‘देश के सभी हिन्‍दू साम्‍प्रदायिक क्‍यों नहीं हैं?’

सलीम जब से आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे।

इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है। अब अगर कांग्रेस के कार्यकर्ता संघ कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता। सोनिया गांधी को इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या की साजिश में शामिल होने की बात कोई पागल ही कह सकता है। किसी को अवैध संतान बताने से बड़ी गाली कोई नहीं हो सकती। गलती केएस सुदर्शन की भी नहीं है। आरएसएस ने महात्मा गांधी की हत्या की। एक साजिश के तहत राममंदिर आंदोलन खड़ा करके देश के दो समुदायों के बीच नफरत की दीवार खड़ी की।

जो आदमी या संगठन दिन रात साजिशों में ही उलझा रहता हो, उसे दूसरे लोग भी ऐसे ही नजर आते हैं। कहते हैं कि ‘चोरों को सब चोर नजर आते हैं।’ आरएसएस की नीतियों की आलोचना की जाती है, लेकिन यह तो माना ही जाता रहा है कि आरएसएस के लोग अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करते। सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए उतरना और फिर राजनैतिक दलों की तरह अभद्र भाषा का प्रयोग करना इस बात का संकेत भी है कि शायद अब आरएसएस खुलकर राजनीति में आना चाहता है।

जब से आरएसएस नेता इन्द्रेश कुमार का नाम अजमेर ब्लास्ट में आया है, तब से आरएसएस बैकफुट पर आ गया है। इन्द्रेश कुमार के अलावा भी अनेक संघी कार्यकर्ता आतंकवादी घटनाओं में लिप्त पाए गए है। कानपुर और नांदेड़ आदि में मारे गए छोटे कार्यकर्ताओं के बारे में तो संघ ने यह कहकर पीछा छुड़ा लिया था कि उनका संघ से कोई नाता नहीं है, लेकिन इन्द्रेश कुमार के बारे में यह नहीं कह सकते कि उनका नाता संघ से नहीं है। तीन-चार साल पहले देश में आयी बम धमाकों की बाढ़ के पीछे कभी लश्कर-ए-तोएबा का तो कभी इंडियन मुजाहिदीन का तो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का नाम लिया जाता रहा। इंडियन मुजाहिदीन का ओर-छोर भी आज तक खुफिया एजेंसियां पता नहीं लगा सकी है।

मालेगांव, समझौता एक्सपेस, हैदराबाद की मक्का मस्जिद और अजमेर की दरगाह पर हुए विस्फोट और कानपुर, नांदेड़ आदि में संघ के कई कार्यकताओं के बम बनाते हुए विस्फोट में मारे जाने के बाद खुफिया एजेंसियों को शक हुआ था कि इंडियन मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तोएबा की आड़ में कोई और भी बम धमाके करने में लिप्त हो सकता है। तब कुछ लोगों ने भी आशंका जाहिर की थी कि कहीं कोई और ही तो नहीं बम धमाके कर रहा है।

उधर आरएसएस के कार्यकर्ता बम धमाके करते थे, इधर आरएसएस हिटलर के प्रचार मंत्री गोयबल्स की तर्ज पर इस्लामिक आतंकवाद का ऐसा हौआ खड़ा कर देता था कि सभी का ध्यान सिर्फ मुसलमानों पर ही केन्द्रित हो जाता था। आरएसएस ने सुनियोजित तरीके से इस्लामिक आतंकवाद का ऐसा मिथक गढ़ा कि सभी को यह लगने लगा आतंकवाद के पीछे मुसलमान ही हैं। हद यहां तक हो गयी कि देश के हर मुसलमान को शक की नजरों से देखा जाने लगा। हर मुसलमान आतंकवाद का पर्याय समझा जाने लगा। भारत का मुसलमान बचाव की मुद्रा में था। उसे यह नहीं सूझ रहा था कि वह क्या करे? यहां तक हुआ कि दारुल उलूम देवबंद को आतंकवाद के खिलाफ फतवा तक देना पड़ा।

जब मुसलमानों की तरफ से यह कहा गया कि सभी मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं तो इसके जवाब में आरएसएस ने यह कहना शुरु किया कि यह सही है कि हर मुसलमान आतंकवादी नहीं है, लेकिन हर आतंकवादी मुसलमान ही क्यों है? अब यह भी तो कहा जा सकता है कि जिन बम धमाकों में हिन्दुओं की संलिप्तता सामने आयी है, वे सभी संघी क्यों हैं? कुछ लोग तो यह आशंका भी व्यक्त करते रहे हैं कि इंडियन मुजाहिदीन के नाम से हिन्दुवादी संगठन ही बम धमाके कर रहे थे। यह संयोग नहीं हो सकता कि जब से बम धमाकों के पीछे हिन्दुवादी संगठनों का हाथ सामने आया है, तब से बम धमाके नहीं हो रहे हैं।

