्नी मिल कर दो महत्वपूर्ण स्थान रोके पड़े हो. किसी भले आदमी को मौका दो, जो अपना भी कुछ कल्याण कर सके और अपने आस-पास वालों का भी. इसी परम बौडम शख्स से मैंने (अमिताभ ठाकुर) एक लंबी बातचीत की जिसके अंश आप के सम्मुख प्रस्तुत हैं-
प्र- कुछ अपने बारे में बताएं?
उ- मैं मूल रूप से लखनऊ का ही रहने वाला हूँ. पुराने लखनऊ में हमारा मकान है. मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से इंग्लिश में एमए किया था और उसके बाद रशियन भाषा में एडवांस डिप्लोमा. इसके बाद मेरा इरादा रूस जाने का था. लगभग पूरी तैयारी हो गयी थी कि अचानक माँ की तबियत काफी खराब हो गयी. माँ की बीमारी की वजह से रूस नहीं जा पाया और फिर इस क्षेत्र में चला आया.
प्र- पत्रकारिता में कैसे आये?
उ- जैसा कि मैंने कहा, मेरी शुरू में रूचि अन्य क्षेत्रों में थी पर जब इंडिया में रह गया तो धीरे-धीरे पत्रकारिता में दिल लगाने लगा. मैंने वर्ष 1990 में नव भारत टाइम्स के लखनऊ कार्यालय से अपना काम शुरू किया. यह अखबार तीन साल बाद 1993 में बंद हो गया. उस समय विनोद शुक्ल ने मुझे अपने अखबार में काम करने का अवसर दिया लेकिन मैंने कुछ दिनों बाद वहाँ से रिजाइन कर दिया. फिर दिसम्बर 1994 में मैं एनडीटीवी में चला आया और उसके बाद यह मेरे दूसरे घर की तरह ही हो गया. तब से पिछले अट्ठारह सालों से मैं एनडीटीवी में ही हूँ.
उस समय एनडीटीवी का अपना चैनल नहीं था. शायद आपको स्मरण हो कि उस समय डीडी टू यानि डीडी मेट्रो पर अंग्रेजी में एक न्यूज़ बुलेटिन आती थी 20 मिनट की. यह प्रोग्राम स्वयं प्रणव रॉय प्रस्तुत करते थे. मैं उसी समय से प्रणव रॉय सर के साथ जुड़ा तो आज तक यह साथ कायम है.
प्र- कुछ रूचि जी के बारे में बताएं?
उ- रूचि भी मेरी तरह लखनऊ की हैं. ये लोग मूल रूप से माथुर कायस्थ हैं और एक बहुत बड़े परिवार को बिलोंग करते हैं. इनके परिवार का सीधा सम्बन्ध वाराणसी के बड़े कायस्थ परिवारों और पूर्व उपराष्ट्रपति कृष्णकांत जी के परिवार से भी था. इनकी दादी ने उस जमाने में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पी एचडी किया था. पर उस समय इनकी दादी के पिता ने उन्हें इंग्लैंड जाने की अनुमति मात्र इसी शर्त पर दी थी कि वे वेस्टर्न कल्चर में नहीं ढलेंगी और किसी फिरंगी से शादी नहीं करेंगी. वे बहुत ही लंबे समय तक सिंधिया कॉलेज की प्रिंसिपल भी रहीं.
रूचि के पिता तो और भी विलक्षण व्यक्ति थे. वे आचार्य नरेन्द्र देव के सेक्रेटरी रहे. वे लोग पैसे वाले लोग थे, झारखंड में उनकी बौक्साईट की दो बहुत बड़ी माइंस थीं. पर वे मूलतः सोशलिस्ट विचारधारा के थे, इसीलिए माइंस को पैसा कमाने का नही बल्कि देश की और मजदूरों की सेवा करने का माध्यम समझते थे. इस कदर मजदूरों के हितैषी थे कि वे खुद उन्ही लोगों के गाँव में रहते थे. चाहे कहीं भी हों, ठीक सात तारीख को वे अपने माइंस में पहुँच जाते. उनका कहना था कि मजदूरों को समय से वेतन नहीं मिलने पर उन्हें कठिनाई होगी. आज भी वे रिक्शे पर चलते हैं, खादी का कपडा पहनते हैं और हमेशा कहते हैं कि बेटा यदि रिक्शे पर बैठना हो तो बूढ़े रिक्शे वाले के रिक्शे पर बैठो क्योंकि उसे सवारियां कम मिलती हैं.
एक बार झारखण्ड में उनके पास नक्सलाईट पहुंचे. उन्हें उम्मीद थी कि पैसे वाला है, कुछ बढ़िया पैसा मिल जाएगा. पर वहाँ देखा तो केवल खादी के कपडे और दुनिया भर की किताबें. वे लोग आश्चर्यचकित रह गए, फिर इनसे काफी देर बात करने के बाद इनके पाँव छू कर वहाँ से आये.
