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एसपी मंजिल सैनी की बर्बरता की तस्वीरें : जबरा मारे और रोवे भी न दे

एक कहावत है. भोजपुरी इलाकों में कही जाती है. जबरा मारे और रोवे भी न दे. यही हाल कुछ अभिनव के साथ घटित हो रहा है. एसपी ने उन्हें पीटा. जमकर पिटवाया. जब अभिनव ने पिटाई के खिलाफ शिकायत की तो उन्हें अब फिर से धमकाया जा रहा है और बुरी तरह फंसा देने की धमकियां दी जा रही हैं. माजरा यूपी का ही है. जिला है फिरोजाबाद. पर अभिनव ने लड़ने की ठानी है.

एक कहावत है. भोजपुरी इलाकों में कही जाती है. जबरा मारे और रोवे भी न दे. यही हाल कुछ अभिनव के साथ घटित हो रहा है. एसपी ने उन्हें पीटा. जमकर पिटवाया. जब अभिनव ने पिटाई के खिलाफ शिकायत की तो उन्हें अब फिर से धमकाया जा रहा है और बुरी तरह फंसा देने की धमकियां दी जा रही हैं. माजरा यूपी का ही है. जिला है फिरोजाबाद. पर अभिनव ने लड़ने की ठानी है.

पुलिस के कहर और पुलिस के दुर्व्यवहार की बात हम हमेशा सुनते और देखते रहते हैं. पुलिस उत्पीड़न की ज्यादातर शिकायतें निचले लेवल के पुलिस वालों के खिलाफ होती हैं. पर जब ऐसा आरोप पुलिस के किसी उच्चाधिकारी के खिलाफ हो, जिसके कंधों पर रक्षा करने और मानवाधिकारों का ध्यान रखने का भार हो तो प्रकरण वाकई गंभीर हो जाता है. खासकर जब आरोप किसी जनपद में कार्यरत महिला पुलिस अधीक्षक पर हो तब तो मामला निश्चित रूप से बेहद गंभीर हो जाता है.

यहां मैं एक ऐसा ही वाकया पेश कर रही हूं. यह प्रकरण मानावाधिकार हनन और पुलिस अत्याचार का गंभीर उदाहरण है.  मामला उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद की पुलिस का है. पुलिस वाले धमका कर एक व्यक्ति पर इसलिए दबाव बना रहे हैं ताकि वह उस जिले की पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी के खिलाफ किये गए शिकायत को वापस ले ले. इस भारी दबाव के बीच जी रहे सज्जन का नाम है अभिनव चतुर्वेदी. पुलिस वाले एसपी साहिबा के खिलाफ दर्ज केस वापस नहीं लेने पर कई अन्य फर्जी मामलों में फंसा देने की धमकी दे रहे हैं.

अब थोड़ा पीड़ित अभिनव चतुर्वेदी के बारे में जान लें. अभिनव फिरोजाबाद के सम्मानित और पुराने परिवार से संबंधित हैं. मेरी उनसे जान-पहचान मेरे पति अमिताभ की फिरोजाबाद जिले में पोस्टिंग के दौरान हुई. मेरी उनके बारे में राय है कि वे फिरोजाबाद के सज्जन और जिम्मेदार लोगों में से हैं. अभिनव यदा-कदा अमिताभ से मिलने आया करते थे. वे कांग्रेस पार्टी के पुराने नेता भी हैं. हालांकि वे नेता कम, भले व भरोसेमंद आदमी ज्यादा हैं. इसी कारण वे वैसी नेतागिरी नहीं कर पाते जैसी राजनीति आजकल कई लोग करते दिख जाते हैं.

अभिनव यानि शरीर से भारी भरकम और चेहरे से शरीफ. यही उनकी प्रथम दृष्टया पहचान है. अभिनव पहली नजर में ही शरीफ घर और सभ्य संस्कार वाले आदमी लगते हैं. उनके बैकग्राउंड और स्वभाव को देखते हुए उनसे कोई गुंडागर्दी, तोड़फोड़, मारपीट, दंगाई जैसे आचरण की अपेक्षा कर ही नहीं सकता. उनके साथ एक वाकया घटित हुआ. अभिनव एक रोज कांग्रेस के एक धरने में शामिल हुए. घटना इसी साल के बारह मई की है. धरने का एजेंडा था भट्टा पारसोल में राहुल गाँधी की गिरफ्तारी का विरोध. तब कॉंग्रेस ने प्रदेश-व्यापी धरना-प्रदर्शन रखा था. इसी क्रम में फिरोजाबाद में धरना हुआ. पुराने कॉंग्रेसी नेता होने के कारण अभिनव धरने में शामिल हुए.