बम धमाकों में संघियों के नाम आने के बाद वे इस बात पर बहुत जोर दे रहे हैं कि हिन्दुओं को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। हिन्दू धर्म और कर्म से आतंकवादी हो ही नहीं सकता। हम इससे भी आगे की बात कहते हैं, दुनिया के सभी धर्मों के भी सभी लोग आतंकवादी नहीं हो सकते। हां, कुछ लोग जरुर गुमराह हो सकते हैं। यही बात हिन्दुओं पर भी लागू होती है। और मुसलमानों पर भी। कुछ लोगों की गलत हरकतों की वजह से न तो पूरा समुदाय जिम्मेदार हो सकता है और न ही धर्म। हिन्दुओं में भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो आतंकवादी घटनाओं में लिप्त पाए गए हैं। इसलिए यह तो बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि हिन्दू धर्म और कर्म से आतंकवादी होते हैं। जब आरएसएस बम धमाकों के आरोपियों के पक्ष में बोलकर यह कहता है कि हिन्दुओं को बदनाम किया जा रहा है तो वह देश के तमाम हिन्दुओं को इमोशनल ब्लैकमेल करके उन्हें अपनी ओर लाना चाहता है।

आरएसएस इस बात को भी समझ ले कि वह इस देश के 85 प्रतिशत हिन्दुओं का अकेला प्रतिनिधि नहीं है। इस देश का बहुसंख्यक हिन्दू सेक्यूलर है। हिन्दुओं ने ही बम धमाकों में शामिल हिन्दुओं के चेहरे बेनकाब किए। हिन्दुओं ने ही गुजरात दंगों पर नरेन्द्र मोदी को कठघरे में खड़ा कर रखा है। हिन्दुओं ने ही बाबरी मस्जिद विध्वंस पर अफसोस और गुस्सा जताया था। ये हिन्दू ही हैं, जो आज केएस सुदर्शन के वाहियात बयान पर आरएसएस के कार्यालयों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन आरएसएस को इस बात का अफसोस रहता है कि इस देश के सभी हिन्दू साम्प्रदायिक क्यों नहीं हैं? क्यों वे इस देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की उसकी योजना में शामिल नहीं होते? क्यों वे आरएसएस की हां में हां नहीं मिलाते?

लेखक सलीम अख्तर सिद्दीक़ी हिंदी के सक्रिय ब्लागर, सिटिजन जर्नलिस्ट और सोशल एक्टिविस्ट हैं. उदयन शर्मा से बेहद प्रभावित सलीम मेरठ में निवास करते हैं. विभिन्न विषयों पर वे लगातार लेखन करते रहते हैं.

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Comments on “‘देश के सभी हिन्‍दू साम्‍प्रदायिक क्‍यों नहीं हैं?’

  • Salim Akhtar Siddiki ji …Apake vicharon ko padha ….Kuch Alag naheen laga ..bas bahte huee paani main apane hathon ko aapane bhi dho liya…..
    Hindutwa ka matalab shayad aap nahen jante isliye aap aisa kah rahe hain….
    Jitna Bura apako tatha Congress ko laga SONIA ke baare me sun kar ..Utana Bura hinduwon ko bhi laga RSS ke baare main sun kar …dono hi baate aadhar-heen hai …Saath hi aapane ise relate kiya Muslim antankwad se …..Muslim Kya hain Main Apako batata hun….

    1..Muslim Kisi bhi mandir ka prasad / Darshan Naheen Karte .(maine dekha hai saaf Inkaar Karte huee )..jabki hindu sabhi Dharmon Ka aadar karte hain…masjid ke aage bhi sar jhukate hain..

    2..Aaj Hindustan main Muslim Haq ki baat karne wala seculer kahlata hai …tatha Hindu ki baat karne wala COMMUNAL….ajeeb Sthiti hai…

    3..Hindi kisi ka dharm pariwartan naheen karate lekin Aaj kal Isai(Cristian) banaya jata hai logon ko…Hidu ki aisi koyee bhi sanstha naheen hai ….

    4..Sadiyon ke baad bhi (MUGAL / BRITISH) apane aapako muslim kahlane wale shayad aap bhi converted hon….ya kisi muslim ke kisi hindu ke saath jabardasti sambandh ki paidaish hon….

    5..Kya MUJAHIDDIN ko wo ijjat de paye muslim……..
    ek choti se jagah AYODHYA ke kiye Jo Apaka KABA naheen hai, lekin hundu ki Astha ki baat hai lekin muslim ko dusare ki aastha se koyee matalab naheen….

    6.. Kyun Saare hindu mandiron se sat kar Muslimon ki Masjid hain……KABHI SONCHA…..