ऐसे परिवार का पूरा संस्कार रूचि को भी मिला.
प्र- रूचि जी के पत्रकारिता सम्बंधित कैरियर के बारे में कुछ?
उ- रूचि ने टाइम्स ऑफ इंडिया के एक संस्थान टीआरएस द्वारा उस समय संचालित मीडिया एंड मास कम्युनिकेशन के एक आल इंडिया कम्पीटिशन में भाग लिया था जिसमे पूरे देश से मात्र 11 लोग चयनित हुए थे. टाइम्स ऑफ इंडिया वाले इन चयनित लोगों को ट्रेनिंग के बाद अपने यहाँ ही नौकरी भी देते थे. रूचि ने टाइम्स ऑफ इंडिया के जयपुर कार्यालय में ट्रेनिंग लिया और उसके बाद वे लखनऊ आ गयीं.
वहाँ कुछ साल रहने के बाद वे टीवी में चली आयीं और 1993 में विनोद दुआ द्वारा डीडी के लिए बनाए जा रहे एक बहुत चर्चित प्रोग्राम ‘परख’ के लिए यूपी का काम देखा. इसके बाद वे कई सालों तक फ्रीलांस काम करती रहीं. इस दौरान इनको एक से बढ़ कर एक महत्वपूर्ण दायित्व निभाने का मौका मिला. उस दौरान गिरीश कर्नाड टीवी के लिए स्वराजनामा बना रहे थे, रूचि ने इसके लिए पूरे यूपी की जिम्मेदारी ली. फिर मेनका गाँधी की वाइल्ड लाइफ से जुड़े एक कार्यक्रम हेड्स एंड टेल्स के लिए काम किया जिसमे दुधवा पार्क, कॉर्बेट पार्क जैसे कई जगहों पर सैकड़ों स्टोरी की. प्रीतिश नंदी ने अटल बिहारी वाजपेयी पर एक डोक्युमेंटरी बनायी थी जो उनके पहली बार पीएम बनने पर टीवी पर दिखाई भी गयी थी. इसमें भी यूपी का कम रूचि ने ही किया था. इसके अलावा आर्ट एंड कल्चर नामक एक प्रोग्राम के लिए काम किया था जो सी एन एन तक पर प्रदर्शित हुआ. इसके लिए वे बद्रीनाथ से लेकर केदारनाथ तक ना जाने कितनी बार गयीं. अब कई सालों से इंडिया टीवी में हैं.
प्र- आप दोनों की शादी के बारे में?
उ- हमारी मुलाक़ात टाइम्स ऑफ इंडिया में हुई जब मैं नव भारत टाइम्स और वह टाइम्स में थीं. मुलाक़ात के बाद मिलने जुलने का सिलसिला चलता रहा और करीब दो साल बाद हमारी शादी हुई.
प्र- शादी में कोई दिक्कत, परेशानी?
उ- परेशानी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि मेरी माँ ने मेरी शादी के छह माह बाद अचानक मुझसे पुछा कि बेटा रूचि की जाति क्या है, कुछ आस-पास वाले पूछते रहते हैं, मालूम हो तो बता दूंगी. कुल मिला कर दोनों परिवार के लोगों ने इस शादी में भरपूर योगदान और सहयोग दिया और बड़े जतन से हमारी शादी कराई. मेरे पिता थे नहीं, पहले ही उनकी मृत्यु हो गयी थी. माँ ने कोई आपत्ति की नहीं. रूचि के पिता तो और भी मजेदार थे. उन्होंने हमारी शादी का कार्ड अपने हाथ से लिख कर उसे लैटर प्रेस से निकलवाया क्योंकि उनका कहना था कि लोग बाद में यह नहीं कहने की स्थिति में हों कि उनकी लड़की रूचि ने भाग कर शादी की है.
हमने स्पेशल मैरेज एक्ट में अप्लाई किया-राकेश ओझा उस समय एडीएम थे. और फिर नियत समय पर हमारी शादी हो गयी.
प्र- कुछ अपने बारे में और भी?
उ- देखिये मैं यही जानता हूँ कि मैं बहुत ही साधारण आदमी हूँ. मैं यह मानता हूँ कि मैं पत्रकारिता में अपना काम अपनी पूरी कोशिश भर करता हूँ और पूरी इमानदारी से करता हूँ. इसके बाद मेरी जिंदगी में बहुत कुछ है और मैं अपनी उसी दुनिया में खोया रहता हूँ. कुल मिला कर मैं मूलतः एक पारिवारिक आदमी हूँ जो अपने ड्यूटी के अलावा अपनी बीवी और बच्चों में लगा रहता है. मुझे पार्टियों में जाना, किसी के आगे-पीछे करना, बिलावजह डिनर पर जाना अच्छा नहीं लगता. इसीलिए मैं अपनी तरह की जिंदगी जीता हूँ. हाँ, यदि कोई भी रचनात्मक कार्य होता है तो मैं जरूर करने की कोशिश करता हूँ.
