सेबी ने सहारा समूह को दिया जोर का झटका

अपने राजनीतिक ताल्लुकात, बॉलीवुड सितारों से नजदीकी और रहस्यमय चेयरमैन सुब्रत रॉय के लिए मशहूर सहारा समूह को कैपिटल मार्केट नियामक सेबी ने जोर का झटका जोर से ही दे दिया है। सेबी ने रॉय और सहारा के कुछ अन्य निदेशकों पर प्रतिभूति जारी कर रकम जुटाने पर पाबंदी लगा दी है। इसके अलावा समूह की दो कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भेजकर सवाल किया गया है कि क्यों न उन्हें 5,000 करोड़ रुपए रिफंड करने के निर्देश दिए जाएं, जिनका इंतजाम उन्होंने अब तक किया है। यह कदम समूह की रियल एस्टेट इकाई सहारा प्राइम सिटी के बहुप्रतीक्षित आईपीओ पर सवाल खड़ा करता है, जिस पर सितंबर 2009 से ही तलवार लटक रही है।

सेबी का यह आदेश निवेशकों की उन शिकायतों के बाद आया है, जिसमें उन्होंने इल्जाम लगाया था कि आईपीओ प्रॉस्पेक्टस के मसौदे में इस बात का खुलासा नहीं किया गया है कि सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन (एसएचआईसीएल) जैसी समूह की कंपनियां कंवर्टिबल बॉन्ड जारी कर रही थीं। रेगुलेटरी संस्था को साथ ही साथ रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से जानकारी मिली कि एसआईआरईसीएल ने करीब 4,800 करोड़ रुपए जुटाए हैं, जबकि दूसरी कंपनी की ओर से जुटाई गई रकम का पता नहीं चल सका है। सेबी ने बुधवार देर शाम जारी आदेश में कहा, ‘इन कंपनियों की ओर से जुटाई गई रकम को देखकर प्रथमदृष्टया ऐसा मालूम होता है कि प्रमोटरों की मिलीभगत से नियमों का उल्लंघन किया गया है।’

इस बात की पूरी संभावना है कि सहारा इस अंतरिम एकपक्षीय आदेश को चुनौती देगा। सहारा के प्रवक्ता ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सहारा के प्रमुख सुब्रत रॉय के अलावा सेबी के आदेश से प्रभावित होने वाले दूसरे प्रमोटरों तथा निदेशकों में वंदना भार्गव, रवि शंकर दूबे और अशोक रॉय चौधरी शामिल हैं। इन सभी पर सेबी ने ‘प्रॉस्पेक्टस जारी करने या किसी तरह का दस्तावेज या फिर आम लोगों से किसी भी तरीके से पैसा जुटाने के लिए विज्ञापन जारी करने पाबंदी लगा दी है।’

सहारा ने दलील दी है कि इस जानकारी का खुलासा इसलिए नहीं किया गया, क्योंकि कंवर्टिबल उत्पाद निजी रूप से प्लेस हैं और कंपनियां इन प्रतिभूतियों को लिस्ट कराने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं रखती। हालांकि, सेबी का मानना है कि क्योंकि इन प्रतिभूतियों के लिए सब्सक्राइब करने वाले निवेशकों की तादाद 50 से ज्यादा है, ऐसे में यह ऑफर ‘पब्लिक इश्यू’ हो सकता है, लेकिन ‘प्राइवेट प्लेसमेंट’ नहीं। सेबी के मुताबिक इसी वजह से यह उसकी निगाह में हैं। आदेश में कहा गया है, ‘यह पता लगाने के लिए सहारा गुप की बैलेंस शीट की ब्योरेवार जांच-पड़ताल की जरूरत है कि कंपनियों से निकलने वाली और आने वाली नकदी का प्रवाह कैसा रहा है। प्रथमदृष्टया ऐसा लगता है कि ये कंपनियां प्राइवेट प्लेसमेंट के नाम पर फंड के स्त्रोत का खुलासा किए बगैर भारी रकम तक पहुंच बना रही थीं।’ आरओसी के पास एसआईआरईसीएल और एसएचआईसीएल की ओर से जारी प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक हर कंपनी की प्रोजेक्ट कॉस्ट 20,000 करोड़ रुपए है। साभार : इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स

Comments on “सेबी ने सहारा समूह को दिया जोर का झटका

  • mukti deshpandey says:

    Ye sab un logo ne karvaya hai jo sahara se jalte hain, we log is baat se pareshan hai ki wahan par log itna samay se kaam kar rahe hain, aur khush hain, bahut jald sach samne aa jayega.

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