डाक व्यवस्था पर पुस्तक लिख कर चर्चा में आए वरिष्ठ पत्रकार और रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) में परामर्शदाता अरविंद कुमार सिंह की एक और नई पुस्तक प्रकाशित हो गयी है। इस पुस्तक का नाम है- ‘डाक टिकटों में भारत दर्शन’ और इसका प्रकाशन किया है, नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया (भारत सरकार) ने। बड़े आकार में 228 पृष्ठों की इस रंगीन पुस्तक का मूल्य 300 रुपए है।
भारतीय डाक टिकटों के परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक वास्तव में संदर्भ ग्रंथ है। अभी हिंदी भाषा में इस पुस्तक का प्रकाशन किया गया है, पर जल्दी ही नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा इसे अंग्रेजी तथा कई अन्य भारतीय भाषाओं में प्रकाशित करने की योजना है। उल्लेखनीय है कि श्री सिंह की पुस्तक ‘भारतीय डाक सदियों का सफरनामा’ का प्रकाशन भी नेशनल बुक ट्रस्ट ने नवंबर 2006 में हिंदी में किया था। दिसंबर 2009 तक इस पुस्तक के हिंदी संस्करण की 17,000 प्रतियां बिक चुकी हैं और यह किताब बेस्ट सेलर का आंकड़ा भी पार कर चुकी है।
इस पुस्तक का अनुवाद अंग्रेजी, उर्दू तथा असमिया भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है और अन्य कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है। इस पुस्तक का एक खंड चिठ्ठियों की अनूठी दुनिया को एनसीईआरटी ने आठवीं कक्षा की हिंदी पाठ्यपुस्तक वसंत भाग तीन में भी शामिल किया है। श्री सिंह की एक और पुस्तक ‘अयोध्या विवाद एक पत्रकार की डायरी’ का प्रकाशन शिल्यापन ने किया है। इन दोनों पुस्तकों का जल्दी ही लोकार्पण किए जाने की योजना है। श्री सिंह की मीडिया से संबंधित डाक टिकटों पर भी एक पुस्तक लगभग तैयार कर ली है। यह भी अपने तरीके की पहली पुस्तक होगी।
उल्लेखनीय है कि डाक टिकटों संग्रहण (फिलैटली) दुनिया के सबसे लोकप्रिय शौकों में एक है। इसे
विश्व बंधुत्व का प्रतीक माना जाता है। फिलैटली के शौकीनों में आम आदमी से लेकर राजा-महाराजा, राजनेता, सेनाधिकारी, बड़े प्रशासनिक अधिकारी, बड़े धनकुबेर आदि सभी हैं। दुनिया के तमाम देशों में डाक टिकट राजस्व का बड़ा जरिया बन गया है। विश्व का पहला डाक टिकट पैनी ब्लैक माना जाता है जो 6 मई 1840 को इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया की तस्वीर के साथ जारी किया गया था।
इसी तरह भारत का भी पहला डाक टिकट आधिकारिक रूप से 1 अक्तूबर 1854 को महारानी विक्टोरिया के ही तस्वीर के साथ जारी किया गया। आजादी के पहले भारतीय डाक टिकटों पर आम तौर पर राजा-रानी ही राज करते रहे थे। पर आजादी के बाद भारतीय डाक टिकटों की दुनिया एकदम बदल गयी है। समय के साथ तेजी से बदल रहे भारतीय डाक टिकट दुनिया में अपनी खास पहचान बनाते जा रहे हैं। डाक टिकटों के संदर्भ में कई नए प्रयोग भी किए गए हैं और विभिन्न आकार प्रकार के साथ खुशबूवाले डाक टिकट या स्वर्ण डाक टिकट दुनिया में काफी चर्चा में रहे। भारत जैसे देश में ही अब पचास लाख से ज्यादा लोग डाक टिकट संग्रह में लगे हैं। पुराने टिकट तो काफी महंगे दामों पर खरीदे और बेचे जा रहे हैं।
पुस्तक लेखक का कहना है कि भारतीय डाक पर पुस्तक लिखने के दौरान ही मैने महसूस किया था कि भारतीय डाक टिकटों पर भी हिंदी में एक संपूर्ण पुस्तक की आवश्यकता है। नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में डाक टिकटों के इतिहास और उससे संबंधित सभी विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गयी हैं। पुस्तक में डाक टिकटों की शुरुआत से लेकर दिसंबर 2008 तक के सभी डाक टिकटों का ब्यौरा दिया गया है। साथ ही फिलैटलिस्ट और प्रदर्शनियों, कैंसिलेसन, फिलैटली से संबंधित सभी प्रमुख शब्दो की परिभाषा, भारत में फिलैटली के क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न राज्यों की प्रमुख संस्थाओं आदि की जानकारी भी पुस्तक में दी गयी है।












vikas mishra
November 1, 2010 at 1:22 am
Arvind bhai bahut hee creative hain. mai kareeb 24 varshon se unhe jaanta hun aur unki lekhni se bahut kuchh seekha bhee hai. Ve behtareen insan bhee hain.. Unhe Badhai.
dhirendra pratap singh
November 1, 2010 at 2:11 am
arvind bhaiya ji ne dipawali ke avsar pr apne pathko ko achha tohfa diya h.aapko dipawali aur book relese dono ki hardik badhai.
dhirendra pratap singh dehradun uttrakhand
Rajesh Tiwari
November 1, 2010 at 10:00 pm
Derar Uncle
it is great to see you on the top of another milestone. I prey to God that you will reach many more milestone.
Wishing you a Very Happy Diwali with your respected Family.
Thanks & Regards
Rajesh Tiwari
Rajesh Tiwari
November 1, 2010 at 10:08 pm
Respected Uncle
Congratulation
It is great to see you on the top of another milestone. I prey to GOD that gives you a lots of happiness.
Wishing you a very happy & prosperous Diwali with your respected Family
Thanks & Regards
Rajesh Tiwari
shail
November 1, 2010 at 11:30 pm
arvind ji bahut badhaiyan…ye book sahi main sunder hai…
umesh shukla
November 14, 2010 at 5:49 am
Arvindji nai kriti ke liye badhai sweekar karen.aap ki rachanadharmita ke kayal hain ham.