प्र- कुछ हज़रतगंज के सौदर्यीकरण के बारे में बताएं. इसमें आप दोनों के कार्यों की बड़ी सराहना हुई है.
उ- दरअसल मैं और रूचि जब भी विजय शंकर पाण्डेय, एडिशनल कैबिनेट सेक्रेटरी से प्रेस कांफ्रेंस आदि में मिलते तो हर बार हजरतगंज की तमाम समस्याओं के बारे में उन्हें बताते रहते. इसी बीच सरकार के स्तर पर हजरतगंज के सौदर्यीकरण के बारे में कुछ विचार हुआ. इसके बाद हम लोगों ने सतीश चंद्र मिश्रा से भी इसकी चर्चा कई बार की. वे लोग सोचते कि ये दोनों कभी अपने फायदे की बात नहीं करते, हमेशा सार्वजनिक हित की बातें करते रहते हैं. सो उन लोगों ने उन्होने कहा कि हज़रतगंज के सौदर्यीकरण से जुड़े आर्किटेक्ट
नासीर मुंजी से एक शानदार प्लान बना कर हम उन्हें दें तो वे इसे उत्तर प्रदेश डेवेलपमेंट काउन्सिल से आगे बढायेंगे. इसके बाद सरकार ने सौ लोगों की एक ‘लखनऊ कनेक्ट’ नाम से इन्फोर्मल संगठन बनाया जिसमे शहर के कई नामी-गिरामी और पुराने लोगों को शामिल किया. इसमें आर्ट, कल्चर, जर्नलिज्म, लिटरेचर, और हर क्षेत्र के लोग शामिल हुए. इन लोगों की मीटिंग हुई पर यह महसूस किया जाने लगा कि सौ लोगों की कमिटी बहुत बड़ी हो जा रही है. इसके बाद एक कोर कमिटी बनी. इसकी कई बैठकें हुई, कुछ सतीश चंद्र मिश्रा के घर पर, कुछ शरद प्रधान के यहाँ, कुछ सुनीता ऐरन तो कुछ मेरे यहाँ. कई सारी बैठकें यूनिवर्सल बुक डिपो वाले चंदर प्रकाश के यहाँ हुईं. हम लोगों का रोल एक तरह से निशुल्क कंसल्टेंट का रहा. फिर इसमें हजरतगंज ट्रेडर एसोशिएशन भी शामिल की गयी. किशन चंद अम्बानी, लीला ब्रदर वाले, संदीप कोहली, रस्तोगी जी आदि. सरकार ने कहा कि ट्रेडर की सहभागिता भी हो और जहां बाकी काम सरकार करे वहीँ पुताई ये लोग खुद कराएं ताकि आगे का मेंटेनेन्स भी ये लोग करेंगे. हम लोगों का रोल शायद इसीलिए रहा क्योंकि पत्रकार लोग बड़े लोगों से मिल पाने में सक्षम होते हैं.
प्र- कुछ अपने पुरस्कारों के बारे में बताएं?
उ- देखिये, पुरस्कार मिलते रहते हैं पर मैं यही मानता हूँ कि हर आदमी को अपना काम चुपचाप लो प्रोफाइल हो कर करते रहना चाहिए. अब पिछले दो सालों में मुझे पांच पुरस्कार मिले. एक तो रामनाथ गोयनका अवार्ड मिला. फिर गणेश शंकर विद्यार्थी अवार्ड मिला. यह अवार्ड पहले सिर्फ प्रिंट मीडिया के लिए था. पहली बार इलेक्ट्रोनिक मीडिया के लिए शुरू हुआ और मुझे भी मिला. ये दोनों पुरस्कार स्वयं राष्ट्रपति के हाथों मिला. इसके अलावा एक न्यूज़ टेलीविजन अवार्ड मिला जो मेरे अलावा अरूण पुरी साहब को मिला. फिर पर्यावरण पर बेस्ट रिपोर्टिंग के लिए अवार्ड मिला. अभी हाल में सार्क कंट्री राइटर अवार्ड मिला, दक्षेश देशों की संस्था सार्क द्वारा. पहले इसमें सिर्फ लेखकों को अवार्ड मिलते थे, अबकी पत्रकारों को भी शुरू किया है. मुझे और उदय प्रकाश को यह पुरस्कार मिला.
प्र- अंत में कुछ जीवन का फलसफा?