धरने में भीड़ बढ़ने लगी. संभव है किसी ने उत्पात भी कुछ किया हो. पुलिस को तो मौका चाहिए था. लाठीचार्ज शुरू. पर अभिनव के मामले में पुलिस का रुख बेहद घटिया रहा. शरीर से भारी-भरकम अभिनव जहां बैठे थे, वहीं बैठे रह गए. उनकी भाग न पाने की मजबूरी का पुलिस ने दोहन किया. वह लाठीचार्ज के दौरान पुलिस वालों के निशाना पर आ गए. उन पर खूब लाठियां बरसाई गईं. मुझसे हुई बातचीत में उन्होंने कुछ ऐसा ही बताया. उन्हें चारों तरफ से घेर कर बहुत बेरहमी से मारा गया.  इसके कारण उन्हें सिर पर गंभीर चोटें आईं. पूरे शरीर पर कई जगह अत्यधिक चोटें आयीं.

मैंने स्वयं उनके द्वारा भेजे कुछ फोटो देखे हैं. इनमें उनके शरीर पर कई नीले निशान वाले चोट हैं. इससे जाहिर होता है कि उन्हें बर्बरतापूर्वक मारा गया. उस पर भी दुर्भाग्य यह कि यह सब वहां की पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी की उपस्थिति और सक्रिय भूमिका में हुआ. एसपी साहिबा ने खुद ही एक ऐसे आदमी को मारा जो उनके घेरे में चुपचाप खड़ा था. इस तरह मारे जाने और पिटने के बाद पहले उन्हें गिरफ्तार कर फिरोजाबाद के दक्षिण थाने में ले जाया गया पर. वहाँ उनके द्वारा खून की उल्टी होने पर मारे डर के पुलिस वालों द्वारा उसी दिन उन्हें पहले जिला अस्पताल, फिरोजाबाद और फिर हालत बिगड़ने पर एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में भर्ती कराया गया.

अभिनव चतुर्वेदी ने ठीक होने के बाद इस सारे घटनाक्रम की शिकायत कई जगहों पर की जिसमे उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग भी शामिल था. इनमें एसपी मंजिल सैनी, क्षेत्राधिकारी टूंडला एसके मलिक और फिरोजाबाद दक्षिण के इन्स्पेक्टर आरपी सिंह तथा अन्य के विरुद्ध मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए गए. पिछले सप्ताह इस मामले में फिरोजाबाद की एसपी सहित तमाम अधिकारी मानवाधिकार आयोग में अपना बयान देने लखनऊ गए थे और इस सप्ताह आयोग की टीम द्वारा फिरोजाबाद जा कर मामले की आगे की तहकीकात करना संभावित है.

लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई. आयोग में अपने अभिकथन देने के बाद फिरोजाबाद की पुलिस ने फिर से अभिनव चतुर्वेदी तथा अन्य गवाहों को टारगेट कर लिया है. इन लोगों को लगातार परेशान किया जा रहा है. उन पर कई तरह के दबाव बना कर और धमकी दे कर उनसे अपनी शिकायत वापस लेने को कहा जा रहा है. इसी छह अक्टूबर को शाम 7 से 9 बजे तक आरपी सिंह (इन्स्पेक्टर, दक्षिण) ने चतुर्वेदी के घर पर जा कर उन्हें यही धमकी बार-बार दी और बताया कि शिकायत वापस नहीं लेने पर उनके साथ पुलिस किस तरह का सलूक करेगी. पूरे दो घंटे तक वे खुद अभिनव के घर में बैठ कर यही बातें उनको अलग-अलग तरीके से समझाते रहे. इसी तरह से सीओ टूंडला एस के मालिक ने भी इसी सात अक्टूबर को 3 से 4 बजे के बीच फोन करके इसी तरह की धमकी दी. आरपी सिंह ने दो अन्य गवाहों फिरोजाबाद के संजय श्रोतिय तथा संदीप तिवारी को भी छह अक्टूबर को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर अपना बयान बदलने को धमकाया और ऐसा नहीं करने पर फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दी.

अभिनव द्वारा इन सारी घटना से जब मुझे अवगत कराया तो मैंने और हमारी संस्था इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डोक्यूमेन्टेशन इन सोशल साइंसेज (आईआरडीएस)  द्वारा मामले की पूरी जानकारी लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग को पत्र लिख कर इन घटनाओं की जांच कराने और ऐसा करने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही करने की मांग की है. साथ ही हमने यह निश्चित किया है कि हम अभिनव के साथ मिल कर पुलिस के इस बर्बरता और अन्यायपूर्ण आचरण का अंत तक विरोध करेंगे जब तब उन्हें पूरी तरह न्याय नहीं मिल जाएगा.

