न्‍याय नहीं मिला, नौकरी जरूर चली गई

यूपी के लोगों हो जाओ सावधान। न्याय पाने की सोच रखकर अपनी फरियाद लेकर सूबे की मुख्यमंत्री से मिलने की गुस्ताखी न करना। कहीं  आपकी यह गुस्ताखी आप पर भारी न पड़ जाये। हम आपको बताना चाहते हैं कि इस समय यूपी की लोकशाही व्यवस्था देखकर राजशाही व्यवस्था भी शर्माती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री से मिलने की तमन्ना आपको जेल पहुंचा सकती है और यदि आप सरकारी नौकरी में रहकर चैन की रोटी खाते हैं तो आपकी नौकरी भी छीनी जा सकती है। औरैया दौरे पर गयी यूपी की सीएम मायावती से मिलने का प्रयास करना स्कूल की एक शिक्षामित्र को भारी पड़ गया।

पति से परेशान शिक्षामित्र की ननद की जब अधिकारियों ने मदद नहीं की तो वह जान देने को तैयार हो गयी। महिला शिक्षामित्र ने ननद की परेशानी को देखकर न्याय दिलाने का मन बनाया और उसने सोचा कि स्कूल का निरीक्षण करने आ रहीं सूबे की मुख्यमंत्री मायावती से फरियाद कर वह ननद को न्याय दिलावायेगी। और यही सोच उसको भारी पड़ गयी। ननद को तो न्याय मिला नहीं उल्टा मुख्यमंत्री से मिलने की गुस्ताखी ने महिला शिक्षामित्र की नौकरी भी ले ली। नौकरी ही नहीं गयी इसी के साथ मुख्यमंत्री ने स्वयं उसको डांटकर भी भगा दिया। नौकरी से बर्खास्त होने के बाद अब महिला शिक्षामित्र घर पर बैठकर फूट-फूट कर रो रही है और यह पूछ रही है कि आखिर में सूबे की मुखिया से मिलकर एक महिला को न्याय दिलाने का प्रयास कर आखिर में कौन सा गुनाह कर दिया।

एक महिला का दर्द आखिर में अब कौन समझेगा। गयी थी एक महिला को न्याय दिलाने। न्याय तो मिला नहीं उल्टा दो जून की रोटी का इंतजाम भी छीन लिया गया। नौकरी तो गयी ही गयी, ऊपर से जलालत और भी मिली। और यह सब कुछ हुआ सभी को न्याय दिलाने का दम्भ भरने वाली यूपी की मुख्यमंत्री मायावती के सामने। एक महिला की रोटी एक महिला के ही इशारे पर छीन ली गयी। न्याय देने को कौन कहे उसे महिला मुख्यमंत्री ने स्वयं झिड़क कर भगा दिया।

आइये बताते है कि इस महिला की नौकरी जाने के पीछे के कारणों को। यूपी के औरैया जिले के नौनकपुर गांव की रहने वाली प्रीति पाण्डेय नाम की यह महिला अपने ही गांव के प्राथमिक स्कूल में शिक्षामित्र के पद पर तैनात है। शिक्षामित्र प्रीति पाण्डेय की ननद सुलक्षणा की शादी कानपुर देहात जिले मे तैनात शिक्षक समीर शुक्ला से हुई थी। आरोप है कि समीर शुक्ला ने अपनी पत्नी सुलक्षणा की आये दिन पिटाई करता है। समीर की प्रताड़ना की शिकायत कानपुर देहात के अधिकारियों से कई बार की गयी किन्तु सुलक्षणा को न्याय नहीं मिला। सुलक्षणा ने सारी बात मायके नौनकपुर आकर अपने परिजनों को बताया। इसी बीच गांव के निरीक्षण के लिए सूबे की मुख्यमंत्री मायावती का कार्यक्रम लग गया। शिक्षामित्र प्रीति पाण्डेय को लगा कि अब तो न्याय मिलकर ही रहेगा। वह स्कूल में आ रही महिला मुख्यमंत्री से एक महिला का दर्द बतायेगी तो उसे न्याय जरूर मिलेगा। और उसने 6 फरवरी को स्कूल मे आयी सूबे की मुखिया को अपने ननद की समस्या को कागज मे लिखकर न्याय की गुहार लगाने को प्रयास किया। लेकिन मायावती ने उसे झिड़कर भगा दिया। मायावती को शिक्षामित्र का मिलने को प्रयास इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने जाते-जाते अधिकारियों को हिदायत भी दे दी। अगले दिन डीएम ने शिक्षामित्र को तलबकर उसे नौकरी से बर्खास्तगी का पत्र पकड़ा दिया।

स्कूल परिसर में समरसता और न्याय के प्रतीक बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा लगी है। मायावती डा. भीमराव अम्बेडकर को सामाजिक न्याय की क्रान्तिदूत कहती हैं, लेकिन शिक्षामित्र को सूबे की मुख्यमंत्री द्वारा जो न्याय दिया गया है, शायद उसे देखकर डा. भीमराव अम्बेडकर भी शर्मा गये होंगे। अब सवाल यह उठता है कि या तो मुख्यमंत्री जनता से मिलना नहीं चाहती हैं या फिर सूबे के ब्‍यूरोक्रेट्स अपनी कमियों को छुपाने के लिए मायावती को जनता से दूर रखना चाहते हैं। अधिकारियों से अपना जूता साफ करवाने मे दिलचस्पी दिखाने वाली मुख्यमंत्री मायावती को अब तो यह समझना ही होगा कि देश में राजशाही नहीं बल्कि लोकशाही है और जनता से उनकी यह दूरी कहीं उन्हें सत्ता से दूर न कर दे।

लेखक सुरेश मिश्र औरैया के निवासी हैं.

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Comments on “न्‍याय नहीं मिला, नौकरी जरूर चली गई

  • ravi solanki says:

    agar aaisa hi chalta rahega to bharat des me vo din bahut jaldi hi aayega. jab nayay pane ke liye sirf insan ko sabhi hade par kar ya to aatankwad banna hoga. ya fir aapne aap ko bhagawan ke hawale kar usi se nayay ki guhar lagani padegi. kyoki ye bharat des bhrastrachariyo se bhara pada hai. yaha nanay mangna uchit nahi ? sayed we bhul jate hai ki we kiske bharose mantri pad pr bhaite hai…

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  • arvind singh says:

    suresh ji jo mahila kisi byakti ka uttar pradesh ke sansakaro ke anusaar naam tak ucharit na karati ho us mahila se kisi mahila ne nyay magane ki galati hi kaise kar di. ab satta ke mad me choor mahila use dandit kiye jaane ka pachhatawa hi kyu ho raha hai.is desh me aisa hi chalega,kyunki ab bharat me kranti sambhav nahi dikhai padati. yaha ke logo ki socha mar gai hai, sab kuchha chup chaap sahane ki adat pad gai hai logo ko. aur kahawat bhi hai ki murdo ke desha me kranti nahi hoti, to yaha maya ki hi hukoomat chalegi aur yahi sab hoga.

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