उ- मैं चुपचाप अपना काम करता हूँ. मैं मानता हूँ कि एक रोल टीवी के जरिये अदा किया, अपनी जिंदगी को अपने ढंग से जियेंगे. मैं फॅमिली मैन हूँ, बीवी बच्चों के साथ घूमना फिरना, ना मीडिया सेंटर गए, ना यहाँ वहाँ बिलावजह घुमक्कडी की. अपने काम से काम रखता हूँ.
हाँ, यह है कि मैं अपनी बात पूरी शिद्दत से कहता हूँ, लेकिन मेरा मानना है कि गाली देने के लिए गाली बकने की जरूरत नहीं होती. कई बार मेरी बात सरापा गाली होती है पर मैं बहुत ध्यान रखता हूँ कि मेरी भाषा बहुत ही संयत हो. मैंने एक मुख्यमंत्री की कुछ जनविरोधी बातों पर एक बार कहा था-“ तुझसे पहले एक सख्श जो यहाँ तख्तनशीं था, उसको भी अपने खुदा होने का उतना ही यकीन था”. इसी कारण से कुछ लोग मुझसे नाराज़ रहते हैं. पर मैं तो अपना काम अपने ही ढंग से करता हूँ. और यही हाल रूचि का भी है.
अब देखिये, कुछ दिनों पहले मैं श्रावस्ती गया था मुख्यमंत्री के दौरे को कवर करने के लिए. वहाँ मैं स्थानीय पत्रकारों से बहुत आराम से हंस-बोल रहा था, पुलिस के एक सीओ आये और कहा कि आप तो बड़े खुशमिजाज हैं, टीवी पर तो आप बड़े ही खतरनाक दिखते हैं. मैंने उनसे कहा आप खुद देख लीजिए, मैं कैसा हूँ.
यही है मेरी और रूचि की जिंदगी का उसूल और यही हैं हमारे जीवन जीने के ढंग.
लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान का यह इंटरव्यू आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने लिया है. इस इंटरव्यू के बारे में अगर कुछ कहना चाहते हैं तो अपनी प्रतिक्रिया नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए लिख-भेज सकते हैं.












firoz khan
March 8, 2011 at 8:29 am
कमाल साहब तो वैसे ही हमारे मीडिया जगत मे पसंददीदा पत्रकार हैं…आज उनकी स्टोरी सुन कर दिल बाग़ बाग़ हो गया..
..ज़िन्दगी जियो जीने के लिये ज़रुर पर उस ज़िन्दगी से सबक़ मिले या कोशिश सभी की होनी चाहिये……….
Puneet Kumar Malaviya
March 8, 2011 at 8:33 am
[b]Is saadagi pe kaun na mar jaaye ae khuda……
[/b]
vipan gupta
March 8, 2011 at 8:55 am
aap ka big fan hoo sir.plz mujhai dost bnayega…..
manish yadav.bjmc lucknow university 9451917436
March 8, 2011 at 9:24 am
आज जब मीडिया के दुनिया के लोग किसी से सीधे मुह बात नही करते वही आज किसी की इतनी सीधी बातो को सुन कर ये लगता है की आप भीड़ से कितने अलग है…और लोग तो भीड़ से ही अलग हो जाते है…
rajj kumaar
March 8, 2011 at 9:32 am
yh amitabh apna profail bda rha hai aur kuchh nhin hai bhaiyo
Naseem Ansari
March 8, 2011 at 10:10 am
Ulti Ganga beh nikli hai. Ab patrakaro ke interview IPS officers lene lag gaye hain 😉 Iske peeche kuch to hoga hi ;D
Khair interview achcha hai Amitabh ji.
rakesh
March 8, 2011 at 10:13 am
Kammal……tum sachmuch kamaal ke insaaan ho….ndtv kee pehchan tunme insaniyat ke apne najariye se banai..hamari nazar men tumhara muqam aik patarkar se kahin uncha hai…
hamne dekhe the Chand, Sitare aur Suraj hee
tumhen dekha to paya or bhi aik hasti hai Asman pe..
jug-jug jio bhaiye or yun hi chamkate rahe or is is tooti dunia ko jorte raho…
rakesh/jansatta/chd
tuntun
March 8, 2011 at 10:14 am
great kamaal saheb….keep it up…wishes to yu and ruchi ji
tuntun
SUSHIL
March 8, 2011 at 10:30 am
WASTAV ME KAMAAL SIR KAMAAL KE INSAAN HEI…..MALIK UNKO LAMBI UMAR DE.
Harishankar Shahi
March 8, 2011 at 11:36 am
कमाल खान साहब का यह साक्षात्कार पढ़ने में तो काफी अच्छा है साथ इसको पढकर इनके जादुई व्यक्तित्वा की झलक मिल जाती है. कमाल जी बहुत अच्छे पत्रकार हैं, मेरी तो कोई हस्ती ही नहीं की मैं उनकी पत्रकारिता तो नाप तौल सकूँ.