    7..Hindustan Ki tarakki mein Badhak is badhati jansankhya ko rokane main muslimon ka kya yogdaan hai….kyun ek bada vote bank banana chahte hain muslim…..apani jansankhya ko badha kar…

    8..Kyun Viswas ka Mahol Naheen hai Muslim aur hindu ke beech……

    thodi to sharm karo mere dost (sorry ..DUSHMAN)

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  • yashovardhan nayak tikamgarh. says:

    आतंकवाद किसी भी जाति-सम्प्रदाय में या धर्म में नहीं सिखाया जाता ,बात आदमी की जबाबदेही और जिम्मेदारी कि भावना की है .सभी धर्मो में अच्छाई है ,किन्तु उसे ग्रहण कितने लोग कर पाते यह सोचने कि बात है.स्वतन्त्र भारत में तीन बड़ी राजनीतिक हस्तियाँ आतंकवाद की बलि -बेदी पर चढ़ गई ,इनमे गाँधी जी कि हत्या नाथूराम गोंडसे ने की ,इंदिरा जी की हत्या सतवंत सिंह ने की .वही राजीव गाँधी को लिट्टे ने बम से उड़ाया था .इनमे से कोई भी मुस्लिम आतंकवादी नहीं था ? लेकिन पूरी दुनिया में इन दिनों जो आतंक-वाद का दृश्य दिख रहा है ,वह तो यह दर्शाता है ,कि मुस्लिम समुदाय इस समय” इस्लाम” को बचाने में जुटा हो ? मेरा एक मुस्लिम मित्र एक दिन गुस्से से बोला कि “गुजरात ” में क्या हो रहा है ?मैंने उससे यही कहा कि बहुत गलत हो रहा है .किन्तु इतना ही गलत कश्मीर में “कश्मीरी-ब्राम्हणों ” के साथ हो रहा है .बात सही तरीके से सोचने की है ?जो गलत है ,वह गलत है .जो सही है ,वह सही है . धर्मेन्द्र ,हेमामालनी से शादी करते है ,और स्वयम को मुस्लिम घोषित कर देते है .

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  • इस देश का बहुसंख्यक हिन्दू सेक्यूलर है। हिन्दुओं ने ही बम धमाकों में शामिल हिन्दुओं के चेहरे बेनकाब किए। हिन्दुओं ने ही गुजरात दंगों पर नरेन्द्र मोदी को कठघरे में खड़ा कर रखा है। हिन्दुओं ने ही बाबरी मस्जिद विध्वंस पर अफसोस और गुस्सा जताया था। ये हिन्दू ही हैं, जो आज केएस सुदर्शन के वाहियात बयान पर आरएसएस के कार्यालयों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। Lekin Kabhi Musalman kyo nahi aatankvadiyo ke khilaf nahi aaata.

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  • salim ji, thoda gaur farmayen
    a) Hindustaan ka batwaara meri laas par hoga………. Godse ne kaha.. batwaara ho gaya….. Laash nahi hai. Kya yeh gandhiji ki iccha purti nahin thi.
    b) Indiraji ko ek sardaar ne kyon maara…… Bhindarnwala kaun tha, Golden Temple ki haalat kya hui. Yadi sab aap ki tarah samajhdaar nahi hue to.
    c) Rajiv Gandhiji ko LTTE ne maara (2nd attempt mein safalata mil), sri lanka mein unhi ke samman ki parade mein.

    Kya yeh sabhi waastv mein sahid the yaa apne kiye ki saja paye.

    Ek aur bahut choota sa prashn, jab muslims kahin par minority mein hote hain tab ye bahut secular aur anya acche guno se lais hote hain, par jaise hi inki sankhya badhati hai inhe shariyat aur baaki chigje yaad aati hain, jaisa ki hum kashmir aur anya pranton mein dekh rahe hain.

    RSS=SIMI bhi apne aap mein ek bahut badi gaali hai, shaayad sudarshanji ke aaropn se bhi badi, sangh ne to koi aakraman nahin kiya. Haan is vivaad me sudarshanji ki pratikriya sangh ke vicharon ke anukul nahin thi.

    Apne lekh ke aarambh mein aap kuch is tarah lage jaise azadi ke baad sangh hi desh ki satta chala raha tha.

