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इस भ्रष्ट इंजीनियर के पास तीन हजार करोड़ रुपये हैं, सीबीआई ने छापेमारी शुरू की

: यह इंजीनियर खुद को मुख्यमंत्री का दत्तक पुत्र कहता है : मनी लांडरिंग के इस खेल में एक पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश का एक इंडस्ट्री मिनिस्टर भी शामिल : करोड़ों रुपये देकर पहले भी अपने खिलाफ जांचों को बंद करा चुका है यह इंजीनियर : यह खबर आप शायद सिर्फ यहीं पढ़ रहे होंगे क्योंकि इस वक्त मीडिया के गिने-चुने लोगों को ही यह खबर है कि एक भ्रष्ट इंजीनियर के आवासों और कई राज्यों में बिखरे उसके कालेधन की जांच के लिए सीबीआई ने छापा मार रखा है. इस भ्रष्ट चीफ इंजीनियर का नाम है अरुण मिश्रा.

: यह इंजीनियर खुद को मुख्यमंत्री का दत्तक पुत्र कहता है : मनी लांडरिंग के इस खेल में एक पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश का एक इंडस्ट्री मिनिस्टर भी शामिल : करोड़ों रुपये देकर पहले भी अपने खिलाफ जांचों को बंद करा चुका है यह इंजीनियर : यह खबर आप शायद सिर्फ यहीं पढ़ रहे होंगे क्योंकि इस वक्त मीडिया के गिने-चुने लोगों को ही यह खबर है कि एक भ्रष्ट इंजीनियर के आवासों और कई राज्यों में बिखरे उसके कालेधन की जांच के लिए सीबीआई ने छापा मार रखा है. इस भ्रष्ट चीफ इंजीनियर का नाम है अरुण मिश्रा.

यह चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा सपा के राज में बड़े सपा नेताओं और अब बसपा के राज में बड़े बसपा नेताओं को करोड़ों रुपये की रिश्वत देकर सारी जांचों को बेदम कराने के लिए कुख्यात है. इसके कानपुर स्थित आवास और आफिस को सीबीआई ने घेर रखा है. यह यूपीएसआईडीसी का चीफ इंजीनियर है और सपा के कार्यकाल में इसे गलत तरीके से एमडी का काम सौंप दिया गया था. उसी दौरान इस शख्स ने औद्योगिक प्लाटों को बेचने में जमकर हेराफेरी की और सैकड़ों अरब रुपये का स्वामी बन बैठा. मायावती ने सत्ता में आने पर इस भ्रष्ट को सस्पेंड कर मुकदमा लिखा दिया और एसआईटी की टीम को जांच में लगा दिया. लेकिन इस शख्स ने जाने क्या जादू किया कि अचानक सारे केस वापस लेकर इसे बहाल कर दिया गया और यूपीएसआईडीसी में कामकाज जारी रखने को कह दिया गया. इसी कारण कई लोगों का कहना है कि इसने कम से कम सौ करोड़ रुपये रिश्वत नेताओं को देकर अपने खिलाफ जांचों को कमजोर कराया और खुद को बहाल कराने में सफलता पाई.

सूत्रों के मुताबिक इस शख्स के करीब पचास बेनामी एकाउंट दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड और यूपी के कई जिलों में हैं. प्रत्येक बेनामी एकाउंट में करोड़ रुपये से ज्यादा है. इन एकाउंट्स को खुलवाने में देहरादून के पंजाब नेशनल बैंक के एक अधिकारी का बड़ा योगदान रहा है. उस अधिकारी को निलंबित किया जा चुका है. यह बैंक अधिकारी प्रत्येक एकाउंट खोल जाने में प्रस्तावक-समर्थक था. भड़ास4मीडिया ने सीबीआई के अधिकारी मिलाप से बातचीत कर छापेमारी के बारे में जानने की कोशिश की तो उन्होंने कोई भी सूचना मीडिया को देने से इनकार कर दिया. उधर, लखनऊ में मीडिया से जुड़े कुछ लोगों ने इस बात की पुष्टि की है कि छापेमारी की कार्रवाई जारी है. देहरादून और दिल्ली से भी सूचना आ रही है कि सीबीआई के कई बड़े अफसरों ने अरुण मिश्रा के घर, दफ्तरों और कई प्रदेशों में बिखरे साम्राज्य पर सीबीआई की छापेमारी की खबर की पुष्टि की है.