मैं इस बात के लिए अभिनव की सराहना करती हूँ कि वे बिना किसी भय और घबराहट के स्थानीय पुलिस की इन धमकियों और अन्यायपूर्ण आचरण का कडा प्रतिवाद कर रहे हैं. मुझे भी उन्होंने यही बताया कि वे इस मामले में तब तक लड़ते रहेंगे जब तक न्याय नहीं हो जाता है. यदि हममे से हर कोई इसी तरह अपने साथ हुए अत्याचार का पूरी हिम्मत से विरोध करेगा तभी व्यवस्था में वास्तविक सुधार हो सकता है. अन्यथा केवल दूसरों के बल पर व्यवस्था को सुधारने का सपना देखने से कुछ नहीं होने वाला.

लेखिका डॉ नूतन ठाकुर मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्यरत लखनऊ स्थित संस्था इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डोक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंसेज (आईआरडीएस) की सचिव हैं.

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0 Comments

  1. prashant

    October 8, 2011 at 5:38 pm

    bilkul , police ko koi license nahi mil gaya is tarah pitai karne ka. ye wahi police wale hain, jinki daakuon aur aatankvadion ke aage ghigghi bandh jaati hai.

  2. anand klumar

    October 8, 2011 at 6:21 pm

    Nutan je pranam,

    upp ki yah kahani bangi bhar hai aise kitne mamle to samaj ke samne ate nahi hain ya fir pidit dar kar chuppi sadh leta hai.
    hume samaj me nahi ata ki bardi pahnane k bad rachak etne amanviya knyo ho jate hain wo yah knyo bhul jate hain ki wahi lathi aur boot unke sharir par padega to us dard ka agaaz kya hoga.

    hamari police to gundo badmasho ko jo hi qwaliti ke hote hain samman karti hain unke age natmastak hoti hai fir aam nirih admi hi use badmash knyo lagta hai.

    jane kitni sarkaren badal gai sab wahi ashwashan dete hain, naye dgp sahab v aisa hi kuch padarshita ki bat kar rahe they dekhiye hota hai kya.

    aap apne sangthan ke madhyam se abhinav je ka sahyog karti rahin.

    Anand kumar

  3. Nasim Ansari

    October 9, 2011 at 4:42 am

    Dhanyabad Nootan ji,
    U.P. Police ka yah ghinouna chehara behad nindaniya hai. Aap v Abhinav ke sangharson ko salam. Ummid hai ki ek na ek din nyay jaroor milega.

    (Nasim Ansari)
    Pratapgarh

  4. Abhishek sharma

    October 9, 2011 at 5:44 am

    [b][/b]Apradhiyo ke sath gathjod rakhne wali khaki aukat se bahar hotee ja rahi hai…. kanoon ka palan karane ke naam per ugahee karna inka pesha ban chuka hai.

  5. कुमार सौवीर, लखनऊ

    October 9, 2011 at 6:40 am

    शर्मनाक।
    मैं आपके साथ हूं अभिनव चतुर्वेदी।

  6. Rahul

    October 9, 2011 at 10:18 am

    नूतन जी, लगता है सैनी जी को मर्दों से नफरत है. तब भी वह मर्दों के साथ मिल कर ही एक मर्द को पीट रही हैं. ऐसे मर्द को जो अपना विरोध भी नहीं कर रहा है उसे पीटते ही जा रही हैं. वर्दी का नशा लगता है. ये काम के बोझ की मारी लगती है. बेचारी. फोटो देख दुःख हुआ. भगवान अभिनोव जी को लड़ने की ताकत दे -राहुल

  7. a.k.roy

    October 9, 2011 at 3:22 pm

    नूतन जी ,आपकी मानवाधिकार के लिए एक अच्छी कोशिश है ..हम सब अभिनव जी के साथ है ….

  8. www.kranti4people.com

    October 10, 2011 at 8:23 am

    In Haramjadon Pulis walon se janta tang aa gai hai. Sanghars Jari rakhey. Yahswant bhai sath hai ham bhi aapkey sath hai.

  9. saurabh chaturvedi

    October 10, 2011 at 8:31 am

    nutan jee aapne jis tarah se ek samanit nagrik ke liye police barbarta ka anokha chehra apne shabdon main vyakt kiya hai iske liye aap kabile tarif hain is barbarta ke khilaf log aapke vicharon ke sath hain hum sabhi ptrakar sathi is ladai main apke sath hain

  10. rajkumar

    October 12, 2011 at 12:34 pm

    nutan je ham apaki sarahana karte hai jo apane abhinabh je par hue atyachar ko es portel par rakha jile ki pulic mukhiya duara es kayarata purd ghatna ko anjjam diya gaya bo bhi ek sidhe sadhe ensan ke upar aam log firozabad ki police mukhiya se kya ummid karege kya sarif logo ko dhamakaya jayega kher chodo eske liye jo bhi dosi ho unke khilaf karyavahi ho jisse aage se esi ghatana n ho ham apake sath hai….rajkumar manvadhikar emergency help line asosiation karykarta 9808898695

  11. himanshu dixit

    June 7, 2012 at 8:49 pm

    bada hi galat hua

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