सहारा की याचिका पर सेबी को नोटिस जारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सहारा इंडिया रियल एस्टेट को आम जनता से पैसा उगाहने पर रोक लगाने वाली सेबी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सेबी और कंपनी रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया. यह आदेश न्यायमूर्ति डीपी सिंह व न्यायमूर्ति वीके दीक्षित की दो सदस्‍यीय खंडपीठ ने दिया. इस मामले की अगली सुनवाई एक दिसंबर को होगी.

कोर्ट ने यह आदेश सहारा इंडिया के उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि सेबी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर गलत तरीके से आदेश जारी किया है. जबकि उसे इस तरह का आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है. याचिका में यह भी कहा गया कि सहारा एक विश्वसनीय समूह है. आम जनता को इस समूह पर पूरा विश्वास है. फिर भी सेबी ने कानून के विपरीत जाकर यह आदेश जारी किया, जो खारिज किए जाने योग्य हैं. याचिका में कहा गया है कि ऐसा आदेश केंद्र सरकार जारी कर सकती है. सेबी को अधिकार नहीं है कि वह इस तरह के आदेश जारी करे. अपनी बात रखने का अवसर दिए सेबी ने मनमाना आदेश जारी किया है.

गौरतलब है कि सेबी ने सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा रीयल एस्‍टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्‍टमेंट कॉरपोरेशन को शेयर बाजारों से धन जुटाने पर रोक लगा दी थी.

Comments on “सहारा की याचिका पर सेबी को नोटिस जारी

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    यशवंत जी,
    पूरा मामला २जी घोटाले से भी बड़ा है. दो लाख करोड़(जी हाँ, दो लाख करोड़) से ज़्यादा. दम हो तो खुद पड़ताल कर लो.
    वास्तव में सहारा की शुरूआत चीट फंड कंपनी के रूप में हुई थी, जिस पर आरबीआई ने अंकुश लगाया है क्योंकि लाखों छोटे निवेशकों (ठेला लगाने वालों, सब्जी बेचनेवालों, छोटे दुकानदारों) के करोड़ों रुपये नहीं लौटाए गये, जिसका कोई हिसाब किसी के पास नहीं है.( जिनकी मौत निवेश के ५ / १० साल में हो गयी, या जिनकी गुमटी उठ गयी, जिनके पास पेपर नहीं थे). इस साल २३ मार्च को आम्बी वेली में सुब्रत राय ने ३८४ करोड़ के इनाम अपने एजेंटों को दिए. ( ३५००० करोड़ के कमीशन के कमीशन (८ प्रतिशत) के २८०० करोड़ के अलावा).
    नीरा राडिया तो मीडिया के कारण मुन्नी बन गयी. ये तो उसके बाप हैं. आप खुद पड़ताल कर लें और आरबीआई एक्ट की धारा ४५ पड़ा लें, क़ानूनों की धज्जियाँ उड़ा रहा है सहारा समूह.
    आप खुद आरबीआई एक्ट पढ़ लें. RBI act section 45.

    What is a Chit Fund Company?
    Chit fund company means a company managing, conducting or supervising, as foremen, agent or in any other capacity, chits as defined in Section 2 of the Chit Funds Act, 1982.

    What is a Banking Company?
    Banking company under PMLA means a banking company or a co-operative bank to which the Banking Regulation Act, 1949 applies and includes any bank or banking institution referred to in section 51 of that Act. Banking Company includes
    All nationalized banks, private Indian banks and private foreign banks,
    All co-operative banks viz. primary co-operative banks, state co-operative banks and central co-operative banks,
    State Bank of India and its associates and subsidiaries,
    Regional Rural Banks.

    What is a Financial institution?
    Financial Institution under PMLA means a Financial Institution as defined in clause (c) of section 45-I of the Reserve Bank of India Act, 1934 (2 of 1934) and includes a chit fund company, a co-operative bank, a housing finance institution and a non banking financial company. Financial Institution includes:
    (i) Financial Institutions as defined in Section 45-I of the RBI Act. RBI regulates and supervises 8 All- India Financial Institutions namely EXIM Bank, NABARD, NHB, SIDBI, IFCI Ltd., IDFC Ltd., IIBI Ltd. And TFCI Ltd.
    (ii) Insurance companies,
    (iii) Hire Purchase companies,
    (iv) Chit fund companies as defined in the Chit Funds Act.
    (v) Co-operative banks.
    (vi) Housing finance institutions as defined in the National Housing Bank Act such as HDFC.
    (vii) Non-banking financial companies as defined in section 45-I of the RBI Act such as private finance companies – motor and general, hire purchase companies, leasing companies, investment companies etc.

    What is an Intermediary?
    Intermediary under PMLA includes following persons registered under Section 12 of SEBI Act:-
    (i) Stock brokers
    (ii) Sub-brokers
    (iii) Share transfer agents
    (iv) Bankers to an issue
    (v) Trustees to trust deed
    (vi) Registrars to issue
    (vii) Merchant bankers
    (viii) Underwriters
    (ix) Portfolio Managers
    (x) Investment advisers
    (xi) Depositories and Depository Participants
    (xii) Custodian of securities
    (xiii) Foreign institutional investors
    (xiv) Credit rating agencies
    (xv) Venture capital funds
    (xvi) Collective investment schemes including mutual funds

    http://rbidocs.rbi.org.in/rdocs/notification/PDFs/32945.pdf

    एक चोर ने चोरी की. पुलिस ने पकड़ लिया. चोर पैसेवाला था. उस ने तमाम मीडिया में विग्यापन छपवाए कि वह तो केवल सामान को उठाकर घर ले जा रहा था. पुलिस उसे परेशान कर रही है. सामान लाना ले जाना उसका संवेधानिक हक़ है. मीडिया ने बिना पड़ताल के विगयापन छापे क्योंकि उन्हें ‘माल’ में हिस्सा मिल रहा था.

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