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जागरण, देहरादून में महसूस होने लगी जनवाणी की आहट

: कई अन्‍य अखबारों के पत्रकार नये ठिकाने की तलाश में : मेरठ से लॉच होने जा रहे दैनिक अखबार ‘जनवाणी’ की आहट देहरादून में भी थोड़ी बहुत महसूस की जाने लगी है। छोटे-बड़े अखबारों में काम रहे कई मीडियाकर्मी जनवाणी के लिए संपर्क सूत्रों की तलाश में जुटे हैं। देहरादून में विशेषकर वे पत्रकार जनवाणी की राह देख रहे हैं, जो अपने संस्थानों में विभिन्न वजहों से भेदभाव का सामना कर रहे हैं या फिर दो वक्त का चूल्हा फूंकने लायक सेलरी से भी महरूम चल रहे हैं।

: कई अन्‍य अखबारों के पत्रकार नये ठिकाने की तलाश में : मेरठ से लॉच होने जा रहे दैनिक अखबार ‘जनवाणी’ की आहट देहरादून में भी थोड़ी बहुत महसूस की जाने लगी है। छोटे-बड़े अखबारों में काम रहे कई मीडियाकर्मी जनवाणी के लिए संपर्क सूत्रों की तलाश में जुटे हैं। देहरादून में विशेषकर वे पत्रकार जनवाणी की राह देख रहे हैं, जो अपने संस्थानों में विभिन्न वजहों से भेदभाव का सामना कर रहे हैं या फिर दो वक्त का चूल्हा फूंकने लायक सेलरी से भी महरूम चल रहे हैं।

उत्तराखंड में पिछले चार साल में एक के बाद एक कई मीडिया घरानों ने अपने एडिशन लॉच किए हैं। इनमें मुख्य रूप से हिन्दी में राष्‍ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, अंग्रेजी में हिन्दुस्तान टाइम्स और ट्रिब्यून जैसे अखबार शामिल रहे हैं। अमर उजाला, दैनिक जागरण और शाह टाइम्स जैसे छोटे-बड़े अखबार यहां पहले से ही काम कर रहे हैं। इस दौरान अमर उजाला और दैनिक जागरण ने अपने-अपने टेबलायड अखबार कॉम्पैक्ट और आई-नेक्स्ट भी मैदान में उतारे हैं। प्रिंट मीडिया के अलावा इलेक्‍ट्रानिक्स न्यूज चैनल में टीवी-100, टाइम टीवी, जी न्यूज, वॉयस आफ नेशन, जनसंदेश और साधना जैसे चैनल खबरों के बाजार में उतरे हैं। जबकि सहारा और ईटीवी पहले से ही अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। इन अखबार व चैनल्स के आगमन से कुछ नये तो कुछ अनुभवी मीडिया कर्मिर्यों को रोजगार मिला है।

प्रिंट में राष्‍ट्रीय सहारा, दैनिक हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान टाइम्स और ट्रिब्यून की लॉचिंग के करीब दो साल बाद अब एक बार फिर मीडिया कर्मियों को जनवाणी के आगमन की खबर से उठापठक होने की उम्मीद दिख रही है। इससे यहां अपनी जड़ें जमाये बैठे अखबारों के प्रबंधन पर वेतन बढ़ाने का थोड़ा-बहुत दबाव बनने की संभावना है। वैसे अखबारों में काम करने वाले मीडियाकर्मी श्रमिक भाव से अपने श्रम अधिकारों के लिए चाहे-अनचाहे आवाज बुलंद नहीं कर पाते हैं। इसका फायदा अखबारों के अहम ओहदों पर बैठे कुछएक लोगों को होता है, जिनकी नजर कंपनी की बैलेंस शीट की मारी होती है। बैलेंस शीट का उतरना चढ़ना ही हर किसी के वजूद के साथ नत्थी होता है।