परन्तु मुझे क्षमा मांगते हुए अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर कुछ कहना है. इस साक्षात्कार में कमाल जी के बारे में यह आया की वह सबसे सादगी के साथ मिल लेते हैं. पर आज तक जब भी मैंने कोशिश की इनसे बात करने की या कुछ कहने की उनकी तरफ से हमेशा कोई जवाब नहीं आया.
कमाल साहब के बहराइच और श्रावस्ती (चूँकि दोनों जनपदों को कमोबेश एक ही पत्रकार देखते हैं) के ठेकेदार टाइप के पत्रकारों से अच्छे सम्बन्ध होंगे पर हम जैसे फक्कडो के लिए तो वह एक उन्छुये चाँद जैसे रहे हैं. खैर एक नाचीज़ ने कुछ कहा है इस पर सर नाराज़ ना होंगे ऐसी आशा करता हूँ.
faisal khan
March 8, 2011 at 12:19 pm
waqayi kamal bhai aik shandar shakhsiyat ke malik hain mai to jab se media mai aaya hoon tabhi se unka fan hoon kamal bhai jab P2C lagate hain to kamaal ki hoti hai aik-aik lafz na jane kon si kitab se chhant kar late hain aur shayri to wallah lajawab khair kabhi qismat mai milna huva to mare liye mulaqat yadgar hogi.m faisal khan(UNI.TV.saharanpur)09412230786,09760020786
abdul salim khan
March 8, 2011 at 12:27 pm
kamaal bhai aapka interview kafi achchha laga[ hamesha se tv par aapko dekhkar aapke jaise bolne ki nakal karta hun, khair is blog ke jariye hi maine aapko najdik jana hai,
abdul salim khan, reporter amar ujala
lakhimpur kheri
gayatri gupta
March 8, 2011 at 12:35 pm
ye interviwe padne k baad. bahut achcha laga.kyuki kamal khan ji k baare me kahi se kuch pata nhi chal raha tha. unki personal life kaise hai.ye hamesha se hi janne k liye main aatur thi.unhe hamesha hi t.v par dekha hai news dete huai.par aaj uan k baare me jankar achcha laga. thanx for AMITABH THAKUR.
Rahul Kumar Thakur
March 8, 2011 at 3:23 pm
Kamal Khan aaj indian media ke sabse suljhe reporters me se agrani hain sath hi sath navagantuk ke liye ideal person.interview padhkar kamal khan aur unke personal life ke bare mein jankari mili.main unke reporting specially PTC ka to fan hoon.
om
March 8, 2011 at 6:35 pm
पत्रकारों को आत्ममुग्धता की जबरदस्त बीमारी होती है। ये भाई साहब भी उससे बच नहीं पाए हैं। ये जिन अवार्ड्स की सूची गिनाकर मुग्ध हो रहे हैं वो तो कल के लौंडों को भी मिल रहा है। पत्रकारिता के नाम पर शेरो शायरी करने की छूट अगर एनडीटीवी की तरह कोई दूसरा संस्थान भी देने लगे तो इन भाई साहब जैसे आत्ममुग्ध पत्रकारों की भीड़ खड़ी हो जाएगी।
हरिओम
March 8, 2011 at 6:37 pm
ये वही कमाल खान हैं जिनका नाम मुलायम सिंह की उस सूची में शामिल था जिसमें सरकार से मलाईदार प्लाट लेने वाले कई तथाकथित बड़े पत्रकार शामिल थे। कमाल साहब भूल तो नहीं गए। अभी भी ये एक यूपी सरकार के सरकारी घर में मेहमान की तरह रह रहे हैं और सरकार को गालियां देने का दम भर रहे हैं। साहब वाह
Sandeep
March 9, 2011 at 9:08 am
kamal sahab ke jeevan se judi batein jankar bahut accha laga.upar wala aisi shakshiyat har kisi ko nahi bakshta.kamal hindi electronic media ke aise ikloute reporter hain jinki report ka bulletin me hamesha intzar rehta hai.shehar-e-lucknow programe me to unhone gazab dhaa diya tha.alochna kiski nahi hoti lekin in upar ki gayi alochnao me kuntha zyada nazar aa rahi hai.kamal aap sachmuch kamal hain.aapse milne ki badi tamanna hai.dekhte hain kab mouka milta hai.best wishes – sandeep
Sanjeev Shukla
March 9, 2011 at 9:49 am
Good. Being a Political Journalist in Maharashtra i can understand that it is not easy to fight against govt but if you are honest and doing your job transparently than no body can stop you because your concience work as a boost.
himanshu puri
March 9, 2011 at 10:42 am
KUCH NA KAHKAR SIRF YAH KAHUNGA KI ” HE IS GREAT MAN”
vijay shekhar singh
March 10, 2011 at 8:29 am
kamaal khan saheb ke bare me kuch bhi kehna suraj ko chiraj dikhana hoga .
sushil shukla shahjahanpur up
March 10, 2011 at 9:48 am
haqiqat me kamal and ruchi ji dono bahut acche insaan hain .god kare ki aap hamesha aise hi tarraki karen aur abhi aur aage badhen.thanks
Rehan Mustafa
March 11, 2011 at 3:34 am
Sadagi Aur Sharafat ka Naam Hi Tow Kamaal Khan Hai.
