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सब एडिटर से लेकर संपादकीय प्रभारी तक का काम कर चुकी हैं कनिमोझी

: तिहाड़ जेल में जासूस, सेक्स रैकेट संचालिका, हत्यारोपी महिलाओं के साथ रखा गया कनि को : चेन्नई में 1968 में जन्मी कनिमोझी अच्छी कवियित्री हैं. पत्रकारिता में भी उनका अच्छा अनुभव रहा है. तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करूणानिधि खुद अच्छे कवि हैं. इसलिए अपने पिता की तरह कनिमोझी ने कविताएं लिखना शुरू किया और वह इस कारण काफी चर्चित रहीं. कवियित्री के रूप में उनकी कई किताबें आ चुकी हैं. कई पुस्तकों का अनुवाद भी हो चुका है.

: तिहाड़ जेल में जासूस, सेक्स रैकेट संचालिका, हत्यारोपी महिलाओं के साथ रखा गया कनि को : चेन्नई में 1968 में जन्मी कनिमोझी अच्छी कवियित्री हैं. पत्रकारिता में भी उनका अच्छा अनुभव रहा है. तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करूणानिधि खुद अच्छे कवि हैं. इसलिए अपने पिता की तरह कनिमोझी ने कविताएं लिखना शुरू किया और वह इस कारण काफी चर्चित रहीं. कवियित्री के रूप में उनकी कई किताबें आ चुकी हैं. कई पुस्तकों का अनुवाद भी हो चुका है.

कनिमोझी देश के एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक द हिंदू में सब एडिटर के रूप में काम कर चुकी हैं. कनिमोझि सन ग्रुप से जुड़ी एक पत्रिका कुन्गुमम की संपादकीय प्रभारी भी रह चुकी हैं. साथ ही सिंगापुर स्थित समाचार पत्र तमिल मुरासू में फीचर एडिटर रह चुकी है. साल 1989 में कनिमोझि ने शिवकाशी के एक व्यावसायी से शादी की लेकिन दोनों का जल्द ही तलाक हो गया. इसके बाद 1997 में सिंगापुर के एक तमिल लेखक जी अरविंदन से शादी की. अरविंदन से उनका एक बेटा भी है. कनिमोझी का राजनीतिक करियर 2007 में शुरू हुआ जब वे राज्यसभा के लिए चुनी गई.

01 जनवरी 1968 को कनिमोझी का जन्म एक खैराती अस्पताल में हुआ था और उनके पिता करुणानिधि उन्हें देखने भी नहीं पहुंचे थे. दरअसल तब करुणानिधि ने कनिमोझी की मां रजति से अपना रिश्ता सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया था. कनिमोझी जब ग्रेजुएट हुईं, तब जाकर करुणानिधि ने रजति को अपनी तीसरी पत्नी के तौर पर कबूल किया. चेन्नई विवि से अर्थशास्त्र में डिग्री लेने के बाद कनिमोझी ने पत्रकारिता का पेशा अपनाया. उन्होंने अंगरेजी अखबार द हिंदू में बतौर उपसंपादक कैरियर की शुरुआत की. उन्होंने तमिल पत्रिका और अखबार में भी काम किया.

पत्रकारिता छोड़ जब वह सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हुईं, तो करुणानिधि ने उन्हें अपना साहित्यिक उत्तराधिकारी घोषित किया. तभी लोगों को पता चला कि वे कविताएं भी लिखती हैं. कनिमोझी के दो कविता संकलन प्रकाशित हुए हैं, जो बामुश्किल 150 पन्नों के हैं. एक प्रमुख तमिल साहित्यिक पत्रिका ने दोनों किताबों को कूड़ा करार दिया, पर डीएमके नेताओं ने इन्हें खूब बिकवाया. कनिमोझी डीएमके की कला-संस्कृति शाखा की अध्यक्ष हैं. 1989 में कनिमोड़ी ने शिवकाशी के एक व्यवसायी अथिबन बोस से शादी की. लेकिन बाद में तलाक हो गया. 1997 में उन्होंने सिंगापुर में रह रहे एक तमिल लेखक जी अरिवदन से शादी की. उनका एक बेटा भी है.

