हमारे आप जैसे ही थे विद्यार्थीजी

: बस, थोड़े ज्यादा ईमानदार थे, थोड़े ज्यादा साहसी थे : ”विद्यार्थी जी ने अपनी कलम से अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया था. विद्यार्थी जी का जन्म 23 अक्टूबर 1890 में अपने इलाहाबाद स्थित ननिहाल अतरसुइया मोहल्ले में हुआ था. उनके पिता का नाम मुंशी जयनारायण लाल था जो मूल रूप से फतेहपुर के निवासी कायस्थ ब्राह्मण थे. जीविकोपार्जन के लिए वे ग्वालियर रियासत में मुंगावली नामक स्थान पर एक प्राइमरी स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे.

विद्यार्थी जी ने निष्पक्ष खबरें प्रकाशित करने के लिए 9 नवंबर 1913 को खुद अपना अखबार प्रताप नाम से कानपुर से निकाला. अपने क्रांतिकारी एवं तर्कपूर्ण लेखन के चलते ये लोकमान्य तिलक और महात्मा गांधी के संपर्क में आए और उनके कृपापात्र बन गए. विद्यार्थी जी का आग उगलती लेखनी के कारण अंग्रेज सरकार उनकी घोर विरोधी हो गई और उन्हें बार बार जेल जाना पड़ा. पर अंग्रेजी शासन के भय से विद्यार्थी जी कभी झुके नहीं. धीरे धीरे विद्यार्थी जी कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार होने लगे. 1930 में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वे अध्यक्ष बन गए. कांग्रेस के नेताओं से समर्थन प्राप्त होने के बाद उन्होंने अपने साप्ताहिक अखबार को दैनिक में तब्दील कर दिया और प्रभा नाम से एक मैग्जीन भी निकालने लगे. उन्होंने प्रताप और प्रभा को युवा पीढ़ी के प्रशिक्षण का साधन बना दिया. अंग्रेजों ने कई बार विद्यार्थी जी के अखबार को जब्त किया, उन्हें जेल भेजा लेकिन वे न तो डरे न झुके. सामाजिक सदभाव कायम रखने के प्रयासों के तहत गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपने जान की कुर्बानी दे दी.”

उपरोक्त बातें पिछले दिनों गणेश शंकर विद्यार्थी के जन्मदिन पर राष्‍ट्रीय पत्रकार कल्‍याण ट्रस्‍ट एवं यूपी वर्किंग जर्नलिस्‍ट एसोसिएशन के संयुक्‍त तत्‍वावधान में मुरादाबाद में आयोजित परिचर्चा में कही गईं. ‘राष्‍ट्रीय एकता में धार्मिक सदभाव का महत्‍व’ विषयक परिचर्चा में दिल्ली, मेरठ व मुरादाबाद के कई पत्रकारों ने हिस्सा लिया. मधुबनी पार्क में आयोजित कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि वरिष्‍ठ पत्रकार एवं साहित्‍यकार पंकज सिंह ने कहा कि आज पत्रकारिता के मूल्‍यों में कमी आई है. पत्रकारिता का चेहरा और चरित्र बदल गया है. इन मूल्‍यों को पुन: स्‍थापित करने के लिए सभी को मिलकर कदम बढ़ाना होगा. उन्‍होंने गणेश शंकर विद्यार्थी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्‍हें निडर और ईमानदार पत्रकार बताया जिन्होंने सामाजिक सदभाव कायम रखने के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी.

विशिष्‍ट अतिथि के रूप में दिल्ली से आए भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने कहा कि उन्हें अफसोस है कि यहां कई ऐसे वक्ता भी हैं जो बोलते वक्त बार बार गणेश शंकर विद्यार्थी के नाम को भूल जा रहे हैं. यशवंत ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी को भगवान और अलौकिक पुरुष नहीं बताया जाना चाहिए. वे भी हम आप जैसे पत्रकार थे, बस, वे ईमानदारी का पालन सख्ती से करते थे, साहस के साथ कदम उठाते थे, वे किसी पूंजीपति के प्रति नहीं बल्कि समाज और आम जन के प्रति प्रतिबद्ध थे. हम आप में भी गणेश शंकर विद्यार्थी बनने की संभावनाएं हैं लेकिन हम क्षणिक लोभ-लाभ-सुख के कारण एक-एक कर सारी प्रतिबद्धताओं से किनारा कर लेते हैं. गणेश शंकर विद्यार्थी को सच्ची श्रद्धांजलि पत्रकारिता में ईमानदारी का झंडा बुलंद रखना ही होगा और इसके लिए सभी को एक बार फिर कमाने-खाने के लिए कोई और धंधा कर लेना चाहिए और पत्रकारिता को शौकिया करना चाहिए ताकि सच लिखने का कोई सौदा नहीं हो सके. इसके लिए न्यू मीडिया यानि वेब ब्लाग व मोबाइल क्रांतिकारी माध्यम बनकर उभरे हैं.