आप सबको लगेगा कि सीबीआई का यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग है लेकिन सच्चाई यह नहीं है. अरुण मिश्रा बड़ी मछली दिखते हुए भी बड़ी मछली नहीं है. वह तो बड़ी मछलियों को पैसे की सप्लाई कर कर के खुद को बड़ी मछली दिखाने लायक बना रखा था. असली भ्रष्टाचारी तो वे नेता हैं जो इन अफसरों-इंजीनियरों से काली कमाई लेकर अफसरों-इंजीनियरों को लूटने की खुली छूट दे देते हैं. क्या कोई सपा के बड़े नेताओं और बसपा के बड़े नेताओं के यहां सीबीआई या किसी अन्य निष्पक्ष एजेंसी के छापे की कल्पना कर सकता है. हमारे देश का लोकतंत्र और न्याय प्रणाली इन भ्रष्ट नेताओं तक पहुंचते पहुंचते पंगु हो जाती है. देखिए, अगर अरुण मिश्रा के यहां छापेमारी और जांच के दौरान बड़े नेताओं के यहां पैसे पहुंचाने के घटनाक्रम का खुलासा हो पाता है तब तो छापे से सार्थक नतीजे निकलने की उम्मीद कर सकते हैं अन्यथा अरुण मिश्रा के यहां छापेमारी से मिली सूचनाओं को कांग्रेस की केंद्र सरकार अपने राजनीतिक हित के लिए बसपा और सपा के नेताओं को ब्लैकमेल करने में इस्तेमाल करेगी, इससे ज्यादा कुछ नहीं होगा. और, जनता को दिखाने को ये हो जाएगा कि एक बड़े भ्रष्टाचारी अफसर को जेल भेज दिया गया है.

दरअसल सीबीआई जैसी संस्थाएं भी जब केंद्र सरकार के दखल, निर्देश और इशारे पर अपनी सक्रियता कम या ज्यादा करने लगी हैं तो उनसे भी कोई खास उम्मीद हम लोग नहीं कर सकते. कई ऐसे मामले हैं जिनमें सपा और बसपा के लोग फंसे हुए हैं पर केंद्र के इशारे पर सीबीआई उन मामलों में ढील दिए हुए है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई का लगाई जाने वाली आए दिन की लताड़ के बारे में सब लोग जानते ही हैं. ये लताड़ सीबीआई को इसलिए सुननी पड़ती है क्योंकि वह अपने कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण किसी भी बड़े मामले में अपने विवेक से समुचित और पूर्ण कदम नहीं उठा पाती. खैर, देखिए, इस अरुण मिश्रा के मामले में क्या होता-जाता है. अगर आपके पास भी कोई जानकारी हो तो नीचे कमेंट बाक्स के जरिए जरूर शेयर करें.

उधर, अभी-अभी पूर्वांचलदीप ने अपने यहां खबर फ्लैश की है कि सीबीआई छापे में करीब तीन हजार करोड़ रुपये का मामला पकड़ में आया है. पूर्वांचलदीप द्वारा जारी की गई खबर इस प्रकार है…”यूपीएसआईडीसी के एक इंजीनियर के कानपुर, लखनऊ और देहरादून के आवासों और प्रतिष्ठानों पर गुरुवार को सुबह से चल रहे सीबीआई के छापे में कम से कम तीन हजार करोड़ की मनी लांडरिंग का मामला पकड़ में आने की चर्चा है। चर्चा यह भी है कि संबंधित इंजीनियर स्वयं को मुख्यमंत्री मायावती का दत्तक पुत्र कहता फिरता है। इस मामले में एक बार यूपीएसआईडीसी के चेयरमैन बलविंदर सिंह संस्पेंड किये जा चुके हैं और उनके बाद आए चेयरमैन बालाजी का दूसरे विभाग में ट्रांसफर किया गया था, वह अब रिटायर हो चुके हैं। देहरादून स्थित पीएनबी के विधानसभा मार्ग स्थित शाखा का एक ब्रांच मैनेजर सस्पेंड भी किया गया है, ऐसी खबरें हैं। सुना जा रहा है मनी लांडरिंग के इस खेल में एक पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश का एक इंडस्ट्री मिनिस्टर भी शामिल है। मामला एनसीआर में जमीन बिक्री से जुड़ा है। जहां आज माल व शापिंग काम्प्लेक्स तक बने हैं। जिस जमीन की कीमत 2006 में जब जमीन बेची गयी 25 से तीस हजार रुपये वर्गमीटर थी उसे मात्र पांच से छह हजार रुपये वर्ग मीटर में भू और बिल्डिंग माफियाओं को बेचकर अकूत रकम कमाई गयी। इसमें सपा के एक पूर्व सदस्य और राज्य सभा के एक सदस्य की भी भूमिका की चहुंओर चर्चा है।”

यशवंत सिंह

एडिटर, भड़ास4मीडिया

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0 Comments

  1. baljinder shindi

    February 24, 2011 at 7:27 am

    यसवंत सर अगर इस के पास इतना पैसा है तो इसे कहे की एक दो चैनल खोल ले मीडिया से भी बच जाएगा और सरकार व सी.बी.आई.से भी

  2. sheelesh tripathi

    February 24, 2011 at 8:55 am

    jeb bsp ki sarkar bani thi aur iske khilaf karrwai chel rehi thi tabhi isne swejatiye lawyer bsp rajneta ka sath pakda tha. ye to sirf ek mohra hai asli gunahgar to koi aur misra hai bhai.

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