राज्‍यसभा टीवी में सहायक संपादक बने अरविंद कुमार सिंह

: आरिफा खानम भी पहुंची : वरिष्‍ठ पत्रकार तथा रेल मंत्रालय में सलाहकार संपादक के पद पर कार्यरत रहे अरविंद कुमार सिंह अब राज्‍य सभा टीवी से जुड़ गए हैं. उन्‍होंने सहायक संपादक के रूप में अपनी नई पारी शुरू की है. अरविंद सिंह पिछले 28 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजनीति खबरों पर इनकी जबर्दस्‍त पकड़ मानी जाती है.

अरविंद कुमार सिंह की मां का मुंबई में निधन

वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह की मां प्रेम कुमारी सिंह का आज सबेरे मुंबई के एक निजी हास्पिटल में निधन हो गया. उनकी उम्र 76 साल थी.

अतुल को मिला रामेश्‍वरम हिंदी पत्रकारिता पुरस्‍कार

: पत्रकारिता के समक्ष कई गंभीर चुनौतियां – अ‍रविंद कुमार सिंह : समाज के निर्माण और उत्थान में चौथे स्तंभ का विशेष महत्व होता है। जनहित की पत्रकारिता ही वास्तविक पत्रकारिता है। इसलिए हमारे पत्रकार भाइयों को सामाजिक दायित्व बोध के साथ ही लेखनी चलानी चाहिए। शुक्रवार को रामेश्वरम संस्थान द्वारा स्थापित स्व. रामेश्वर दयाल त्रिपाठी नन्ना की स्मृति में रामेश्वरम हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार-10 का सम्मान समारोह झांसी के राजकीय संग्रहालय में आयोजित किया गया।

‘डाक टिकट में भारत दर्शन’ की प्रथम प्रति सोनिया को भेंट

अरविंद : इलाहाबाद में वरिष्‍ठ पत्रकार अ‍रविंद कुमार सिंह ने भेंट की अपनी किताब : संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की मुखिया श्रीमती सोनिया गांधी को उनकी इलाहाबाद यात्रा के दौरान 25 नवंबर 2010 को वरिष्ठ पत्रकार और रेल मंत्रालय में परामर्शदाता अरविंद कुमार सिंह ने अपनी हाल में प्रकाशित पुस्तक ‘डाक टिकटों में भारत दर्शन’ की प्रथम प्रति भेंट की।

अरविंद कुमार सिंह की नई किताब : डाक टिकटों में भारत दर्शन

अरविंद जीडाक व्यवस्था पर पुस्तक लिख कर चर्चा में आए वरिष्ठ पत्रकार और रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) में परामर्शदाता अरविंद कुमार सिंह की एक और नई पुस्तक प्रकाशित हो गयी है। इस पुस्तक का नाम है- ‘डाक टिकटों में भारत दर्शन’ और इसका प्रकाशन किया है, नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया (भारत सरकार) ने। बड़े आकार में 228 पृष्ठों की इस रंगीन पुस्तक का मूल्य 300 रुपए है।

अयोध्याकांड और मीडिया : अर्धसत्य के आगे (2)

[caption id="attachment_17165" align="alignleft"]अरविंद कुमार सिंहअरविंद कुमार सिंह[/caption]4 दिसंबर से ही पत्रकार विहिप की गिरफ्त में थे : नई दिल्ली 17 दिसम्बर। अयोध्या में काले रविवार यानि 6 दिसंबर को देशी-विदेशी प्रेस के साथ क्या कुछ घटा इसकी चर्चा अभी धीमी नहीं पड़ी है, अपितु इसमें नए-नए आयाम जुड़ते जा रहे हैं। पत्रकारों और छायाकारों पर संगठित हमले के लिए सभी लोग जिला प्रशासन से लेकर विहिप और भाजपा के प्रमुख नेताओं तक को गुनाहगार बता रहे हैं। वे गुनहगार हैं भी, क्योंकि उन्होंने ही हर पत्रकार की सुरक्षा का ठेका ले रखा था। सभी जानते हैं कि 7 दिसंबर तक अयोध्या विहिप शासित क्षेत्र हुआ रहा था, जहां कारसेवक राजा थे,जबकि बाकी सभी प्रजा। 

अयोध्या विवाद : एक पत्रकार की डायरी (1)

[caption id="attachment_17142" align="alignleft"]अरविंदअरविंद[/caption]अयोध्या से बहुत करीब ही बस्ती जिले की सीमा में मेरा गांव पड़ता है। गांव के पड़ोस में ही सरयू नदी बहती है और कई बार वहां से अयोध्या की झलक भी साफ-साफ दिख जाती है। दूसरी तरफ मनोरमा और रामरेखा नदी हैं। ये दोनों छोटी पर ऐतिहासिक महत्व की नदियां हैं। हमारे गांव से ही कभी-कभी हिमालय के दर्शन भी हो जाते हैं। बचपन में अयोध्या के मेले में मैं कई बार गया।