ब्रह्मकुमारी से जुड़े विचारक सुशांत कुमार ने पत्रकारिता के आदर्श और उपयोगिता पर बात की. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारों के लेखनी की धार कुंद हो गई है. समाज में व्‍याप्‍त विषमताओं को दूर करने के लिए लेखनी में धार पैदा करनी होगी. वरिष्‍ठ पत्रकार अजीजुल हक ने कहा कि सबसे बड़ा धर्म इंसानियत का है. इसलिए इंसान को जगाने के लिए मीडिया को ही आगे आकर प्रयास करना चाहिए. वरिष्ठ पत्रकार नसीम सागर ने कहा कि पत्रकार वह है जिसके दिल में समाज के लिए दर्द हो. मेरठ से पधारे डीडी न्यूज के पत्रकार मंगल सिंह पंकज ने कहा कि हमें गणेश शंकर विद्यार्थी की शिक्षा पर अमल करना चाहिए.

नरेश मारवाड़ी ने पत्रकारिता को मजबूरी न मानने की बात कही. राष्‍ट्रीय पत्रकार कल्‍याण ट्रस्‍ट के संरक्षक नरेन्‍द्र भाटी ने पत्रकारों को ऐसे आयोजनों में बढ़ चढ़कर हिस्‍सा लेने का आह्वान किया. कार्यक्रम की अध्‍यक्षता राष्‍ट्रीय पत्रकार कल्‍याण ट्रस्‍ट के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष धीरज भारद्वाज और संचालन संतोष गुप्‍ता ने किया. इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्‍ज्‍वलित कर किया. इस मौके पर ऊषा शर्मा, नरेन्‍द्र दीक्षित, विशाल गुप्‍ता, डा. मुजफ्फर सुल्‍तान, सुधीर शर्मा, महेंद्र सिंह बब्बू, मुर्तजा इकबाल, सलीम बेग, डा. मुस्तकीम, यदुनंदन त्रिपाठी, संजय सिंह सहित तमाम पत्रकार मौजूद रहे. आभार यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष राशिद सिद्दीकी ने व्यक्त किया. इस अवसर पर अजमेरा इंस्टीट्यूट आफ मीडिया स्टडीज के 20 विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया.

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Comments on “हमारे आप जैसे ही थे विद्यार्थीजी

  • Yashwant ji, vidyarthi ji ek bahut mahaan vyaktitva the, unke bare me kuch kahna sooraj ko diya dikhane ke barabar hoga. Unko jaat paat ke bandhan me dekhne ka bhi koi irada nahi hai, lekin iss lekh me unko ” kayasth Brahmin” kis gyan par aadharit hai? Kayasthon ki apni pahchan hai, unka apna yogdan hai, jiska varnan yahan karna sambhav nahi hai. Isi tarah brahmin bhi alag cheez hain. Ye likh kar apne kayasthon ko to naraz kiya hi hai, brahmin bhi kam naraz nahi honge. Kripya aap jaat paat ko lekar vivad paida na kare to achha hoga.

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  • चन्द्र कुमार तिवारी says:

    हमारे आप जैसे ही थे गणेश शंकर विद्यार्थी

    बेशक गणेश शंकर विद्यार्थी को निर्भीक व साहसी पत्रकार की संज्ञा दी जानी चाहिए। उनके जन्मदिवस के अवसर पर पत्रकारो को मुरादाबाद में आयोजित कार्यक्रमो की तरह उनकी याद में इस तहर के कार्यक्रम देश के कोने कोने मे आयोजित करना चाहिए। जो पत्रकारिता की गिरती व धूमिल होती छवि को सुधारा जा सके। आज भी हमारे समाज में उन जैसे विभूतियों की कमी नही है बस एक सकारात्मक पहल को अंजाम देने की है। आज हमारे समाज के लोगो का विश्वास तीनो स्तम्भ के लोगो से लड़खड़ाता जा रहा है और भ्रष्टाचार से आच्छिादित समाज को बस एक मीडिया जगत से ही आशा बंधी हुई है, जो उन्हे भ्रष्टाचार से मुक्त करा सकती है। लाख अव्यवस्था के बावजूद लोगो को प्रकाशित खबरो पर ही विश्वास अधिक होता है। यहा तक की समाज के तीसरे स्तम्भ कहे जाने वाली कार्यपालिका भी अब इनके खबरो पर नजर रखती हैै, और समाचार पत्रो मे प्रकाशित या चैनलो पर प्रसारित की जाने वाली खबरो पर कार्यवाही करती है। समाज के प्रति आज के पत्रकारो की जिम्मेदारी भी अधिक हो चली है वे सभी समस्याओ का हल पत्रकारो को माध्यम बना कर ढुंढने लगते है, आज पत्रकारो के बारे मे लोग अच्छे बूरे की चर्चा करते है उन्हे समाज सुधारक के रूप मे देखते है। कोई पत्रकार जरा सा चूक करता है तो वे समाज में चर्चा का विषय बन जाता है। उसी समाज को आज गणेश शंकर विद्यार्थी जेैसे पत्रकारो की तलाश है। पत्रकारिता एक जुनून है, उसे जिवकोपार्जन का साधन नही बनना चाहिए। तभी आप स्वतंत्र व निर्भीक रूप से अपने कलम का इस्तेमाल कर सकते है।
    चन्द्र कुमार तिवारी, गाजीपुर

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