सामाजिक कार्यों से सीधी राजनीति में उनका प्रवेश 2007 में राज्यसभा का सांसद बनने के साथ हुआ. वह राजनीति में कोई बड़ा मुकाम बना पातीं, इससे पहले ही 2जी घोटाले ने उनके दामन को दागदार कर दिया. पिछले साल कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया और कनिमोझी के बीच बातचीत के टेप मीडिया में आये, तो पता चला कि सारा घोटाले के केंद्र में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा हैं. और, 2009 में राजा को दूरसंचार मंत्री बनाने के लिए लॉबिंग में कनिमोझी खासी सक्रिय थीं. 2जी घोटाले के सिलसिले में जब फ़ादर गैस्पर राज के यहां छापा पड़ा, तभी से यह चर्चा शुरू हो गयी थी कि सीबीआई के हाथ जल्द उनकी करीबी दोस्त कनिमोझी तक पहुंचेंगे.

कनिमोझी के हम उम्र फ़ादर गैस्पर ने धर्म की आड़ में खूब गुल खिलाये हैं. उन पर लिट्टे तक हवाला से पैसा पहुंचाने का आरोप है. वहीं लिट्टे ने उन पर तमिल आंदोलन के नाम पर अपनी जेब भरने का आरोप लगाया. कनिमोझी, उनकी मां रजति और पूर्व संचार मंत्री ए राजा के पैसों का हिसाब-किताब गैस्पर ही रखते थे. काले धन को सफ़ेद करने के लिए एक एनजीओ बनाया गया, जिसका मकसद तमिल भाषा और लोक कलाओं का विकास बताया गया था. कनिमोझी फ़ादर गैस्पर के साथ इस एनजीओ की निदेशक थीं. इस एनजीओ में करुणानिधि सरकार के साथ 2जी के घोटालेबाजों ने भी जमकर पैसा लगाया. अंतत: सीबीआई ने गत दो अप्रैल को कनिमोझी पर भी चार्जशीट दाखिल कर दी. आरोप है कि शाहिद बलवा की कंपनी डीबी रियलिटी ने कलैगनार टीवी को 200 करोड़ रुपये दिये थे. इस चैनल में कनिमोझी 20 फ़ीसदी की हिस्सेदार हैं. 20 मई को इस आरोप ने उन्हें तिहाड़ पहुंचा दिया.

तिहाड़ में कनि को 15 फुट लंबी और 10 फुट चौ़ड़ी कोठरी में डाल दिया गया. इस कोठरी में चेन्नई की सीआईटी कॉलोनी स्थित उनके आलीशान बंगले की सुख-सुविधाएं और एयरकंडीशनर जैसी कोई चीज नहीं है. कनिमोझी को बैरक नम्बर-6 में ले जाया गया है. बैरक नंबर-6 में कनिमोझी के साथ कई चर्चित कैदी हैं. जासूसी के आरोप में गिरफ्तार की गई इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायुक्त की एक पूर्व अधिकारी माधुरी गुप्ता, दिल्ली-एनसीआर में सबसे ब़डा सेक्स रैकेट चलाने वाली सोनू पंजाबन और शहर के पार्षद आत्मा राम गुप्ता की हत्या के आरोप में पिछले साल उम्रकैद की सजा पाने वाली शारदा जैन को भी बैरक नम्बर-6 में ही रखा गया है. जेल अधिकारियों के मुताबिक कनिमोझी को उनकी कोठरी में सोने के लिए बेड, एक टीवी, अखबार और पंखे की सुविधा मिलेगी. 2जी घोटाले मामले में कलैगनर टीवी के एमडी शरद कुमार को बैरक नम्बर-4 में रखा जाएगा. गौरतलब है कि बैरक नम्बर-4 में ही नाल्को के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक अभय कुमार श्रीवास्तव और सुरेश कलम़ाडी को भी रखा गया है.

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