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  • विचारक says:

    ये बात मुझे समझ में नही आती कि हर मुस्लिम पत्रकार और विचारक भी..कौम की बात आते ही..क्यों संकीर्ण मानसिकता का हो जाता है…अब सलीम साहब को ही ले लिजिए….क्या कभी इन्होने…कश्मीर से पलायन करने पर मज़बूर..पंडितों के बारे में सोचा..क्या आपने ये सोचा…जब कांग्रेस सिर्फ..मुस्लिम परस्त बाते करती है…तो फिर उसे…फिरक़ा परस्त पार्टी क्यों नही कहा जाता…जबकि बीजेपी के हिन्दू विचारों को लेकर..उसे सांप्रदायिक ठहरा दिया जाता है…सलीम साहब…अगर आप आपकी तमाम एतिहासिक मस्जिदों पर गौर करें…तो वे मंदिरों से ही चिपटकर पाएंगे..ज़रा इतिहास खंगालेंगे..तो आप जान जाएंगे…कि आप…मुस्लिम से पहले क्या थे……

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  • madan kumar tiwary says:

    मैं आर आर एस की एक बात नहीं समझ पाता की क्या हिन्दुस्तानी होने के लिये किसी धर्म विशेष का होना जरुरी है। ? भारत का हर नागरिक , चाहें वह किसी धर्म का हो या कोई भी धर्म न मानता हो , उसका इस देश पर समान अधिकार है। रही बात मुस्लमानों की तो अपने उपर लगे लांछन के लिये मुस्लिम खुद जिम्मेवार हैं। वह अल्पसंख्यक बनकर जिना पसंद करते हैं या पसंद करने के लिये कठ्मुल्लाओं द्वारा मजबुर किया जाता है। न सिर्फ़ मुस्लमान बल्कि हर वह आदमी चाहे उसका धर्म कोई हो , भारत का नागरिक है।

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  • abhishek purohit says:

    जिन लोगो कि धार्मिक पुस्तकें “जेहाद” के जरिये काफ़िरो को मारना सिखाति है वो आज संघ को सिखा रहे है??अभि तक तो एक भी आरोप प्रमाणित नही हुवा है उससे पहले ही सेक्युलरी नाटक शुरु हो गया है।्साफ़ साफ़ दिख रहा है कि सरकार के पास चंडू खाने जीतना भी सबुत नही है फ़िर भी मिडिया हिन्दु को आँतकवादी सिध्द करने प्र तुला है,कोन्ग्रेस से कितने पैसे मिले है??बिके हुवे पत्रकारो मे इतना साम्र्थ्य भी नही है कि अपनी मैडम इटली से कोयी इन्ट्रव्यु ले सके,कम्स्मिर से हिन्दु मार मार कर निकाल दिए गये है लेकिन इन सेक्युलर गिध्धो को नही दिखता है हिन्दुओ का माँस नोचना इनका पैसा है,जरा जेहाद पर अपने धर्म ग्रन्थ के बारे मे तो लेखना नहि तो मै देता हु लिन्क???जो लोग खुद इस्लाम का नाम लेकर हिन्दुओ को मार रहे है उनकि बातॊ ना सुन कर शान्ती का धर्म है रट लगाना ओर यहा खुद पीडित को ही आँतगवादी बनाने की चाले हो रहि है??संघ हिन्दुओ का प्रतिनिधित्व नही है कुछ सालो बाद संघ ही हिन्दु और हिन्दू ही संघ होगा वैसे भी संघ ने आपसे कोयी सेर्टिविक्ट नही माँगा है सुदर्शन जी ने बहुत ही ठिक कहा था वह “हिंसा” पर उतारु कोन्ग्रेसियो की भी अक्ल ठिकाने पर आ गयी है। इन्द्रेश जी ने कोन्ग्रेसीयो की नींदे उडा दि है राष्ट्र्वादी मुसलमानो का एक मंच बना दिया ,पुज्य स्वामी असिमानन्द जी महाराज के बारे मे तो जानते ही होंगे जिन्होने ईसाई मशिनरियो के धन्धो को डाँग मे चोपट कर दिया इतना अपराध पर्याप्त है उनको किसी भी अपराध मे आरोपी बनाने को बाकी को तो पकडने मे ज्यादा वक्त नही लगता है पुलिस को,वैसे जानना दिलच्स्प है की यदी तथाकथित सुनिल जोशी की डायरी मे किसी मिडिया वाले के नम्बर निकल गये तब मीडिया वाले क्या करेंगे.वैसे ताज स्थिति यह है कि पुज्य स्वामी असिमानन्द जी महाराज व भरत भाई ने तो अपने बयान वापस ले लिये है,अब सुरक्षा एजेन्सियो के पास कुछ नही बचा सिवाय “फ़ोटोकोफ़ी” किए हुवे सुनिल जोशी की तथाकथित डायरी के पन्नो के ।जो भारत का विभाजन करने से लेक्र लाखो हिन्दुओ की हत्यायें करने के दोषि है एसे जेहादियो को निरिह हिन्दुओ को सिख देने का कोयी अधिकार नही है बात बात मे जिनका इस्लाम खतरे मे पड जाता है और जो कट्टर मुल्ला-मौलवियो के “रुहानि” जेहादि नारो के गुलाम बन कर हिन्दुओं को मारना शुरु कर देते है एसे बन्धुओ को जाकर समझाईये संघ को नही।

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