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दैनिक जागरण की प्रिंटलाइन से भी जाहिर होने लगा एमएमजी का दबदबा

दैनिक जागरण ने चुपके-चुपके प्रिंटलाइन में बदलाव कर दिया है. संस्थापक स्व. पूर्णचंद्र गुप्त और पूर्व प्रधान संपादक स्व. नरेंद्र मोहन को मुख्य प्रिंटलाइन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है और इन दोनों स्वर्गीयों को एक छोटे से बाक्स में समेटकर मुख्य प्रिंटलाइन के ठीक उपर सिरमौर की तरह सजा दिया गया है. मतलब, दोनों ही बातें आ गईं. प्रिंट लाइन से बाहर भी ये लोग हो गए और प्रिंटलाइन के सिरमौर भी बन गए.

दैनिक जागरण ने चुपके-चुपके प्रिंटलाइन में बदलाव कर दिया है. संस्थापक स्व. पूर्णचंद्र गुप्त और पूर्व प्रधान संपादक स्व. नरेंद्र मोहन को मुख्य प्रिंटलाइन से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है और इन दोनों स्वर्गीयों को एक छोटे से बाक्स में समेटकर मुख्य प्रिंटलाइन के ठीक उपर सिरमौर की तरह सजा दिया गया है. मतलब, दोनों ही बातें आ गईं. प्रिंट लाइन से बाहर भी ये लोग हो गए और प्रिंटलाइन के सिरमौर भी बन गए.

मुख्य प्रिंटलाइन में झन्नाटेदार तरीके से इंट्री मारी है महेंद्र मोहन गुप्त ने. वहीं महेंद्र मोहन गुप्त जो समाजवादी पार्टी से सांसद हैं, और कई महीने पहले कानपुर में एक आईपीएस अफसर के हाथों सड़क पर जलील होने को मजबूर हुए थे. वही महेंद्र मोहन गुप्त जिनके बैटे शैलेश गुप्त हैं और जो जागरण ग्रुप की पूरी मार्केटिंग के सर्वेसर्वा हैं. कहा जाता है कि इन दिनों, जबसे नरेंद्र मोहन जी का निधन हुआ, महेंद्र मोहन गुप्त उर्फ एमएमजी का सिक्का चलने लगा है. खुद एमएमजी सांसद व प्रबंध संपादक हैं और उनके पुत्र शैलेश गुप्त मार्केटिंग डायरेक्टर. तो, पिता-पुत्र की इस समय जागरण ग्रुप में तूती बोलती है.

आई-नेक्स्ट अखबार को शैलेश गुप्त का ब्रेन चाइल्ड माना जाता है. इस अखबार में संजय गुप्त का कभी हस्तक्षेप नहीं हो सका. शैलेश गुप्त के इशारे पर आलोक सांवल ने जैसा चाहा, वैसा इस अखबार को उलटा-पुलटा-सीधा-साधा-टेढ़ा-मेढ़ा चलाया व दौड़ाया. कहा जाता है कि आलोक सांवल और शैलेश गुप्त ने जागरण में ट्रेनिंग एक साथ ली. शैलेश ने डायरेक्टरी की ट्रेनिंग ली और आलोक ने शैलेश के नेतृत्व में यसमैन बनकर ब्रांडिंग की ट्रेनिंग ली. बाद में आलोक सांवल जागरण से जुदा हो गए और दुबारा तब लौटे जब शैलेश गुप्त ग्रप में काफी प्रभावशाली स्थिति में आ गए थे और उनकी तूती बोलने लगी थी. तब उन्हें आई-नेक्स्ट के लिए शैलेश गुप्त लेकर आए. संजय गुप्त ने जागरण ग्रुप के नए अखबार के एडिटोरियल कंटेंट में बतौर संपादक हस्तक्षेप करने की कई बार कोशिश की लेकिन आई-नेक्स्ट की एडिटोरियल टीम को हर बार यही मैसेज आलोक सांवल की तरफ से दिया गया कि संजय गुप्त की सिर्फ सुनो, करो वही जो मैं कहता हूं. यहां मैं का मतलब आलोक सांवल उर्फ शैलेश गुप्त से होता था.

एमएमजी और शैलेश गुप्त के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जागरण की प्रिंट लाइन में बदलाव ला दिया गया और संपादक संजय गुप्त के ठीक उपर प्रबंध संपादक महेंद्र मोहन गुप्त का नाम डाल दिया गया. इससे एक मैसेज तो मार्केट में चला ही गया कि संजय गुप्त से भी बड़ा कोई संपादक जागरण में है जिनका नाम महेंद्र मोहन गुप्ता है. तो देखा जाए तो नरेंद्र मोहन के निधन के बाद उनके पुत्रों को दोयम करने की एमएमजी-शैलेश की कोशिशों को काफी मजबूती मिल चुकी है और अब संजय व संदीप गुप्ता को इन लोगों ने काफी अलग-थलग कर रखा है.

((दैनिक जागरण, मेरठ संस्करण में प्रकाशित प्रिंटलाइन))

ये स्टोरी दैनिक जागरण से जुड़े कई लोगों से बातचीत पर आधारित है. संभव है, स्टोरी में जो तथ्य दिए गए हैं व जो बातें कही गई हैं, उनमें सच्चाई की मात्रा में थोड़ी बहुत कमी-बेसी हो, इसलिए पाठकों से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी जानकारी व ज्ञान के आधार पर इस स्टोरी के तथ्यों को समृद्ध करें, सच के करीब ले जाएं. इसके लिए नीचे दिए गए कमेंट बाक्स में अपनी बात रख सकते हैं या फिर [email protected] पर मेल कर सकते हैं.

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0 Comments

  1. Ratnaker Singh

    April 29, 2011 at 9:33 am

    Shri Mahendra Mohan Gupt ji dwara jagran ki bagdor sambhalne k bd isne jaha vyavsayik pragati ki, vahin Shri Shailesh gupt ke yuva netritva ne iski soch ko vaishvik banaya,jiska seedha asar Dainik Jagran ki lagatar barti lokpriyta ke roop me dekha ja sakta hai.Shradheya Swargiya Narendra Mohan ji ne apne Pita Late Shri Purnchand Gupt ji ki Vaicharik Kranti ko apne samai me nai unchaiyan di thi.

  2. gaurav

    April 29, 2011 at 1:26 pm

    ratnakar भाई क्यों जागरण वालों को भड़ास पर तेल क्यों लगा रहे हो…. ?????????

  3. poonam

    April 29, 2011 at 5:51 pm

    dehradun me dainik jagran printline ka address correct nahi hai kyoki office par kanchan printing press kaha hai aaj tak pata nahi chala

  4. naveen gautam

    April 30, 2011 at 4:32 am

    sahi kah rahe hain gaurav bhai, mmg or shailesh ko kya newpaper chalne ka koi expereince hai, partal karen

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