राहुल कुमार को हमारे-आपके सहयोग की दरकार है भी या नहीं?

पंकज झा: हम राहुल कुमार के साथ हैं, लेकिन….! : यशवंत जी, भास्कर में राहुल से संबंधित खबर के बाद आपका आलेख पढ़ कर याद आया कि संबंधित साइट भड़ास4मीडिया ही है. वह प्रकरण भी याद आया. तो यहां यह कहना ज़रूरी है कि निश्चित ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे लोकतंत्र को पावन बनाता है.

विचार.भड़ास4मीडिया.कॉम के एक लेख पर पत्रकार राहुल के खिलाफ आईटी एक्ट में मुकदमा

बात पुरानी हो चली है. पत्रकार राहुल कुमार ने गरीबों-आदिवासियों-निरीहों के सरकारी दमन से आक्रोशित होकर गृहमंत्री पी. चिदंबरम को संबोधित एक पद्य-गद्य युक्त तीखा आलेख भावावेश में लिख दिया. और उसे हम लोगों ने भड़ास4मीडिया के विचार सेक्शन में प्रकाशित भी कर दिया.

शुक्रिया सुप्रीम कोर्ट, आदिवासी भाइयों का दर्द समझने के लिए : इरा झा

इरा झा की पत्रकारिता में अलग पहचान है। राष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता में पहली ‘न्यूज वूमन‘ होने के अलावा उन्होंने रिपोर्टिंग में भी मुकाम बनाए हैं। विषेष रूप से आदिवासी-नक्सल रिपोर्टिंग में। बरसों से वह आदिवासियों की समस्याओं / संस्कृति पर लिख रहीं है। करीब तीस साल से पत्रकारिता में सक्रिय इरा झा नक्सलियों का उनकी मांद में (बस्तर के बीहड़ इलाके से) उनका इंटरव्यू कर लाईं।

मीडिया ने मिलाया बिछुड़ों को, अगवा जवान हुए रिहा

: अग्निवेश की मध्यस्थता और मीडिया की पहल रंग लाई : छत्तीसगढ़ में मीडिया ने सराहनीय कदम उठाया है. मीडिया ने स्वामी अग्निवेश की मदद से उन चेहरे पर खुशियां लौटाई है जिनके चेहरे मुरझा चुके थे. जिन्होंने अपनों को पाने का आस छोड़ दिया था. जिन्हें सभी तरफ से मायूसी हाथ लगी थी. जिन्होंने अपना माथा हर उस चौखट पर टेका जहां से उन्हें उम्मीद की किरण नजर आ सकती थी. लेकिन यह किरण भी उनकी आंखों से ओझल होती जा रही थी.

छत्तीसगढ़ के डीजीपी वेब वालों से दुखी

छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन साहित्य-कला प्रेमी माने जाते हैं और माओवादियों-नक्सलियों से दो-दो हाथ करने वाले भी. कई तरह के संगठनों व लोगों की आलोचना झेलते रहने वाले विश्वरंजन समय-समय पर नक्सलवाद-माओवाद पर अपने विचार प्रकट करते रहते हैं. उन्होंने माओवादियों व उनके समर्थकों पर अपना एक लेख भड़ास4मीडिया के पास भेजा है. इसमें विश्वरंजन वेब वालों से खासे दुखी दिखते हैं, और माओवादियों के समर्थकों से चिढ़े भी. पढ़िए.  -एडिटर, भड़ास4मीडिया

एक नक्सली की डायरी (2)

: सुख-दुख की साझेदारी का रिश्ता : इलाहाबाद में कई लोगों से मेरी गहरी दोस्तियां भी हुईं लेकिन उन्हें पारंपरिक अर्थों में दोस्ती कहना शायद ठीक नहीं रहेगा। यह कॉमरेडशिप थी- दोस्ती से कहीं ज्यादा गहरी लगने वाली चीज लेकिन दिली मामलों में उतनी ही दूर की। इसका अंदाजा इस बात से मिलता है कि इलाहाबाद में जिन लोगों के साथ दिन-रात रहना होता था उनमें एक भी दोस्त की अब मुझे याद नहीं आती।

बिनायक सेन के पक्ष में : एक अदभुत कोलाज

: पेंटिंग की तस्वीर, व्याख्यान का आडियो और वीडियो में कविताई : एक दुर्लभ आयोजन. संघर्ष, साहस, सच्चाई और सपने देखते रहने के समकालीन प्रतीक बन चुके बिनायक सेन को लेकर यहां एक कोलाज पेश है. तीन अलग-अलग माध्यम हैं. और तीन अलग तरह की कलाएं हैं. एक पेंटिंग, जो पिक्चर फार्मेट में है. एक व्याख्यान जो आडियो फार्मेट में है. और एक कविता जो वीडियो फार्मेट में है. तीनों के केंद्र में हैं बिनायक सेन.

कोई है जो इस बेबस लड़की को बचा सकता है?