News story mein Lafjo ka Talmail Itna Acha Hota,Ki Koi Jawab Nahi.
Apka Rehan Mustafa
KHALID SAEED
March 11, 2011 at 4:52 am
Kaun kahta hei aasmaan mein surakh ho nahi sakta ek paththar to tabiyat se uchhalo yaaro, wakayee kamal sahab ek zimmedar reporter hi nahi ek behatreeen insaan bhi hein, aaj jab media professional name aur fame ke pichhe bhagte bhagte apni family aur khud se bhi door hote ja rahe hein aise mein mujhe lagta hei kamal sahab ka interview padhkar unhe apne wajood ko tatolne mein kisi hadh tak to madad milegi hi,
kamal sahab aap wakayye media industry ko noor hein, mujhe lagta hei mulk ka har zimmedar bashinda aapki umer darazi ki dua karega, aameen
संजय द्विवेदी
March 11, 2011 at 9:18 am
कमाल भाई तो कमाल के ही आदमी हैं। मैं जब लखनऊ विश्वविद्यालय से बीए कर रहा था, तब कमाल भाई नवभारत टाइम्स में थे। संयोग से वे विश्वविद्यालय ही कवर करते थे। तब वे वेस्पा से चलते थे। हमें उनका बहुत प्यार मिला। वे सचमुच एक अच्छे इंसान हैं। एक अच्छा इंसान हर भूमिका में अच्छा ही होता है, यह उन्होंने साबित किया है। उन्हें और उनकी धर्मपत्नी को मेरी शुभकामनाएं कि वे यूं ही युवाओं को प्रेरित करते रहें। आज जब मेरे विद्यार्थी कमाल भाई की रिर्पोटिंग और उनकी पीटूसी का जिक्र करते हैं तो यह सोचकर अच्छा लगता है कि हमने कमाल भाई को बहुत करीब से देखा है। अमिताभ जी को इस बेहतर इंटरव्यू के लिए बधाई।
एम्. रिजवान कुरैशी
March 11, 2011 at 12:52 pm
अस्सलामुआलेकुम कमाल खान भाई
आईएएस अधिकारी अविनाश ठाकुर जी द्वारा लिया गया आपका इंटरव्यू आज भड़ास-4-मीडिया के माध्यम से पड़ने को मिला और बेहद पसंद आया! भाई आपसे एक बार बरेली में राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी की जनसभा में मुलाकात हुई है , आपकी सादगी का ये लिबास देश के पत्रकारों के लिए एक नजीर है और अलग अलग मजहब के होकर अपने इंसानियत की इबारत जिस तरह अपनी शादी में लिखी उससे देश की नौजबान पीड़ी सबक लेकर मोहब्बत और भाईचारे की अनूठी मिशाल पेश करेगी , भाई आपकी इस सादगी को हम सलाम करते है और अविनाश ठाकुर जी का शुक्रिया अदा करते है कि उन्होंने आपकी इस सादगी से हमें रु-ब-रु कराया
आपका अपना
एम्. रिजवान कुरैशी
संजय शर्मा
March 11, 2011 at 2:43 pm
कमाल भाई आपकी स्टोरी तो मैं ज्यादातर एनडीटीवी पर देखता रहता हूं आप कमाल की स्टोरी करते हैं लेकिन आप वास्तव मे भी कमाल के हैं ये मैं आपका इंटरव्यू पढ़कर जाना…बेस्ट ऑफ लक
rajkumar sahu, janjgir chhattisgarh
March 12, 2011 at 1:19 pm
badhiya interview. badhaai.
Harishankar Shahi
March 13, 2011 at 6:15 am
यशवंत भाई जी आपका यह पोर्टल भी कुछ सुस्त होता जा रहा है. हमने अपने पूर्व कमेन्ट को मिटाने के लिए आपसे एक निवेदन किया था परन्तु आज 3 दिन बीतने के बाद भी आपकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया. अब कुछ तेज़ी दिखाइए.
