बिनायक सेन के पक्ष में : एक अदभुत कोलाज

: पेंटिंग की तस्वीर, व्याख्यान का आडियो और वीडियो में कविताई : एक दुर्लभ आयोजन. संघर्ष, साहस, सच्चाई और सपने देखते रहने के समकालीन प्रतीक बन चुके बिनायक सेन को लेकर यहां एक कोलाज पेश है. तीन अलग-अलग माध्यम हैं. और तीन अलग तरह की कलाएं हैं. एक पेंटिंग, जो पिक्चर फार्मेट में है. एक व्याख्यान जो आडियो फार्मेट में है. और एक कविता जो वीडियो फार्मेट में है. तीनों के केंद्र में हैं बिनायक सेन.

नेट की ताकत और नेट की व्यापकता का गवाह है ये आयोजन जो सब कुछ एक ही जगह समेटे है, टेक्स्ट, फोटो, आडियो, वीडियो, कविता, पेंटिंग..

सबसे पहले पेंटिंग. इसे कोलकाता के इंडियन कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स से पढ़े पबन राय ने तैयार किया है. झारखण्ड के देवघर शहर के वरिष्ठ कलाकार पबन राय ने विनायक सेन के समर्थन में वाटर कलर से चित्रकारी की है. इसे जनज्वार टीम के साथियों को दैनिक प्रभात खबर के देवघर संपादक संजय मिश्र ने उपलब्ध कराई है. कला क्षेत्र में महत्वपूर्ण कामों के लिए आधा दर्जन पुरस्कारों से नवाजा जा चुके पबन राय खुद को आदिवासी और लोक कला में पारंगत करने में लगे हैं. इस ध्येय से उन्होंने ‘कोर्निक’ नाम के कला समूह का गठन भी किया है.

एक व्याख्यान में बिनायक सेन का भाषण. करीब 50 मिनट का यह भाषण आडियो फार्मेट में है. आईजी खान मेमोरियल की तरफ से आयोजित व्याख्यान में बिनायक सेन का लेक्चर कई मामलों में जोरदार है. उन्हें नीचे दिए गए आडियो प्लेयर पर क्लिक करके सुन सकते हैं.

तीसरा और आखिरी कविता है. नीचे दिए गए वीडियो में बिनायक सेन पर एक अदभुत कविता का वाचन है. शायद, इस कविता को सुनकर हम सबके दिमाग की बंद खिड़कियां खुल सकें. पेंटिंग की तस्वीर, भाषण का आडियो फार्मेट, कविताई वीडियो में…. बिनायक सेन और मुक्ति की आवाज को सुनिए, बांचिए, देखिए और महसूसिए.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


पेटिंग…

पबन राय की कृति : शांति के लिए उठे हाथ,  मुक्ति के लिए उठे हाथ, इंसाफ के लिए उठे हाथ
पबन राय की कृति : शांति के लिए उठे हाथ, मुक्ति के लिए उठे हाथ, इंसाफ के लिए उठे हाथ

व्याख्यान…

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कविता….

 

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Comments on “बिनायक सेन के पक्ष में : एक अदभुत कोलाज

  • Poet: Amir Rizvi

    काश के वो सिखों का हत्यारा होता, या गुजरात के नरसंघार में शामिल होता
    काश के वो प्राइवेट अस्पताल के लुटेरे डाक्टरों में से एक होता
    काश के वो किसी मल्टीनेशनल कंपनी का दलाल होता
    काश के वो राष्ट्रीय धरोहर को बेचने वाला बनिया होता
    If only he were a murderer of Sikhs, or involved in the massacre in Gujarat
    If only he were one of the malpractitioners at a private hospital
    If only he were an agent of a multinational company
    If only he were a merchant of national property

    काश के वो हिंसा प्रेरित करने वाले सलवा-जुडूम का सदस्य होता
    काश के वो भाषा, धर्म, मस्जिद, मंदिर के नाम पर रथ यात्रा निकाल पाता
    काश के वो घूसखोर पुलिस का अफसर होता
    काश के वो किसान की मेहनत से उपजे अनाज को सड़ाने वाला कृषि मंत्री होता
    If only he were a member of violence inciting Salwa Judum
    If only he could conduct a Rath Yatra on the name of language, religion, mosque, or a temple
    If only he were a corrupt police officer
    If only he were an agriculture minister letting the grain produced by hardworking farmers rot

    काश के वो त्रिशूल बाँटने वाला धार्मिक गुरु होता
    काश के वो टीवी चेन्नलों पर नफरत फैलाने वाला कठमुल्ला होता
    काश के वो जंगलों को उजाड़ कर खदान बनाने वाला मंत्री होता
    काश के वो पुलिस और सेना के अत्याचार पर गर्व करने वाला राष्ट्रवादी होता
    If only he were a religious guru distributing Trishools to people
    If only he were a hate spewing Mullah on TV channels
    If only he were a minister uprooting forests to make way for mines
    If only he were a nationalist who feels proud about tortures committed by the armed forces and the police

    काश के वो अहम् की खातिर इंसानियत की बलि चढ़ाने वाले वक्तव्य देता
    काश के उसके हृदय में करुना और दया नाम की कोई चीज़ न होती
    काश के वो अपने सारे सुख और चैन तो त्याग कर गाँव की सेवा में ना जाता
    काश के वो भी हम आप जैसे सोये हुए नागरिकों में से एक होता
    If only he would make a public statement on sacrificing humanity for one’s pride
    If only he didn’t have any compassion or empathy in his heart
    If only he didn’t leave his cozy life and went to villages for social work
    If only he was a sleeping citizen like you or I

    काश के वो भी अपने परिवार और व्यापार में व्यस्त और मस्त होता
    काश के वो महात्मा गाँधी के आदर्शों का मज़ाक़ उड़ा पता
    काश के वो डाक्टरों द्वारा ली गयी शपथ का पालन नहीं करता
    काश के वो भ्रष्ट अन्यायपालिका और दबंगों के आगे घुटने टेक देता
    If only he was happily immersed in his family and businesses
    If only he would mock Gandhi’s ideals
    If only he wouldn’t follow the Hippocratic oath
    If only he would surrender to corruption, injustice and bullies

    काश के वो घूस लेकर आतंक को भारत में प्रवेश देने वाला सुरक्षा कर्मी होता
    काश के वो देश को गरीबों और किसानो की समस्या से बहकाने वाली न्यूज़ सुनाता
    काश के वो नोबेल शांति पुरूस्कार के विजेता ओबामा साहब के साथ नाचता गाता
    काश के उसका दिल मानवाधिकार के लिए नहीं धड़कता
    If only he was a security guard letting terror enter India for a bribe
    If only he would deliver news to distract people from the issues of the poor and the farmers
    If only he would sing and dance with the Nobel Peace Prize winner Mr. Obama
    If only his heart wouldn’t beat for human rights

    तो आज
    बिनायक देश का खलनायक नहीं कहलाता
    न कोई कार्यवाही होती, न ही देशद्रोही का इलज़ाम गढ़ा जाता
    उम्र क़ैद की जंजीरों से दूर वो भी सम्मानीय और स्वतंत्र होता
    काश, काश, काश !!!
    Then today
    Binayak wouldn’t be called a villain in this country
    There wouldn’t be any prosecution, nor a charge for treason
    He would be free and far from the chains of life imprisonments, and well respected
    If only though, if only.

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