[caption id="attachment_19185" align="alignleft" width="67"]हिमांशु कुमारहिमांशु कुमार[/caption]पिछले दिनों मैंने दंतेवाडा जिले की एक आदिवासी लड़की सोनी सोरी के मुश्किल हालात पर एक लेख लिखा था. जिसमें उसके भांजे लिंगा कोडोपी को दिल्ली से वापस बुला कर पुलिस के हाथों में सौंप देने के लिए वहां का एसएसपी कल्लूरी इस लड़की से सौदेबाजी कर रहा है. पहले तो उसने धमकी दी कि अगर इस लड़की सोनी सोरी ने अपने भांजे लिंगा कोडोपी को दिल्ली से लाकर पुलिस को नहीं सौंपा तो पुलिस इस लड़की की ज़िंदगी बर्बाद कर देगी.

पत्रकारों के सवालों से बौखलाए डीजीपी विश्वरंजन

बीते साल नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ पुलिस को करारा झटका दिया है. नए साल पर पत्रकारों से पुलिस महानिदेशक की मुलाकात में इसका असर साफ दिखा. नक्सली मोर्चे पर असफल छत्तीसगढ़ पुलिस के कप्तान विश्वरंजन पत्रकारों के सवालों के जवाब देते-देते बौखला गए. उन्होंने सभी आंकड़ों को किनारे करते हुए कहा कि 2010 में नक्सली मोर्चे पर सुरक्षा बल को काफी कम नुकसान हुआ है, नक्सलियों को धकेला गया है, छत्तीसगढ़ पुलिस सजग, सतर्क और समर्थ है.

उस डीआईजी ने मुझे नक्सली घोषित कर दिया

[caption id="attachment_18623" align="alignleft" width="80"]कुशल मोरकुशल मोर[/caption]मुझे हमेशा लगता रहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों पर होने वाले अत्याचारों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रचारित जाता है, इसलिए मैं खुद की आंखों से पूरी तरह सच देखना-समझना चाहता था. इसी तेजी में मैं वहां से हो आये पत्रकारों और अन्य लोगों की सलाह को दरकिनार करते हुए दो दिन पहले ही भारत के उस छोटे शहर दंतेवाड़ा पहुंच गया, जहां मैंने वो बड़े सच देखे जो आज भी मुझे आश्चर्यचकित करता है. मैं यह देखना चाहता था कि आखिर क्यों प्रधानमंत्री दंतेवाड़ा और देश के दूसरे इलाके में फैले माओवादियों को देश के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बताते हैं? वहीं इसके विपरीत बुकर पुरस्कार प्राप्त लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधती रॉय 10 ह़जार शब्दों का एक निबंध लिखती हैं और माओवादियों का यशगान करती हैं. जबकि वे सुरक्षा बलों के सैकड़ों जवानों को मार चुके हैं. मैं यह देखने के लिए उत्सुक था कि यह अनजान सी जगह आखिर क्यों देश में पिछले कुछ महीनों से चर्चा के केंद्र में है.

पांच बंधक पत्रकारों को नक्‍सलियों ने रिहा किया

: बिहार के नक्‍सल प्रभावित भभुआ की घटना : बिहार के भभुआ जिले में नक्‍सलियों ने पांच पत्रकारों को बंधक बना लिया था. सभी को अघौरा के कोटमा जंगल में नक्‍सलियों ने रोके रखा. घंटों तक बंधक रखने के बाद नक्‍सलियों ने उन्‍हें चेतावनी देकर रिहा कर दिया. पांचों मीडियाकर्मी अघौरा प्रखण्ड क्षेत्र के बथा गांव में कैमूर शांति समिति और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद समाचार संकलन करने गए थे.

इन माओवादी महिलाओं की भी सुनें

मिर्जापुर । हथियार उठाकर समाज बदल डालने का सपना देखने वाले माओवादियो के समाज से वे महिलाए ही बाहर धकेल दी जा रही हैं जो सशत्र क्रांति के लिए पुलिस की लाठी गोली का मुकाबला करते हुए जेल की यातना भरी जिंदगी गुजार चुकी हैं। इनकी संख्या भी कम नहीं है। जिसके नाम से कभी उत्तर प्रदेश, झारखंड  और बिहार के नक्सल प्रभावित इलाकों में लोग सिहर उठते थे, आज उन महिलाओं के आंसू पोछने वाला भी नज़र नहीं आता।

नक्सलवाद पर खुलकर हुई बात

: दूसरी वर्षगांठ पर साधना न्यूज की पहल : रायपुर में जमा हुए नेता, पत्रकार व अधिकारी :  नक्सलवाद पर हर जगह तीखी बहस छिड़ी हुई है. हर कोई समस्या का हल तलाश रहा है.

सरकार की नजर में इंसाफ मांगने वाला नक्सली

डबवाली (डी.डी. गोयल) गांधी आश्रम दांतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) के संचालक हिमांशु कुमार ने कहा कि सरकार विदेशी कम्पनियों से सौदेबाजी करके देश के धन को लुटा रही है। माईनिंग के लिए सेना और पुलिस के बल पर गरीब लोगों की जमीन हथियाई जा रही है। इंसाफ मांगने वाले को नक्सली करार देकर उसकी हत्या कर दी जाती है। वे ऑप्रेशन ग्रीन हंट के विरोध में अपने भारत भ्रमण के दौरान डबवाली में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।