बहरहाल हम अपने पूर्व में किये गए कमेन्ट में कुछ सुधार करना चाहते हैं. हमने पूर्व में ठेकेदार टाइप पत्रकार शब्द किसी खास के लिए प्रयोग नहीं किया था. हमारा आशय उन लोगो के लिए था जो पत्रकारिता और बड़े लोगो से संबंधो के नाम पर काम करने के ठेके लेते हैं. हमारे शब्दों का इशारा किसी खास पत्रकार की ओर नहीं था यह एक सामूहिक रूप से कहा गया था. कुछ वरिष्ठ लोगो को बुरा लगा उसका क्षमा प्रार्थी हूँ. हम यहाँ एक चीज़ यह भी कहना चाहेंगे की दो दिन पूर्व तक हम यह जानते भी नहीं थे की कोई बहराइच और श्रावस्ती से कमाल सर के चैनल एन.डी.टी.वी. का कोई रिपोर्टर भी है. अन्यथा अपने शब्दों को और बचा कर लिखते.
वह कहते हैं की हमने उन्हें शमशीर छुआ दी,
हमे यकीं हैं की हमने सिर्फ जबां ही खोली थी.
कमाल सर एक कमाल के व्यक्तित्व के धनी हैं. उसमे कोई दो राय नहीं.
vaibhav shiv
March 15, 2011 at 4:00 pm
JAISA NAAM ,VAISA KAM ,VAKAI KAMAL SIR KAMAL HAI. AUR AMITABH SIR AAP BHI KAMAL HAI . AAP NE HAME KAMAL SIR KI KAMAL KE VYKTIV SE PARICHAY KARAYA . AAP DONO KO PRANAM .
choudhary lalit kumar singh
March 18, 2011 at 7:01 am
aaj kammal shahab ka ye interview padh kar woh sher yaad aa gaya ki
“Aarzoo hai jis mukammal manzil ki,use toh ek din pa hi lenge hum,
risto ko ret ki dher ki tarah bikra kar paya toh kia paya.
Wakai aaj ke samaj ko nayi sheekh di hai kammal shahab ne….
jaisa ki hum jante hai ki har kaam jo shiddhat se kiya ho use manzil mil hi jati hai.usi tarah apne jo kiya badi shiddhat ke sath kiya…or samaj or zindgi ke har kartavye ko badi shejta or saralta ke sath aam insaan ke samne rakh dia hai
ravi Srivastav
March 23, 2011 at 2:22 pm
aaj kamal khan sir jas mukam pe hain, wakai usse hum logo ko sikhna chahiye…jab Kamal sir ki Koi bhee khabar main TV Per Dekhta hoon to mano kashi mathura aur agra ki sanskriti ko samete ko aapko up ke darshan kara raho ho…
ajay
March 25, 2011 at 12:38 pm
written by ajay kumar
from panipat
today i just read your interview.
i reaily impress your persnality.
sir,i m doing B.A Mass Communication2nd year from k.u.k univercity
sir,you r great
Virendra Singh
March 26, 2011 at 1:08 pm
Thanks Yashwant ji for presenting the interview of Kamal Khan. Kamal Khan is the best icon of reporting. Especially his PTC is always touching with the sweetness of Urdu juban. His tone, texture and theme of the news is excellent. As voice of common man, he always breaks those news items, that others never heed to. This genre and specialty of Kamal makes him Kamal.
danish anwar
March 26, 2011 at 2:01 pm
assalam ale kum kamal bhai. Amitabh sahab ka liya ye interview padha. Pad k bahut achcha laga. Mai bhi journalism ka student hun n mai bhi ek imandar patrakar banna chahata hun. aap ki imandari ka mai qayal hun.
Purti Nigam
March 26, 2011 at 2:58 pm
Dear Amitabh Ji,
This is very nice interview. This is very nice interview. Kamal Sir and Ruchi Mam are really very honourable personality in media world.
I belong to journalism field and a big follower of Kamal Sir, and Ruchi Mam. May god always bless them.
Purti Nigam
TV INDIA LIVE
sarfaraaz Pathan
March 31, 2011 at 9:32 am
bahut badiya
aashish koshal
March 31, 2011 at 10:20 am
kamal saheb…aap wakai kamal ke hai…
फिरोज अहमद खान
March 31, 2011 at 6:23 pm
कमाल भाई आप कमाल हो
Shrawan Singh, Not Journalist...Only Mediakarmiii !!!
April 5, 2011 at 3:38 pm
Adaab Kamal Khan Sir,
TV par aapko aur aapki khabrein dekh kar toh sukoon milta hi hai aaj aap ke baare mein thoda aur jaankar achha laga.
Mai bhi ek tv patrakaar hun, aaj-kal news channels mein kya chal rha hai…kisi ko batane ki jarurat nahi.
Aise mein aap unmein se hain jisse dekhkar lagta hai k sachchi patrakarita abhi ZINDA hai..!
Kyukii, khabar me agar dum hai toh woh khud BOLTI hai…uske liye aapko chillane ki zarurat nahi..!