खैर, मेरठ में बड़े अखबारों में हलचल पैदा करने वाले जनवाणी की सुगबुगाहट यहां भी शुरू हो गई है। मेरठ में कई बड़े नामों के इस नये नवेले अखबार की ओर रुख करने से यहा भी उठापठक होना तय है। बताया जाता है कि जनवाणी उत्तराखंड में देहरादून और हरिद्वार को फोकस करते हुए कदम रख रहा है। मेरठ में कई पत्रकारों और गैर-पत्रकारों को अपने खेमे में शामिल कर चुका यह अखबार अगर देहरादून में भी ठीक-ठाक सैलरी पैकेज देता है तो दैनिक जागरण को चार से पांच फील्ड व डेस्क का काम देख रहे पत्रकार बॉय-बॉय करने को तैयार बैठे हैं। जागरण, देहरादून वैसे भी पिछले काफी समय से अनुभवी पत्रकारों की कमी से जूझ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक के बाद एक पत्रकार जागरण को अलविदा कह रहे हैं, लेकिन पिछले दो साल में जागरण की सीढि़यां चढ़ते कोई अनुभवी पत्रकार नहीं देखा गया। इसकी वजह जागरण का सेलरी पैकेज दूसरे अखबारों की अपेक्षा कमतर माना जाता है।

जागरण में ही काम कर रहे एक मीडियाकर्मी चुटकी लेते हुए कहते हैं, आर्थिक मंदी के दौरान जिन पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखाया गया, शायद जागरण उसी की करनी भुगत रहा है। खैर, इस चुटकी से इतर स्थानीय संपादक कुशल कोठियाल का अपने सहकर्मिर्यों के साथ काफी हदतक मित्रवत व्यवहार होने के बावजूद जागरण में ही काम कर रहे एक पत्रकार बताते हैं कि इसके बाद भी कई ऐसी वजहें हैं, जिनके चलते जागरण में काम करना दिनों-दिन जटिल होता जा रहा है। एक तो पत्रकारों पर काम का अत्यधिक बोझ और दूसरा अहम पदों की जिम्मेदारी निभा रहे कुछएक लोगों द्वारा मातहतों के कामकाज को लेकर किसी न किसी रूप में नुक्ताचीनी के लिए नुक्से तलाशते रहना है। कुछएक पत्रकार ऐसे भी हैं जो कुछ दिन पहले तक अहम जिम्मेदारी निभा रहे थे, लेकिन एकाएक साइड लाइन कर कोने में बैठा दिए गए हैं। ऐसे लोग जनवाणी के आने से होने वाली उठापठक के बीच इधर-उधर अपने लिए जगह तलाशने को सक्रिय हो चुके हैं।

हालांकि जनवाणी कब तक यहां कदम रखेगा अभी यह स्पष्ट नहीं है और नये अखबार के चलते बड़े अखबारों से जुड़े पत्रकारों में इसको लेकर कुछ शंकाएं भी हैं। जागरण में एक वरिष्ठ पत्रकार के तो कुछ दिन पहले जनवाणी जाने न जाने को लेकर अपने मित्रों से सलाह मशविरा करने की खबर है। उधर, सहारा में भी विभिन्न वजहों से नाराज चल रहे कई पत्रकार दूसरे अखबारों की ओर कदम बढ़ाने की ताक में हैं। वहीं, अमर उजाला दो माह के अंतराल में जागरण को दूसरा झटका देने जा रहा है। खबर है कि सिटी डेस्क में काम कर रहे सब एडीटर पुनीत चुतर्वेदी आजकल में अमर उजाला ज्वाइन करने वाले हैं। इससे पहले जागरण में करीब एक दशक की लम्बी पारी खेलकर सब एडीटर अनिल चमोली उजाला के हमराही हो चुके हैं। दीपक

देहरादून से दीपक आजाद की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. mini sharma

    January 17, 2011 at 10:50 am

    Deepak jee
    Yeh too achee baat hai. Kee Janbaanee Kafee Achee salary package de raha hai. jo aur news paper nahee de rahe hain. sayed yahee dekh kar aur news paper wale apne worker ke salary badhane ke barain mai soche. other wiase too bechre aise hee ghut ghut kar jeete rahenge..

  2. rajveer

    November 11, 2010 at 5:40 am

    dipak ji isme galat bhi kya hai ap ne khud jagran me job kia hai kitne rupye milte hai apko behtar malum hai .bureau leble per baithe log to apne dalali se kam chla lete hai lekin imandari se kam karne wale ko mahaj 10 thousand milte hai aise me janvadi ka asar hona lajmi hai

  3. deepak

    November 11, 2010 at 7:12 am

    aabhi to yaa shruaat hai.

  4. vikram srivastava

    November 12, 2010 at 5:49 am

    Deepak Brother electronic media Liean is also good news CNEB knocking in Uttarakhand has also collaboration with NNI CNEB soon going to begin the Uttarakhand News

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