Kabhi mauka mila toh aap se zarur milunga…shukriya kehne k liye!!!
Thanx.
Shrawan Singh, Not Journalist...Only Mediakarmiii !!!
April 5, 2011 at 3:49 pm
Adaab Kamal Khan Sir,
Tv par aapko aur aapki khabrein dekh kar toh sukoon milta hi hai aaj aapke baare mein thoda aur jaankar achha laga.
Mai bhi ek tv patrakaar hun…aaj-kal news channels par kya chal rahaa hai kisi ko batane ki zarurat nahi!!!
Aise mein aap unmien se hain jinhe dekhkar ehsaas hota hai ki sachchi ptrakarita abhi ZINDA hai…!
Kyukii, khabar mein agar dum hai toh woh khud BOLTI hai…uske liye chillane ki zarurat nahi hoti…!
Mauka mila toh zarur milna chahunga…shukriyaa kehne k liye.
Regards.
Inam
April 7, 2011 at 9:45 am
Really difficult to find such people in today’s world…when I was in school, Hindi was one subject, I would only write enough to be able to get just passing marks. I read this entire article…This is really inspiring..
Dharmender Yadav Faridabad
April 19, 2011 at 10:40 am
कमल खान जी आप की खबरे में देखता हु मेरे पास शब्द नहीं है उन की तारीफ करने की मेरे दिल में आप के लिए वही जगह है जेसे किस आम आदमी के लिए फ़िल्मी हीरो अमिताभ बच्चन ,सलमान खान ऋतिक रोशन के लिए होती है आप टी वी जगत की पत्रकारिता में आप एक महान पत्रकार है बुन्देल खंड की पानी पर बनाई आप की वो खबर मुझे आज भी याद है जिस में मुहावरा था की चाहे खसम मर जाये गागर न फूटे एक और खबर थी जिस में किसान के अनाज की तुलना 1956 ( शायद ) में एक तोले सोने से की गई थी आज एक कुंतल गेहू में तो 1 मासा सोना भी नहीं आएगा आप की खबरे में एसे देखता हु जेसे लोग क्रिकेट मेच और अपनी पसंदीदा फिल्म देखता है
धर्मेंदर यादव फरीदाबाद
दिनेश शुक्ल
May 22, 2011 at 11:50 am
कमाल खान जी तो कमाल है ही…साथ ही हमें उनके जीवन जीने की कला से प्रेरणा लेनी चाहिए…और अपने उसूलों के साथ ही उनकी अचछाईयों को भी ग्रहण करना हमारा उद्देश्य होना चाहिए…क्योकिं पत्रकारिता जगत में कुछ लोग ही है जो उसूलों पर चल रहे है…बाकी तो सब जानते ही है क्या हो रहा है…मैं एक बार कमाल जी से मिलना चाहुँगा और उनके सहज और साधारण होने की कला सीखना चाहूँगा….
नमन
September 26, 2011 at 4:49 pm
सुना है कि हजरतगंज सौन्दरीकर्ण मे पत्रकारो को भी हिस्सा मिला था तो अमिताभ जी आप कमाल खान से ये भी पता कर लेते की उसमें कौन से पत्रकार शामिल थे आखिर ये सतीश चन्द्र मिश्रा जी के भी खास है।
niti jha
December 1, 2011 at 1:15 am
कमाल खान जी को मै उन प्रत्रकारो में से एक मानता हूं जिन्होंने पत्रकारिता को पेशा नही बल्कि जिम्मेदारी बनाया है। कमाल के राम देख के तो मै कमाल खान का कायल हो गया और आगे भी उम्मीद करता हूं कि कमाल सतानशि को खुदा ना बनने का एहसास कराते रहेंगे।
sirfirapatrakar
December 9, 2011 at 5:38 am
KAMAL HAI. EK BHRASHT IPS ADHIKARI EK BADDIMAG PATRAKAR SE BAAT KAR RAHA HAI
Abdul salam
September 13, 2013 at 3:54 pm
·माल खान जी आप·ी स्टोरी एनडी टीवी में देखता हूं, आप विषयों ·ो बेहतरीन तरी·े से पेश ·रते हैं। मैं भी राजस्थान पत्रि·ा ·े छत्तीसगढ़ संस्·रण में संपाद·ीय विभाग में सेवाएं दे रहा हूं।
Abdul salam, Bhilai, CG
September 13, 2013 at 3:55 pm
·माल खान जी आप·ी स्टोरी एनडी टीवी में देखता हूं, आप विषयों ·ो बेहतरीन तरी·े से पेश ·रते हैं। मैं भी राजस्थान पत्रि·ा ·े छत्तीसगढ़ संस्·रण में संपाद·ीय विभाग में सेवाएं दे रहा हूं।